रिपोर्ट के मुताबिक, अगर क्षेत्र में नया तनाव नहीं बढ़ता और होर्मुज सुरक्षित रूप से खुल जाता है, तो खाड़ी देशों के तेल उत्पादन में तेज सुधार संभव है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सुरक्षित रूप से दोबारा खुल जाता है, तो खाड़ी देशों का कच्चे तेल का उत्पादन कुछ महीनों के भीतर तेजी से बहाल हो सकता है. हालांकि, पूरी तरह से प्री-कॉन्फ्लिक्ट स्तर पर उत्पादन पहुंचने में कई तिमाहियां लग सकती हैं.
होर्मुज खुलते ही तेज रिकवरी की संभावना
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 57% घटकर करीब 14.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था. अगर आने वाले महीनों में यह जलमार्ग सुरक्षित रूप से फिर से खुलता है और तेल परिसंपत्तियों पर हमले नहीं होते, तो अधिकतर उत्पादन तेजी से वापस आ सकता है.
पूरी रिकवरी में लग सकता है समय
गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि उत्पादन को पूरी तरह पुराने स्तर पर लाने में ज्यादा समय लग सकता है, खासकर अगर तनाव या संघर्ष दोबारा बढ़ता है. रिपोर्ट के अनुसार, रिकवरी की गति कई तकनीकी और लॉजिस्टिक बाधाओं पर निर्भर करेगी, जिनमें पाइपलाइन क्षमता, खाली टैंकरों की उपलब्धता, श्रमिकों और सामग्री की आपूर्ति तथा कुओं की उत्पादन क्षमता शामिल हैं.
लॉजिस्टिक और तकनीकी बाधाएं बनेंगी चुनौती
रिपोर्ट में बताया गया है कि खाड़ी क्षेत्र में खाली टैंकर क्षमता लगभग 50% तक घट चुकी है, जो करीब 130 मिलियन बैरल के बराबर है. इससे न केवल भंडारित तेल को बाहर भेजने में दिक्कत होगी, बल्कि नए उत्पादन को भी तेजी से शुरू करने में बाधा आएगी.
लंबे समय तक बंदी से बढ़ सकता है नुकसान
गोल्डमैन सैक्स ने यह भी कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो तेल उत्पादन की रिकवरी और धीमी हो सकती है. लंबे व्यवधान से तेल भंडार में दबाव (reservoir pressure) संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिससे उत्पादन को फिर से शुरू करने से पहले अतिरिक्त मरम्मत और तकनीकी काम की जरूरत पड़ेगी.
मजबूत रिकवरी का आधार भी मौजूद
चुनौतियों के बावजूद रिपोर्ट में निकट भविष्य में मजबूत रिकवरी की संभावना भी जताई गई है. गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि तेल क्षेत्रों को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है, जबकि सऊदी अरामको ने संकेत दिया है कि उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा सऊदी अरब और यूएई अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के जरिए बाजार को स्थिर करने में सक्षम हैं.
सऊदी और UAE से मिल सकता है बड़ा सपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब और यूएई मिलकर प्री-वॉर स्तर की तुलना में 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ सकते हैं. यह वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
पूरी रिकवरी में लग सकते हैं कई तिमाहियां
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से खुलने के तीन महीने के भीतर लगभग 70% उत्पादन वापस आ सकता है, जबकि छह महीनों में यह आंकड़ा 88% तक पहुंच सकता है. हालांकि, पूरी रिकवरी में कई तिमाहियां लग सकती हैं क्योंकि अलग-अलग देशों में भूगर्भीय परिस्थितियां, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिबंधों का असर अलग-अलग होगा.
पोस्ट-अर्निंग्स कॉल में बैंक के मैनेजमेंट ने चेतावनी दी कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में क्रेडिट कार्ड बिजनेस पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, बैंक का मानना है कि दूसरी छमाही में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मार्च 2025 तिमाही के मजबूत नतीजों के बावजूद आरबीएल बैंक (RBL Bank) के शेयरों में आज जोरदार बिकवाली देखने को मिली. बैंक के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद मैनेजमेंट की भविष्य को लेकर दी गई सतर्क टिप्पणी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते शेयर इंट्रा-डे में करीब 5% तक टूट गए.
