मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने ग्लोबल फूड चेन ब्रांड Pret A Manger के साथ स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
गौतम अडानी और मुकेश अंबानी लगातार अपने बिज़नेस का विस्तार कर रहे हैं. दोनों में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ है. पिछले कुछ वक्त, खासकर नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में अडानी की तरक्की आसमान छूने लगी है. अंबानी की कमाई का ग्राफ भी ऊपर चढ़ा है, लेकिन उसकी रफ्तार अडानी से कम है. ये भी एक प्रमुख वजह है कि अंबानी अलग-अलग सेक्टर में संभावनाएं तलाश रहे हैं.
ब्रिटिश कंपनी, नाम फ्रांसीसी
अब वह फूड एंड बेवरेज रिटेल में तहलका मचाना चाहते हैं और इसीलिए उन्होंने ग्लोबल फूड चेन ब्रांड Pret A Manger के साथ स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप की है. Pret A Manger ब्रांड को भारतीय बाजारों में मजबूती देने के लिए दोनों कंपनियां साथ काम करेंगी. Pret A Manger मूल रूप से ब्रिटेन की कंपनी है, लेकिन इसका नाम कुछ हद तक फ्रांसीसी. वो ऐसे कि फ्रेंच में Pret A Manger का मतलब होता है रेडी टू ईट.
इसलिए अंबानी ने लगाया दांव
Pret A Manger की पहली फूड शॉप 1986 में लंदन में खोली गई थी. आज इसकी UK, US, यूरोप और एशिया सहित नौ देशों में 550 फूड शॉप हैं. अकेले लंदन में ही कंपनी 300 से ज्यादा शॉप चला रही है, इससे Pret A Manger की लोकप्रियता का अंदाजा हो जाता है. मुकेश अंबानी को Pret A Manger की ब्रांड इमेज का अहसास है और साथ ही उन्हें भारतीय फूड बाजार में बढ़ती संभावनाएं भी नज़र आ रही हैं. यही वजह है कि उन्होंने ब्रिटिश कंपनी के साथ स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप की है.
बढ़ रहा रेडी टू ईट का मार्केट
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर का आउटपुट 2025-26 तक 535 बिलियन डॉलर पहुंच सकता है. वहीं, रेडी टू ईट फूड मार्केट की बात करें, तो 2022-26 तक इसके 751.43 मिलियन USD होने की उम्मीद है. Pret A Manger के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत रिलायंस अब देश भर के प्रमुख शहरों में फूड चेन खोलेगा. रिलायंस के लिए प्लस पॉइंट ये है कि लोगों में खाने को लेकर जागरुकता बढ़ी है. रेडी-टू-इट फूड एक तरह से नया फैशन बन रहा है. लोग ताज़ी और ऑर्गेनिक चीजों से बने खाने को तवज्जो देने लगे हैं, जो Pret A Manger के साथ रिलायंस अब उन्हें मुहैया करा पाएगी. यानी मुकेश अंबानी इस क्षेत्र से भी मोटा मुनाफा कमा सकते हैं.
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस मिलने के बाद मोबिक्विक अब अपनी फाइनेंशियल सर्विसेज को बड़े स्तर पर विस्तार दे सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फिनटेक कंपनी वन मोबिक्विक (One MobiKwik Systems) के लिए बड़ी खबर सामने आई है. कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) से NBFC लाइसेंस मिल गया है. इस ऐलान के बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और यह करीब 16% तक उछल गया. अब कंपनी लोन और क्रेडिट बिजनेस में सीधे उतरने की तैयारी में है.
NBFC लाइसेंस मिलने का क्या मतलब
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस मिलने के बाद मोबिक्विक अब अपनी फाइनेंशियल सर्विसेज को बड़े स्तर पर विस्तार दे सकेगी. कंपनी “मोबिक्विक फाइनेंशियल सर्विसेज” के जरिए ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को सीधे लोन ऑफर कर पाएगी. इसमें सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों तरह के लोन शामिल होंगे.
लेंडिंग बिजनेस में मिलेगा बड़ा फायदा
अब तक मोबिक्विक को लेंडिंग के लिए पार्टनर संस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन NBFC लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी अपने क्रेडिट ऑपरेशंस को इन-हाउस ला सकेगी. इससे कंपनी का मार्जिन बेहतर होगा और लोन प्रोडक्ट्स को तेजी से लॉन्च करने में मदद मिलेगी. साथ ही ग्राहकों को अधिक कस्टमाइज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी मिल सकेंगे.
