पाइन लैब्स का $1 अरब का प्रस्तावित IPO न केवल फिनटेक सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान और तकनीकी नवाचार को भी दर्शाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारतीय पूंजी बाजार नियामक SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स के लंबे समय से प्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के साथ ही साल 2025 के सबसे बड़े तकनीकी IPO में से एक के लिए रास्ता साफ हो गया है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI की वेबसाइट पर सोमवार को जारी एक खुलासे में कहा गया कि पाइन लैब्स को IPO के ज़रिए 1 अरब डॉलर (लगभग ₹8,300 करोड़) तक जुटाने की अनुमति मिल गई है. कंपनी इस पेशकश के ज़रिए लगभग $6 अरब (₹49,800 करोड़) के मूल्यांकन की तलाश कर रही है.
क्या करती है पाइन लैब्स?
1998 में स्थापित पाइन लैब्स एक फुल-स्टैक पेमेंट और मर्चेंट कॉमर्स प्लेटफॉर्म प्रदान करती है. कंपनी की सेवाओं में कार्ड और डिजिटल पेमेंट को सक्षम करने वाले पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनें शामिल हैं. इसके अलावा, पाइन लैब्स उपभोक्ता ऋण (कंज़्यूमर क्रेडिट) और लॉयल्टी प्रोग्राम जैसे वैल्यू-ऐडेड सेवाएं भी देती है.
पाइन लैब्स का सीधा मुकाबला Paytm और PhonePe (जो Walmart के स्वामित्व में है) जैसे बड़े फिनटेक खिलाड़ियों से है.
IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग
कंपनी द्वारा जारी ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, IPO से प्राप्त राशि का उपयोग तीन मुख्य क्षेत्रों में किया जाएगा:
- अंतरराष्ट्रीय परिचालन का विस्तार
- तकनीकी विकास में तेजी
- कर्ज को कम करना
फिलहाल, पाइन लैब्स की मौजूदगी दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार बढ़ रही है.
हीरो मोटर्स और केनरा रोबेको को भी IPO की मंजूरी
पाइन लैब्स के साथ-साथ, SEBI ने हीरो मोटर्स, जो भारत की प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों में से एक है और केनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट सार्वजनिक क्षेत्र के केनरा बैंक की म्युचुअल फंड इकाई के IPO प्रस्तावों को भी हरी झंडी दे दी है.
IPO बाजार में बढ़ रही हलचल
इन अनुमतियों के साथ भारत के IPO बाज़ार में फिर से जोश देखने को मिल रहा है. कई हाई-प्रोफाइल कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए तैयार खड़ी हैं. बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि फिनटेक और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी, खासकर ऐसे समय में जब डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाया जा रहा है और घरेलू खपत भी मजबूत बनी हुई है.
मुंबई में आयोजित एक इंडस्ट्री इंटरैक्शन कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और इजिप्ट ने द्विपक्षीय व्यापार को 12 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है. मुंबई में आयोजित एक इंडस्ट्री इंटरैक्शन कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया.
भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी को मिल रही नई गति
मुंबई में मिस्र की कौंसल जनरल डालिया मोहम्मद नाजिह मोहम्मद तवाकोल ने कहा कि भारत और मिस्र के बीच ऐतिहासिक और मजबूत द्विपक्षीय संबंध रहे हैं. उन्होंने बताया कि जून 2023 में हुए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट और अक्टूबर 2025 में आयोजित पहले इंडिया-इजिप्ट स्ट्रैटर्जिक डायलॉग (Egypt-India Strategic Dialogue) के बाद दोनों देशों के बीच डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, स्टार्टअप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है.
विदेशी निवेश के लिए मिस्र खोल रहा नए अवसर
तवाकोल ने कहा कि मिस्र सरकार व्यापार को आसान बनाने और छोटे एवं मध्यम उद्योगों (SMEs) को समर्थन देने पर फोकस कर रही है. उन्होंने कहा कि मिस्र में विदेशी निवेशकों के लिए कई क्षेत्रों में बड़े अवसर मौजूद हैं, जिनमें शामिल हैं:
1. रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन
2. पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी
3. कृषि और एग्रीबिजनेस
4. IT सेवाएं और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग
5. मैन्युफैक्चरिंग
6. फार्मास्युटिकल्स और हेल्थकेयर
7. लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन
भारतीय कंपनियों के लिए मिस्र बन सकता है रणनीतिक गेटवे
कार्यक्रम में मौजूद उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि मिस्र की इंडस्ट्रियल फ्री जोन नेटवर्क और उसकी भौगोलिक स्थिति भारतीय निर्यातकों के लिए अफ्रीका, भूमध्यसागरीय और मध्य-पूर्वी बाजारों तक पहुंचने का अहम केंद्र बन सकती है.
MVIRDC वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन और ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विजय कलंत्री ने लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी के जरिए व्यापार की संभावनाओं को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, “भारत और मिस्र के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी है और दोनों देशों के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं. वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 5 अरब डॉलर का है और 2030 तक इसे 12 अरब डॉलर के पार ले जाने का साझा लक्ष्य रखा गया है.”
