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SEBI ने जारी किया Algo Trading पर ड्राफ्ट पेपर, निवेशकों के हित में तैयार होगा फ्रेमवर्क
हर एल्गो (Algo) के लिए ब्रोकर को एक्सचेंज से मंजूरी जरूरी होगी. सभी एल्गो प्रोवाइडर का एक्सचेंज पर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
SEBI ने अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग (Algo Trading) से जुड़ी और कड़े नियमों का प्रस्ताव रखा है. अब रिटेल निवेशक बिना हर API स्ट्रैटेजी की मंजूरी के अल्गो ट्रेडिंग का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. SEBI ने यह प्रस्ताव रखा है कि स्टॉक ब्रोकर को अल्गो ट्रेडिंग की सुविधा केवल तब ही देनी चाहिए जब वह हर अल्गो के लिए स्टॉक एक्सचेंज से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर लें. भारत में 50 प्रतिशत से अधिक ट्रेडिंग अल्गो ट्रेडिंग के जरिए होती है और रिटेल ट्रेडर्स ने इसे अपनाया है.
सेबी ने क्या कहा?
SEBI के सर्कुलर के अनुसार, "सभी अल्गो ऑर्डर्स को स्टॉक एक्सचेंज द्वारा दिए गए एक यूनिक आइडेंटिफायर से टैग किया जाएगा ताकि ऑडिट ट्रेल बन सके और ब्रोकर को किसी भी मॉडिफिकेशन या बदलाव के लिए एक्सचेंज से अनुमति लेनी होगी." APIs के उपयोग के बारे में SEBI ने यह भी कहा कि ब्रोकर प्रिंसिपल होगा जबकि कोई भी अल्गो प्रोवाइडर या फिनटेक/वेंडर उसका एजेंट होगा, जब वह ब्रोकर द्वारा प्रदान की गई API का इस्तेमाल करेगा.
3 जनवरी तक राय मांगी
सेबी ने एल्गो ट्रेडिंग (Algo Traing) फर सभी पक्षों से 3 जनवरी तक राय मांगी है. हर एल्गो के लिए ब्रोकर को एक्सचेंज से मंजूरी जरूरी होगी. सभी एल्गो प्रोवाइडर का एक्सचेंज पर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा. हर एल्गो ऑर्डर की यूनिक आईडी होना जरूरी होगा. एल्गो में हर बदलाव के लिए एक्सचेंज की मंजूरी जरूरी होगी.
एल्गो प्रोवाइडर ब्रोकर के एजेंट की तरह ही काम करेंगे. तय सीमा से अधिक प्रति सेकंड ऑर्डर को एल्गो माना जाएगा. रिटेल निवेशक (Retail Investors) खुद एल्गो बनायें तो भी रजिस्ट्रेशन जरूरी है. रिटेल निवेशक के बनाए एल्गो का इस्तेमाल खुद के परिवार तक सीमित होगा. निवेशकों को एल्गो ट्रेडिंग के रिस्क मैनेजमेंट पर एक्सचेंज नियम जारी करेंगे.
क्या होती है एल्गो ट्रेडिंग (Algo Trading)?
एल्गो ट्रेडिंग (Algo Trading), शेयर बाजार में निवेश करने का एक तरीका है. इसमें, कंप्यूटर प्रोग्राम को पहले से तय नियमों के आधार पर ऑर्डर पूरा करने का काम दिया जाता है. इसे एल्गोरिथम ट्रेडिंग भी कहा जाता है. एल्गो ट्रेडिंग में, सॉफ़्टवेयर ही निवेशक की जगह ट्रेडिंग से जुड़े फैसले लेता है और ऑर्डर देता है.
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