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ऐतिहासिक गिरावट की ओर रुपया, डॉलर के मुकाबले जल्द पार कर सकता है 80 का बेंचमार्क
अगर सरकार और रिजर्व बैंक ने तत्काल ठोस कदम उठाना शुरू नहीं किया तो यह जल्द ही 80 के बेंचमार्क को छू सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः सोमवार को हफ्ते के पहले कारोबारी दिन फॉरेक्स मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और कमजोर हो गई और यह अब तक इतिहास में सबसे कमजोर होकर खुला है. अगर सरकार और रिजर्व बैंक ने तत्काल ठोस कदम उठाना शुरू नहीं किया तो यह जल्द ही 80 के बेंचमार्क को छू सकता है.
शुरुआती कारोबार में ये रहा हाल
सोमवार 11 जुलाई 2022 को शुरुआती कारोबार में घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती और जोखिम से बचने के रुख के चलते रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे टूटकर 79.33 पर आ गया. विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये की कमजोरी को थामने में मदद की. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 79.30 पर कमजोर खुला और बाद के कारोबार में 79.33 पर आ गया, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले सात पैसे की कमजोरी को दर्शाता है. पिछले सत्र में रुपया 79.26 के स्तर पर बंद हुआ था.
डॉलर इंडेक्स में मजबूती
हालांकि डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली और यह 0.31 फीसदी बढ़कर 107.34 पर पहुंच गया. डॉलर इंडेक्स में छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर दिखाया जाता है. रुपये में कमजोरी का असर भारतीय इकोनॉमी के लिहाज से खराब है. इससे जहां विदेशी मुद्रा भंडार ज्यादा तेजी से घटता है, वहीं सरकार को भी बाहर से इंपोर्ट करने वाली वस्तुएं जिनका पेमेंट डॉलर में किया जाता है, उनके लिए ज्यादा राशि खर्च करनी पड़ती है. फिलहाल सरकार का सबसे ज्यादा खर्चा कच्चा तेल और सोना खरीदने में किया जाता है.
महंगाई बढ़ती है
एक्सपर्ट के मुताबिक रुपये में कमजोरी से महंगाई भी बढ़ती है, क्योंकि सरकार द्वारा जो वस्तुएं बाहर से महंगी कीमतों पर मिलेंगी, उनकी देश में कीमत बढ़ जाती है. गिरते रुपये का यह असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल, सीएनजी और रसोई गैस जैसे ईंधन पर ही नहीं इंपोर्ट की जाने वाली तमाम चीजों पर पड़ता है. इनमें खाने के तेल से लेकर फर्टिलाइजर और स्टील तक हर तरह की चीजें शामिल हैं. इतना ही नहीं, इन इंपोर्टेड चीजों का कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करके बनने वाली वस्तुओं की लागत भी बढ़ जाती है. जाहिर है, रुपये में गिरावट का एक बड़ा असर महंगाई बढ़ने के रूप में भी देखने को मिलता है.
रिजर्व बैंक के लिए बढ़ी चुनौती
देश में महंगाई दर पहले से ही बरसों पुराने रिकॉर्ड तोड़ रही है. थोक और रिटेल दोनों कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार लगातार बढ़ रही है, ऐसे में गिरते रुपये का असर उसे और कहां तक ले जाएगा, ये सबके लिए चिंता की बात है. खासतौर पर रिजर्व बैंक के लिए तो कमजोर रुपया एक बहुत बड़ी चुनौती है. क्योंकि इससे एक तरफ तो ब्याज दरें बढ़ाकर कीमतों पर काबू पाने की उसकी कोशिशों को झटका लगता है और दूसरी तरफ करेंसी में गिरावट पर काबू पाने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया खरीदकर अपने पास रखी बेशकीमती फॉरेन करेंसी खर्च करनी पड़ती है.
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