तिमाही नतीजों में जबरदस्त उछाल
आरबीएल बैंक ने मार्च 2025 तिमाही में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया. बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 6.9% बढ़कर ₹1,671 करोड़ पहुंच गई, जबकि शुद्ध मुनाफा तीन गुना से अधिक बढ़कर ₹230 करोड़ हो गया. पूरे वित्त वर्ष के दौरान भी बैंक के नतीजों में सुधार देखा गया, जिससे शुरुआत में निवेशकों की धारणा सकारात्मक रही, लेकिन बाद में मैनेजमेंट की टिप्पणी ने सेंटीमेंट बदल दिया.
मैनेजमेंट की चेतावनी से बढ़ी चिंता
पोस्ट-अर्निंग्स कॉल में बैंक के मैनेजमेंट ने चेतावनी दी कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में क्रेडिट कार्ड बिजनेस पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, बैंक का मानना है कि दूसरी छमाही में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा. अनुमान के मुताबिक, इस अवधि में क्रेडिट कार्ड स्लिपेज 7% से 7.5% के स्तर तक आ सकता है, जबकि क्रेडिट कॉस्ट करीब 5.5% रहने की संभावना है.
डिपॉजिट ग्रोथ और माइक्रोफाइनेंस पर भी नजर
मैनेजमेंट ने यह भी संकेत दिया कि एमिरेट्स एनबीडी के निवेश के बाद बैंक अधिक महंगे डिपॉजिट जुटाने पर फोकस नहीं करेगा, जिससे वित्त वर्ष 2027 में डिपॉजिट ग्रोथ सिंगल या लो-डबल डिजिट में रह सकती है. वहीं, माइक्रोफाइनेंस से जुड़े दबाव को बैंक ने अपने चरम पर बताया है. जैसे-जैसे स्लिपेज कम होंगे, प्रोविजंस में गिरावट आने की उम्मीद है.
शेयर बाजार में तेज गिरावट
मैनेजमेंट की टिप्पणी के बाद निवेशकों में घबराहट देखी गई. बीएसई पर आरबीएल बैंक का शेयर 11:00 बजे के आसपास 3.43 प्रतिशत गिरकर 310.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इंट्रा-डे में यह करीब 4.96 प्रतिशत तक गिरकर 305.90 रुपये तक पहुंच गया. खबर लिखे जाने तक बैंक का शेयर 2.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 313.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था.
वैश्विक ब्रोकरेज CLSA ने कहा कि बैंक का मुनाफा उम्मीद से लगभग 20% कम रहा, हालांकि लोन और डिपॉजिट ग्रोथ को सकारात्मक संकेत माना गया है. CLSA ने ₹320 के टारगेट के साथ ‘होल्ड’ रेटिंग दी है. वहीं सिटी ने ₹390 के टारगेट प्राइस के साथ ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है, हालांकि कमाई के अनुमान में 3% की कटौती की गई है. कुल मिलाकर 22 एनालिस्ट्स में से 12 ने खरीदारी, 6 ने होल्ड और 4 ने सेल की सलाह दी है.
एक साल में शानदार रिटर्न, फिर भी दबाव
पिछले एक साल में आरबीएल बैंक के शेयरों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है. अप्रैल 2025 में ₹186.85 के स्तर से यह फरवरी 2026 में ₹340.30 तक पहुंच गया था, यानी करीब 82% की तेजी. हालांकि आरबीएल बैंक के तिमाही नतीजे मजबूत रहे, लेकिन भविष्य को लेकर मैनेजमेंट की सावधानी भरी टिप्पणी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है. निवेशक अब क्रेडिट कार्ड और डिपॉजिट ग्रोथ से जुड़ी आगे की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं.
कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि इस सौदे के तहत सन फार्मा, ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की दर से खरीदेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय दवा कंपनी सन फार्मा (Sun Pharmaceutical Industries) ने अमेरिका स्थित Organon & Co को 11.75 अरब डॉलर (कर्ज सहित) के ऑल-कैश सौदे में खरीदने पर सहमति जताई है. यह भारतीय फार्मा क्षेत्र की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों में से एक माना जा रहा है.
कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि इस सौदे के तहत सन फार्मा, ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की दर से खरीदेगी.
वैश्विक विस्तार को मिलेगा बढ़ावा
ऑर्गेनॉन को 2021 में मर्क से अलग किया गया था और यह कंपनी मुख्य रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य और बायोसिमिलर्स पर केंद्रित है. इसके पास 140 देशों में बिकने वाले 70 से अधिक उत्पादों का पोर्टफोलियो है, जिससे सन फार्मा को वैश्विक बाजारों में मजबूत विस्तार मिलेगा.
इस अधिग्रहण के बाद सन फार्मा, भारत की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी, दुनिया की शीर्ष 25 फार्मा कंपनियों में शामिल हो जाएगी. संयुक्त राजस्व लगभग 12.4 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
कंपनी नेतृत्व की प्रतिक्रिया
सन फार्मा के कार्यकारी अध्यक्ष दीलिप सांघवी ने कहा कि ऑर्गेनॉन का पोर्टफोलियो और वैश्विक पहुंच कंपनी के मौजूदा कारोबार के साथ पूरी तरह मेल खाती है. वहीं, प्रबंध निदेशक कीर्ति गनोर्कर ने इसे कंपनी के वैश्विक विस्तार, विशेष रूप से अमेरिका जैसे प्रमुख बाजार में मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.
रणनीति और भविष्य की योजना
यह सौदा सन फार्मा की नवोन्मेषी दवाओं (innovative medicines) के व्यवसाय को मजबूत करने की रणनीति के अनुरूप है. फिलहाल यह सेगमेंट कंपनी की कुल बिक्री का लगभग 20% योगदान देता है, जो अधिग्रहण के बाद बढ़कर लगभग 27% होने की उम्मीद है.
ऑर्गेनॉन की उपस्थिति अमेरिका, यूरोप, चीन, कनाडा और ब्राजील जैसे बड़े बाजारों में है और इसके पास यूरोपियन यूनियन व उभरते बाजारों में छह उत्पादन इकाइयाँ भी हैं.
ऑर्गेनॉन की कार्यकारी अध्यक्ष Carrie Cox ने कहा कि बोर्ड ने कई रणनीतिक विकल्पों की समीक्षा के बाद पाया कि यह ऑल-कैश सौदा शेयरधारकों के लिए तत्काल और आकर्षक मूल्य प्रदान करता है.
भारतीय फार्मा सेक्टर की वैश्विक महत्वाकांक्षा
यह अधिग्रहण इस बात का संकेत है कि भारतीय फार्मा कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति, नवाचार और विकसित बाजारों तक पहुंच को बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठा रही हैं.
इस साझेदारी के साथ कंपनी ने अपना पहला राष्ट्रीय ब्रांड अभियान ‘देश का किसान, देश का असली हीरो’ भी लॉन्च किया है, जो देश के किसानों के योगदान और उनके साहस को समर्पित है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिसर्च आधारित एग्री-इनपुट कंपनी क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन ने अभिनेता अक्षय कुमार को अपना नया ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है. इस साझेदारी के साथ कंपनी ने अपना पहला राष्ट्रीय ब्रांड अभियान ‘देश का किसान, देश का असली हीरो’ भी लॉन्च किया है, जो देश के किसानों के योगदान और उनके साहस को समर्पित है.
कंपनी का कहना है कि इस साझेदारी का उद्देश्य भारत के किसानों से अपने जुड़ाव को और मजबूत करना है, ताकि वे आधुनिक कृषि समाधानों को अपनाकर अपनी खेती की लाभप्रदता बढ़ा सकें. यह अभियान टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न किसान संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से चलाया जाएगा.
क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर अग्रवाल ने कहा, “यह साझेदारी एक राष्ट्रीय आइकन को उन असली नायकों से जोड़ने का प्रयास है, जो देश का पेट भरते हैं. हमारे लिए किसान केवल हितधारक नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का आधार हैं.”
