रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में भारत ने लगातार सबसे ऊंचा कंज्यूमर कॉन्फिडेंस स्कोर दर्ज किया. भारत का नेशनल इंडेक्स स्कोर मई में 0.4 अंक बढ़कर 66.6 पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
वैश्विक अनिश्चितताओं और रोजगार को लेकर बढ़ती चिंताओं के बावजूद भारत दुनिया का सबसे भरोसेमंद कंज्यूमर मार्केट बना हुआ है. एलएसईजी-इप्सोस प्राइमरी कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स (PCSI) की ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में भारत ने लगातार सबसे ऊंचा कंज्यूमर कॉन्फिडेंस स्कोर दर्ज किया. भारत का नेशनल इंडेक्स स्कोर मई में 0.4 अंक बढ़कर 66.6 पर पहुंच गया. सर्वे में शामिल 30 देशों में भारत सबसे आगे रहा और 60 अंक के स्तर को पार करने वाला इकलौता देश बना.
मलेशिया और इंडोनेशिया भी पीछे
रिपोर्ट के अनुसार मलेशिया और इंडोनेशिया का स्कोर 56.7 रहा, जबकि स्वीडन 55.4 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा. ब्राजील का स्कोर 52.3 और मेक्सिको का 51 रहा. वहीं फ्रांस, जापान और तुर्किये सबसे कमजोर बाजारों में शामिल रहे. इन देशों का स्कोर क्रमशः 39.3, 37.8 और 35.6 दर्ज किया गया.
वित्तीय स्थिति और निवेश भरोसे ने बढ़ाया कॉन्फिडेंस
PCSI सर्वे चार प्रमुख संकेतकों पर आधारित होता है. इनमें व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, आर्थिक उम्मीदें, रोजगार और निवेश से जुड़ा भरोसा शामिल है. भारत में कंज्यूमर सेंटिमेंट को सबसे ज्यादा मजबूती व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और निवेश भरोसे से मिली. करंट पर्सनल फाइनेंशियल कंडीशंस सब-इंडेक्स में 1.2 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि निवेश सब-इंडेक्स 1.7 अंक बढ़ा. आर्थिक उम्मीदों वाला इंडेक्स लगभग स्थिर रहा और इसमें सिर्फ 0.1 अंक की बढ़त हुई. हालांकि रोजगार से जुड़ा सब-इंडेक्स 1.5 अंक गिर गया, जिससे नौकरी को लेकर बढ़ती चिंता साफ दिखाई दी.
AI और कॉस्ट कटिंग से बढ़ी नौकरी की चिंता
इप्सोस इंडिया के CEO सुरेश रामलिंगम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित बदलाव और कंपनियों की कॉस्ट कटिंग के कारण भारतीयों में नौकरी को लेकर तनाव बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बाद कंपनियां खर्च घटाने पर जोर दे रही हैं, जिसका असर रोजगार के माहौल पर पड़ रहा है.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद लोग अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश और भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर अब भी सकारात्मक बने हुए हैं.
सरकार के कदमों से बना भरोसा
रामलिंगम के मुताबिक सरकार ने बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव, पश्चिम एशिया संघर्ष और रुपये की कमजोरी जैसे बाहरी दबावों से लोगों को बचाने के लिए सावधानीपूर्ण कदम उठाए हैं. इसी वजह से उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत बना हुआ है.
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि सर्वे के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी आने वाले महीनों में घरेलू बजट और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है.
21 हजार से ज्यादा लोगों पर हुआ सर्वे
यह सर्वे 24 अप्रैल से 8 मई 2026 के बीच इप्सोस के ग्लोबल एडवाइजर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए किया गया. इसमें दुनिया भर के 75 वर्ष से कम उम्र के 21 हजार से ज्यादा वयस्क शामिल हुए. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अप्रैल 2026 से भारत में सर्वे का तरीका बदला गया है. अब पूरी तरह ऑनलाइन इंटरव्यू किए जा रहे हैं, जबकि पहले इसमें आमने-सामने इंटरव्यू भी शामिल थे.
RBI के आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग सिस्टम में छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है. लेकिन बड़े कर्ज से जुड़े घोटाले अब भी सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या भले ही तेजी से घटी हो, लेकिन इन फ्रॉड से जुड़ी रकम लगातार बढ़ती जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों में कुल ₹48,021 करोड़ की धोखाधड़ी दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब छोटे डिजिटल फ्रॉड की जगह बड़े कर्ज और एडवांस से जुड़े घोटाले बैंकिंग सिस्टम पर भारी पड़ रहे हैं.
तीन साल में बदली तस्वीर
RBI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में धोखाधड़ी के 10,114 मामले सामने आए, जबकि एक साल पहले यह संख्या 23,722 थी. यानी मामलों की संख्या में करीब 57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं वित्त वर्ष 2023-24 के मुकाबले यह गिरावट लगभग 72 फीसदी रही.
हालांकि दूसरी तरफ फ्रॉड से जुड़ी रकम तेजी से बढ़ी है. 2024-25 में जहां यह रकम ₹32,803 करोड़ थी, वहीं 2025-26 में बढ़कर ₹48,021 करोड़ पहुंच गई. तीन साल पहले यह आंकड़ा केवल ₹11,013 करोड़ था. यानी तीन वर्षों में धोखाधड़ी की रकम चार गुना से ज्यादा बढ़ गई.
सरकारी बैंकों पर सबसे बड़ा असर
रिपोर्ट के अनुसार सरकारी बैंकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा. वित्त वर्ष 2025-26 में पब्लिक सेक्टर बैंकों में फ्रॉड से जुड़ी रकम ₹35,709 करोड़ रही, जो पिछले साल की तुलना में 51 फीसदी ज्यादा है. कुल धोखाधड़ी राशि में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 74.5 फीसदी तक पहुंच गई. हालांकि इन बैंकों में मामलों की संख्या घटकर 5,418 रह गई, जो एक साल पहले 6,916 थी.