शेयर बाजार में दिखा जबरदस्त असर
इस बड़ी खबर का सीधा असर शेयर बाजार में देखने को मिला. बीएसई पर कंपनी का शेयर 203 रुपये के आसपास खुला और कारोबार के दौरान उछलकर 243 रुपये तक पहुंच गया और बाद में शेयर में थोड़ी गिरावट देखी गई और यह 11. 26 प्रतिशत की तेजी के साथ 224.94 रुपये पर बंद हुआ. पिछले सत्र में यह करीब 202.55 रुपये पर बंद हुआ था. स्टॉक का 52 हफ्तों का उच्च स्तर 333.95 रुपये और निचला स्तर 151.95 रुपये रहा है.
कब शुरू होगा लेंडिंग ऑपरेशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करने के बाद केंद्रीय बैंक से सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) मिलेगा. इसके बाद ही मोबिक्विक आधिकारिक तौर पर नॉन-बैंक लेंडिंग ऑपरेशंस शुरू कर पाएगी.
डिजिटल वॉलेट से फुल-फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म की ओर
मोबिक्विक पहले से डिजिटल वॉलेट और पेमेंट सर्विसेज में सक्रिय है. इसके अलावा कंपनी क्रेडिट और निवेश जैसे सेगमेंट में भी धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. NBFC लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी अब खुद को एक फुल-स्टैक फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी.
मोबिक्विक के लिए NBFC लाइसेंस एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. इससे कंपनी के बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू और ग्रोथ संभावनाओं को नई मजबूती मिलेगी. बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया भी इसी भरोसे को दर्शाती है.
मुनाफे के इस शानदार प्रदर्शन के बाद कंपनी ने निवेशकों को बड़ा तोहफा दिया है. कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹7.50 का डिविडेंड घोषित किया है. प्रतिशत के
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महिंद्रा फाइनेंस (Mahindra & Mahindra Financial Services) ने मार्च 2026 तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ा सरप्राइज दिया है. कंपनी का मुनाफा दोगुना होने के साथ शेयरों में जोरदार तेजी आई, वहीं शेयरधारकों के लिए 375% के बंपर डिविडेंड का ऐलान किया गया है, जिससे बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला.
तिमाही नतीजों में जबरदस्त उछाल
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो मार्च तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 106% बढ़कर ₹940 करोड़ हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह ₹456 करोड़ था. वहीं, स्टैंडअलोन स्तर पर भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा और शुद्ध लाभ 55% बढ़कर ₹873 करोड़ पहुंच गया, जो एक साल पहले ₹563 करोड़ था.
रेवेन्यू और मार्जिन में सुधार
कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 13% बढ़कर ₹5,539 करोड़ हो गया, जो पहले ₹4,886 करोड़ था. तिमाही आधार पर भी मुनाफे में लगभग 13.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह प्रदर्शन मुख्य रूप से बेहतर मार्जिन और मजबूत लोन ग्रोथ के कारण संभव हुआ.
निवेशकों को मिला बंपर डिविडेंड
मुनाफे के इस शानदार प्रदर्शन के बाद कंपनी ने निवेशकों को बड़ा तोहफा दिया है. कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹7.50 का डिविडेंड घोषित किया है. प्रतिशत के हिसाब से यह 375% का डिविडेंड है, जो निवेशकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बना.
शेयरों में जोरदार तेजी
नतीजों के बाद बाजार में कंपनी के शेयरों में तेज खरीदारी देखने को मिली. स्टॉक 311 रुपये पर खुला और जल्द ही 331 रुपये के स्तर तक पहुंच गया. हालांकि बाद में हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली, खबर लिखे जाने तक यह शेयर करीब 8.02 प्रतिशत की तेजी के साथ 318 रुपये पर कारोबार करता नजर आया.
मजबूत नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्मों ने भी इस शेयर पर भरोसा जताया है.
1. Nomura ने ‘Buy’ रेटिंग के साथ ₹400 का टारगेट दिया
2. Motilal Oswal ने ₹350 का लक्ष्य तय किया
3. Emkay Global ने ‘Add’ रेटिंग के साथ ₹340 का टारगेट बढ़ाया
4. JM Financial ने ₹350 का टारगेट प्राइस दिया
महिंद्रा फाइनेंस ने मजबूत तिमाही नतीजों, बेहतर मार्जिन और निवेशकों के लिए आकर्षक डिविडेंड के दम पर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की है. आने वाले समय में भी कंपनी के प्रदर्शन को लेकर बाजार का रुख सकारात्मक बना रह सकता है.