सुएज नहर को बताया वैश्विक व्यापार की अहम कड़ी
उन्होंने वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में समुद्री मार्गों की अहम भूमिका पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा, “मिस्र लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, पर्यटन, प्राकृतिक संसाधन और सुएज नहर के जरिए कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में बड़े अवसर प्रदान करता है. सुएज नहर आज भी वैश्विक कार्गो मूवमेंट, व्यापार दक्षता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.”
वीजा और एयर कनेक्टिविटी पर भी चर्चा
कार्यक्रम में निवेशकों के लिए वीजा प्रक्रियाओं को आसान बनाने और दोनों देशों के बीच एयर कनेक्टिविटी बेहतर करने पर भी चर्चा हुई. इजिप्ट की वाइस कौंसल दीना अल्बाहे ने कहा, “वीजा प्रक्रिया सरल है और इसकी शर्तें भी आसान हैं. मिस्र पात्र आवेदकों को सिंगल-एंट्री, मल्टीपल-एंट्री और पांच साल तक के वीजा प्रदान करता है. निवेशक कंपनी में शेयरधारक या पूंजी निवेश करने वाले पार्टनर के रूप में पात्रता हासिल कर सकते हैं, जिसे GAFI की सिफारिशों का समर्थन प्राप्त होता है.”
व्यापार और यात्रा को मिलेगा बढ़ावा
इजिप्टएयर की डालिया हाफेज ने कहा कि बेहतर एयर कनेक्टिविटी व्यापार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा देने में मदद करेगी. भारत और मिस्र के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई दे सकती है. डिजिटल टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा.
बाजार में भारी गिरावट के बीच LIC ने दिखाई आक्रामक निवेश रणनीति, Bajaj Finance, Infosys, TCS और IRFC समेत कई बड़ी कंपनियों में निवेश बढ़ाया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में मार्च तिमाही के दौरान जब भारी बिकवाली का माहौल था और निवेशकों में घबराहट बढ़ रही थी, उसी समय देश की सबसे बड़ी घरेलू संस्थागत निवेशक कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने बड़ा दांव खेलते हुए करीब 18,500 करोड़ रुपये का निवेश किया. LIC ने उन कंपनियों के शेयर खरीदे, जिनमें तिमाही के दौरान 20% से 30% तक की गिरावट देखने को मिली थी. बाजार के जानकार इसे “बाय द डिप” रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण मान रहे हैं.
Bajaj Finance में सबसे बड़ा निवेश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, LIC ने इस तिमाही में सबसे ज्यादा खरीदारी बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) के शेयरों में की. कंपनी ने करीब 2.32 करोड़ अतिरिक्त शेयर खरीदकर लगभग 2,167 करोड़ रुपये का निवेश किया. खास बात यह रही कि इस दौरान Bajaj Finance का शेयर करीब 19% टूट चुका था. इसके अलावा LIC ने Bharti Airtel में 2,153 करोड़ रुपये और TCS में 2,143 करोड़ रुपये का निवेश किया.
IRFC में हिस्सेदारी बढ़ने से बाजार में चर्चा तेज
सबसे ज्यादा चर्चा इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) में बढ़ाई गई हिस्सेदारी को लेकर हो रही है. LIC ने IRFC के 18.72 करोड़ अतिरिक्त शेयर खरीदे, जिनकी अनुमानित वैल्यू करीब 2,044 करोड़ रुपये रही. मार्च तिमाही में IRFC का शेयर लगभग 30% गिरा था. इसके बावजूद LIC ने इस PSU कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 1.10% से बढ़ाकर 2.54% कर दी.
आईटी और डिफेंस सेक्टर पर भी जताया भरोसा
LIC ने आईटी सेक्टर में भी मजबूत भरोसा दिखाया. कंपनी ने Infosys में करीब 1,897 करोड़ रुपये और HAL में लगभग 1,819 करोड़ रुपये का निवेश किया. इस दौरान इंफोसिस (Infosys) का शेयर करीब 23% और हिंदुस्तान एयरोनॉटिकेस (HAL) का शेयर लगभग 21% तक टूट चुका था. इसके अलावा एचसीएल (HCL Technologies), हुंडई (Hyundai Motor India) और मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) भी LIC की प्रमुख खरीदारी वाली कंपनियों में शामिल रहीं.
बैंकिंग शेयरों में की मुनाफावसूली
जहां एक ओर LIC ने कई गिर चुके शेयरों में खरीदारी की, वहीं दूसरी ओर कंपनी ने कुछ बैंकिंग और मेटल शेयरों में मुनाफावसूली भी की. सबसे बड़ी बिकवाली भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में देखने को मिली, जहां LIC ने करीब 4,626 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इसके अलावा आईसीआईसीआई (ICICI Bank) और एचडीएफसी (HDFC Bank) में भी हिस्सेदारी कम की गई.