कंपनी ने बताया कि अक्षय कुमार सामाजिक मुद्दों के समर्थक रहे हैं और देश की भावनाओं से गहराई से जुड़े हुए हैं. वह किसानों की चुनौतियों, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की आवाज बनेंगे.
अक्षय कुमार ने कहा, “ऐसे ब्रांड से जुड़ना गर्व की बात है, जो भारत के किसानों के साथ केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों में भी खड़ा है. हम मिलकर भारतीय किसान का सम्मान करेंगे और आधुनिक कृषि के नए युग को प्रेरित करेंगे.”
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत
31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी की परिचालन आय 26,905 मिलियन रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष में 22,299 मिलियन रुपये थी. वहीं, कंपनी का मुनाफा बढ़कर 1,183 मिलियन रुपये हो गया, जो इससे पहले 872 मिलियन रुपये था. हालांकि, कंपनी के खर्च भी बढ़कर 25,643 मिलियन रुपये हो गए, जो वित्त वर्ष 2024 में 21,627 मिलियन रुपये थे.
कंपनी के इस फंडरेज प्लान में दो प्रमुख हिस्से शामिल हैं. पैरेंट कंपनी एक्सिस बैंक ₹1500 करोड़ का निवेश राइट्स इश्यू के जरिए करेगी. वहीं प्राइवेट इक्विटी फर्म केदार कैपिटल ₹750 करोड़ का निवेश प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट के माध्यम से करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एक्सिस ग्रुप की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी एक्सिस फाइनेंस (Axis Finance) ने ₹2250 करोड़ की रिकॉर्ड पूंजी जुटाने की योजना का ऐलान किया है. यह फंडरेज कई मायनों में खास है, क्योंकि पहली बार कंपनी किसी बाहरी निवेशक को शामिल कर रही है. इस कदम को एनबीएफसी बिजनेस को विस्तार देने और क्रेडिट मार्केट में पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा रणनीतिक फैसला माना जा रहा है.
कैसे जुटाए जाएंगे ₹2250 करोड़
कंपनी के इस फंडरेज प्लान में दो प्रमुख हिस्से शामिल हैं. पैरेंट कंपनी एक्सिस बैंक ₹1500 करोड़ का निवेश राइट्स इश्यू के जरिए करेगी. वहीं प्राइवेट इक्विटी फर्म केदार कैपिटल ₹750 करोड़ का निवेश प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट के माध्यम से करेगी. यह पहली बार होगा जब एक्सिस फाइनेंस बाहरी निवेशक से पूंजी जुटाएगी. हालांकि, केदार कैपिटल के निवेश को नियामकीय मंजूरी मिलना अभी बाकी है.
क्यों जरूरी है यह पूंजी
कंपनी के मुताबिक इस पूंजी से उसकी टियर-1 कैपिटल और कुल कैपिटल एडेकेसी मजबूत होगी. इससे कंपनी को रिटेल, एमएसएमई और होलसेल सेगमेंट में ज्यादा लोन देने की क्षमता मिलेगी. एक्सिस फाइनेंस एक डाइवर्सिफाइड लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है, जहां सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों तरह के लोन में विस्तार की योजना है. नई पूंजी इस विस्तार को तेज करने में मदद करेगी.
मैनेजमेंट और निवेशकों का क्या कहना है
अमिताभ चौधरी, जो एक्सिस बैंक के एमडी और सीईओ हैं, का कहना है कि यह निवेश ग्रुप की एनबीएफसी बिजनेस के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है. वहीं एक्सिस फाइनेंस के प्रमुख साई गिरिधर के मुताबिक देश में लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है और यह अतिरिक्त पूंजी टेक्नोलॉजी व डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में निवेश को बढ़ावा देगी. सुनीश शर्मा का मानना है कि भारत के क्रेडिट मार्केट में बड़े अवसर मौजूद हैं और Axis Finance की मजबूत व विविध लेंडिंग उपस्थिति से भविष्य में बेहतर ग्रोथ देखने को मिल सकती है.
