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SEBI ने विदेशी निवेशकों को दी बड़ी राहत, FPI निवेश सीमा को बढ़ाकर किया 50 हजार करोड़
सेबी ने निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों को एक साल तक अग्रिम शुल्क लेने की अनुमति देने का फैसला किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छी खबर है. पूंजी बाजार नियामक सेबी के निदेशक मंडल ने सोमवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए निवेश सीमा को दोगुना करके 50,000 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. फिलहाल 25,000 करोड़ रुपये से अधिक एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले एफपीआई के लिए अपने सभी निवेशकों या हितधारकों का डिटेल अंडरलेइंग एनालिसिस के आधार पर देना जरूरी है. बता दें कि नवनियुक्त चेयरमैन पांडेय की अगुवाई में यह निदेशक मंडल की पहली बैठक थी.
SEBI चीफ ने क्या कहा?
सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मीटिंग के बाद कहा, "वित्त वर्ष 2022-23 और चालू वित्त वर्ष 2024-25 के बीच कैश इक्विटी बाजारों में ट्रेडिंग वॉल्यूम दोगुने से अधिक हो गया है. इसे ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने लागू थ्रेसहोल्ड को मौजूदा 25,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने के प्रपोजल को मंजूरी दे दी है." पांडेय ने आगे कहा, "इस तरह से भारतीय बाजारों में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक इक्विटी एयूएम रखने वाले FPIs को अब अतिरिक्त खुलासे करने की जरूरत होगी." पांडेय सेबी के नए चेयरमैन नियुक्त हुए हैं और उनकी अगुवाई में यह बोर्ड की पहली मीटिंग थी.
अगस्त 2023 में क्या लाया गया था नियम
अगस्त, 2023 में सेबी ने किसी एक कॉरपोरेट समूह में अपने इक्विटी एयूएम का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखने वाले या भारतीय इक्विटी बाजारों में 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की कुल हिस्सेदारी रखने वाले FPIs को निर्देश दिया था कि वे FPI में मालिकाना हक, आर्थिक हित या नियंत्रण रखने वाली सभी एंटिटीज की विस्तृत डिटेल दें. हालांकि कुछ FPI को कुछ शर्तों के तहत ऐसी अतिरिक्त खुलासा शर्तों से छूट दी गई है. इनमें विस्तारित इनवेस्टर बेस वाले ब्रॉड-बेस्ड, पूल्ड स्ट्रक्चर्ड या सरकार या सरकार से जुड़े निवेशकों की ओर से मालिकाना हित वाले FPI शामिल हैं.
सेबी मीटिंग के अन्य फैसले
इसके अलावा सेबी ने बोर्ड के मेंबर्स और अधिकारियों के हितों के टकराव, संपत्ति, निवेश और देनदारियों से संबंधित खुलासे की व्यापक समीक्षा करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का भी फैसला किया. समिति को गठन की तारीख से 3 महीने के अंदर अपनी सिफारिशें पेश करनी होंगी. इस रिपोर्ट को विचार के लिए सेबी के बोर्ड के सामने रखा जाएगा. समिति में संवैधानिक या वैधानिक या रेगुलेटरी बॉडीज, सरकारी/पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर और शिक्षा जगत में रिलीवेंट बैकग्राउंड और अनुभव रखने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों और विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा.
सेबी ने निवेश सलाहकारों और रिसर्च एनालिस्ट्स को एक साल तक एडवांस फीस लेने की इजाजत देने का भी फैसला किया है. मौजूदा नियमों के तहत निवेश सलाहकार (आईए) ग्राहक की सहमति होने पर दो तिमाहियों तक के लिए एडवांस फीस ले सकते हैं. रिसर्च एनालिस्ट्स (आरए) के लिए यह अवधि केवल एक तिमाही थी.
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