लंबी अवधि के नजरिए से निवेश
विशेषज्ञों का मानना है कि LIC ने बाजार की कमजोरी को लंबी अवधि के निवेश अवसर के रूप में देखा है. बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में गिरावट के दौरान निवेश कर LIC ने यह संकेत दिया है कि वह अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय लंबी अवधि के रिटर्न पर फोकस कर रही है.
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बाद कंपनी ने अपने निवेशकों के लिए 90.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड भी घोषित किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी ब्रिटानिया (Britannia Industries) ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का मुनाफा बढ़कर 679.68 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि मजबूत बिक्री और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग ने इसके नतीजों को मजबूती दी है. इसी के साथ कंपनी ने निवेशकों के लिए 90.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड भी घोषित किया है.
Q4 में 21% बढ़ा मुनाफा
मार्च 2026 तिमाही में ब्रिटानिया का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 21.6% बढ़कर 679.68 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 559.13 करोड़ रुपये था. कंपनी की कुल आय भी बढ़कर 4,718.92 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह 4,432.19 करोड़ रुपये थी. मजबूत मांग और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई.
रेवेन्यू और प्रॉफिट में लगातार मजबूती
कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) भी बढ़कर 785.11 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह 751.93 करोड़ रुपये था. Q4 में कंपनी की बिक्री 7.1% बढ़कर 4,686 करोड़ रुपये रही. यह लगातार बेहतर होती उपभोक्ता मांग को दर्शाता है.
पूरे वित्त वर्ष में मजबूत प्रदर्शन
पूरे वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का प्रदर्शन स्थिर और मजबूत रहा.
1. कुल रेवेन्यू: 19,151.59 करोड़ रुपये (पिछले साल 17,942.67 करोड़ रुपये)
2. नेट प्रॉफिट: 2,537.01 करोड़ रुपये (16.4% की बढ़ोतरी)
यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की ग्रोथ लगातार स्थिर बनी हुई है.
डिजिटल और प्रीमियम प्रोडक्ट्स से बढ़ी बिक्री
कंपनी के MD और CEO Rajneet Singh Kohli ने बताया कि तिमाही के शुरुआती महीनों में कारोबार लगभग 9% की रफ्तार से बढ़ा. उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स चैनल से कंपनी को मजबूत योगदान मिला है, जिसका हिस्सा करीब 6% तक पहुंच गया है. साथ ही क्रोइसां, वेफर्स और अन्य प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई.
बाहरी चुनौतियों का असर भी दिखा
कंपनी ने बताया कि मार्च महीने में वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण इंटरनेशनल बिजनेस प्रभावित हुआ और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा. हालांकि घरेलू मांग ने इस प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया.
निवेशकों के लिए 90.50 रुपये का डिविडेंड
ब्रिटानिया के बोर्ड ने FY26 के लिए 1 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 90.50 रुपये के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है. यह प्रस्ताव कंपनी की 107वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लागू होगा. इस घोषणा के बाद बाजार में कंपनी के शेयर को लेकर सकारात्मक रुख देखा गया.
शेयर बाजार में भी दिखा असर
नतीजों से पहले NSE पर Britannia का शेयर 1.77% की बढ़त के साथ 5,885.50 रुपये पर बंद हुआ, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने Q4 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ यह साबित किया है कि प्रीमियम प्रोडक्ट्स, डिजिटल बिक्री और स्थिर डिमांड इसके ग्रोथ इंजन बने हुए हैं. वहीं 90.50 रुपये का डिविडेंड निवेशकों के लिए बड़ी राहत और आकर्षक रिटर्न का संकेत है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अब सोलर सेक्टर में स्टोरेज-इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट्स जैसे FDRE, RTC और Solar+BESS तेजी से बढ़ रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
निवेश सलाहकार संस्था वैल्यूक्वेस्ट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर (ValueQuest Investment Advisors) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सोलर ऊर्जा की वार्षिक मांग वित्त वर्ष 2030 (FY30) तक लगभग 85 गीगावाट (GW) तक पहुंच सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन और चौबीसों घंटे स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग आने वाले वर्षों में सोलर सेक्टर की वृद्धि को तेज करेगी.
नए मांग चालक बढ़ाएंगे सोलर विस्तार
ValueQuest की रिपोर्ट के अनुसार, FY29 से भारत में हर साल अतिरिक्त 15 से 20 GW सोलर मांग उत्पन्न हो सकती है. यह मांग मुख्यधारा के विश्लेषक अनुमानों में अभी शामिल नहीं है, जिससे भविष्य में सोलर विस्तार और तेज हो सकता है. रिपोर्ट का अनुमान है कि FY30 तक भारत की कुल वार्षिक सोलर मांग सतर्क अनुमान के आधार पर 85 GW तक पहुंच सकती है.