भारत-न्यूजीलैंड FTA एक संतुलित समझौता माना जा रहा है, जिसमें व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू हितों की भी रक्षा की गई है. यह डील आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार और निर्यात को नई गति दे सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आज हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देगा. इस डील से जहां कई उत्पाद सस्ते हो सकते हैं, वहीं निवेश, सेवाओं और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़े अवसर खुलने की उम्मीद है. हालांकि, भारत ने किसानों और MSME सेक्टर को ध्यान में रखते हुए कई संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है.
FTA क्या है और क्यों अहम है
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या अधिक देशों के बीच ऐसा करार होता है, जिसमें व्यापार होने वाले अधिकांश सामानों पर कस्टम ड्यूटी घटाई या खत्म की जाती है. इसके साथ ही व्यापार और निवेश से जुड़े नियमों को आसान बनाया जाता है, जिससे कारोबार बढ़े.
समझौते की टाइमलाइन
भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA की बातचीत लंबी रही है.
1. 2010 में बातचीत शुरू हुई
2. 2015 में 9 दौर के बाद ठहराव आया
3. मार्च 2025 में बातचीत फिर शुरू हुई
4. दिसंबर 2025 में समझौता पूरा हुआ
5. 27 अप्रैल 2026 को इस पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं
इस समझौते में व्यापार, सेवाएं, निवेश, कस्टम नियम और विवाद समाधान समेत 20 अध्याय शामिल हैं.
भारत को क्या मिलेगा
इस समझौते से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं. टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर के उत्पाद न्यूजीलैंड में जीरो ड्यूटी पर निर्यात हो सकेंगे. आईटी, शिक्षा, फाइनेंस, पर्यटन और कंस्ट्रक्शन जैसे सर्विस सेक्टर में नए अवसर खुलेंगे. भारतीय पेशेवरों को 5,000 वीजा कोटा के तहत 3 साल तक काम करने का मौका मिलेगा.
इसके अलावा, न्यूजीलैंड ने अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है.
न्यूजीलैंड को क्या फायदा
भारत न्यूजीलैंड को लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच देगा. करीब 54% उत्पादों को पहले दिन से ही ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी. इनमें ऊन, कोयला, लकड़ी और कुछ कृषि उत्पाद शामिल हैं.
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा
इस समझौते के बाद कुछ आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं. सेब, कीवी, मनुका शहद और कुछ डेयरी उत्पादों पर ड्यूटी में छूट मिलेगी, हालांकि इन पर कोटा और न्यूनतम कीमत की शर्तें लागू होंगी. समुद्री उत्पादों और कुछ अन्य वस्तुओं पर चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी खत्म की जाएगी.
संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित
भारत ने अपने किसानों और MSME सेक्टर की सुरक्षा के लिए कई उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है. इनमें डेयरी, चीनी, कुछ कृषि उत्पाद, तांबा और एल्युमीनियम जैसे सेक्टर शामिल हैं. इन पर कोई ड्यूटी छूट नहीं दी जाएगी.
निवेश और रणनीतिक महत्व
न्यूजीलैंड का 20 अरब डॉलर निवेश का वादा इस समझौते को और अहम बनाता है. यह भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आर्थिक रणनीति मजबूत करने में मदद करेगा. वहीं न्यूजीलैंड को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था तक बेहतर पहुंच मिलेगी.
कंपनी का लक्ष्य लगभग ₹16,600 करोड़ से ₹20,750 करोड़ के बीच वैल्यूएशन हासिल करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख डिजिटल इंश्योरटेक कंपनी ACKO ने शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने अपने प्रस्तावित IPO के लिए प्रमुख निवेश बैंकों की नियुक्ति कर दी है और लगभग 2 से 2.5 अरब डॉलर (करीब ₹16,000 करोड़ से ₹21,000 करोड़) के वैल्यूएशन का लक्ष्य रखा है. यह डील भारतीय इंश्योरटेक सेक्टर में एक और बड़ी पब्लिक लिस्टिंग साबित हो सकती है.
IPO की तैयारी में तेजी, बैंकर्स की नियुक्ति
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ACKO ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए ICICI Securities, Morgan Stanley और Kotak Securities को बुक-रनिंग लीड मैनेजर के रूप में चुना है. कंपनी आने वाले महीनों में सेबी के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकती है. यह कदम कंपनी की लिस्टिंग प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
वैल्यूएशन और इश्यू स्ट्रक्चर
IPO में फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) का मिश्रण शामिल होने की संभावना है. कंपनी का लक्ष्य लगभग ₹16,600 करोड़ से ₹20,750 करोड़ के बीच वैल्यूएशन हासिल करना है. यह लिस्टिंग सफल होने पर इंश्योरटेक सेक्टर में Policybazaar के बाद दूसरी बड़ी सार्वजनिक पेशकशों में से एक होगी.
