रिलायंस का बड़ा कदम: केल्विनेटर और बीपीएल से वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में धमाल

RIL की यह नई चाल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में बड़ी हलचल ला सकती है. अगर ‘कैंपा कोला’ मॉडल इलेक्ट्रॉनिक्स में भी काम करता है, तो LG, Samsung, Whirlpool और Godrej जैसे दिग्गजों को कड़ी चुनौती मिल सकती है.

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Friday, 31 October, 2025
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रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) अपने उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में वही रणनीति अपनाने जा रही है जिसने ‘कैंपा कोला’ को बाजार में दोबारा खड़ा किया था. दरअसल, कंपनी का फोकस अब आक्रामक कीमतों, ट्रेडर्स को अधिक मार्जिन, और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर रहेगा. जानकारी के मुताबिक, रिलायंस रिटेल अपने केल्विनेटर (Kelvinator) और बीपीएल (BPL) ब्रांड्स को देशभर के मल्टी-ब्रांड इलेक्ट्रॉनिक स्टोर्स, रीजनल रिटेल चेन्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर पेश करने की तैयारी में है.

‘कैंपा कोला’ से मिली प्रेरणा

रिलायंस ने कुछ साल पहले कैंपा कोला ब्रांड को फिर से लॉन्च कर पेप्सिको और कोका-कोला जैसी दिग्गज कंपनियों को कड़ी टक्कर दी थी. अब वही रणनीति इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट में अपनाई जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रिलायंस के प्रोडक्ट्स की कीमतें LG और Samsung जैसे ब्रांड्स से 20-25% तक कम हो सकती हैं. इसके जरिए कंपनी अलग-अलग प्राइस पॉइंट्स पर उपभोक्ताओं को विकल्प देना चाहती है.

ज्यादा मार्जिन और एक्सपोर्ट पर जोर

रिलायंस अपने डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स को स्थापित ब्रांड्स की तुलना में 8-15% तक ज्यादा मार्जिन देने की योजना बना रही है. कंपनी पहले ही नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों में अपने केल्विनेटर और बीपीएल ब्रांडेड प्रोडक्ट्स का निर्यात शुरू कर चुकी है. आगे इसका लक्ष्य श्रीलंका, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के बाजारों में प्रवेश करने का है. रिलायंस रिटेल के एक प्रवक्ता ने नेपाल और भूटान में एक्सपोर्ट की पुष्टि की है.

केल्विनेटर की कहानी: स्वीडिश कंपनी से खरीद तक

रिलायंस 2019 से स्वीडिश अप्लायंस निर्माता इलेक्ट्रोलक्स (Electrolux) से ब्रांड लाइसेंस लेकर केल्विनेटर उत्पाद बेच रही थी. हाल ही में कंपनी ने करीब ₹160 करोड़ में केल्विनेटर ब्रांड को पूरी तरह खरीद लिया. रिलायंस अब इस ब्रांड के तहत साइड-बाय-साइड रेफ्रिजरेटर, फ्रंट-लोड वॉशिंग मशीन, डायरेक्ट-कूल फ्रिज और एयर कूलर जैसे प्रोडक्ट्स पेश कर रही है. कंपनी का उद्देश्य हर आय वर्ग के ग्राहकों तक पहुंच बनाना है.

बीपीएल का विस्तार: बजट से लेकर प्रीमियम तक

बीपीएल (BPL) ब्रांड को रिलायंस ने 2020 में लाइसेंस के तहत लॉन्च किया था. तब से कंपनी ने टीवी, वॉशिंग मशीन और छोटे होम अप्लायंसेज में अपनी मौजूदगी मजबूत की है. अब बीपीएल के तहत रिलायंस एंट्री-लेवल से लेकर प्रीमियम टीवी, रेफ्रिजरेटर, एसी और वॉशिंग मशीन जैसे कई मॉडल पेश कर रही है.

‘मेड इन इंडिया’ को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य

रिलायंस का कहना है कि उसके इलेक्ट्रॉनिक ब्रांड्स का उद्देश्य भारत में बनी तकनीक को दुनिया तक पहुंचाना है. कंपनी प्रवक्ता के मुताबिक, “हम विभिन्न प्रोडक्ट कैटेगरी, प्राइस पॉइंट्स और मार्केट्स में नए अवसरों की तलाश जारी रखेंगे. हमारा लक्ष्य है कि रिलायंस के ब्रांड्स भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धी बनें.”


 


मुंबई में 30 मई को सजेगा ‘Wellbeing 5.0’ का मंच, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन पर होगा मंथन

यह फेस्टिवल समग्र स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है. कार्यक्रम में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न आयामों पर चर्चा होगी.

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Friday, 29 May, 2026
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मुंबई के अंधेरी स्थित नोवोटेल होटल में 30 मई 2026 को ‘BW Festival of Wellbeing’ के पांचवें संस्करण का आयोजन किया जाएगा. इस साल का थीम “Wellbeing 5.0: The Evolution of Human Flourishing | Pause, Reconnect, Flourish” है. यह आयोजन विज्ञान, आध्यात्म, व्यवसाय और मानवता के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक खास पहल माना जा रहा है.

यह फेस्टिवल समग्र स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है. कार्यक्रम में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न आयामों पर चर्चा होगी. इसमें विशेषज्ञ, चिकित्सक, आध्यात्मिक गुरु, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और वेलनेस क्षेत्र से जुड़े लोग एक मंच पर एकत्र होंगे.