निजी बैंकों में भी बढ़ी फ्रॉड राशि
निजी बैंकों में भी फ्रॉड से जुड़ी रकम में बढ़ोतरी दर्ज की गई. यहां धोखाधड़ी की राशि बढ़कर ₹11,399 करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल यह ₹8,927 करोड़ थी. कुल मामलों में निजी बैंकों की हिस्सेदारी 39.1 फीसदी रही.
बड़े लोन फ्रॉड बने सबसे बड़ी चुनौती
RBI रिपोर्ट के मुताबिक अब सबसे बड़ा खतरा कर्ज और एडवांस से जुड़े फ्रॉड बन चुके हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में ऐसे मामलों की रकम बढ़कर ₹40,774 करोड़ पहुंच गई, जो कुल फ्रॉड राशि का करीब 85 फीसदी है.
इन मामलों की संख्या भी बढ़कर 8,640 हो गई, जबकि पिछले साल यह 7,924 थी. इससे साफ है कि बैंकिंग सिस्टम में बड़े कॉरपोरेट लोन और एडवांस से जुड़े जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं.
डिजिटल पेमेंट फ्रॉड में बड़ी राहत
एक सकारात्मक संकेत यह रहा कि कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़े फ्रॉड मामलों में भारी गिरावट आई है. ऐसे मामलों की संख्या घटकर केवल 293 रह गई, जबकि पिछले साल यह 13,332 थी. इन मामलों में शामिल रकम भी ₹517 करोड़ से घटकर सिर्फ ₹29 करोड़ रह गई.
वित्त वर्ष 2023-24 में डिजिटल फ्रॉड कुल मामलों का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा थे, लेकिन अब इनकी हिस्सेदारी घटकर केवल 2.9 फीसदी रह गई है.
अन्य कैटेगरी में भी बदलाव
जमा यानी डिपॉजिट से जुड़े फ्रॉड मामलों की रकम घटकर ₹377 करोड़ रह गई. वहीं “अन्य” कैटेगरी में धोखाधड़ी की राशि तेजी से बढ़कर ₹6,063 करोड़ पहुंच गई, जो पिछले साल केवल ₹971 करोड़ थी.
RBI रिपोर्ट से क्या संकेत मिलते हैं?
RBI के आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग सिस्टम में छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है. लेकिन बड़े कर्ज से जुड़े घोटाले अब भी सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं. खासतौर पर सरकारी बैंकों पर इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई दे रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बैंकों को बड़े कॉरपोरेट लोन की निगरानी, जोखिम मूल्यांकन और रिकवरी सिस्टम को और मजबूत करना होगा, ताकि हजारों करोड़ रुपये के ऐसे फ्रॉड पर लगाम लगाई जा सके.
पॉलीमर नोट सबसे पहले साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया में शुरू किए गए थे. इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम, रोमानिया और मॉरीशस समेत दुनिया के कई देशों ने इन्हें अपनाया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर सकता है. आने वाले समय में 100, 200 और 500 रुपये के नोट कागज की जगह प्लास्टिक जैसे मजबूत पॉलीमर मटेरियल में देखने को मिल सकते हैं. बढ़ती नोट छपाई लागत, जल्दी खराब होने वाले नोटों और नकली करेंसी की चुनौती को देखते हुए RBI पॉलीमर बैंक नोट शुरू करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है. केंद्रीय बैंक जल्द ही पॉलीमर नोटों को लेकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है. इस मुद्दे पर RBI की हालिया बोर्ड बैठकों में भी चर्चा हुई है.
क्यों बढ़ रही है पॉलीमर नोटों की जरूरत?
देश में हर साल बड़ी संख्या में नोट फटने, गंदे होने और खराब होने के कारण चलन से बाहर हो जाते हैं. RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 23.8 अरब पुराने और क्षतिग्रस्त नोटों को नष्ट करना पड़ा. यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 12% ज्यादा रहा. सबसे ज्यादा खराब होने वाले नोटों में 500 रुपये और 100 रुपये के नोट शामिल रहे. नोटों की लगातार बढ़ती मांग के कारण छपाई लागत भी तेजी से बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने पर RBI का खर्च बढ़कर करीब ₹6,373 करोड़ पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह ₹5,101 करोड़ था.
क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट एक खास तरह के प्लास्टिक आधारित मटेरियल से बनाए जाते हैं. ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और मजबूत माने जाते हैं. पानी, नमी, गंदगी और बार-बार इस्तेमाल का इन पर कम असर पड़ता है. विशेषज्ञों के मुताबिक पॉलीमर नोट सामान्य नोटों की तुलना में करीब ढाई गुना ज्यादा समय तक चल सकते हैं. लंबे समय तक उपयोग होने के कारण इनकी रिप्लेसमेंट लागत भी कम हो जाती है.
नकली नोटों पर भी लगेगी रोक
पॉलीमर नोटों में कई एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स जोड़े जा सकते हैं. इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग और विशेष सुरक्षा लेयर शामिल होती हैं, जिन्हें कॉपी करना काफी मुश्किल माना जाता है. RBI का मानना है कि इससे जाली नोटों की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. हालांकि पहले भी सरकार ने स्पष्ट किया था कि पॉलीमर नोटों का मुख्य उद्देश्य नोटों की उम्र बढ़ाना है.
ATM और मशीनें भी होंगी तैयार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहले पॉलीमर नोटों को लेकर तकनीकी चुनौतियां थीं, लेकिन अब ATM और करेंसी मशीनों को ऐसे नोटों के अनुकूल बनाने के समाधान तैयार कर लिए गए हैं. RBI का कहना है कि अब देश के पास जरूरी संसाधन और तकनीक उपलब्ध है.
दुनिया के कई देशों में पहले से चलन में हैं पॉलीमर नोट
पॉलीमर नोट सबसे पहले साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया में शुरू किए गए थे. इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम, रोमानिया और मॉरीशस समेत दुनिया के कई देशों ने इन्हें अपनाया. रिपोर्ट्स के अनुसार अब करीब 60 देशों में पॉलीमर नोट इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इन नोटों की एक खास बात यह भी है कि खराब होने के बाद इन्हें रिसाइकिल कर दूसरी प्लास्टिक वस्तुएं बनाई जा सकती हैं.