कंपनी का विस्तार और बिजनेस मॉडल
ACKO की स्थापना 2016 में Varun Dua द्वारा की गई थी. कंपनी ने शुरुआत में डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ऑटो इंश्योरेंस सेगमेंट में काम शुरू किया था. मार्च 2023 में कंपनी ने हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट में भी प्रवेश किया और अपने विस्तार को मजबूत करने के लिए Parentlane का अधिग्रहण किया.
बड़े प्लेटफॉर्म्स के साथ साझेदारी
ACKO ने डिजिटल इकोसिस्टम में मजबूत पकड़ बनाई है. कंपनी PhonePe और MyGate जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ साझेदारी कर चुकी है ताकि ग्राहकों को सीधे इंश्योरेंस सेवाएं मिल सकें. इसके अलावा OYO, RedBus, Zomato, HDB Financial Services और Urban Company सहित 50 से अधिक प्लेटफॉर्म्स के साथ एम्बेडेड इंश्योरेंस डील्स भी की गई हैं.
मजबूत ग्राहक आधार और रेवेन्यू ग्रोथ
कंपनी के अनुसार, अब तक 7.8 करोड़ (78 मिलियन) से अधिक ग्राहकों को इंश्योरेंस पॉलिसी दी जा चुकी हैं और 1 अरब से ज्यादा पॉलिसी जारी की गई हैं. वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का रेवेन्यू ₹2,837 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 35% की वृद्धि दर्शाता है. यह ग्रोथ व्यापक इंश्योरेंस सेक्टर की तुलना में काफी तेज रही है.
घाटे में सुधार और निवेशकों का भरोसा
ACKO ने अपने नेट लॉस में भी 37% की कमी दर्ज की है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार का संकेत देता है. कंपनी ने अब तक जनरल अटलांटिक, एक्सेल, एलीवेशन कैपिटल और अन्य निवेशकों से लगभग 450-460 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है.
ACKO का संभावित IPO भारतीय स्टार्टअप और इंश्योरटेक सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है. मजबूत ग्रोथ, बढ़ता ग्राहक आधार और तेजी से बढ़ता डिजिटल इंश्योरेंस नेटवर्क इसे बाजार में एक महत्वपूर्ण लिस्टिंग बना सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर क्षेत्र में नया तनाव नहीं बढ़ता और होर्मुज सुरक्षित रूप से खुल जाता है, तो खाड़ी देशों के तेल उत्पादन में तेज सुधार संभव है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सुरक्षित रूप से दोबारा खुल जाता है, तो खाड़ी देशों का कच्चे तेल का उत्पादन कुछ महीनों के भीतर तेजी से बहाल हो सकता है. हालांकि, पूरी तरह से प्री-कॉन्फ्लिक्ट स्तर पर उत्पादन पहुंचने में कई तिमाहियां लग सकती हैं.
होर्मुज खुलते ही तेज रिकवरी की संभावना
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 57% घटकर करीब 14.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था. अगर आने वाले महीनों में यह जलमार्ग सुरक्षित रूप से फिर से खुलता है और तेल परिसंपत्तियों पर हमले नहीं होते, तो अधिकतर उत्पादन तेजी से वापस आ सकता है.
पूरी रिकवरी में लग सकता है समय
गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि उत्पादन को पूरी तरह पुराने स्तर पर लाने में ज्यादा समय लग सकता है, खासकर अगर तनाव या संघर्ष दोबारा बढ़ता है. रिपोर्ट के अनुसार, रिकवरी की गति कई तकनीकी और लॉजिस्टिक बाधाओं पर निर्भर करेगी, जिनमें पाइपलाइन क्षमता, खाली टैंकरों की उपलब्धता, श्रमिकों और सामग्री की आपूर्ति तथा कुओं की उत्पादन क्षमता शामिल हैं.
लॉजिस्टिक और तकनीकी बाधाएं बनेंगी चुनौती
रिपोर्ट में बताया गया है कि खाड़ी क्षेत्र में खाली टैंकर क्षमता लगभग 50% तक घट चुकी है, जो करीब 130 मिलियन बैरल के बराबर है. इससे न केवल भंडारित तेल को बाहर भेजने में दिक्कत होगी, बल्कि नए उत्पादन को भी तेजी से शुरू करने में बाधा आएगी.