चार प्रमुख विकास इंजन
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का सोलर बाजार अब चार प्रमुख क्षेत्रों से संचालित हो रहा है:
1. यूटिलिटी-स्केल सोलर प्रोजेक्ट
2. कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ओपन एक्सेस प्रोजेक्ट
3. कृषि सोलराइजेशन (KUSUM योजना के तहत)
4. रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन
भारत ने FY26 में लगभग 45 GW सोलर क्षमता जोड़ी, जो तेज़ी से बढ़ते विस्तार को दर्शाता है. रिपोर्ट के अनुसार, पहले 50 GW सोलर क्षमता स्थापित करने में 11 साल लगे, अगले 50 GW में 3 साल लगे, जबकि अंतिम 50 GW सिर्फ 14 महीनों में जोड़ा गया.
स्टोरेज आधारित प्रोजेक्ट्स से बढ़ेगी मांग
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अब सोलर सेक्टर में स्टोरेज-इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट्स जैसे FDRE, RTC और Solar+BESS तेजी से बढ़ रहे हैं. एक सामान्य 100 MW सोलर टेंडर में लगभग 140 MW मॉड्यूल लगते हैं, जबकि स्टोरेज आधारित जटिल प्रोजेक्ट्स में यह जरूरत बढ़कर लगभग 200 MW DC तक पहुंच जाती है. इससे मॉड्यूल की मांग में तेज वृद्धि होती है.
वैश्विक सोलर विस्तार और भारत की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तेजी से इंस्टॉलेशन के बावजूद सोलर अभी भी कुल बिजली उत्पादन का 10% से कम हिस्सा है. दुनिया में हर आधे दिन में लगभग 1 GW सोलर क्षमता जोड़ी जा रही है. भारत और चीन में लगभग 11% बिजली उत्पादन सोलर से हो रहा है, जबकि यूरोप में यह आंकड़ा करीब 10% है.
डेटा सेंटर और AI से नई मांग
रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा सेंटर सोलर मांग को नया बढ़ावा दे रहे हैं. भारत में अब तक 300 से अधिक डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है. अमेजन वेब सर्विसेज (AWS), माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों ने भारत में प्रत्येक के लिए 2 से 3 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश की घोषणा की है.
ग्रीन हाइड्रोजन से भी बढ़ेगा सोलर उपयोग
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत का लक्ष्य 2030 तक सालाना 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का है. हर 1 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए लगभग 20 GW सोलर क्षमता की आवश्यकता होगी, जिससे यह सेक्टर भी सोलर मांग का बड़ा चालक बन सकता है.
निष्कर्ष
ValueQuest की रिपोर्ट का कहना है कि डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण आधारित प्रोजेक्ट्स भारत के सोलर सेक्टर को नई गति देंगे. FY30 तक 85 GW वार्षिक मांग का अनुमान देश को वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा बाजार में और मजबूत स्थिति में ला सकता है.
GTRI ने सुझाव दिया है कि भारत को अपनी टैरिफ और कस्टम्स प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन करना चाहिए. ऐसा न करने पर देश वैश्विक निवेश और व्यापार अवसरों की दौड़ में पीछे रह सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक व्यापार शोध संस्था ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अपने टैरिफ (आयात शुल्क) और कस्टम्स प्रणाली में व्यापक सुधार करने की आवश्यकता है. ताकि व्यापार लागत कम हो सके और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया जा सके. रिपोर्ट के अनुसार, भारत की मौजूदा टैरिफ संरचना अब राजस्व जुटाने का प्रभावी साधन नहीं रही है. बल्कि यह व्यापार लागत को बढ़ा रही है. जिससे भारत के वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लक्ष्य पर असर पड़ सकता है.
टैरिफ और कस्टम्स में जटिलता से बढ़ रही लागत
GTRI ने अपनी फ्लैगशिप रिपोर्ट में कहा कि आयात शुल्क और जटिल कस्टम्स प्रक्रियाओं ने व्यापार में कई तरह की अक्षमताएं पैदा की हैं. जो कंपनियों और निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं.
इतिहास में टैरिफ का उपयोग घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और राजस्व संग्रह के लिए किया जाता था. लेकिन आज इसकी जटिल संरचना उत्पादन लागत बढ़ा रही है. और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर रही है.
23 सुधारों की सिफारिश
रिपोर्ट में टैरिफ प्रणाली को सरल बनाने और कस्टम्स प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने के लिए 23 सिफारिशें दी गई हैं. इनमें शामिल हैं.
1. टैरिफ ढांचे का सरलीकरण.
2. प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना.
3. कस्टम्स प्रशासन का आधुनिकीकरण.
4. व्यापार को आसान बनाने के लिए सिस्टम को अधिक दक्ष बनाना.
GTRI का कहना है कि इन सुधारों से लेन-देन लागत घटेगी. माल की क्लीयरेंस तेज होगी. और भारत की व्यापार नीति वैश्विक मानकों के अनुरूप बनेगी.