एक्सिस बैंक की मौजूदा स्थिति
एक्सिस बैंक के हालिया वित्तीय नतीजों पर नजर डालें तो मार्च 2026 तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा मामूली 0.65% घटकर ₹7,071 करोड़ रहा. हालांकि इस दौरान बैंक की कुल आय करीब 2% बढ़कर ₹38,746 करोड़ तक पहुंच गई. बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹1 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड को भी मंजूरी दी है, हालांकि इसकी रिकॉर्ड डेट अभी तय नहीं हुई है.
आगे की रणनीति और असर
एक्सिस फाइनेंस का यह फंडरेज ऐसे समय पर आ रहा है जब देश में क्रेडिट डिमांड तेजी से बढ़ रही है. अतिरिक्त पूंजी के साथ कंपनी अपने लोन पोर्टफोलियो को बढ़ाने, जोखिम संतुलन सुधारने और डिजिटल व डिस्ट्रीब्यूशन क्षमताओं को मजबूत करने पर फोकस करेगी.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम एक्सिस ग्रुप को एनबीएफसी स्पेस में और प्रतिस्पर्धी बनाएगा और आने वाले समय में इसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद कर सकता है.
शुक्रवार को सेंसेक्स 999 अंकों की गिरावट के साथ 76,664 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 275 अंक टूटकर 23,897 के स्तर पर आ गया. इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹5 लाख करोड़ की कमी कर दी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
तीन दिन की भारी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में आज संभलने के संकेत मिल रहे हैं. बीते सप्ताह निवेशकों के लगभग ₹5 लाख करोड़ डूबने के बाद सोमवार को शुरुआती कारोबार में सकारात्मक माहौल दिखा. वैश्विक संकेतों में सुधार और अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को कुछ हद तक वापस लौटाया है.
पिछला सप्ताह जब बाजार में मचा हाहाकार
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE Sensex) करीब 2,600 अंकों तक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE Nifty 50) भी भारी दबाव में रहा. शुक्रवार को सेंसेक्स 999 अंकों की गिरावट के साथ 76,664 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 275 अंक टूटकर 23,897 के स्तर पर आ गया. इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹5 लाख करोड़ की कमी कर दी.
आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव
गिरावट का सबसे बड़ा असर आईटी शेयरों पर देखने को मिला. Infosys के शेयर लगभग 7% तक लुढ़क गए, जबकि TCS, HCLTech और Tech Mahindra में भी 1 से 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा ICICI Bank, Hindustan Unilever और Bharti Airtel जैसे दिग्गज शेयर भी दबाव में रहे. वहीं दूसरी ओर Bajaj Finance, State Bank of India और HDFC Bank जैसे शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली.
गिरावट की बड़ी वजहें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ सक्रिय रहे. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को लेकर आशंकाएं बढ़ाईं. इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली ने मिलकर बाजार पर दबाव बना दिया.
आज के संकेत, राहत या नया उतार-चढ़ाव
सोमवार सुबह बाजार के लिए संकेत बेहतर नजर आए. GIFT निफ्टी में करीब 190 अंकों की तेजी देखी गई, जिससे मजबूत शुरुआत की उम्मीद बनी. एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख रहा. जापान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे. वहीं अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों की मजबूती ने निवेशकों को राहत का संकेत दिया.
आज किन शेयरों पर नजर
आज कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे और कॉरपोरेट अपडेट बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. Coal India, UltraTech Cement, Paytm, Varun Beverages और SBI Cards जैसी कंपनियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी. वहीं, Paytm Payments Bank से जुड़ी खबर ने बाजार का ध्यान खींचा है. RBI द्वारा बैंकिंग लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद इसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसका असर Paytm के शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा स्थिति में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. निवेशकों को सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत है. मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना और वैश्विक संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखना अहम रहेगा.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
एक फाउंडेशन डे जिसे भूलना मुश्किल या शायद, जिसे आप भूल ही नहीं सकते.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
शनिवार सुबह, मुंबई. जियो कन्वेंशन सेंटर का जैस्मिन हॉल, एक ऐसा स्थल जो 500 से अधिक लोगों को बैठाने में सक्षम ह, सेबी के 38वें फाउंडेशन डे के लिए भर गया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस अवसर की शोभा बढ़ाई. सेबी प्रमुख तुहिन कांता पांडे ने अपना संबोधन दिया. एफएम ने भी अपना भाषण दिया. इसी बीच, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के एक पूर्णकालिक सदस्य ने पंजाबी भांगड़ा पोशाक पहनकर नृत्य किया.