आत्मिक चेतना और हीलिंग पर होंगी विशेष चर्चाएं

कार्यक्रम की शुरुआत ‘इनर इंटेलिजेंस’ यानी आंतरिक चेतना पर विशेष सत्र से होगी, जिसे इस्कॉन साउथ मुंबई के संयोजक, आध्यात्मिक सलाहकार और लेखक एचजी नित्यानंद चरण दास संबोधित करेंगे. इस सत्र में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक मजबूती और मानसिक संतुलन पर चर्चा की जाएगी. इसके बाद ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड थेरेपिस्ट और Centre for Healing & Sacred Arts की संस्थापक जिया नाथ द्वारा हीलिंग सेशन आयोजित किया जाएगा. यह सत्र प्रतिभागियों को शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने, तनाव कम करने और आंतरिक शांति पाने के तरीकों से परिचित कराएगा.

साउंड हीलिंग और संगीत से मिलेगा मानसिक सुकून

पूरे दिन चलने वाले इस आयोजन में कई इंटरैक्टिव और अनुभवात्मक गतिविधियां भी शामिल होंगी. होर्मज्द और उनकी टीम द्वारा साउंड हीलिंग सेशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें विशेष ध्वनियों, संगीत और कंपन के माध्यम से मानसिक शांति और रिलैक्सेशन का अनुभव कराया जाएगा. कार्यक्रम के समापन पर प्रसिद्ध सिंगर और कंपोजर शिबानी कश्यप तथा सिंगर, वॉइस कोच और हीलर शुभांगी द्वारा ‘म्यूजिकल हीलिंग’ प्रस्तुत की जाएगी. संगीत और मेडिटेशन के मेल से यह अनुभव प्रतिभागियों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा.

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का होगा मेल

फेस्टिवल में ज्योतिष, टैरो, न्यूमरोलॉजी और एनर्जी हीलिंग जैसी प्राचीन पद्धतियों को आधुनिक दौर में किस तरह नए रूप में अपनाया जा रहा है, इस पर भी चर्चा होगी. आयोजन में कई पैनल डिस्कशन, कीनोट एड्रेस और विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे.

इसके अलावा अभिनेत्री ऋषिता भट्ट और BW Businessworld के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा के बीच भी विशेष बातचीत होगी. यह चर्चा बाहरी सफलता और सार्वजनिक जीवन से आगे बढ़कर समग्र वेलबीइंग के महत्व पर केंद्रित रहेगी.

सात्विक भोजन भी होगा आकर्षण का केंद्र

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को सात्विक लंच और डिनर परोसा जाएगा, ताकि आयोजन की थीम के अनुरूप शारीरिक और मानसिक संतुलन का अनुभव और बेहतर हो सके.

Wellbeing 5.0 Awards में होगा सम्मान

कार्यक्रम के दौरान ‘Wellbeing 5.0 Awards’ भी प्रदान किए जाएंगे. इन पुरस्कारों के जरिए उन व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने वेलनेस, भावनात्मक मजबूती, जागरूक नेतृत्व और स्वस्थ कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया है.

पुरस्कार श्रेणियां:

1. Emerging Leaders Under 40
2. Excellence Leaders 40 & Above
3. Institutional Excellence in Wellbeing

आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन आधुनिक विज्ञान, प्राचीन ज्ञान और मानवीय संवेदनाओं को एक साथ जोड़कर लोगों को संतुलित और बेहतर जीवन की दिशा में प्रेरित करेगा.


IBC ने मजबूत की वित्तीय व्यवस्था, संकटग्रस्त कंपनियों के पुनरुद्धार को मिली रफ्तार: निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री ने कहा कि IBC अब भारत के वित्तीय सुधार ढांचे का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है. यह सरकार की मजबूत आर्थिक संस्थाएं बनाने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.

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Friday, 29 May, 2026
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) ने पिछले एक दशक में भारत की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने और संकटग्रस्त कंपनियों के तेजी से पुनरुद्धार में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि इस कानून ने भारत की दिवाला समाधान प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है.

IBC के 10 साल पूरे होने पर कही बात

दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के लागू होने के 10 साल पूरे होने के मौके पर वित्त मंत्री ने कहा कि IBC ने पुराने बिखरे हुए और देनदार-आधारित सिस्टम की जगह समयबद्ध और लेनदार-आधारित समाधान प्रक्रिया को स्थापित किया. इससे कंपनियों के मामलों का तेजी से निपटारा संभव हुआ है.

‘देरी और अनिश्चितता’ से ‘समाधान और पुनरुद्धार’ की ओर बदलाव

सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में निर्मला सीतारमण ने कहा कि IBC ने कारोबारी संकट से निपटने के भारत के तरीके को “देरी और अनिश्चितता” से निकालकर “समाधान और पुनरुद्धार” की दिशा में बदल दिया है. इससे लेनदारों, निवेशकों और उद्योग जगत का भरोसा भी मजबूत हुआ है.

आर्थिक सुधारों का अहम स्तंभ बना IBC

वित्त मंत्री ने कहा कि IBC अब भारत के वित्तीय सुधार ढांचे का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है. यह सरकार की मजबूत आर्थिक संस्थाएं बनाने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.

क्या है IBC

साल 2016 में लागू किया गया IBC भारत का प्रमुख दिवाला कानून है. यह कंपनियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों से जुड़े दिवाला मामलों के समाधान के लिए एकीकृत ढांचा प्रदान करता है. इसके तहत तय समयसीमा में मामलों के निपटारे का प्रावधान है.

समय-समय पर हुए कई संशोधन

IBC लागू होने के बाद से इसमें कई बदलाव किए गए हैं ताकि रिकवरी प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके, मामलों के समाधान में तेजी लाई जा सके और लागू करने में आने वाली कमियों को दूर किया जा सके. हाल ही में सरकार ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 के जरिए नए संशोधन भी किए हैं.