नीतिगत स्थिरता की जरूरत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टैरिफ दरों में बार-बार बदलाव से निवेशकों और कंपनियों में अनिश्चितता पैदा होती है. जिससे सप्लाई चेन और निवेश योजनाएं प्रभावित होती हैं. इसलिए नीति में अधिक स्थिरता और पूर्वानुमान जरूरी है.
वैश्विक व्यापार में बदलाव से बढ़ा दबाव
रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था बड़े बदलावों से गुजर रही है. अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक घटनाओं ने कंपनियों को अपने सप्लायर देशों को विविध बनाने के लिए प्रेरित किया है. इन परिस्थितियों में भारत के लिए अवसर बने हैं. लेकिन इसका लाभ उठाने के लिए उसे टैरिफ स्थिरता. लॉजिस्टिक्स दक्षता और व्यापार सुगमता जैसे क्षेत्रों में सुधार करना होगा.
उच्च आयात शुल्क से बढ़ रही उत्पादन लागत
GTRI के अनुसार. इंटरमीडिएट वस्तुओं (कच्चे माल) पर अधिक आयात शुल्क भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ा रहे हैं. जिससे निर्यात अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ रहा है.
वैश्विक सप्लाई चेन में एकीकरण की जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि टैरिफ ढांचे को सरल बनाया जाए. और अनावश्यक बाधाओं को हटाया जाए. तो भारतीय उद्योग वैश्विक सप्लाई चेन में बेहतर तरीके से जुड़ सकते हैं. इससे उत्पादन और निर्यात दोनों में वृद्धि होगी.
GTRI ने सुझाव दिया है कि भारत को अपनी टैरिफ और कस्टम्स प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन करना चाहिए. ऐसा न करने पर देश वैश्विक निवेश और व्यापार अवसरों की दौड़ में पीछे रह सकता है. संस्था ने कहा कि एक दूरदर्शी व्यापार नीति ही भारत को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकती है.
इस फाइलिंग के साथ InCred Holdings ने IPO की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिया है. मजबूत फाइनेंशियल ग्रोथ और बढ़ते लोन पोर्टफोलियो के साथ कंपनी निवेशकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनी InCred Holdings ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बाजार नियामक सेबी (Sebi) के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) दाखिल किया है. कंपनी का यह IPO फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) दोनों का मिश्रण होगा.
₹1,250 करोड़ का फ्रेश इश्यू और बड़ा ऑफर फॉर सेल
कंपनी के प्रस्तावित इश्यू में ₹1,250 करोड़ तक का फ्रेश इश्यू शामिल है. इसके साथ ही 99,020,833 इक्विटी शेयरों का ऑफर फॉर सेल भी रखा गया है. OFS में कई बड़े निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे, जिनमें KKR India Financial Investment, MNI Ventures, MEMG Family Office LLP और V’Ocean Investments जैसे नाम शामिल हैं.
InCred Finance पर रहेगा फंड का फोकस
IPO से मिलने वाली राशि का उपयोग मुख्य रूप से InCred Finance में किया जाएगा, जो कंपनी की प्रमुख सहायक इकाई है. कंपनी इस फंड का इस्तेमाल Tier-I कैपिटल बढ़ाने, लेंडिंग क्षमता को मजबूत करने और CRAR (Capital to Risk-Weighted Assets Ratio) सुधारने में करेगी. इसका उद्देश्य आगे की लोन ग्रोथ को सपोर्ट करना है.
लोन पोर्टफोलियो में विविधता
InCred Finance एक रिटेल-फोकस्ड NBFC है, जो पांच प्रमुख सेगमेंट में लोन देती है. इसमें पर्सनल लोन सबसे बड़ा हिस्सा है, जो AUM का 55.56% है. इसके बाद स्टूडेंट लोन 22.15%, सिक्योर्ड बिजनेस लोन और स्कूल फाइनेंसिंग 8.74% हिस्सेदारी रखते हैं.
मजबूत फाइनेंशियल ग्रोथ
31 मार्च 2025 तक कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹12,585.07 करोड़ था, जबकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹373.15 करोड़ रहा. इस दौरान कंपनी का ROA 3.45% दर्ज किया गया. FY23 से FY25 के बीच कंपनी ने मजबूत ग्रोथ दर्ज की, जहां AUM और PAT क्रमशः 44.04% और 84.97% की CAGR से बढ़े.
दिसंबर 2025 तक और बढ़ा कारोबार
31 दिसंबर 2025 तक कंपनी का AUM बढ़कर ₹14,447.86 करोड़ पहुंच गया. नौ महीने की अवधि में PAT ₹290.14 करोड़ रहा. इसी अवधि में डिस्बर्समेंट ₹6,683.28 करोड़ दर्ज किए गए.
ऑपरेशनल परफॉर्मेंस स्थिर
कंपनी के ऑपरेशनल मैट्रिक्स भी स्थिर रहे हैं. पोर्टफोलियो यील्ड 18.39% और औसत उधारी लागत 10.05% रही, जिससे कंपनी के मार्जिन स्थिर बने रहे.