लंबे समय तक बंदी से बढ़ सकता है नुकसान
गोल्डमैन सैक्स ने यह भी कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो तेल उत्पादन की रिकवरी और धीमी हो सकती है. लंबे व्यवधान से तेल भंडार में दबाव (reservoir pressure) संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिससे उत्पादन को फिर से शुरू करने से पहले अतिरिक्त मरम्मत और तकनीकी काम की जरूरत पड़ेगी.
मजबूत रिकवरी का आधार भी मौजूद
चुनौतियों के बावजूद रिपोर्ट में निकट भविष्य में मजबूत रिकवरी की संभावना भी जताई गई है. गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि तेल क्षेत्रों को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है, जबकि सऊदी अरामको ने संकेत दिया है कि उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा सऊदी अरब और यूएई अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के जरिए बाजार को स्थिर करने में सक्षम हैं.
सऊदी और UAE से मिल सकता है बड़ा सपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब और यूएई मिलकर प्री-वॉर स्तर की तुलना में 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ सकते हैं. यह वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
पूरी रिकवरी में लग सकते हैं कई तिमाहियां
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से खुलने के तीन महीने के भीतर लगभग 70% उत्पादन वापस आ सकता है, जबकि छह महीनों में यह आंकड़ा 88% तक पहुंच सकता है. हालांकि, पूरी रिकवरी में कई तिमाहियां लग सकती हैं क्योंकि अलग-अलग देशों में भूगर्भीय परिस्थितियां, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिबंधों का असर अलग-अलग होगा.
पोस्ट-अर्निंग्स कॉल में बैंक के मैनेजमेंट ने चेतावनी दी कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में क्रेडिट कार्ड बिजनेस पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, बैंक का मानना है कि दूसरी छमाही में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मार्च 2025 तिमाही के मजबूत नतीजों के बावजूद आरबीएल बैंक (RBL Bank) के शेयरों में आज जोरदार बिकवाली देखने को मिली. बैंक के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद मैनेजमेंट की भविष्य को लेकर दी गई सतर्क टिप्पणी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते शेयर इंट्रा-डे में करीब 5% तक टूट गए.
तिमाही नतीजों में जबरदस्त उछाल
आरबीएल बैंक ने मार्च 2025 तिमाही में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया. बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 6.9% बढ़कर ₹1,671 करोड़ पहुंच गई, जबकि शुद्ध मुनाफा तीन गुना से अधिक बढ़कर ₹230 करोड़ हो गया. पूरे वित्त वर्ष के दौरान भी बैंक के नतीजों में सुधार देखा गया, जिससे शुरुआत में निवेशकों की धारणा सकारात्मक रही, लेकिन बाद में मैनेजमेंट की टिप्पणी ने सेंटीमेंट बदल दिया.
मैनेजमेंट की चेतावनी से बढ़ी चिंता
पोस्ट-अर्निंग्स कॉल में बैंक के मैनेजमेंट ने चेतावनी दी कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में क्रेडिट कार्ड बिजनेस पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, बैंक का मानना है कि दूसरी छमाही में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा. अनुमान के मुताबिक, इस अवधि में क्रेडिट कार्ड स्लिपेज 7% से 7.5% के स्तर तक आ सकता है, जबकि क्रेडिट कॉस्ट करीब 5.5% रहने की संभावना है.
डिपॉजिट ग्रोथ और माइक्रोफाइनेंस पर भी नजर
मैनेजमेंट ने यह भी संकेत दिया कि एमिरेट्स एनबीडी के निवेश के बाद बैंक अधिक महंगे डिपॉजिट जुटाने पर फोकस नहीं करेगा, जिससे वित्त वर्ष 2027 में डिपॉजिट ग्रोथ सिंगल या लो-डबल डिजिट में रह सकती है. वहीं, माइक्रोफाइनेंस से जुड़े दबाव को बैंक ने अपने चरम पर बताया है. जैसे-जैसे स्लिपेज कम होंगे, प्रोविजंस में गिरावट आने की उम्मीद है.
शेयर बाजार में तेज गिरावट
मैनेजमेंट की टिप्पणी के बाद निवेशकों में घबराहट देखी गई. बीएसई पर आरबीएल बैंक का शेयर 11:00 बजे के आसपास 3.43 प्रतिशत गिरकर 310.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इंट्रा-डे में यह करीब 4.96 प्रतिशत तक गिरकर 305.90 रुपये तक पहुंच गया. खबर लिखे जाने तक बैंक का शेयर 2.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 313.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था.