पहले भी हो चुकी है कोशिश
भारत में पॉलीमर नोट लाने का विचार नया नहीं है. साल 2012 में तत्कालीन सरकार ने पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर पॉलीमर से बने 10 रुपये के नोट जारी करने की योजना बनाई थी. हालांकि तकनीकी दिक्कतों के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी. अब बदलती तकनीक और बढ़ती करेंसी लागत को देखते हुए RBI एक बार फिर इस दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी कर रहा है.
कंपनी अब विज्ञापन आधारित कमाई पर निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बढ़ते निवेश के बीच नए रेवेन्यू मॉडल तैयार करने पर जोर दे रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) ने अपने प्रमुख प्लेटफॉर्म फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) और व्हाड्सऐप (WhatsApp) के लिए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च करने का ऐलान किया है. कंपनी अब विज्ञापन आधारित कमाई पर निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बढ़ते निवेश के बीच नए रेवेन्यू मॉडल तैयार करने पर जोर दे रही है. मेटा ने फेसबुक प्लस, इंस्टाग्राफ प्लस और व्हाट्सऐप प्लस नाम से नए प्रीमियम प्लान पेश किए हैं. कंपनी की हेड ऑफ प्रोडक्ट नाओमी ग्लाइट ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में इन नए सब्सक्रिप्शन प्लान की जानकारी दी.
फेसबुक और इंस्टाग्राफ प्लस की इतनी होगी कीमत
रिपोर्ट्स के मुताबिक फेसबुक प्लस और इंस्टाग्राफ प्लस की कीमत 3.99 डॉलर प्रति माह रखी गई है. वहीं व्हाट्सऐप प्लस के लिए यूजर्स को हर महीने 2.99 डॉलर चुकाने होंगे. कंपनी ने साफ किया है कि इन प्लेटफॉर्म्स के फ्री वर्जन पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे. यानी यूजर्स चाहें तो बिना सब्सक्रिप्शन के भी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे.
प्रीमियम यूजर्स को मिलेंगे खास फीचर्स
मेटा के नए पेड प्लान्स में यूजर्स को कई अतिरिक्त फीचर्स और एडवांस टूल्स मिलेंगे. फेसबुक प्लस, इंस्टाग्राफ प्लस यूजर्स को एडवांस ऑडियंस एनालिटिक्स, एंगेजमेंट इनसाइट्स, प्रोफाइल कस्टमाइजेशन और कंटेंट विजिबिलिटी बढ़ाने वाले फीचर्स दिए जा सकते हैं. वहीं, व्हाट्सऐप प्लस में एक्सक्लूसिव स्टिकर्स, कस्टम थीम्स और पर्सनलाइज्ड नोटिफिकेशन टोन जैसे फीचर्स मिलने की उम्मीद है.
AI निवेश बढ़ने से बदली रणनीति
मेटा इस समय AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है. कंपनी ने इस साल 125 अरब डॉलर से 145 अरब डॉलर तक के कैपिटल एक्सपेंडिचर का अनुमान जताया है. यह निवेश मुख्य रूप से AI डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और संबंधित टेक्नोलॉजी पर किया जाएगा. निवेशक लंबे समय से इस बात पर नजर बनाए हुए थे कि मेटा इतनी बड़ी लागत के बीच अपनी कमाई को कैसे मजबूत बनाए रखेगी. रिपोर्ट्स के अनुसार सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च की खबर के बाद Meta के शेयरों में करीब 3% की तेजी देखने को मिली.
पहले भी कर चुकी है प्रयोग
मेटा इससे पहले भी पेड सर्विसेज पर प्रयोग कर चुकी है. साल 2023 में कंपनी ने यूरोप के कुछ हिस्सों में फेसबुक और इंस्टाग्राम के ऐड-फ्री सब्सक्रिप्शन वर्जन लॉन्च किए थे. हालांकि नया कदम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ा माना जा रहा है, क्योंकि इस बार कंपनी वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं को टारगेट कर रही है.
‘Meta One’ के तहत आएंगी सभी पेड सर्विसेज
नाओमी ग्लाइट ने कहा कि मेटा भविष्य में अपनी सभी पेड सर्विसेज को ‘मेटा वन’ नाम के बड़े इकोसिस्टम के तहत लाने की योजना बना रही है. इसमें कंपनी के अलग-अलग सब्सक्रिप्शन प्रोडक्ट्स को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा सकता है.
यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया
मेटा के इस फैसले पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं. कुछ लोग इसे अतिरिक्त सुविधाओं वाला बेहतर विकल्प मान रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स का कहना है कि कंपनी धीरे-धीरे ज्यादा फीचर्स को पेवॉल के पीछे ले जा रही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यूजर्स इन प्रीमियम फीचर्स के लिए हर महीने भुगतान करने को कितना तैयार होते हैं.
रिपोर्ट में बताया गया कि Q1 2025 से Q1 2026 के बीच असम ने सबसे ज्यादा 40% की कंपाउंडेड क्वार्टरली ग्रोथ दर्ज की. इसके बाद उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश का स्थान रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में रूफटॉप सोलर सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है. साल 2026 की पहली तिमाही में देश ने 2.7 गीगावॉट (GW) नई रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ी है. यह पिछले क्वार्टर की तुलना में 25% और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 125% ज्यादा है. मेरकॉम इंडिया रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ग्रोथ में सबसे बड़ी भूमिका घरेलू यानी रेजिडेंशियल सेगमेंट की रही.
रिपोर्ट के अनुसार, Q1 2026 में भारत की कुल सोलर इंस्टॉलेशन में रूफटॉप सोलर की हिस्सेदारी 18% रही. पीएम सूर्य घर योजना, सब्सिडी आधारित सिस्टम, आसान अप्रूवल प्रोसेस और राज्यों की बेहतर भागीदारी ने इस वृद्धि को गति दी.