इस इश्यू के लिए IIFL Capital Services, InCred Capital Wealth Portfolio Managers, Kotak Mahindra Capital Company, Nomura Financial Advisory and Securities (India) और UBS Securities India को बुक रनिंग लीड मैनेजर्स बनाया गया है.
IPO की ओर मजबूत कदम
इस फाइलिंग के साथ InCred Holdings ने IPO की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिया है. मजबूत फाइनेंशियल ग्रोथ और बढ़ते लोन पोर्टफोलियो के साथ कंपनी निवेशकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन सकती है.
कंपनी की कुल आय में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली. मार्च तिमाही में बीएसई का रेवेन्यू 85 फीसदी बढ़कर 1,564 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 847 करोड़ रुपये था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने मार्च तिमाही में जोरदार वित्तीय प्रदर्शन किया है. कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं. शेयर बाजार में बढ़ती ट्रेडिंग गतिविधियों का फायदा एक्सचेंज को सीधे तौर पर मिला है. मजबूत नतीजों के साथ कंपनी ने निवेशकों के लिए ₹10 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का भी ऐलान किया है. बीएसई के ताजा नतीजों ने बाजार में कंपनी की मजबूती को फिर साबित किया है. खासतौर पर ट्रांजैक्शन चार्ज से हुई तेज कमाई ने एक्सचेंज की आय को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया.
मार्च तिमाही में 61% बढ़ा मुनाफा
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में बीएसई का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 61 फीसदी बढ़कर 797 करोड़ रुपये पहुंच गया. पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा 494 करोड़ रुपये था. अगर पिछली तिमाही से तुलना करें तो भी कंपनी ने मजबूत ग्रोथ दर्ज की है. दिसंबर तिमाही में बीए सईका मुनाफा 602 करोड़ रुपये रहा था. इस तरह तिमाही आधार पर कंपनी का लाभ करीब 32 फीसदी बढ़ा है.
रेवेन्यू में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी
कंपनी की कुल आय में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली. मार्च तिमाही में बीएसई का रेवेन्यू 85 फीसदी बढ़कर 1,564 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 847 करोड़ रुपये था. वहीं, पिछली तिमाही के 1,244 करोड़ रुपये के मुकाबले भी रेवेन्यू में 26 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.
ट्रेडिंग से हुई बंपर कमाई
बीएसई की आय बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ट्रांजैक्शन चार्ज से हुई मजबूत कमाई रही. कंपनी ने इस मद से 1,311 करोड़ रुपये कमाए, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 114 फीसदी ज्यादा है. पिछली तिमाही की तुलना में भी इस आय में करीब 38 फीसदी का उछाल आया है. इससे साफ है कि शेयर बाजार में बढ़ते कारोबार और निवेशकों की सक्रियता का फायदा एक्सचेंज को भरपूर मिला.
निवेशकों को मिलेगा ₹10 का डिविडेंड
शानदार नतीजों के साथ बीएसई ने अपने शेयरधारकों को बड़ा तोहफा भी दिया है. कंपनी के बोर्ड ने ₹10 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की है. कंपनी ने डिविडेंड के लिए 10 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है. यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट खाते में बीएसई के शेयर होंगे, वही इस डिविडेंड के पात्र माने जाएंगे. कंपनी के मुताबिक, 17 सितंबर 2026 तक डिविडेंड की राशि निवेशकों के बैंक खातों में भेज दी जाएगी.
बाजार की नजर अब आगे की ग्रोथ पर
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में बढ़ती भागीदारी और हाई ट्रेडिंग वॉल्यूम का फायदा आगे भी एक्सचेंज कंपनियों को मिलता रह सकता है. डेरिवेटिव्स और इक्विटी ट्रेडिंग में बढ़ती सक्रियता बीएसई के कारोबार को नई रफ्तार दे रही है. ऐसे में आने वाली तिमाहियों में भी कंपनी के प्रदर्शन पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी.
गुरुवार को BSE सेंसेक्स 114 अंक टूटकर 77,844.52 पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी मामूली गिरावट के साथ 24,326.65 के स्तर पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बदलते घटनाक्रम का असर भारतीय शेयर बाजार पर लगातार दिखाई दे रहा है. गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला था. अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर संभावित समझौते की खबरों से सेंसेक्स महज 12 मिनट में करीब 500 अंक उछल गया था. हालांकि, दिन के आखिर तक बाजार अपनी अधिकांश बढ़त गंवा बैठा और कमजोर बंद हुआ.
अब शुक्रवार को निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल और पश्चिम एशिया से आने वाली हर नई खबर पर टिकी हुई है. शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि आज बाजार दबाव में शुरुआत कर सकता है, क्योंकि गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) और एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है.
कमजोर बंद हुए प्रमुख सूचकांक
गुरुवार को दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 114 अंक टूटकर 77,844.52 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी मामूली गिरावट के साथ 24,326.65 के स्तर पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 78,384.70 का उच्चतम और 77,713.21 का न्यूनतम स्तर छुआ. निफ्टी भी 24,482 और 24,284 के दायरे में कारोबार करता रहा.
