होम / बिजनेस / SEBI ने लिए कई अहम फैसले: स्टार्टअप IPO, PSU डीलिस्टिंग और FPI नियमों में ढील
SEBI ने लिए कई अहम फैसले: स्टार्टअप IPO, PSU डीलिस्टिंग और FPI नियमों में ढील
SEBI के ये फैसले बाजार की पारदर्शिता, निवेशकों की सुरक्षा और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की हालिया बोर्ड बैठक में पूंजी बाजार से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. इन निर्णयों का उद्देश्य नियामकीय बोझ को कम करना, स्टार्टअप्स को आईपीओ में सहूलियत देना और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना है.
स्टार्टअप्स को ईसॉप रखने की छूट
सेबी ने स्टार्टअप्स और नई कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि वे ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करने से एक साल पहले जारी किए गए ईसॉप (ESOP) को अपने पास रख सकते हैं. हालांकि, डीआरएचपी दाखिल करने की प्रक्रिया के दौरान कोई नया ईसॉप जारी नहीं किया जा सकेगा. यह फैसला उन कंपनियों के लिए खास महत्व रखता है जो “रिवर्स फ्लिपिंग” की योजना बना रही हैं, यानी विदेशी बाजारों से वापस भारत लौटने की प्रक्रिया में हैं.
एआईएफ और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों
सेबी ने यह भी घोषणा की कि अब विदेशी वेंचर अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों द्वारा नियंत्रित हिस्सेदारी को न्यूनतम प्रवर्तक हिस्सेदारी के रूप में मान्यता दी जाएगी. यह निर्णय संस्थागत निवेशकों की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
पीएसयू डीलिस्टिंग के लिए नया ढांचा
सरकार के 90% से अधिक हिस्सेदारी वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के लिए सेबी ने एक नया *स्वैच्छिक गैर-सूचीबद्धता ढांचा* (Voluntary Delisting Framework) पेश किया है. इस ढांचे के तहत इन कंपनियों को शेयर बाजार से हटने की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी.
एफपीआई निवेश को बनाया सरल
भारत सरकार के बॉन्ड (IGB) में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए सेबी ने अनुपालन नियमों को और आसान बना दिया है. इस पहल का उद्देश्य दीर्घकालिक विदेशी बॉन्ड निवेशकों को भारत की ओर आकर्षित करना है.
वर्तमान में एफपीआई तीन मार्गों से भारतीय ऋण प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं: सामान्य मार्ग, वैकल्पिक प्रतिधारण मार्ग (VRR) और पूर्ण सुलभ मार्ग (FAR). इनमें से VRR और FAR निवेशकों को कम प्रतिबंधों के साथ निवेश की सुविधा देते हैं. अब, जी-सेक में निवेश करने वाले एफपीआई की केवाईसी समीक्षा की समयसीमा को भी आरबीआई के नियमों के अनुरूप कर दिया गया है.
आईपीओ दस्तावेजों के लिए डीमैट शेयर अनिवार्य
नए दिशानिर्देशों के तहत अब आईपीओ दस्तावेज दाखिल करने से पहले *निदेशकों, प्रमुख प्रबंध कर्मचारियों और चयनित शेयरधारकों* को अपने शेयर डीमैट फॉर्म में रखने होंगे. यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और आईपीओ प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है.
निपटान योजना को मंजूरी
सेबी ने नैशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) से जुड़े ब्रोकरों के लिए एक *विशेष निपटान योजना* को भी मंजूरी दे दी है. इसके अलावा, वेंचर कैपिटल फंडों के लिए भी एक अलग निपटान प्रक्रिया की शुरुआत की गई है.
भले ही इस बैठक में क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन पर चर्चा नहीं हुई, लेकिन सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने जानकारी दी कि शुल्क संरचना की समीक्षा के लिए एक कार्यसमूह (वर्किंग ग्रुप) का गठन किया गया है. इसका मकसद बाजार की दक्षता को और बेहतर बनाना है.
टैग्स