रेजिडेंशियल सेगमेंट ने दिखाई सबसे ज्यादा तेजी
रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में रेजिडेंशियल सेगमेंट का दबदबा देखने को मिला. कुल इंस्टॉलेशन में इसकी हिस्सेदारी 82% रही. वहीं इंडस्ट्रियल सेक्टर ने 11%, कमर्शियल सेक्टर ने 7% और सरकारी सेक्टर ने 0.4% योगदान दिया.
मेरकॉम कैपिटल ग्रुप के CEO राज प्रभु ने कहा कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत बढ़ती घरेलू मांग ने रूफटॉप सोलर मार्केट को मजबूत गति दी है. उन्होंने कहा कि आगे की ग्रोथ अब बेहतर फाइनेंसिंग, DISCOM के सहयोग, ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट्स के तेज निष्पादन पर निर्भर करेगी.
Capex मॉडल का रहा दबदबा
रिपोर्ट के मुताबिक, Q1 2026 में कुल रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में 81% हिस्सेदारी कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी Capex मॉडल की रही. वहीं OPEX या RESCO मॉडल का योगदान करीब 19% रहा.
महाराष्ट्र, यूपी और गुजरात रहे सबसे आगे
रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात सबसे आगे रहे. कुल नई क्षमता में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 17%, उत्तर प्रदेश की 16% और गुजरात की 15% रही. कुल संचयी रूफटॉप सोलर क्षमता के मामले में भी गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल रहे. मार्च 2026 तक भारत की कुल रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़कर 23.5 GW तक पहुंच गई है. देश के टॉप 10 राज्यों की इसमें करीब 80% हिस्सेदारी है.
असम ने दर्ज की सबसे तेज ग्रोथ
रिपोर्ट में बताया गया कि Q1 2025 से Q1 2026 के बीच असम ने सबसे ज्यादा 40% की कंपाउंडेड क्वार्टरली ग्रोथ दर्ज की. इसके बाद उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश का स्थान रहा.
टेंडर गतिविधियों में गिरावट
हालांकि इंस्टॉलेशन में तेजी देखने को मिली, लेकिन टेंडर गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई. Q1 2026 के दौरान 482 मेगावॉट (MW) के रूफटॉप सोलर टेंडर जारी किए गए, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 38% कम रहे. हालांकि सालाना आधार पर इसमें करीब 32% की बढ़ोतरी दर्ज हुई. वहीं, ऑक्शन की गई रूफटॉप सोलर क्षमता 269 MW रही, जो Q4 2025 की तुलना में 67% कम है.
सोलर सिस्टम की कीमतें रहीं स्थिर
रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर मॉड्यूल टेक्नोलॉजी में रूफटॉप सोलर सिस्टम की कीमतें स्थिर बनी रहीं. हालांकि चीनी मॉड्यूल वाले सिस्टम की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई.
रिलायंस के अनुसार भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026 में देश की पेट्रोलियम खपत 1.7% बढ़कर 24.3 करोड़ टन सालाना तक पहुंच गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने अपनी ताजा वार्षिक रिपोर्ट में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊंची तेल कीमतों और वैश्विक आर्थिक सुस्ती को लेकर चिंता जताई है. कंपनी ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 का कारोबारी माहौल भू-राजनीतिक, व्यापक आर्थिक और नीतिगत जोखिमों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है. हालांकि रिलायंस ने अपने डिजिटल और रिटेल कारोबार के विस्तार की रणनीति पर भरोसा जताया, लेकिन बहुप्रतीक्षित जियो IPO को लेकर कोई समयसीमा साझा नहीं की.
पश्चिम एशिया संकट और तेल बाजार पर चिंता
रिलायंस ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. कंपनी के मुताबिक ऊंची तेल कीमतें, आर्थिक मंदी और रिफाइनरी इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की वजह से वैश्विक तेल मांग की वृद्धि धीमी पड़ सकती है. साथ ही सप्लाई चेन में बाधा और कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से बाजार में अस्थिरता बनी रहने की आशंका है.
कंपनी ने यह भी कहा कि ओपेक+ देशों की बढ़ती सप्लाई, ईरान और रूस पर प्रतिबंध, ट्रेड टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव ने तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है. मार्च 2026 में ईरान संघर्ष की वजह से मांग में भी बड़ा व्यवधान देखने को मिला.
घरेलू मांग में मजबूती, गैस सेक्टर पर बड़ा दांव
रिलायंस के अनुसार भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026 में देश की पेट्रोलियम खपत 1.7% बढ़कर 24.3 करोड़ टन सालाना तक पहुंच गई. कंपनी ने ऊर्जा परिवर्तन में प्राकृतिक गैस की भूमिका को भी अहम बताया और अनुमान जताया कि 2030 तक देश की कुल ऊर्जा खपत में गैस की हिस्सेदारी लगभग 6% से बढ़कर 15% हो सकती है.
जियो IPO पर नहीं मिला कोई अपडेट
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि समूह अपने डिजिटल कारोबार को मजबूत करने के लिए रणनीतिक और सोच-समझकर कदम उठा रहा है. हालांकि उन्होंने जियो प्लेटफॉर्म्स की संभावित लिस्टिंग या IPO की समयसीमा पर कोई टिप्पणी नहीं की. ब्रोकरेज फर्मों के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO भारतीय बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी लिस्टिंग्स में शामिल हो सकता है और इसका संभावित वैल्यूएशन 135 से 145 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. जियो प्लेटफॉर्म्स में Meta, Google, Saudi Public Investment Fund और Mubadala जैसे वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी है.
52 करोड़ से ज्यादा ग्राहक, 5G विस्तार पर फोकस
जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस जियो इन्फोकॉम की पैरेंट कंपनी है और 52.4 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के साथ देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम सेवा प्रदाता बनी हुई है. कंपनी ने भारत में 5G और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) टेक्नोलॉजी के विस्तार को अपनी बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया है.