अनुमान लगाइए, लोग अभी भी किस बारे में बात कर रहे हैं?
भाषण: कुछ न कहने की एक मास्टरक्लास
आइए संबोधनों से शुरू करें. दोनों भाषण, सबसे उदार शब्द का उपयोग करें तो, व्यापक थे. T+1 सेटलमेंट का उल्लेख हुआ. ASBA की सराहना हुई. UPI-लिंक्ड IPOs को उनका अनिवार्य सम्मान का क्षण मिला. कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को बुलाया गया, परखा गया, अपर्याप्त पाया गया, और होमवर्क देकर वापस भेज दिया गया. म्युनिसिपल बॉन्ड्स ने कैमियो किया. साइबर सुरक्षा को अपना अलग पैराग्राफ मिला, जिसमें यह वाक्य शामिल था "हमले के उपकरण तेज गति से विकसित हो रहे हैं, और रक्षा के उपकरणों को उससे भी तेज विकसित होना चाहिए", एक पंक्ति जो 2009 के आसपास से पृथ्वी पर कहीं भी बने किसी भी नियामक दस्तावेज़ में आराम से फिट हो सकती है.
बताया जाता है कि दर्शकों में एक सज्जन भाषणों के दौरान लिंक्डइन चैट पढ़ते हुए देखे गए, जो सोचने पर शायद कमरे में समय का सबसे प्रभावी उपयोग था.
न्याय की बात करें तो, आँकड़े थे. वित्त वर्ष 2025-26 में 366 IPOs (हम्म). ₹1.9 लाख करोड़ जुटाए गए (ऊबाऊ). सुप्रीम कोर्ट में 90 प्रतिशत से अधिक सफलता दर (जाँच की ज़रूरत है). NSDL और CDSL के पास $5 ट्रिलियन से अधिक की डिमैट प्रतिभूतियाँ (ठीक है). ये वास्तव में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हैं (सेबी की?), जो ऐसे स्वर में प्रस्तुत की गईं जैसे कोई सीरियल के डिब्बे पर सामग्री पढ़ रहा हो.
"बेहतर बाज़ार, केवल बड़े बाज़ार नहीं," एफएम ने जोशीले ढंग से कहा, ऐसे हॉल में जहाँ लोग बाज़ारों को नियंत्रित करते हैं. तालियाँ शिष्ट थीं. उस तरह की तालियाँ जो तब बजती हैं जब 500 लोग एक साथ याद करते हैं कि उन्हें ताली बजानी चाहिए.
KYC सरलीकरण का आग्रह किया गया. वैश्विक परामर्श का आग्रह किया गया. सिद्धांत-आधारित विनियमन का आग्रह किया गया. म्युनिसिपल बॉन्ड्स का आग्रह किया गया. एक प्रतिभागी ने कथित तौर पर अपने सहकर्मी से झुककर फुसफुसाया, "क्या वास्तव में कुछ हो रहा है, या हम आग्रह करते-करते विकसित भारत तक पहुँचेंगे?" सहकर्मी ने समझदारी से कुछ नहीं कहा.
पांडे स्वयं उस शांत अधिकार के साथ बोले जैसे कोई व्यक्ति जिसने कभी रात 11:45 बजे "अर्जेंट" लिखकर ईमेल नहीं भेजा और उसे इस पर गर्व है. हर वाक्य संतुलित था. हर सुझाव नपा-तुला था. हर सिफारिश, शब्द के सटीक चिकित्सीय अर्थ में, उचित थी. दर्शकों ने सुना. दर्शकों ने सिर हिलाया. कई दर्शक शायद कुछ क्षणों के लिए ध्यान की अवस्था में पहुँच गए.