वैश्विक ब्रोकरेज CLSA ने कहा कि बैंक का मुनाफा उम्मीद से लगभग 20% कम रहा, हालांकि लोन और डिपॉजिट ग्रोथ को सकारात्मक संकेत माना गया है. CLSA ने ₹320 के टारगेट के साथ ‘होल्ड’ रेटिंग दी है. वहीं सिटी ने ₹390 के टारगेट प्राइस के साथ ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है, हालांकि कमाई के अनुमान में 3% की कटौती की गई है. कुल मिलाकर 22 एनालिस्ट्स में से 12 ने खरीदारी, 6 ने होल्ड और 4 ने सेल की सलाह दी है.
एक साल में शानदार रिटर्न, फिर भी दबाव
पिछले एक साल में आरबीएल बैंक के शेयरों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है. अप्रैल 2025 में ₹186.85 के स्तर से यह फरवरी 2026 में ₹340.30 तक पहुंच गया था, यानी करीब 82% की तेजी. हालांकि आरबीएल बैंक के तिमाही नतीजे मजबूत रहे, लेकिन भविष्य को लेकर मैनेजमेंट की सावधानी भरी टिप्पणी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है. निवेशक अब क्रेडिट कार्ड और डिपॉजिट ग्रोथ से जुड़ी आगे की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं.
कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि इस सौदे के तहत सन फार्मा, ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की दर से खरीदेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय दवा कंपनी सन फार्मा (Sun Pharmaceutical Industries) ने अमेरिका स्थित Organon & Co को 11.75 अरब डॉलर (कर्ज सहित) के ऑल-कैश सौदे में खरीदने पर सहमति जताई है. यह भारतीय फार्मा क्षेत्र की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों में से एक माना जा रहा है.
कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि इस सौदे के तहत सन फार्मा, ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की दर से खरीदेगी.
वैश्विक विस्तार को मिलेगा बढ़ावा
ऑर्गेनॉन को 2021 में मर्क से अलग किया गया था और यह कंपनी मुख्य रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य और बायोसिमिलर्स पर केंद्रित है. इसके पास 140 देशों में बिकने वाले 70 से अधिक उत्पादों का पोर्टफोलियो है, जिससे सन फार्मा को वैश्विक बाजारों में मजबूत विस्तार मिलेगा.
इस अधिग्रहण के बाद सन फार्मा, भारत की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी, दुनिया की शीर्ष 25 फार्मा कंपनियों में शामिल हो जाएगी. संयुक्त राजस्व लगभग 12.4 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
कंपनी नेतृत्व की प्रतिक्रिया
सन फार्मा के कार्यकारी अध्यक्ष दीलिप सांघवी ने कहा कि ऑर्गेनॉन का पोर्टफोलियो और वैश्विक पहुंच कंपनी के मौजूदा कारोबार के साथ पूरी तरह मेल खाती है. वहीं, प्रबंध निदेशक कीर्ति गनोर्कर ने इसे कंपनी के वैश्विक विस्तार, विशेष रूप से अमेरिका जैसे प्रमुख बाजार में मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.
रणनीति और भविष्य की योजना
यह सौदा सन फार्मा की नवोन्मेषी दवाओं (innovative medicines) के व्यवसाय को मजबूत करने की रणनीति के अनुरूप है. फिलहाल यह सेगमेंट कंपनी की कुल बिक्री का लगभग 20% योगदान देता है, जो अधिग्रहण के बाद बढ़कर लगभग 27% होने की उम्मीद है.
ऑर्गेनॉन की उपस्थिति अमेरिका, यूरोप, चीन, कनाडा और ब्राजील जैसे बड़े बाजारों में है और इसके पास यूरोपियन यूनियन व उभरते बाजारों में छह उत्पादन इकाइयाँ भी हैं.
ऑर्गेनॉन की कार्यकारी अध्यक्ष Carrie Cox ने कहा कि बोर्ड ने कई रणनीतिक विकल्पों की समीक्षा के बाद पाया कि यह ऑल-कैश सौदा शेयरधारकों के लिए तत्काल और आकर्षक मूल्य प्रदान करता है.
भारतीय फार्मा सेक्टर की वैश्विक महत्वाकांक्षा
यह अधिग्रहण इस बात का संकेत है कि भारतीय फार्मा कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति, नवाचार और विकसित बाजारों तक पहुंच को बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठा रही हैं.