रिटेल कारोबार को लेकर सकारात्मक नजरिया
रिलायंस ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में रिटेल सेक्टर को लेकर भी सकारात्मक रुख दिखाया. कंपनी के मुताबिक निकट अवधि में मांग पर व्यापक आर्थिक हालात का असर रह सकता है, लेकिन मध्यम अवधि में रिटेल कारोबार की ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद है.
कंपनी ने कहा कि रिलायंस रिटेल विस्तार, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और ग्राहक-केंद्रित नवाचार पर फोकस जारी रखेगी. साथ ही स्टोर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के एकीकृत इकोसिस्टम को और मजबूत किया जाएगा.
Campa ब्रांड ने पकड़ी रफ्तार
रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) ने FMCG कारोबार में तेजी से विस्तार किया है. कंपनी के मुताबिक उसके पेय ब्रांड Campa ने वित्त वर्ष 2025-26 में 4,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की सकल बिक्री दर्ज की. मार्च 2026 तक Campa भारत का चौथा सबसे बड़ा कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड बन गया और कई प्रमुख बाजारों में दो अंकों की मार्केट हिस्सेदारी हासिल की. कंपनी ने कहा कि वह रणनीतिक साझेदारियों, अधिग्रहण और वैश्विक विस्तार के जरिए FMCG कारोबार को और मजबूत करने पर फोकस बनाए रखेगी.
पिछले कारोबारी सत्र यानी बुधवार को BSE सेंसेक्स 141.90 अंक टूटकर 75,867.80 पर बंद हुआ था, NSE निफ्टी 50 मामूली गिरावट के साथ 23,907.15 के स्तर पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिल सकता है. पिछले दो कारोबारी सत्रों में गिरावट के बाद निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर टिकी हुई है. बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 141.90 अंक टूटकर 75,867.80 पर बंद हुआ था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 मामूली गिरावट के साथ 23,907.15 के स्तर पर बंद हुआ.
बैंकिंग शेयरों पर रहेगा फोकस
विश्लेषकों के अनुसार, शुक्रवार को बाजार की दिशा काफी हद तक बैंकिंग शेयरों और ग्लोबल ट्रिगर्स पर निर्भर करेगी. HDFC Bank, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank और SBI जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों में पिछले सत्र में बिकवाली देखने को मिली थी, जिसका असर प्रमुख इंडेक्स पर पड़ा. बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव की वजह से बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था.
इन सेक्टर्स में दिखी मजबूती
हालांकि बाजार में कुछ सेक्टर्स में खरीदारी भी देखने को मिली. Power Grid, NTPC, Tata Steel, Maruti Suzuki और IndiGo जैसे शेयरों में तेजी दर्ज की गई थी. निफ्टी मीडिया, मेटल और ऑटो इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे संकेत मिला कि चुनिंदा सेक्टर्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी
ब्रॉडर मार्केट में निवेशकों की रुचि बनी हुई है. बुधवार को निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.42% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.15% की बढ़त दर्ज की गई थी. इससे संकेत मिलता है कि बड़े शेयरों में दबाव के बावजूद मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट में चुनिंदा खरीदारी जारी रह सकती है.
ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल पर नजर
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी कुछ राहत दे सकती है. ब्रेंट क्रूड में हालिया गिरावट से महंगाई और आयात लागत को लेकर दबाव कम होने की उम्मीद है. डॉलर के मुकाबले रुपया भी पिछले सत्र में लगभग स्थिर रहा था.
आज इन शेयरों में रह सकती है हलचल
शुक्रवार के कारोबार में Wipro, Swiggy, Reliance Industries, Zydus Lifesciences, RITES और Escorts Kubota समेत कई कंपनियों के शेयर फोकस में रह सकते हैं. Wipro ने ServiceNow के साथ एआई आधारित वर्कफ्लो समाधान के लिए साझेदारी बढ़ाई है, जबकि Zydus Lifesciences की सब्सिडियरी को अमेरिकी FDA से सरोग्लिटाजार दवा के लिए प्रायोरिटी रिव्यू मिला है. Reliance Industries ने 19 जून को AGM बुलाने का ऐलान किया है. इसके अलावा Swiggy, Oil India और Indoco Remedies से जुड़ी खबरें भी शेयरों में हलचल बढ़ा सकती हैं.
आज आएंगे कई कंपनियों के नतीजे
आज InterGlobe Aviation, Glenmark Pharma, Gujarat Gas, Natco Pharma, Inox Wind और BEML समेत कई कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी. ऐसे में रिजल्ट आधारित स्टॉक्स में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
इस लॉन्च के साथ ओरियो ने एक इंटरैक्टिव डिजिटल फैन कैंपेन भी शुरू किया है. कंपनी BTS और उनके प्रशंसकों के बीच लिखे जाने वाले संदेशों से प्रेरित होकर दुनिया का सबसे बड़ा “ग्लोबल लव लेटर” तैयार कर रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दुनिया की लोकप्रिय कुकी ब्रांड ओरियो ने ग्लोबल पॉप सेंसेशन BTS के साथ अपनी पहली वैश्विक स्नैकिंग पार्टनरशिप की घोषणा की है. इस खास सहयोग के तहत कंपनी लिमिटेड एडिशन ‘ओरियो x BTS’ कुकीज लॉन्च कर रही है, जिन्हें खास तौर पर BTS फैंस को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है. यह स्पेशल एडिशन भारत समेत 80 से अधिक देशों में पेश किया जाएगा और इसे ओरियो की अब तक की सबसे बड़ी पॉप-कल्चर साझेदारियों में से एक माना जा रहा है.
पहली बार पर्पल रंग में दिखेगा ओरियो वेफर
नई ‘ओरियो x BTS’ कुकीज में दक्षिण कोरिया के मशहूर स्ट्रीट फूड ‘होटोक’ (Hotteok) से प्रेरित फ्लेवर दिया गया है. इस एडिशन की सबसे खास बात यह है कि पहली बार ओरियो का सिग्नेचर वेफर पर्पल रंग में लॉन्च किया गया है. यह रंग BTS फैंडम ‘ARMY’ का प्रतीक माना जाता है. कंपनी के मुताबिक, कुकीज के डिजाइन और फ्लेवर को तैयार करने में BTS सदस्यों की भी अहम भागीदारी रही है.