बैंकों को मिला बड़ा सहारा

सरकार लगातार यह कहती रही है कि IBC ने अर्थव्यवस्था में क्रेडिट अनुशासन को मजबूत किया है और बैंकों को बढ़ते फंसे हुए कर्ज यानी स्ट्रेस्ड एसेट्स से निपटने में मदद मिली है. इससे बैंकिंग सेक्टर की स्थिति भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है.
 

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Cash Ur Drive का मुनाफा FY26 की दूसरी छमाही में 94.5% उछला, EV सेक्टर में बढ़ाया विस्तार

पूरे वित्त वर्ष FY26 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 33.98% बढ़कर ₹186.67 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹139.32 करोड़ था.

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Friday, 29 May, 2026
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आउट-ऑफ-होम (OOH) और ट्रांजिट मीडिया क्षेत्र की कंपनी Cash Ur Drive Marketing Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही और पूरे साल के लिए मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी की ग्रोथ ट्रांजिट मीडिया कारोबार में तेजी और EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में विस्तार के चलते बढ़ी है.

दूसरी छमाही में शानदार बढ़त

कंपनी के मुताबिक FY26 की दूसरी छमाही में ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू सालाना आधार पर 43.72% बढ़कर ₹108.79 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹75.70 करोड़ था. इसी दौरान EBITDA 86.06% बढ़कर ₹20.02 करोड़ हो गया. वहीं कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) 94.5% की जोरदार छलांग लगाते हुए ₹18.52 करोड़ पर पहुंच गया.

पूरे वित्त वर्ष में भी मजबूत प्रदर्शन

पूरे वित्त वर्ष FY26 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 33.98% बढ़कर ₹186.67 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹139.32 करोड़ था. कंपनी का EBITDA 59.2% बढ़कर ₹33.56 करोड़ हो गया. वहीं नेट प्रॉफिट 64.98% बढ़कर ₹29.40 करोड़ दर्ज किया गया.

मुनाफे के मार्जिन में भी सुधार

कंपनी की लाभप्रदता में भी सुधार देखने को मिला. FY26 में EBITDA मार्जिन बढ़कर 17.98% हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 15.13% था. वहीं नेट प्रॉफिट मार्जिन 12.52% से बढ़कर 15.28% पहुंच गया.

कंपनी ने FY26 को बताया ‘ट्रांसफॉर्मेशनल ईयर’

कंपनी के प्रतिनिधि रघु खन्ना ने कहा कि FY26 कंपनी के लिए एक “ट्रांसफॉर्मेशनल ईयर” साबित हुआ है. उन्होंने कहा कि मजबूत वित्तीय वृद्धि, रणनीतिक विस्तार और लंबी अवधि की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन ने इस प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई है.

उन्होंने कहा, “टोटल इनकम, EBITDA और प्रॉफिट में मजबूत बढ़त हमारे बिजनेस मॉडल की ताकत, ट्रांजिट और आउटडोर मीडिया की बढ़ती अहमियत और लाभदायक ग्रोथ पर हमारे फोकस को दर्शाती है.”

NSE Emerge पर लिस्टिंग से बढ़ी पहचान

रघु खन्ना ने बताया कि अगस्त 2025 में कंपनी की NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग से बाजार में उसकी पहचान मजबूत हुई है और भविष्य के विस्तार के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है.

EV इकोसिस्टम में रणनीतिक निवेश

कंपनी ने शहरी मोबिलिटी और EV इकोसिस्टम में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए कई रणनीतिक निवेश किए हैं. FY26 के दौरान कंपनी ने Kolkata Call Taxi Private Limited में 19.06% हिस्सेदारी खरीदी. इसके अलावा Charj Karo Greentech Mobility Private Limited में 50% हिस्सेदारी भी हासिल की.

कंपनी को नगर निगम ऋषिकेश से 10 साल का कंसेशन एग्रीमेंट भी मिला है, जिसके तहत 10 EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे. इन चार्जिंग स्टेशनों के साथ विज्ञापन सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी.

2009 में हुई थी शुरुआत

साल 2009 में स्थापित Cash Ur Drive Marketing Limited देश के प्रमुख OOH और ट्रांजिट मीडिया सेक्टर में काम करती है. कंपनी बड़े भारतीय शहरों में टिकाऊ और टेक्नोलॉजी आधारित विज्ञापन समाधान उपलब्ध कराती है.

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कम हुए बैंक फ्रॉड के मामले, लेकिन ₹48 हजार करोड़ डूबे, सरकारी बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित: RBI

RBI के आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग सिस्टम में छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है. लेकिन बड़े कर्ज से जुड़े घोटाले अब भी सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

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Friday, 29 May, 2026
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देश के बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या भले ही तेजी से घटी हो, लेकिन इन फ्रॉड से जुड़ी रकम लगातार बढ़ती जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों में कुल ₹48,021 करोड़ की धोखाधड़ी दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब छोटे डिजिटल फ्रॉड की जगह बड़े कर्ज और एडवांस से जुड़े घोटाले बैंकिंग सिस्टम पर भारी पड़ रहे हैं.

तीन साल में बदली तस्वीर

RBI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में धोखाधड़ी के 10,114 मामले सामने आए, जबकि एक साल पहले यह संख्या 23,722 थी. यानी मामलों की संख्या में करीब 57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं वित्त वर्ष 2023-24 के मुकाबले यह गिरावट लगभग 72 फीसदी रही.

हालांकि दूसरी तरफ फ्रॉड से जुड़ी रकम तेजी से बढ़ी है. 2024-25 में जहां यह रकम ₹32,803 करोड़ थी, वहीं 2025-26 में बढ़कर ₹48,021 करोड़ पहुंच गई. तीन साल पहले यह आंकड़ा केवल ₹11,013 करोड़ था. यानी तीन वर्षों में धोखाधड़ी की रकम चार गुना से ज्यादा बढ़ गई.