इस साझेदारी के साथ कंपनी ने अपना पहला राष्ट्रीय ब्रांड अभियान ‘देश का किसान, देश का असली हीरो’ भी लॉन्च किया है, जो देश के किसानों के योगदान और उनके साहस को समर्पित है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिसर्च आधारित एग्री-इनपुट कंपनी क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन ने अभिनेता अक्षय कुमार को अपना नया ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है. इस साझेदारी के साथ कंपनी ने अपना पहला राष्ट्रीय ब्रांड अभियान ‘देश का किसान, देश का असली हीरो’ भी लॉन्च किया है, जो देश के किसानों के योगदान और उनके साहस को समर्पित है.
कंपनी का कहना है कि इस साझेदारी का उद्देश्य भारत के किसानों से अपने जुड़ाव को और मजबूत करना है, ताकि वे आधुनिक कृषि समाधानों को अपनाकर अपनी खेती की लाभप्रदता बढ़ा सकें. यह अभियान टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न किसान संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से चलाया जाएगा.
क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर अग्रवाल ने कहा, “यह साझेदारी एक राष्ट्रीय आइकन को उन असली नायकों से जोड़ने का प्रयास है, जो देश का पेट भरते हैं. हमारे लिए किसान केवल हितधारक नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का आधार हैं.”
कंपनी ने बताया कि अक्षय कुमार सामाजिक मुद्दों के समर्थक रहे हैं और देश की भावनाओं से गहराई से जुड़े हुए हैं. वह किसानों की चुनौतियों, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की आवाज बनेंगे.
अक्षय कुमार ने कहा, “ऐसे ब्रांड से जुड़ना गर्व की बात है, जो भारत के किसानों के साथ केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों में भी खड़ा है. हम मिलकर भारतीय किसान का सम्मान करेंगे और आधुनिक कृषि के नए युग को प्रेरित करेंगे.”
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत
31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी की परिचालन आय 26,905 मिलियन रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष में 22,299 मिलियन रुपये थी. वहीं, कंपनी का मुनाफा बढ़कर 1,183 मिलियन रुपये हो गया, जो इससे पहले 872 मिलियन रुपये था. हालांकि, कंपनी के खर्च भी बढ़कर 25,643 मिलियन रुपये हो गए, जो वित्त वर्ष 2024 में 21,627 मिलियन रुपये थे.
कंपनी के इस फंडरेज प्लान में दो प्रमुख हिस्से शामिल हैं. पैरेंट कंपनी एक्सिस बैंक ₹1500 करोड़ का निवेश राइट्स इश्यू के जरिए करेगी. वहीं प्राइवेट इक्विटी फर्म केदार कैपिटल ₹750 करोड़ का निवेश प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट के माध्यम से करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एक्सिस ग्रुप की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी एक्सिस फाइनेंस (Axis Finance) ने ₹2250 करोड़ की रिकॉर्ड पूंजी जुटाने की योजना का ऐलान किया है. यह फंडरेज कई मायनों में खास है, क्योंकि पहली बार कंपनी किसी बाहरी निवेशक को शामिल कर रही है. इस कदम को एनबीएफसी बिजनेस को विस्तार देने और क्रेडिट मार्केट में पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा रणनीतिक फैसला माना जा रहा है.
कैसे जुटाए जाएंगे ₹2250 करोड़
कंपनी के इस फंडरेज प्लान में दो प्रमुख हिस्से शामिल हैं. पैरेंट कंपनी एक्सिस बैंक ₹1500 करोड़ का निवेश राइट्स इश्यू के जरिए करेगी. वहीं प्राइवेट इक्विटी फर्म केदार कैपिटल ₹750 करोड़ का निवेश प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट के माध्यम से करेगी. यह पहली बार होगा जब एक्सिस फाइनेंस बाहरी निवेशक से पूंजी जुटाएगी. हालांकि, केदार कैपिटल के निवेश को नियामकीय मंजूरी मिलना अभी बाकी है.
क्यों जरूरी है यह पूंजी
कंपनी के मुताबिक इस पूंजी से उसकी टियर-1 कैपिटल और कुल कैपिटल एडेकेसी मजबूत होगी. इससे कंपनी को रिटेल, एमएसएमई और होलसेल सेगमेंट में ज्यादा लोन देने की क्षमता मिलेगी. एक्सिस फाइनेंस एक डाइवर्सिफाइड लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है, जहां सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों तरह के लोन में विस्तार की योजना है. नई पूंजी इस विस्तार को तेज करने में मदद करेगी.