BTS ने बताया खास यादों से जुड़ा सहयोग
BTS ने कहा कि किसी ग्लोबल स्नैक ब्रांड के साथ यह उनका पहला आधिकारिक सहयोग है. बैंड के सदस्यों के अनुसार, ओरियो उनके बचपन और स्टूडियो के दिनों की यादों का हिस्सा रहा है और अब वे इस साझेदारी के जरिए अपने “घर के स्वाद” को दुनियाभर के प्रशंसकों तक पहुंचाना चाहते हैं.
BTS की 13वीं सालगिरह को खास बनाने के लिए लिमिटेड एडिशन कुकीज में 13 अलग-अलग एम्बॉसमेंट डिजाइन शामिल किए गए हैं. इनमें BTS मेंबर्स के नाम, बैंड की लाइट स्टिक और फैंस के लिए विशेष संदेश शामिल हैं. कंपनी का कहना है कि अलग-अलग पैक कलेक्ट करने पर फैंस को सभी डिजाइन देखने का मौका मिलेगा.
फैंस के लिए शुरू हुआ ‘ग्लोबल लव लेटर’ कैंपेन
इस लॉन्च के साथ ओरियो ने एक इंटरैक्टिव डिजिटल फैन कैंपेन भी शुरू किया है. कंपनी BTS और उनके प्रशंसकों के बीच लिखे जाने वाले संदेशों से प्रेरित होकर दुनिया का सबसे बड़ा “ग्लोबल लव लेटर” तैयार कर रही है. इसके लिए उपभोक्ता पैक पर दिए गए QR कोड को स्कैन कर सकते हैं या कंपनी की वेबसाइट पर जाकर BTS के लिए अपना डिजिटल मैसेज लिख सकते हैं. दुनियाभर से आने वाले इन संदेशों को एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया जाएगा.
जून 2026 से भारत में मिलेगी स्पेशल कुकी
कंपनी के अनुसार, लिमिटेड एडिशन ‘ओरियो x BTS’ कुकीज जून 2026 से भारत समेत चुनिंदा बाजारों में उपलब्ध होंगी. यह स्पेशल एडिशन सीमित समय तक बिक्री के लिए रहेगा. फैंस अधिक जानकारी और अपडेट के लिए ओरियो के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइट पर नजर रख सकते हैं.
कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट में एक नई उपभोक्ता तस्वीर सामने आई है, जिसमें अनाज पर खर्च घटा और डिजिटल लाइफस्टाइल पर लोगों की निर्भरता बढ़ी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में लोगों के खर्च करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब परिवार सिर्फ खाने-पीने और जरूरी सामान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मोबाइल, ऑनलाइन मनोरंजन, यात्रा, प्रीमियम गैजेट्स और डिजिटल सेवाओं पर पहले से कहीं ज्यादा खर्च कर रहे हैं. कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट ‘द ग्रेट कंजम्प्शन शिफ्ट’ में भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं की तस्वीर सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक देश की खपत कहानी अब पारंपरिक जरूरतों से आगे बढ़कर सुविधाओं, अनुभवों और डिजिटल लाइफस्टाइल की ओर मुड़ चुकी है.
खाने-पीने से घटा खर्च. डिजिटल सेवाओं पर बढ़ा फोकस
रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण भारत में कुल खर्च में खाने की हिस्सेदारी 1999-2000 के 59% से घटकर 2022-23 में 46% रह गई है. वहीं शहरी भारत में यह हिस्सा 48% से घटकर 39% पर आ गया. सबसे ज्यादा गिरावट अनाज और जरूरी खाद्य पदार्थों पर खर्च में दर्ज की गई है.
इसके उलट मोबाइल, डेटा सेवाएं, टिकाऊ उपभोक्ता सामान, वाहन, किराया और शिक्षा पर लोगों का खर्च तेजी से बढ़ा है. रिपोर्ट का कहना है कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, लोग बुनियादी जरूरतों से आगे बढ़कर सुविधाओं और बेहतर अनुभवों पर अधिक पैसा खर्च करने लगते हैं.
ओटीटी, ऑनलाइन शॉपिंग और प्रीमियम गैजेट्स का बढ़ता बाजार
भारतीय उपभोक्ताओं के बजट में अब मोबाइल फोन, ऑनलाइन मनोरंजन प्लेटफॉर्म, इंस्टेंट डिलीवरी सेवाएं और डिजिटल सब्सक्रिप्शन की बड़ी हिस्सेदारी देखने को मिल रही है. पिछले कुछ वर्षों में ओटीटी सदस्यता, ऑनलाइन खरीदारी, प्रीमियम स्मार्टफोन और डिजिटल ऑडियो डिवाइसेज के बाजार में तेज विस्तार हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल सेवाएं अब शहरी ही नहीं, ग्रामीण भारत के उपभोक्ताओं की जीवनशैली का भी अहम हिस्सा बनती जा रही हैं.
‘अनुभवों’ पर बढ़ रहा भारतीयों का खर्च
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब लोग केवल सामान खरीदने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनुभवों पर भी खुलकर खर्च कर रहे हैं. कॉन्सर्ट, लाइव शो, यात्रा और आउटडोर गतिविधियों पर खर्च में तेजी से उछाल आया है. भारत में टिकट आधारित लाइव कार्यक्रमों की संख्या 2022 के 19 हजार से बढ़कर 2025 में 34 हजार तक पहुंच गई. बड़े अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रमों के लिए करीब 1.3 करोड़ लोगों ने टिकट हासिल करने की कोशिश की, जबकि टिकट सिर्फ 1.5 लाख लोगों को ही मिल सके.
