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मुकेश अंबानी की इन दो कंपनियों को चाहिए करोड़ों का लोन, जानें क्या है पूरा मामला

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग (ECB) के जरिए यह लोन जुटाना चाहती है. वहीं, रिलायंस जियो को भी लोन चाहिए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

दौलत के मामले में गौतम अडानी से पिछड़ चुके मुकेश अंबानी तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रहे हैं. जाहिर है इसके लिए उन्हें बड़े पैमाने पर पैसा चाहिए और शायद इसीलिए उनकी दो कंपनियां लोन की तलाश में हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और रिलायंस जियो इस समय लोन देने वाली कंपनियों से बातचीत कर रही हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज को 12400 करोड़ और जियो को 20600 करोड़ रुपए का लोन चाहिए.

5 साल के लिए चाहिए लोन
रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकेश अंबानी की दोनों कंपनियां इन दिनों दुनिया के दिग्गज बैंकों से बातचीत कर रही हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग (ECB) के जरिए यह लोन जुटाना चाहती है. इस समय रिलायंस इंडस्ट्री HSBC और एमयूसीबैंक जैसे दिग्गज फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से बात कर रही है. एक मीडिया रिपोर्ट में इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज इस समय लोन जुटाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है. यह लोन पांच सालों की अवधि के लिए लिया जाना है. 

किसी मंजूरी की ज़रूरत नहीं
HSBC और एमयूसी बैंक के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज की बातचीत बैंक ऑफ अमेरिका, सिटी ग्रुप, क्रेडिट एग्रिकोल, डीबीएस बैंक और मिज़ूहो बैंक से भी चल रही है. जानकारों का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को विदेशी बैंकों से लोन लेने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक या सेबी जैसी संस्थाओं से मंजूरी लेने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि हाल में ही एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग के जरिए 1.5 अरब डॉलर की रकम लेने के नियमों में संशोधन किया गया है. हालांकि, अभी तक रिलायंस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

इनसे चल रही बातचीत
वहीं, रिलायंस जियो बैंक ऑफ अमेरिका, BNP और HSBC से लोन संबंधी बातचीत में जुटी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस जियो 5G कम्युनिटी गियर को गिरवी रखकर लोन लेना चाहती है. कंपनी के लोन की अवधि 3 से 7 साल तक हो सकती है. उधर, गौतम अडानी की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स ने कर्ज के लिए अपनी 50 फीसदी हिस्सेदारी गिरवी रखी है. हालांकि, यह हिस्सेदारी उसने अपनी सब्सिडियरी एसीसी लिमिटेड में गिरवी रखी है. अंबुजा सीमेंट्स द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया गया है कि कंपनी ने 26 सितंबर, 2022 को एसीसी लिमिटेड में अपने कुल 9.39 करोड़ शेयर गिरवी रखे हैं. बता दें कि अडानी समूह ने मॉरिशस की एसपीवी एंडेवर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (ETIL) के जरिए अंबुजा और ACC दोनों कंपनियों का अधिग्रहण किया है. 

क्या है एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग?
जब कोई भारतीय कंपनी किसी बाहरी कंपनी (नॉन-रेजिडेंट) से कमर्शियल लोन लेती है, तो उसे एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग या ECB कहा जाता है. यह लोन भारतीय मुद्रा सहित किसी भी ऐसी विदेशी मु्द्रा में लिया जा सकता है, जो कन्वर्टिबल हो. ECB लोन की सुविधा के जरिए भारतीय कंपनियां कम लागत पर बाहरी वित्तीय संस्थाओं से पैसा उधार ले सकती हैं. कम लागत पर इसलिए क्योंकि कई विदेशी वित्तीय बाजारों में ब्याज की दर भारत से कम है. ईसीबी लोन अंतरराष्ट्रीय बैंक, अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार, वित्तीय संस्थानों से लिया जा सकता है. ईसीबी के तहत बैंक लोन, फ्लोटिंग रेट बांड्स व फिक्स्ड रेट बांड्स, बायर्स क्रेडिट और सप्लायर्स क्रेडिट के रूप में लोन लिया जा सकता है. 


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