सरकारी बैंकों पर सबसे बड़ा असर

रिपोर्ट के अनुसार सरकारी बैंकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा. वित्त वर्ष 2025-26 में पब्लिक सेक्टर बैंकों में फ्रॉड से जुड़ी रकम ₹35,709 करोड़ रही, जो पिछले साल की तुलना में 51 फीसदी ज्यादा है. कुल धोखाधड़ी राशि में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 74.5 फीसदी तक पहुंच गई. हालांकि इन बैंकों में मामलों की संख्या घटकर 5,418 रह गई, जो एक साल पहले 6,916 थी.

निजी बैंकों में भी बढ़ी फ्रॉड राशि

निजी बैंकों में भी फ्रॉड से जुड़ी रकम में बढ़ोतरी दर्ज की गई. यहां धोखाधड़ी की राशि बढ़कर ₹11,399 करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल यह ₹8,927 करोड़ थी. कुल मामलों में निजी बैंकों की हिस्सेदारी 39.1 फीसदी रही.

बड़े लोन फ्रॉड बने सबसे बड़ी चुनौती

RBI रिपोर्ट के मुताबिक अब सबसे बड़ा खतरा कर्ज और एडवांस से जुड़े फ्रॉड बन चुके हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में ऐसे मामलों की रकम बढ़कर ₹40,774 करोड़ पहुंच गई, जो कुल फ्रॉड राशि का करीब 85 फीसदी है.

इन मामलों की संख्या भी बढ़कर 8,640 हो गई, जबकि पिछले साल यह 7,924 थी. इससे साफ है कि बैंकिंग सिस्टम में बड़े कॉरपोरेट लोन और एडवांस से जुड़े जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं.

डिजिटल पेमेंट फ्रॉड में बड़ी राहत

एक सकारात्मक संकेत यह रहा कि कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़े फ्रॉड मामलों में भारी गिरावट आई है. ऐसे मामलों की संख्या घटकर केवल 293 रह गई, जबकि पिछले साल यह 13,332 थी. इन मामलों में शामिल रकम भी ₹517 करोड़ से घटकर सिर्फ ₹29 करोड़ रह गई.

वित्त वर्ष 2023-24 में डिजिटल फ्रॉड कुल मामलों का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा थे, लेकिन अब इनकी हिस्सेदारी घटकर केवल 2.9 फीसदी रह गई है.

अन्य कैटेगरी में भी बदलाव

जमा यानी डिपॉजिट से जुड़े फ्रॉड मामलों की रकम घटकर ₹377 करोड़ रह गई. वहीं “अन्य” कैटेगरी में धोखाधड़ी की राशि तेजी से बढ़कर ₹6,063 करोड़ पहुंच गई, जो पिछले साल केवल ₹971 करोड़ थी.

RBI रिपोर्ट से क्या संकेत मिलते हैं?

RBI के आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग सिस्टम में छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है. लेकिन बड़े कर्ज से जुड़े घोटाले अब भी सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं. खासतौर पर सरकारी बैंकों पर इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई दे रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बैंकों को बड़े कॉरपोरेट लोन की निगरानी, जोखिम मूल्यांकन और रिकवरी सिस्टम को और मजबूत करना होगा, ताकि हजारों करोड़ रुपये के ऐसे फ्रॉड पर लगाम लगाई जा सके.


अब कागज नहीं, प्लास्टिक के हो सकते हैं भारतीय नोट, RBI कर रहा पॉलीमर करेंसी पर बड़ा विचार

पॉलीमर नोट सबसे पहले साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया में शुरू किए गए थे. इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम, रोमानिया और मॉरीशस समेत दुनिया के कई देशों ने इन्हें अपनाया.

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Friday, 29 May, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर सकता है. आने वाले समय में 100, 200 और 500 रुपये के नोट कागज की जगह प्लास्टिक जैसे मजबूत पॉलीमर मटेरियल में देखने को मिल सकते हैं. बढ़ती नोट छपाई लागत, जल्दी खराब होने वाले नोटों और नकली करेंसी की चुनौती को देखते हुए RBI पॉलीमर बैंक नोट शुरू करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है. केंद्रीय बैंक जल्द ही पॉलीमर नोटों को लेकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है. इस मुद्दे पर RBI की हालिया बोर्ड बैठकों में भी चर्चा हुई है.

क्यों बढ़ रही है पॉलीमर नोटों की जरूरत?
देश में हर साल बड़ी संख्या में नोट फटने, गंदे होने और खराब होने के कारण चलन से बाहर हो जाते हैं. RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 23.8 अरब पुराने और क्षतिग्रस्त नोटों को नष्ट करना पड़ा. यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 12% ज्यादा रहा. सबसे ज्यादा खराब होने वाले नोटों में 500 रुपये और 100 रुपये के नोट शामिल रहे. नोटों की लगातार बढ़ती मांग के कारण छपाई लागत भी तेजी से बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने पर RBI का खर्च बढ़कर करीब ₹6,373 करोड़ पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह ₹5,101 करोड़ था.

क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट एक खास तरह के प्लास्टिक आधारित मटेरियल से बनाए जाते हैं. ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और मजबूत माने जाते हैं. पानी, नमी, गंदगी और बार-बार इस्तेमाल का इन पर कम असर पड़ता है. विशेषज्ञों के मुताबिक पॉलीमर नोट सामान्य नोटों की तुलना में करीब ढाई गुना ज्यादा समय तक चल सकते हैं. लंबे समय तक उपयोग होने के कारण इनकी रिप्लेसमेंट लागत भी कम हो जाती है.