विदेश यात्राओं पर भारतीयों का खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में फरवरी तक भारतीयों ने विदेश यात्रा पर लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपये खर्च किए.
प्रीमियम स्मार्टफोन की बढ़ती मांग
कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट में एप्पल और हिंदुस्तान यूनिलीवर के कारोबार की तुलना भी की गई है. रिपोर्ट के अनुसार एप्पल इंडिया का कारोबार पिछले पांच वर्षों में 6.2 गुना बढ़ा है और वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का अनुमानित राजस्व हिंदुस्तान यूनिलीवर से लगभग दोगुना हो सकता है.
रिपोर्ट बताती है कि देश में कुल मोबाइल बिक्री लगभग स्थिर बनी हुई है, लेकिन प्रीमियम स्मार्टफोन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2020 में कुल मोबाइल बिक्री में प्रीमियम फोन का हिस्सा 20% था, जो 2025 तक बढ़कर 26% हो गया. यह संकेत देता है कि देश का एक बड़ा उपभोक्ता वर्ग अब महंगे और प्रीमियम उत्पादों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहा है.
आय बढ़ रही, लेकिन सभी की नहीं
रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि देश में आय बढ़ जरूर रही है, लेकिन उसका फायदा सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिल रहा. रिपोर्ट के अनुसार शहरी अमीर वर्ग की आय 18% की दर से बढ़ रही है, जबकि शहरी मध्यम और सामान्य वर्ग की आय वृद्धि करीब 6% के आसपास है.
ग्रामीण क्षेत्रों में भी संपन्न वर्ग की आय, मजदूर वर्ग की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट ने इस स्थिति को “एक देश, दो आर्थिक यात्राएं” बताया है. यानी खपत तो बढ़ रही है, लेकिन उसका लाभ सीमित वर्ग तक ज्यादा केंद्रित होता जा रहा है.
किराया, मोबाइल बिल और ईएमआई ने बढ़ाया दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक शहरों में किराया अब परिवारों के बजट का बड़ा हिस्सा बन चुका है. शहरी परिवारों के कुल खर्च में किराए की हिस्सेदारी 1999-2000 के 4.5% से बढ़कर 2022-23 में 6.6% तक पहुंच गई है.
मोबाइल डेटा पर खर्च में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले आठ वर्षों में डेटा खर्च की वृद्धि ग्रामीण मजदूरी की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक रही. इसके अलावा परिवारों पर कर्ज और ईएमआई का दबाव भी तेजी से बढ़ा है.
रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात वर्षों में पांच साल ऐसे रहे, जब ईएमआई का बोझ आय वृद्धि से अधिक तेजी से बढ़ा. इसका असर घरेलू बचत पर भी दिखाई दे रहा है और वित्तीय बचत लगातार दबाव में बनी हुई है.
शेयर बाजार और साइबर फ्रॉड में बढ़ा नुकसान
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बड़ी संख्या में लोग डेरिवेटिव ट्रेडिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी में पैसा गंवा रहे हैं. सेबी के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025 में 91% खुदरा निवेशकों को F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ.
सिर्फ FY25 में खुदरा निवेशकों का कुल नुकसान 1.05 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि FY22 से FY25 के बीच यह आंकड़ा 2.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
वहीं डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में साइबर फ्रॉड के कारण लोगों को 22,849 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
क्या संकेत देती है यह रिपोर्ट?
कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है. अब लोगों का खर्च खाने और जरूरी सामान से हटकर डेटा, मोबाइल, यात्रा, मनोरंजन और बेहतर अनुभवों की ओर शिफ्ट हो रहा है.
हालांकि इसके साथ किराया, ईएमआई और डिजिटल खर्च का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि देश में बढ़ती खपत और आय का बड़ा हिस्सा उच्च आय वर्ग के पास केंद्रित होता जा रहा है. यानी भारत में खर्च तो बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार और फायदा हर वर्ग तक बराबरी से नहीं पहुंच पा रहा.
29 मई की रिकॉर्ड डेट वाली कंपनियों में कई बड़े और मिडकैप नाम शामिल हैं. कुछ कंपनियां निवेशकों को आकर्षक फाइनल डिविडेंड दे रही हैं, जबकि कुछ अंतरिम डिविडेंड का ऐलान कर चुकी हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार में डिविडेंड का इंतजार कर रहे निवेशकों के लिए 29 मई बेहद अहम रहने वाला है. इस दिन 12 कंपनियों ने डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट तय की है. इनमें कुछ कंपनियां फाइनल डिविडेंड देंगी, जबकि कुछ अंतरिम डिविडेंड का भुगतान करेंगी. कई कंपनियां निवेशकों को ₹150 प्रति शेयर तक का डिविडेंड देने जा रही हैं. अगर आप भी इन कंपनियों के डिविडेंड का फायदा उठाना चाहते हैं, तो रिकॉर्ड डेट और एक्स-डेट को समझना जरूरी है. ध्यान रहे कि 29 मई को शेयर खरीदने वाले निवेशकों को इस घोषित डिविडेंड का लाभ नहीं मिलेगा.
क्या होती है रिकॉर्ड डेट?
रिकॉर्ड डेट वह तारीख होती है, जिस दिन कंपनी अपने रिकॉर्ड में यह तय करती है कि किन निवेशकों के पास उसके शेयर मौजूद हैं. जिन निवेशकों का नाम कंपनी के रिकॉर्ड या डिपॉजिटरी के डेटा में दर्ज होता है, वही डिविडेंड पाने के हकदार माने जाते हैं.
29 मई को शेयर खरीदने पर क्यों नहीं मिलेगा डिविडेंड?
भारतीय शेयर बाजार में ट्रेडिंग T+1 सेटलमेंट सिस्टम पर होती है. यानी अगर कोई निवेशक रिकॉर्ड डेट वाले दिन शेयर खरीदता है, तो उसका नाम अगले कारोबारी दिन कंपनी के रिकॉर्ड में जुड़ता है. ऐसे में 29 मई को शेयर खरीदने वाले निवेशकों को इस डिविडेंड का फायदा नहीं मिलेगा.
