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जनवरी में सर्विस सेक्टर की रफ्तार तेज, PMI बढ़कर 58.5 पर पहुंचा
जनवरी के PMI आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार साल की शुरुआत में मजबूत बनी हुई है. सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग दोनों सेक्टर में स्थिर मांग, रोजगार सृजन और निवेश गतिविधियां आने वाले महीनों के लिए सकारात्मक संकेत दे रही हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
भारत के सर्विस सेक्टर ने साल की शुरुआत मजबूत नोट पर की है. जनवरी 2026 में एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज परचेज़िंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) बढ़कर 58.5 पर पहुंच गया, जो दिसंबर 2025 में 58.0 था. यह आंकड़ा 50 के तटस्थ स्तर से काफी ऊपर है, जो यह संकेत देता है कि सेक्टर में विस्तार लगातार बना हुआ है.
नए कारोबार और विदेशी मांग से मिला सपोर्ट
जनवरी में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ को मजबूत घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी सहारा मिला. खास तौर पर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया से बढ़ी मांग ने नए ऑर्डर्स को बढ़ावा दिया. कंपनियों ने बेहतर मार्केटिंग रणनीतियों और तकनीक में निवेश के जरिए नए ग्राहकों को जोड़ा, जिससे कुल गतिविधियों में तेजी बनी रही.
कारोबारी भरोसा तीन महीने के उच्च स्तर पर
एचएसबीसी में भारत के मुख्य अर्थशास्त्री प्रणजुल भंडारी के अनुसार, जनवरी में सर्विस PMI का 58.5 पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि सेक्टर की रफ्तार बरकरार है. उन्होंने कहा कि उत्पादन में मजबूत वृद्धि नए ऑर्डर्स की निरंतर आमद के कारण हुई.
एफिशियंसी में सुधार और नए ग्राहकों के जुड़ने से कारोबारी भरोसा तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया. हालांकि इनपुट और आउटपुट लागत में बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन ऐतिहासिक मानकों की तुलना में यह दबाव अभी भी सीमित बना हुआ है.
कंपोजिट PMI में भी मजबूती
जनवरी में कंपोज़िट PMI में भी सुधार देखने को मिला, जो यह दर्शाता है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर में मांग मजबूत बनी हुई है. यह समग्र आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी विस्तार के रास्ते पर
सिर्फ सर्विस सेक्टर ही नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी जनवरी में सुधार दर्ज किया गया. एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग PMI दिसंबर 2025 के 55.0 से बढ़कर जनवरी में 55.4 पर पहुंच गया. हालांकि यह आंकड़ा जनवरी के फ्लैश अनुमान 56.8 से कम रहा, लेकिन फिर भी यह दीर्घकालिक औसत से ऊपर बना हुआ है. दिसंबर में दो साल के निचले स्तर के बाद यह सुधार परिचालन स्थितियों में बेहतर स्थिति का संकेत देता है.
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