नकली नोटों पर भी लगेगी रोक
पॉलीमर नोटों में कई एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स जोड़े जा सकते हैं. इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग और विशेष सुरक्षा लेयर शामिल होती हैं, जिन्हें कॉपी करना काफी मुश्किल माना जाता है. RBI का मानना है कि इससे जाली नोटों की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. हालांकि पहले भी सरकार ने स्पष्ट किया था कि पॉलीमर नोटों का मुख्य उद्देश्य नोटों की उम्र बढ़ाना है.

ATM और मशीनें भी होंगी तैयार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहले पॉलीमर नोटों को लेकर तकनीकी चुनौतियां थीं, लेकिन अब ATM और करेंसी मशीनों को ऐसे नोटों के अनुकूल बनाने के समाधान तैयार कर लिए गए हैं. RBI का कहना है कि अब देश के पास जरूरी संसाधन और तकनीक उपलब्ध है.

दुनिया के कई देशों में पहले से चलन में हैं पॉलीमर नोट
पॉलीमर नोट सबसे पहले साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया में शुरू किए गए थे. इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम, रोमानिया और मॉरीशस समेत दुनिया के कई देशों ने इन्हें अपनाया. रिपोर्ट्स के अनुसार अब करीब 60 देशों में पॉलीमर नोट इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इन नोटों की एक खास बात यह भी है कि खराब होने के बाद इन्हें रिसाइकिल कर दूसरी प्लास्टिक वस्तुएं बनाई जा सकती हैं.

पहले भी हो चुकी है कोशिश
भारत में पॉलीमर नोट लाने का विचार नया नहीं है. साल 2012 में तत्कालीन सरकार ने पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर पॉलीमर से बने 10 रुपये के नोट जारी करने की योजना बनाई थी. हालांकि तकनीकी दिक्कतों के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी. अब बदलती तकनीक और बढ़ती करेंसी लागत को देखते हुए RBI एक बार फिर इस दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी कर रहा है.


मेटा का बड़ा दांव: फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के लिए लॉन्च किए पेड प्लान

कंपनी अब विज्ञापन आधारित कमाई पर निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बढ़ते निवेश के बीच नए रेवेन्यू मॉडल तैयार करने पर जोर दे रही है.

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Friday, 29 May, 2026
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सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) ने अपने प्रमुख प्लेटफॉर्म फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) और व्हाड्सऐप (WhatsApp) के लिए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च करने का ऐलान किया है. कंपनी अब विज्ञापन आधारित कमाई पर निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बढ़ते निवेश के बीच नए रेवेन्यू मॉडल तैयार करने पर जोर दे रही है. मेटा ने फेसबुक प्लस, इंस्टाग्राफ प्लस और व्हाट्सऐप प्लस नाम से नए प्रीमियम प्लान पेश किए हैं. कंपनी की हेड ऑफ प्रोडक्ट नाओमी ग्लाइट ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में इन नए सब्सक्रिप्शन प्लान की जानकारी दी.

फेसबुक और इंस्टाग्राफ प्लस की इतनी होगी कीमत

रिपोर्ट्स के मुताबिक फेसबुक प्लस और इंस्टाग्राफ प्लस की कीमत 3.99 डॉलर प्रति माह रखी गई है. वहीं व्हाट्सऐप प्लस  के लिए यूजर्स को हर महीने 2.99 डॉलर चुकाने होंगे. कंपनी ने साफ किया है कि इन प्लेटफॉर्म्स के फ्री वर्जन पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे. यानी यूजर्स चाहें तो बिना सब्सक्रिप्शन के भी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे.

प्रीमियम यूजर्स को मिलेंगे खास फीचर्स

मेटा के नए पेड प्लान्स में यूजर्स को कई अतिरिक्त फीचर्स और एडवांस टूल्स मिलेंगे. फेसबुक प्लस, इंस्टाग्राफ प्लस यूजर्स को एडवांस ऑडियंस एनालिटिक्स, एंगेजमेंट इनसाइट्स, प्रोफाइल कस्टमाइजेशन और कंटेंट विजिबिलिटी बढ़ाने वाले फीचर्स दिए जा सकते हैं. वहीं, व्हाट्सऐप प्लस  में एक्सक्लूसिव स्टिकर्स, कस्टम थीम्स और पर्सनलाइज्ड नोटिफिकेशन टोन जैसे फीचर्स मिलने की उम्मीद है.

AI निवेश बढ़ने से बदली रणनीति

मेटा इस समय AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है. कंपनी ने इस साल 125 अरब डॉलर से 145 अरब डॉलर तक के कैपिटल एक्सपेंडिचर का अनुमान जताया है. यह निवेश मुख्य रूप से AI डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और संबंधित टेक्नोलॉजी पर किया जाएगा. निवेशक लंबे समय से इस बात पर नजर बनाए हुए थे कि मेटा इतनी बड़ी लागत के बीच अपनी कमाई को कैसे मजबूत बनाए रखेगी. रिपोर्ट्स के अनुसार सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च की खबर के बाद Meta के शेयरों में करीब 3% की तेजी देखने को मिली.

पहले भी कर चुकी है प्रयोग

मेटा इससे पहले भी पेड सर्विसेज पर प्रयोग कर चुकी है. साल 2023 में कंपनी ने यूरोप के कुछ हिस्सों में फेसबुक और इंस्टाग्राम के ऐड-फ्री सब्सक्रिप्शन वर्जन लॉन्च किए थे. हालांकि नया कदम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ा माना जा रहा है, क्योंकि इस बार कंपनी वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं को टारगेट कर रही है.