किन कंपनियों ने घोषित किया डिविडेंड?
29 मई की रिकॉर्ड डेट वाली 12 कंपनियों के डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट तय की गई है, जिनमें बजाज ऑटो, टोरेंट फार्मा, ICICI लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मा और बैंक ऑफ इंडिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं. बजाज ऑटो निवेशकों को ₹150 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दे रही है, जबकि ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मा ₹57, टोरेंट फार्मा ₹9, ICICI लोंबार्ड ₹7, बैंक ऑफ इंडिया ₹4.65 और UNO Minda ₹1.75 प्रति शेयर का डिविडेंड देगी. इसके अलावा JB Chemicals ₹9.30, Eris Lifesciences ₹7.21, Home First Finance ₹5.20, S Chand and Company ₹4, Advani Hotels ₹0.80 और BCPL Railway Infrastructure ₹1 प्रति शेयर डिविडेंड देने जा रही हैं. कुछ कंपनियां फाइनल तो कुछ अंतरिम डिविडेंड का भुगतान करेंगी. कुछ कंपनियां निवेशकों को आकर्षक फाइनल डिविडेंड दे रही हैं, जबकि कुछ अंतरिम डिविडेंड का ऐलान कर चुकी हैं. इनमें प्रति शेयर डिविडेंड ₹150 तक पहुंच रहा है, जिससे निवेशकों के बीच इन शेयरों को लेकर काफी चर्चा है.
डिविडेंड निवेशकों के लिए क्यों अहम है?
डिविडेंड उन निवेशकों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया माना जाता है, जो लंबे समय तक शेयर होल्ड करते हैं. नियमित डिविडेंड देने वाली कंपनियां आमतौर पर मजबूत वित्तीय स्थिति और स्थिर कारोबार का संकेत देती हैं. यही वजह है कि कई निवेशक डिविडेंड देने वाले शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में प्राथमिकता देते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल डिविडेंड देखकर किसी शेयर में निवेश करना सही रणनीति नहीं माना जाता. निवेशकों को कंपनी के बिजनेस मॉडल, मुनाफे, कर्ज और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का भी विश्लेषण करना चाहिए. साथ ही रिकॉर्ड डेट और एक्स-डेट की जानकारी पहले से रखना जरूरी है, ताकि डिविडेंड का लाभ सही समय पर मिल सके.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
करीब ₹15,000 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है. इसका उद्देश्य देश को अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट से लैस करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय वायुसेना की ताकत को नई ऊंचाई देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. रक्षा मंत्रालय ने देश के महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) यानी आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया है. करीब ₹15,000 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है. इसका उद्देश्य देश को अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट से लैस करना है.
टाटा, L&T और भारत फोर्ज के बीच कड़ी टक्कर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मेगा रक्षा परियोजना के लिए तीन बड़े औद्योगिक समूहों और उनके कंसोर्टियम को शॉर्टलिस्ट किया गया है. इसमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो (L&T)-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) कंसोर्टियम और भारत फोर्ज-बेमल (BEML) साझेदारी शामिल हैं. देश के सबसे बड़े रक्षा कॉन्ट्रैक्ट्स में शामिल इस परियोजना को हासिल करने के लिए इन कंपनियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है.
भारत का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट
AMCA प्रोजेक्ट भारत के रक्षा इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकता है. अब तक भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी लड़ाकू विमानों पर काफी हद तक निर्भर रहा है, लेकिन यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती देगी.
यह भारत का पहला स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट होगा, जिसे ऐसी तकनीक से तैयार किया जाएगा कि दुश्मन के रडार सिस्टम इसे आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे. इससे भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता और रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा होगा.
सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर करेंगी काम
पिछले वर्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने AMCA प्रोग्राम के एक्जीक्यूशन मॉडल को मंजूरी दी थी. इस मॉडल के तहत एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) निजी और सरकारी क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएगी.
सरकार का उद्देश्य रक्षा निर्माण क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना और हाई-टेक रक्षा तकनीक को देश के भीतर विकसित करना है. इससे घरेलू रक्षा उद्योग को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा.
AI तकनीक से लैस होगा नया लड़ाकू विमान
AMCA फाइटर जेट को भविष्य की युद्ध चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है. एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के मुताबिक, विमान में अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम भी लगाए जाएंगे.
यह AI तकनीक पायलट को युद्ध के दौरान तेजी से निर्णय लेने, दुश्मन की गतिविधियों का विश्लेषण करने और मिशन की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन आधुनिक तकनीकों के जरिए भारत का AMCA दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों की श्रेणी में शामिल हो सकता है.
एयरो इंडिया 2025 में दिखी थी ताकत की झलक
बेंगलुरु में आयोजित एयरो इंडिया 2025 प्रदर्शनी के दौरान AMCA फाइटर जेट का फुल-स्केल मॉडल भी पेश किया गया था. इस मॉडल ने भारत की तेजी से बढ़ती रक्षा तकनीकी क्षमता और स्वदेशी सैन्य निर्माण की ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया था.
आंध्र प्रदेश में बनेगा हाईटेक टेस्टिंग सेंटर
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से काम शुरू हो गया है. हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पुट्टपर्थी में ‘कोर इंटीग्रेशन एंड फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर’ की आधारशिला रखी.
करीब ₹2,000 करोड़ की लागत से बनने वाला यह सेंटर स्वदेशी विमानों की टेस्टिंग और डेवलपमेंट प्रक्रिया को तेज करने में अहम भूमिका निभाएगा. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह केंद्र भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करेगा, जहां पांचवीं पीढ़ी के आधुनिक लड़ाकू विमानों की टेस्टिंग और विकास की क्षमता मौजूद है.
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि AMCA प्रोजेक्ट सिर्फ एक रक्षा परियोजना नहीं, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बन सकता है. इससे रक्षा उत्पादन, रोजगार, तकनीकी विकास और वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होगी.