शुक्रवार को कमजोर शुरुआत के संकेत
शुक्रवार सुबह GIFT Nifty करीब 117 अंक की गिरावट के साथ 24,278 के आसपास कारोबार करता दिखा. इससे संकेत मिल रहे हैं कि घरेलू बाजार की शुरुआत दबाव में हो सकती है. एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल रहा. निक्केई, हैंग सेंग, कोस्पी और स्ट्रेट टाइम्स जैसे प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए.
अमेरिकी बाजारों में भी गुरुवार को बिकवाली देखने को मिली. अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता और टेक शेयरों में कमजोरी के चलते S&P 500, Nasdaq और Dow Jones गिरावट के साथ बंद हुए. विशेष रूप से चिप कंपनियों और टेक सेक्टर के शेयरों में दबाव देखा गया, जिसका असर वैश्विक निवेश धारणा पर पड़ा.
कच्चे तेल और सोने में फिर तेजी
गुरुवार को संभावित समझौते की खबरों से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया था. लेकिन शुक्रवार सुबह हालात फिर बदलते नजर आए. मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमलों की खबर आने के बाद बाजार में तनाव बढ़ गया, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी लौट आई. शुरुआती कारोबार में ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों एक फीसदी से ज्यादा मजबूत दिखे. वहीं, सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी में भी तेज खरीदारी देखने को मिली. कॉमेक्स पर सोना करीब 0.7 फीसदी और चांदी लगभग 2 फीसदी तक चढ़ गई.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने दिखाया दम
भले ही मुख्य सूचकांक कमजोर रहे हों, लेकिन व्यापक बाजार में खरीदारी बनी रही. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.20 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 1 फीसदी मजबूत होकर बंद हुए. ऑटो सेक्टर ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि आईटी और एफएमसीजी शेयरों में दबाव बना रहा.
आज इन शेयरों में रहेगी हलचल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेंसेक्स पैक में महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील और इटरनल प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे. दूसरी ओर एचयूएल, टीसीएस, टेक महिंद्रा, टाइटन और सन फार्मा में कमजोरी दर्ज की गई. इसके अलावा रिलायंस, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक भी दबाव में रहे.
FII की बिकवाली जारी, DII ने संभाला मोर्चा
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 7 मई को भी बिकवाली जारी रखी और करीब 340 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 441 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया. विश्लेषकों के अनुसार, जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. निवेशकों की नजर अब चौथी तिमाही के नतीजों, कंपनियों के आउटलुक और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ी हर नई खबर पर रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
नए नियमों के अनुसार, विदेशी मुद्रा सेवाएं देने के लिए ‘प्रिंसिपल-एजेंट मॉडल’ का विस्तार किया जाएगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सेवाएं बेहतर निगरानी और उचित जांच-परख के साथ प्रदान की जाएं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) कारोबार से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. नए नियमों के तहत अब नए मनी चेंजर्स को लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे. इसके साथ ही विदेशी मुद्रा लेनदेन करने वाली सभी संस्थाओं के लिए आरबीआई की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है. केंद्रीय बैंक का यह कदम फॉरेक्स सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और सिस्टम को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
नए मनी चेंजर्स लाइसेंस पर रोक
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि अब नए फुल फ्लेज्ड मनी चेंजर्स (FFMC) के लिए कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा. इसका उद्देश्य मौजूदा ढांचे को मजबूत करना और अनियमितताओं को रोकना बताया गया है. इसके साथ ही विदेशी मुद्रा सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने और अनुपालन प्रक्रिया को आसान करने पर भी जोर दिया गया है.
प्रिंसिपल-एजेंट मॉडल का होगा विस्तार
नए नियमों के अनुसार, विदेशी मुद्रा सेवाएं देने के लिए ‘प्रिंसिपल-एजेंट मॉडल’ का विस्तार किया जाएगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सेवाएं बेहतर निगरानी और उचित जांच-परख के साथ प्रदान की जाएं. आरबीआई ने कहा है कि अब किसी भी प्रकार का विदेशी मुद्रा लेनदेन करने के लिए सभी संस्थाओं को केंद्रीय बैंक से अनुमति लेना जरूरी होगा.
तीन श्रेणियों में बांटे गए अधिकृत डीलर
आरबीआई ने फॉरेक्स कारोबार से जुड़े अधिकृत डीलरों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है. AD कैटेगरी-I में बैंक शामिल होंगे, जो सीधे आवेदन कर सकते हैं. AD कैटेगरी-II में NBFC और फुल फ्लेज्ड मनी चेंजर शामिल होंगे, बशर्ते वे कम से कम दो साल से संचालन में हों और उनका औसत वार्षिक फॉरेक्स टर्नओवर पिछले दो वित्तीय वर्षों में 50 करोड़ रुपये रहा हो. वहीं, AD कैटेगरी-III में वे संस्थाएं आएंगी जो विदेशी मुद्रा से जुड़े नए और इनोवेटिव प्रोडक्ट्स और सेवाएं पेश करना चाहती हैं.