‘Meta One’ के तहत आएंगी सभी पेड सर्विसेज

नाओमी ग्लाइट ने कहा कि मेटा भविष्य में अपनी सभी पेड सर्विसेज को ‘मेटा वन’ नाम के बड़े इकोसिस्टम के तहत लाने की योजना बना रही है. इसमें कंपनी के अलग-अलग सब्सक्रिप्शन प्रोडक्ट्स को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा सकता है.

यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया

मेटा के इस फैसले पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं. कुछ लोग इसे अतिरिक्त सुविधाओं वाला बेहतर विकल्प मान रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स का कहना है कि कंपनी धीरे-धीरे ज्यादा फीचर्स को पेवॉल के पीछे ले जा रही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यूजर्स इन प्रीमियम फीचर्स के लिए हर महीने भुगतान करने को कितना तैयार होते हैं.


रोजगार को लेकर बढ़ी चिंता, फिर भी दुनिया का सबसे भरोसेमंद कंज्यूमर मार्केट बना भारत: रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में भारत ने लगातार सबसे ऊंचा कंज्यूमर कॉन्फिडेंस स्कोर दर्ज किया. भारत का नेशनल इंडेक्स स्कोर मई में 0.4 अंक बढ़कर 66.6 पर पहुंच गया.

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Friday, 29 May, 2026
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वैश्विक अनिश्चितताओं और रोजगार को लेकर बढ़ती चिंताओं के बावजूद भारत दुनिया का सबसे भरोसेमंद कंज्यूमर मार्केट बना हुआ है. एलएसईजी-इप्सोस प्राइमरी कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स (PCSI) की ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में भारत ने लगातार सबसे ऊंचा कंज्यूमर कॉन्फिडेंस स्कोर दर्ज किया. भारत का नेशनल इंडेक्स स्कोर मई में 0.4 अंक बढ़कर 66.6 पर पहुंच गया. सर्वे में शामिल 30 देशों में भारत सबसे आगे रहा और 60 अंक के स्तर को पार करने वाला इकलौता देश बना.

मलेशिया और इंडोनेशिया भी पीछे

रिपोर्ट के अनुसार मलेशिया और इंडोनेशिया का स्कोर 56.7 रहा, जबकि स्वीडन 55.4 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा. ब्राजील का स्कोर 52.3 और मेक्सिको का 51 रहा. वहीं फ्रांस, जापान और तुर्किये सबसे कमजोर बाजारों में शामिल रहे. इन देशों का स्कोर क्रमशः 39.3, 37.8 और 35.6 दर्ज किया गया.

वित्तीय स्थिति और निवेश भरोसे ने बढ़ाया कॉन्फिडेंस

PCSI सर्वे चार प्रमुख संकेतकों पर आधारित होता है. इनमें व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, आर्थिक उम्मीदें, रोजगार और निवेश से जुड़ा भरोसा शामिल है. भारत में कंज्यूमर सेंटिमेंट को सबसे ज्यादा मजबूती व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और निवेश भरोसे से मिली. करंट पर्सनल फाइनेंशियल कंडीशंस सब-इंडेक्स में 1.2 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि निवेश सब-इंडेक्स 1.7 अंक बढ़ा. आर्थिक उम्मीदों वाला इंडेक्स लगभग स्थिर रहा और इसमें सिर्फ 0.1 अंक की बढ़त हुई. हालांकि रोजगार से जुड़ा सब-इंडेक्स 1.5 अंक गिर गया, जिससे नौकरी को लेकर बढ़ती चिंता साफ दिखाई दी.

AI और कॉस्ट कटिंग से बढ़ी नौकरी की चिंता

इप्सोस इंडिया के CEO सुरेश रामलिंगम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित बदलाव और कंपनियों की कॉस्ट कटिंग के कारण भारतीयों में नौकरी को लेकर तनाव बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बाद कंपनियां खर्च घटाने पर जोर दे रही हैं, जिसका असर रोजगार के माहौल पर पड़ रहा है.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद लोग अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश और भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर अब भी सकारात्मक बने हुए हैं.

सरकार के कदमों से बना भरोसा

रामलिंगम के मुताबिक सरकार ने बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव, पश्चिम एशिया संघर्ष और रुपये की कमजोरी जैसे बाहरी दबावों से लोगों को बचाने के लिए सावधानीपूर्ण कदम उठाए हैं. इसी वजह से उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत बना हुआ है.

हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि सर्वे के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी आने वाले महीनों में घरेलू बजट और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है.

21 हजार से ज्यादा लोगों पर हुआ सर्वे

यह सर्वे 24 अप्रैल से 8 मई 2026 के बीच इप्सोस के ग्लोबल एडवाइजर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए किया गया. इसमें दुनिया भर के 75 वर्ष से कम उम्र के 21 हजार से ज्यादा वयस्क शामिल हुए. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अप्रैल 2026 से भारत में सर्वे का तरीका बदला गया है. अब पूरी तरह ऑनलाइन इंटरव्यू किए जा रहे हैं, जबकि पहले इसमें आमने-सामने इंटरव्यू भी शामिल थे.
 


भारत में रूफटॉप सोलर की तेज रफ्तार, Q1 2026 में 2.7 GW क्षमता जुड़ी, 82% ग्रोथ का आधार बना रेजिडेंशियल सेक्टर

रिपोर्ट में बताया गया कि Q1 2025 से Q1 2026 के बीच असम ने सबसे ज्यादा 40% की कंपाउंडेड क्वार्टरली ग्रोथ दर्ज की. इसके बाद उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश का स्थान रहा.

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Friday, 29 May, 2026
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भारत में रूफटॉप सोलर सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है. साल 2026 की पहली तिमाही में देश ने 2.7 गीगावॉट (GW) नई रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ी है. यह पिछले क्वार्टर की तुलना में 25% और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 125% ज्यादा है. मेरकॉम इंडिया रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ग्रोथ में सबसे बड़ी भूमिका घरेलू यानी रेजिडेंशियल सेगमेंट की रही.

