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रिजर्व बैंक ने फिर किया रेपो रेट में इजाफा, जानिए कितनी हुई बढ़ोतरी
रिजर्व बैंक ने एक बार फिर रेपा रेट में इजाफा कर दिया है, महंगाई के कम होने के बावजूद रेपो रेट के कम होने की आशंका तो नहीं थी लेकिन इसके स्थिर रहने की आशंका जताई जा रही थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
रिजर्व बैंक ने एक बार फिर रेपा रेट की दरों में इजाफा कर दिया है. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक बार फिर रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत का इजाफा कर दिया है. इस इजाफे के बाद रेपो रेट 6.50 प्रतिशत तक जा पहुंची है. इसके बाद एक बार फिर कर्ज के सस्ता होने की उम्मीद खत्म हो गई है. इससे पहले रेपो रेट 6.25 प्रतिशत था. इसी के साथ तीन दिन से चली आ रही मौद्रिक समीक्षा नीति की बैठक आज समाप्त हो गई.
क्या बोले RBI गवर्नर
इस रेपो रेट की घोषणा करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर दास बोले कि पिछले कुछ साल में वैश्विक परिस्थितियों के कारण दुनिया भर के केन्द्रीय बैंकों के लिए बड़ी चुनौती रही है. रेपो रेट बढ़ने के बाद सभी बैंक अपने कर्ज के रेट ऑफ इंट्रेस्ट को भी बढ़ा देते हैं. इससे पहले जब दिसंबर में मौद्रिक समीक्षा बैठक हुई थी तो उसमें 0.35 प्रतिशत का इजाफा किया गया था, जिसके बाद रेपो रेट 6.25 प्रतिशत हो गई थी. आरबीआई ने आज वर्ष 2023 की अपनी पहली मौद्रिक नीति बैठक में जो रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है, जो मई 2022 के बाद से सबसे कम रेपो दर वृद्धि है. मई 2022 के बाद से ही लगातार रेपो रेट में इजाफे का सिलसिला शुरू हुआ था. मौजूदा वृद्धि के साथ, पिछले 10 महीनों के भीतर समग्र वृद्धि 2.5% हो गई है. एफडी निवेशकों के लिए यह इससे बेहतर नहीं हो सकता था क्योंकि सिर्फ एक साल पहले वे पिछले दो दशकों में एफडी पर सबसे कम ब्याज दरों में से एक के साथ संघर्ष कर रहे थे और अब, वे इस बड़े रेपो रेट की उम्मीद कर रहे हैं.
महंगाई कम होने से रेपो रेट कम होने की थी उम्मीद
एक ओर जहां रेपो रेट में हुए इजाफे के कारण जहां कर्ज लेने वाले लोग परेशान हैं वहीं दूसरी ओर लगातार कम हो रही महंगाई के बाद उम्मीद ये ही जताई जा रही थी कि रेपो रेट में कमी हो सकती है. हालांकि कई जानकार इसकी कम ही संभावना व्यक्त कर रहे थे. उनका कहना था कि रिजर्व बैंक कम तो नहीं करेगा लेकिन इसे स्थिर रख सकता है. लेकिन रिजर्व बैंक ने इस रेपो रेट में हुए इजाफे से ये साफ कर दिया है कि अभी हालात पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं.दुनियाभर में छाई महंगाई की आहट से भारत भी अछूता नहीं है. आईएमएफ की पूर्व चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर गीता गोपीनाथ ने भी यही कहा था कि इस साल के पहले 6 महीनों में ब्याज दरों के कम होने की संभावना नहीं है। उसके बाद बाजार में कुछ बदलाव आ सकता है.
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