नए आवेदन पर सख्त रोक
आरबीआई ने 30 अप्रैल को जारी अधिसूचना में साफ किया है कि अब नए FFMC लाइसेंस के लिए किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा. यह कदम फॉरेक्स सेक्टर को अधिक नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
फॉरेक्स कारोबार में बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई के इन नए नियमों से फॉरेक्स मार्केट में संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. इससे जहां एक ओर निगरानी मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर कारोबार करने वाली संस्थाओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया और सख्त हो जाएगी.
आरबीआई का यह फैसला विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. नए नियमों के लागू होने के बाद फॉरेक्स कारोबार की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
बजाज ऑटो के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने FY26 के लिए 150 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश की है. यह 10 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर पर 1500 प्रतिशत डिविडेंड के बराबर है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख ऑटो कंपनी बजाज ऑटो (Bajaj Auto) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के शानदार नतीजों के साथ निवेशकों के लिए बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने 150 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देने और 12,000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बड़ा बायबैक लाने की घोषणा की है. कंपनी के मजबूत नतीजों और शेयरधारकों को मिलने वाले फायदे के बाद बाजार में भी उत्साह देखने को मिला और बजाज ऑटो के शेयरों में तेजी दर्ज की गई.
150 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान
बजाज ऑटो के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने FY26 के लिए 150 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश की है. यह 10 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर पर 1500 प्रतिशत डिविडेंड के बराबर है. कंपनी ने 29 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है, यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, उन्हें डिविडेंड का लाभ मिलेगा. अगर आगामी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी मिल जाती है, तो डिविडेंड की राशि 24 जुलाई 2026 के आसपास निवेशकों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी.
5,633 करोड़ रुपये का बड़ा बायबैक
कंपनी ने पिछले दो वर्षों में दूसरी बार शेयर बायबैक का ऐलान किया है. बजाज ऑटो करीब 5,633 करोड़ रुपये के शेयर वापस खरीदेगी. बायबैक प्राइस 12,000 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जो BSE पर पिछले बंद भाव से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है. कंपनी कुल 46.9 लाख शेयर खरीदेगी, जो उसकी कुल इक्विटी का करीब 1.68 प्रतिशत हिस्सा है. कंपनी के अनुसार डिविडेंड और बायबैक को मिलाकर कुल 9,825 करोड़ रुपये शेयरधारकों को लौटाए जाएंगे, जो FY26 के कुल प्रॉफिट आफ्टर टैक्स के लगभग बराबर है.
चौथी तिमाही में मुनाफे में जोरदार उछाल
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में बजाज ऑटो का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 34 प्रतिशत बढ़कर 2,746 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा 2,049 करोड़ रुपये था. वहीं, कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बढ़कर 3,492 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 1,801 करोड़ रुपये था. कंपनी ने कहा कि रिकॉर्ड वाहन बिक्री और विदेशी मुद्रा से हुए फायदे ने नतीजों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई.
राजस्व और EBITDA में भी मजबूत बढ़त
Q4 FY26 में कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 32 प्रतिशत बढ़कर 16,005 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी तिमाही में यह 12,148 करोड़ रुपये था. वहीं, EBITDA 35.6 प्रतिशत बढ़कर 3,322 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी का EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 20.8 प्रतिशत हो गया, जो पिछले साल 20.2 प्रतिशत था. हालांकि, कंपनी का कुल खर्च भी बढ़कर 15,390 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
वाहन बिक्री में शानदार प्रदर्शन
चौथी तिमाही में बजाज ऑटो की कुल वाहन बिक्री 24 प्रतिशत बढ़कर 13.71 लाख यूनिट हो गई. टू-व्हीलर बिक्री 24 प्रतिशत बढ़कर 11.66 लाख यूनिट रही, जबकि कमर्शियल व्हीकल बिक्री 28 प्रतिशत बढ़कर 2.04 लाख यूनिट पहुंच गई. घरेलू बाजार में भी कंपनी की बिक्री मजबूत रही और दोनों सेगमेंट में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई.
पूरे साल में शानदार प्रदर्शन
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बढ़कर 10,574 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 7,324 करोड़ रुपये था. वहीं कुल रेवेन्यू बढ़कर 62,905 करोड़ रुपये पहुंच गया. FY26 में कंपनी की कुल वाहन बिक्री 10 प्रतिशत बढ़कर 51.17 लाख यूनिट रही.
शेयर बाजार में दिखा असर
मजबूत तिमाही नतीजों, बड़े डिविडेंड और बायबैक ऐलान के बाद बजाज ऑटो के शेयरों में तेजी देखने को मिली. BSE पर कंपनी का शेयर करीब 2.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10,572 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के मजबूत फंडामेंटल और शेयरधारकों को लगातार बेहतर रिटर्न देने की रणनीति निवेशकों का भरोसा और मजबूत कर सकती है.