रिपोर्ट के अनुसार, Q1 2026 में भारत की कुल सोलर इंस्टॉलेशन में रूफटॉप सोलर की हिस्सेदारी 18% रही. पीएम सूर्य घर योजना, सब्सिडी आधारित सिस्टम, आसान अप्रूवल प्रोसेस और राज्यों की बेहतर भागीदारी ने इस वृद्धि को गति दी.

रेजिडेंशियल सेगमेंट ने दिखाई सबसे ज्यादा तेजी

रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में रेजिडेंशियल सेगमेंट का दबदबा देखने को मिला. कुल इंस्टॉलेशन में इसकी हिस्सेदारी 82% रही. वहीं इंडस्ट्रियल सेक्टर ने 11%, कमर्शियल सेक्टर ने 7% और सरकारी सेक्टर ने 0.4% योगदान दिया.

मेरकॉम कैपिटल ग्रुप के CEO राज प्रभु ने कहा कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत बढ़ती घरेलू मांग ने रूफटॉप सोलर मार्केट को मजबूत गति दी है. उन्होंने कहा कि आगे की ग्रोथ अब बेहतर फाइनेंसिंग, DISCOM के सहयोग, ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट्स के तेज निष्पादन पर निर्भर करेगी.

Capex मॉडल का रहा दबदबा

रिपोर्ट के मुताबिक, Q1 2026 में कुल रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में 81% हिस्सेदारी कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी Capex मॉडल की रही. वहीं OPEX या RESCO मॉडल का योगदान करीब 19% रहा.

महाराष्ट्र, यूपी और गुजरात रहे सबसे आगे

रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात सबसे आगे रहे. कुल नई क्षमता में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 17%, उत्तर प्रदेश की 16% और गुजरात की 15% रही. कुल संचयी रूफटॉप सोलर क्षमता के मामले में भी गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल रहे. मार्च 2026 तक भारत की कुल रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़कर 23.5 GW तक पहुंच गई है. देश के टॉप 10 राज्यों की इसमें करीब 80% हिस्सेदारी है.

असम ने दर्ज की सबसे तेज ग्रोथ

रिपोर्ट में बताया गया कि Q1 2025 से Q1 2026 के बीच असम ने सबसे ज्यादा 40% की कंपाउंडेड क्वार्टरली ग्रोथ दर्ज की. इसके बाद उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश का स्थान रहा.

टेंडर गतिविधियों में गिरावट

हालांकि इंस्टॉलेशन में तेजी देखने को मिली, लेकिन टेंडर गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई. Q1 2026 के दौरान 482 मेगावॉट (MW) के रूफटॉप सोलर टेंडर जारी किए गए, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 38% कम रहे. हालांकि सालाना आधार पर इसमें करीब 32% की बढ़ोतरी दर्ज हुई. वहीं, ऑक्शन की गई रूफटॉप सोलर क्षमता 269 MW रही, जो Q4 2025 की तुलना में 67% कम है.

सोलर सिस्टम की कीमतें रहीं स्थिर

रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर मॉड्यूल टेक्नोलॉजी में रूफटॉप सोलर सिस्टम की कीमतें स्थिर बनी रहीं. हालांकि चीनी मॉड्यूल वाले सिस्टम की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई.
 


रिलायंस की वार्षिक रिपोर्ट में बड़ा संकेत, तेल बाजार और वैश्विक तनाव पर बढ़ी चिंता

रिलायंस के अनुसार भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026 में देश की पेट्रोलियम खपत 1.7% बढ़कर 24.3 करोड़ टन सालाना तक पहुंच गई.

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Friday, 29 May, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने अपनी ताजा वार्षिक रिपोर्ट में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊंची तेल कीमतों और वैश्विक आर्थिक सुस्ती को लेकर चिंता जताई है. कंपनी ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 का कारोबारी माहौल भू-राजनीतिक, व्यापक आर्थिक और नीतिगत जोखिमों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है. हालांकि रिलायंस ने अपने डिजिटल और रिटेल कारोबार के विस्तार की रणनीति पर भरोसा जताया, लेकिन बहुप्रतीक्षित जियो IPO को लेकर कोई समयसीमा साझा नहीं की.

पश्चिम एशिया संकट और तेल बाजार पर चिंता

रिलायंस ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. कंपनी के मुताबिक ऊंची तेल कीमतें, आर्थिक मंदी और रिफाइनरी इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की वजह से वैश्विक तेल मांग की वृद्धि धीमी पड़ सकती है. साथ ही सप्लाई चेन में बाधा और कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से बाजार में अस्थिरता बनी रहने की आशंका है.

कंपनी ने यह भी कहा कि ओपेक+ देशों की बढ़ती सप्लाई, ईरान और रूस पर प्रतिबंध, ट्रेड टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव ने तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है. मार्च 2026 में ईरान संघर्ष की वजह से मांग में भी बड़ा व्यवधान देखने को मिला.

घरेलू मांग में मजबूती, गैस सेक्टर पर बड़ा दांव

रिलायंस के अनुसार भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026 में देश की पेट्रोलियम खपत 1.7% बढ़कर 24.3 करोड़ टन सालाना तक पहुंच गई. कंपनी ने ऊर्जा परिवर्तन में प्राकृतिक गैस की भूमिका को भी अहम बताया और अनुमान जताया कि 2030 तक देश की कुल ऊर्जा खपत में गैस की हिस्सेदारी लगभग 6% से बढ़कर 15% हो सकती है.

