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रिलायंस ने जुटाए ₹21,000 करोड़, भारत की सबसे बड़ी एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज डील
इस डील से न केवल रिलायंस को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए दीर्घकालिक फंडिंग मिली है, बल्कि यह ट्रांजैक्शन आने वाले समय में अन्य कंपनियों के लिए भी एक नया बेंचमार्क स्थापित कर सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
मुकेश अंबानी की रिलायंस ग्रुप ने एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज (ABS) जारी कर लगभग ₹21,000 करोड़ (लगभग $2.4 अरब) जुटाए हैं. यह इस साल भारत की इस तरह की सबसे बड़ी फंडरेजिंग डील में से एक है. शुरुआत में यह राशि ₹18,000 करोड़ निर्धारित की गई थी, लेकिन मजबूत निवेशकों की मांग को देखते हुए इसे बढ़ाकर ₹21,000 करोड़ कर दिया गया.
कौन बैठे इस डील में निवेशकों के रूप में
देश की प्रमुख एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने इस इश्यू में महत्वपूर्ण निवेश किया है. इनमें आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC, HDFC AMC, ICICI प्रूडेंशियल AMC, निप्पॉन लाइफ इंडिया AMC और SBI फंड्स मैनेजमेंट शामिल हैं.
सिक्योरिटीज की संरचना और शर्तें
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये सिक्योरिटीज "पास-थ्रू सर्टिफिकेट्स" के रूप में जारी की गई हैं. इन्हें तीन ट्रस्ट राधाकृष्ण सिक्युरिटाइजेशन ट्रस्ट, शिवशक्ति सिक्युरिटाइजेशन ट्रस्ट और सिद्धिविनायक सिक्युरिटाइजेशन ट्रस्ट ने जारी किया है. इनकी परिपक्वता अवधि लगभग तीन, चार और पांच साल की है. इन पर औसतन 7.75% का कूपन रेट मिलेगा.
डील से क्या असर होगा बाजार पर
रिलायंस की इस पेशकश को निवेशकों से अच्छा प्रतिसाद मिला है. यह डील उन निवेशकों को टॉप-रेटेड एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज में निवेश का अवसर देती है, जो अब तक मुख्य रूप से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के माध्यम से ही उपलब्ध थी. इससे भारत के सिक्योरिटाइजेशन बाजार को मजबूती मिलने की संभावना है. ICRA के अनुसार, यह बाजार इस वित्त वर्ष के अंत तक ₹2.5 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है.
क्यों बढ़ाई गई राशि
रिलायंस को इस ट्रांजैक्शन में मजबूत मांग देखने को मिली. पहले कंपनी ₹18,000 करोड़ जुटाने की योजना में थी, लेकिन निवेशकों की दिलचस्पी के कारण इसे बढ़ाकर ₹21,000 करोड़ कर दिया गया. इस ट्रांजैक्शन को बार्कलेज पीएलसी ने आयोजित किया.
किन परिसंपत्तियों से जुड़ी हैं ये सिक्योरिटीज
ये पास-थ्रू सर्टिफिकेट्स डिजिटल फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट से जुड़े लोन पर आधारित हैं. यह ट्रस्ट रिलायंस इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट्स एंड होल्डिंग्स लिमिटेड द्वारा बनाया गया है. इसके अलावा, ये सर्टिफिकेट्स ABS ओरिजिनेटर्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज की प्रमोटर संस्थाओं के बीच हुए ऑप्शन एग्रीमेंट के तहत पेआउट से भी समर्थित हैं.
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