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Reliance ने रूस की कंपनी के साथ की डील, भारत को मिलता रहेगा सस्ता तेल
रूस यूक्रेन के बीच जंग के बाद रूस पर अमेरिका और यूरोप के देशों ने कारोबारी प्रतिबंध लगाए हैं. हालांकि इसके बाद भी भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल की खरीद कर रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने रूस की कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) के साथ एक साल के लिए करार किया है. इस करार के तहत रिलायंस हर महीने कम से कम 3 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) का आयात करेगी. पेमेंट रूस की करेंसी रूबल में किया जाएगा. तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक+ (OPEC+) 2 जून को मीटिंग करने वाले हैं. इसमें ये तेल सप्लाई में कटौती जारी रखने कर निर्णय ले सकते हैं. ऐसे में रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस डील की वजह से रियायती कीमत पर तेल मिलते रहने में मदद मिलेगी.
क्या है रिलायंस- Rosneft के बीच सौदा?
सौदे की शर्तों के तहत रिलायंस यूराल क्रूड (Urals crude) के करीब दस लाख बैरल के दो कार्गो खरीदेगा, जिसमें हर महीने 3 डॉलर की छूट पर चार और कार्गो खरीदने का विकल्प होगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिलायंस हर महीने एक से दो कार्गो लो-सल्फर क्रूड ऑयल की खरीद करेगी. इसमें मुख्य रूप से रूस के कोज़मिनो (Kozmino) के प्रशांत बंदरगाह से निर्यात किया जाने वाला ईएसपीओ ब्लेंड (ESPO Blend) होगा. इसके साथ ही रिलायंस भारत के एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank ) और रूस के गज़प्रॉमबैंक (Gazprombank) के माध्यम से रूस के रूबल का उपयोग करके तेल के लिए पेमेंट करने पर सहमत हो गया है. पेमेंट सिस्टम पर अधिक जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाई है.
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आम लोगों को मिलेगी राहत?
क्रूड ऑयल के उत्पादक देशों का समूह ओपेक+ (OPEC+) जून 2024 से आगे भी तेल सप्लाई में कटौती जारी रखेगा. इससे दुनियाभर में तेल के दाम बढ़ने की आशंका रहेगी. लेकिन, रिलायंस इंडस्ट्रीज की Rosneft के साथ टर्म डील के चलते भारत में जनता को रियायती दर पर तेल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) और रूस सहित अन्य सहयोगियों वाले देशों को मिलाकर OPEC+ ग्रुप बना है. यह 2 जून 2024 को एक ऑनलाइन मीटिंग में तेल उत्पादन में कटौती का फैसला लेगा.
भारत तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है. 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदने पर बैन लगा दिया था. इसके बाद से भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है. भारत ने रूसी कच्चे तेल के लिए रुपए, दिरहम और चीन की करेंसी युआन में भी भुगतान किया है.
3 साल में 2 से 40% हुआ रूस से तेल का इंपोर्ट
भारत ने 2020 में रूस से अपनी जरूरत का सिर्फ 2% कच्चा तेल खरीदा था. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने से ठीक पहले 2021 में टोटल सप्लाई 16% हो गई और 2022 में सप्लाई बढ़कर 35% तक पहुंच गई. फिलहाल भारत रूस से अपनी जरूरत का 40% क्रूड ऑयल खरीद रहा है. भारत की टोटल व्यापार वैल्यू में क्रूड ऑयल का हिस्सा एक तिहाई है. यानी भारत जो कुछ भी बाहर से इंपोर्ट करता है उसका करीब एक तिहाई हिस्सा क्रूड ऑयल होता है. इसलिए इस मुनाफे से व्यापार घाटे में कमी आएगी.
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