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Vedanta जो नहीं कर पाई, वो मुकेश अंबानी करके दिखाएंगे, अब इस सेक्टर में कूदने की तैयारी! 

अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता फॉक्सकॉन के साथ मिलकर भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने वाली थी, लेकिन उसकी पार्टनरशिप टूट गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

छोटी सी सेमीकंडक्टर चिप क्या कर सकती है ये किसी से छिपा नहीं है. कोरोना काल में जब चिप की किल्लत हुई, तो कार कंपनियों के पसीने छूटने लगे. कारों का वेटिंग पीरियड बढ़ा दिया गया. मोबाइल, कंप्यूटर जैसे अनगिनत इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की कीमतों में उछाल की आशंका जताई जाने लगी. उस वक्त यह महसूस हुआ कि भारत को इस मामले में आत्मनिर्भर होना चाहिए. सरकार ने योजना बनाई, वेदांता (Vedanta) आगे आई और एक उम्मीद जगी कि देश का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट (Semiconductor Plant) जल्द ही अस्तित्व में आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब वेदांता और उसकी पूर्व पार्टनर फॉक्सकॉन अलग-अलग राह तलाश रही हैं. इस बीच, रिलायंस का नाम एकदम से चर्चा में आ गया है.

विदेशी कंपनियों से बातचीत
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो अरबपति कारोबारी मुकेश अंबानी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में संभावनाएं तलाश रहे हैं. रिलांयस समूह ने ऐसे विदेशी चिपमेकर्स के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है, जिन्हें टेक्नोलॉजी पार्टनर बनाया जा सकता है. वैसे, अभी रिलायंस ने इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है. लेकिन मुकेश अंबानी चौंकाने वाले फैसलों के लिए जाने जाते हैं. कोई आश्चर्य नहीं होगा कि वो एकदम से आएं और ऐलान कर दें. दरअसल, सेमीकंडक्टर चिप का कारोबार बहुत बड़ा है. भारत में भी इसकी काफी डिमांड है. फिलहाल भारत अपनी जरूरतों को दूसरे देशों से पूरा करता है, ऐसे में यदि भारत में प्लांट लगेगा, तो हमारी कंपनियों को विदेशी कंपनियों का मुंह नहीं तकना पड़ेगा और इसका चिप बनाने वाले को भी जबरदस्त फायदा होगा.

पहले दांव वाले को मिलेगा फायदा
मुकेश अंबानी लगातार अपने कारोबार का विस्तार कर रहे हैं. ऐसे में सेमीकंडक्टर चिप मार्केट में कूदना भी उनके लिए एक ऑप्शन हो सकता है. भारत में फिलहाल यह बाजार सभी के लिए खुला है और जो पहले दांव चलता है, मार्केट में उसी का दबदबा होगा. रिलायंस के पास भले ही इस फील्ड का अनुभव नहीं है, लेकिन वो टेक्नोलॉजी पार्टनर के साथ मिलकर आगे बढ़ सकती है. वेदांता भी यही कर रही थी, लेकिन उसकी पार्टनरशिप टिक नहीं सकी. अब खबर है कि ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन, STMicro के साथ मिलकर भारत में चिप फैक्ट्री लगाने की योजना बना रही है. वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल भी कह चुके हैं कि वो भी दूसरे पार्टनर के साथ इस दिशा में आगे बढ़ेंगे.

 


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