मैनेजमेंट और निवेशकों का क्या कहना है
अमिताभ चौधरी, जो एक्सिस बैंक के एमडी और सीईओ हैं, का कहना है कि यह निवेश ग्रुप की एनबीएफसी बिजनेस के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है. वहीं एक्सिस फाइनेंस के प्रमुख साई गिरिधर के मुताबिक देश में लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है और यह अतिरिक्त पूंजी टेक्नोलॉजी व डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में निवेश को बढ़ावा देगी. सुनीश शर्मा का मानना है कि भारत के क्रेडिट मार्केट में बड़े अवसर मौजूद हैं और Axis Finance की मजबूत व विविध लेंडिंग उपस्थिति से भविष्य में बेहतर ग्रोथ देखने को मिल सकती है.
एक्सिस बैंक की मौजूदा स्थिति
एक्सिस बैंक के हालिया वित्तीय नतीजों पर नजर डालें तो मार्च 2026 तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा मामूली 0.65% घटकर ₹7,071 करोड़ रहा. हालांकि इस दौरान बैंक की कुल आय करीब 2% बढ़कर ₹38,746 करोड़ तक पहुंच गई. बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹1 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड को भी मंजूरी दी है, हालांकि इसकी रिकॉर्ड डेट अभी तय नहीं हुई है.
आगे की रणनीति और असर
एक्सिस फाइनेंस का यह फंडरेज ऐसे समय पर आ रहा है जब देश में क्रेडिट डिमांड तेजी से बढ़ रही है. अतिरिक्त पूंजी के साथ कंपनी अपने लोन पोर्टफोलियो को बढ़ाने, जोखिम संतुलन सुधारने और डिजिटल व डिस्ट्रीब्यूशन क्षमताओं को मजबूत करने पर फोकस करेगी.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम एक्सिस ग्रुप को एनबीएफसी स्पेस में और प्रतिस्पर्धी बनाएगा और आने वाले समय में इसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद कर सकता है.
शुक्रवार को सेंसेक्स 999 अंकों की गिरावट के साथ 76,664 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 275 अंक टूटकर 23,897 के स्तर पर आ गया. इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹5 लाख करोड़ की कमी कर दी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
तीन दिन की भारी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में आज संभलने के संकेत मिल रहे हैं. बीते सप्ताह निवेशकों के लगभग ₹5 लाख करोड़ डूबने के बाद सोमवार को शुरुआती कारोबार में सकारात्मक माहौल दिखा. वैश्विक संकेतों में सुधार और अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को कुछ हद तक वापस लौटाया है.
पिछला सप्ताह जब बाजार में मचा हाहाकार
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE Sensex) करीब 2,600 अंकों तक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE Nifty 50) भी भारी दबाव में रहा. शुक्रवार को सेंसेक्स 999 अंकों की गिरावट के साथ 76,664 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 275 अंक टूटकर 23,897 के स्तर पर आ गया. इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹5 लाख करोड़ की कमी कर दी.
आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव
गिरावट का सबसे बड़ा असर आईटी शेयरों पर देखने को मिला. Infosys के शेयर लगभग 7% तक लुढ़क गए, जबकि TCS, HCLTech और Tech Mahindra में भी 1 से 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा ICICI Bank, Hindustan Unilever और Bharti Airtel जैसे दिग्गज शेयर भी दबाव में रहे. वहीं दूसरी ओर Bajaj Finance, State Bank of India और HDFC Bank जैसे शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली.
गिरावट की बड़ी वजहें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ सक्रिय रहे. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को लेकर आशंकाएं बढ़ाईं. इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली ने मिलकर बाजार पर दबाव बना दिया.
आज के संकेत, राहत या नया उतार-चढ़ाव
सोमवार सुबह बाजार के लिए संकेत बेहतर नजर आए. GIFT निफ्टी में करीब 190 अंकों की तेजी देखी गई, जिससे मजबूत शुरुआत की उम्मीद बनी. एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख रहा. जापान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे. वहीं अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों की मजबूती ने निवेशकों को राहत का संकेत दिया.
आज किन शेयरों पर नजर
आज कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे और कॉरपोरेट अपडेट बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. Coal India, UltraTech Cement, Paytm, Varun Beverages और SBI Cards जैसी कंपनियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी. वहीं, Paytm Payments Bank से जुड़ी खबर ने बाजार का ध्यान खींचा है. RBI द्वारा बैंकिंग लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद इसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसका असर Paytm के शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा स्थिति में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. निवेशकों को सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत है. मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना और वैश्विक संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखना अहम रहेगा.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)