जियो IPO पर नहीं मिला कोई अपडेट

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि समूह अपने डिजिटल कारोबार को मजबूत करने के लिए रणनीतिक और सोच-समझकर कदम उठा रहा है. हालांकि उन्होंने जियो प्लेटफॉर्म्स की संभावित लिस्टिंग या IPO की समयसीमा पर कोई टिप्पणी नहीं की. ब्रोकरेज फर्मों के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO भारतीय बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी लिस्टिंग्स में शामिल हो सकता है और इसका संभावित वैल्यूएशन 135 से 145 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. जियो प्लेटफॉर्म्स में Meta, Google, Saudi Public Investment Fund और Mubadala जैसे वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी है.

52 करोड़ से ज्यादा ग्राहक, 5G विस्तार पर फोकस

जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस जियो इन्फोकॉम की पैरेंट कंपनी है और 52.4 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के साथ देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम सेवा प्रदाता बनी हुई है. कंपनी ने भारत में 5G और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) टेक्नोलॉजी के विस्तार को अपनी बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया है.

रिटेल कारोबार को लेकर सकारात्मक नजरिया

रिलायंस ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में रिटेल सेक्टर को लेकर भी सकारात्मक रुख दिखाया. कंपनी के मुताबिक निकट अवधि में मांग पर व्यापक आर्थिक हालात का असर रह सकता है, लेकिन मध्यम अवधि में रिटेल कारोबार की ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद है.

कंपनी ने कहा कि रिलायंस रिटेल विस्तार, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और ग्राहक-केंद्रित नवाचार पर फोकस जारी रखेगी. साथ ही स्टोर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के एकीकृत इकोसिस्टम को और मजबूत किया जाएगा.

Campa ब्रांड ने पकड़ी रफ्तार

रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) ने FMCG कारोबार में तेजी से विस्तार किया है. कंपनी के मुताबिक उसके पेय ब्रांड Campa ने वित्त वर्ष 2025-26 में 4,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की सकल बिक्री दर्ज की. मार्च 2026 तक Campa भारत का चौथा सबसे बड़ा कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड बन गया और कई प्रमुख बाजारों में दो अंकों की मार्केट हिस्सेदारी हासिल की. कंपनी ने कहा कि वह रणनीतिक साझेदारियों, अधिग्रहण और वैश्विक विस्तार के जरिए FMCG कारोबार को और मजबूत करने पर फोकस बनाए रखेगी.
 


दो दिन की गिरावट के बाद आज बाजार में कैसी रहेगी चाल? इन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर

पिछले कारोबारी सत्र यानी बुधवार को BSE सेंसेक्स 141.90 अंक टूटकर 75,867.80 पर बंद हुआ था, NSE निफ्टी 50 मामूली गिरावट के साथ 23,907.15 के स्तर पर बंद हुआ.

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Friday, 29 May, 2026
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घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिल सकता है. पिछले दो कारोबारी सत्रों में गिरावट के बाद निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर टिकी हुई है. बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 141.90 अंक टूटकर 75,867.80 पर बंद हुआ था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 मामूली गिरावट के साथ 23,907.15 के स्तर पर बंद हुआ.

बैंकिंग शेयरों पर रहेगा फोकस

विश्लेषकों के अनुसार, शुक्रवार को बाजार की दिशा काफी हद तक बैंकिंग शेयरों और ग्लोबल ट्रिगर्स पर निर्भर करेगी. HDFC Bank, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank और SBI जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों में पिछले सत्र में बिकवाली देखने को मिली थी, जिसका असर प्रमुख इंडेक्स पर पड़ा. बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव की वजह से बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था.

इन सेक्टर्स में दिखी मजबूती

हालांकि बाजार में कुछ सेक्टर्स में खरीदारी भी देखने को मिली. Power Grid, NTPC, Tata Steel, Maruti Suzuki और IndiGo जैसे शेयरों में तेजी दर्ज की गई थी. निफ्टी मीडिया, मेटल और ऑटो इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे संकेत मिला कि चुनिंदा सेक्टर्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी

ब्रॉडर मार्केट में निवेशकों की रुचि बनी हुई है. बुधवार को निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.42% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.15% की बढ़त दर्ज की गई थी. इससे संकेत मिलता है कि बड़े शेयरों में दबाव के बावजूद मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट में चुनिंदा खरीदारी जारी रह सकती है.

ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल पर नजर

वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी कुछ राहत दे सकती है. ब्रेंट क्रूड में हालिया गिरावट से महंगाई और आयात लागत को लेकर दबाव कम होने की उम्मीद है. डॉलर के मुकाबले रुपया भी पिछले सत्र में लगभग स्थिर रहा था.

आज इन शेयरों में रह सकती है हलचल

शुक्रवार के कारोबार में Wipro, Swiggy, Reliance Industries, Zydus Lifesciences, RITES और Escorts Kubota समेत कई कंपनियों के शेयर फोकस में रह सकते हैं. Wipro ने ServiceNow के साथ एआई आधारित वर्कफ्लो समाधान के लिए साझेदारी बढ़ाई है, जबकि Zydus Lifesciences की सब्सिडियरी को अमेरिकी FDA से सरोग्लिटाजार दवा के लिए प्रायोरिटी रिव्यू मिला है. Reliance Industries ने 19 जून को AGM बुलाने का ऐलान किया है. इसके अलावा Swiggy, Oil India और Indoco Remedies से जुड़ी खबरें भी शेयरों में हलचल बढ़ा सकती हैं.

आज आएंगे कई कंपनियों के नतीजे

आज InterGlobe Aviation, Glenmark Pharma, Gujarat Gas, Natco Pharma, Inox Wind और BEML समेत कई कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी. ऐसे में रिजल्ट आधारित स्टॉक्स में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)