और फिर, असली शो.
फिर आया सांस्कृतिक कार्यक्रम
सेबी के कर्मचारी, वही लोग जो अपने दिन ऑफर डॉक्यूमेंट्स की जांच करने और शो-कॉज़ नोटिस जारी करने में बिताते हैं, बॉलीवुड प्रस्तुतियों के लिए मंच पर आए. हॉल, जिसने अब तक अनुपालन सेमिनार जैसी गरिमा बनाए रखी थी, अचानक याद करने लगा कि उसमें धड़कन भी है.
और वहाँ, नर्तकों के बीच, पूर्ण पंजाबी भांगड़ा वेशभूषा में सजे, थे कमलेश वर्शनेय. पूर्णकालिक सदस्य (1990-बैच IRS अधिकारी), बोर्ड-स्तरीय पदाधिकारी. प्रतिभूति बाज़ार के नियामक. भांगड़ा करते हुए.
उनके बहुत बड़े श्रेय के लिए: उस व्यक्ति ने पूरी तरह समर्पण किया. यह किसी वरिष्ठ अधिकारी का कार्यालय पार्टी में अनमने ढंग से किया गया अजीब सा कदम नहीं था. यह भागीदारी थी. यह आनंद था. यह सेबी का एक पूर्णकालिक सदस्य था जो स्वयं को उस तरीके से व्यक्त कर रहा था, जिस तरह से कोई सेबी सर्कुलर कभी कुछ व्यक्त नहीं कर पाया.
दर्शक, जिन्हें एक घंटे तक लगातार आग्रहों से घेरा गया था, फूट पड़े. यहाँ, अंततः, सार था. यहाँ पारदर्शिता थी. यहाँ एक ऐसा नियामक था जिसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं था — निश्चित रूप से उसके डांस मूव्स नहीं.
किसी को उस सटीक क्षण का टाइमस्टैम्प करना चाहिए जब हॉल "सम्मानजनक ध्यान" से "वास्तविक उत्साह" में बदल गया. यह ठीक ढोल के साथ मेल खाता था.
माधबी के बाद का जीवन: महान शांति
कमरे में मौजूद हाथी या बल्कि, एक विशेष हाथी की स्पष्ट अनुपस्थिति को स्वीकार करना जरूरी है.
माधबी पुरी बुच पिछले साल फरवरी में सेबी से विदा हो गईं. उनके कार्यकाल पर किसी की भी राय हो और राय बहुत हैं, जो एक रंगीन स्पेक्ट्रम में फैली हैं, कोई भी उन्हें शांत संस्थान चलाने का आरोप नहीं लगा सकता. माधबी के तहत, सेबी अपॉइंटमेंट टेलीविजन थी. नियम ऐसे गति से सामने आए मानो चेयरपर्सन ने तय कर लिया हो कि नींद कमतर नियामकों के लिए है. प्रवर्तन कार्रवाइयाँ बिना चेतावनी के आईं. फिन-फ्लुएंसर्स रोए. परामर्श पत्र मानसून की बारिश की तरह गिरे. विवाद अपने समय पर, बिना बुलाए और बिना डरे आए.
कर्मचारियों ने धरने दिए. मेमो उड़ते रहे. कर्मचारियों को कथित तौर पर टाइपो के कारण छुट्टियों के बीच वापस बुलाया गया. आपके सुबह के टूथपेस्ट का ब्रांड भी उनकी जानकारी से परे नहीं था. यह पूरी तरह आपकी चिंता के साथ संबंध पर निर्भर करता था या तो रोमांचक या थकाने वाला.
माधबी के तहत सेबी उद्देश्य के साथ अराजकता थी, तेज, विवादास्पद, कभी-कभी चकित करने वाली, लेकिन कभी उबाऊ नहीं.
तुहिन कांता पांडे के तहत सेबी एक सावधानीपूर्वक व्यवस्थित फाइलिंग कैबिनेट है. सब कुछ अपनी जगह पर. हर पहल पर ठीक से परामर्श. हर हितधारक की विधिवत भागीदारी. हर भाषण पेशेवर ढंग से दिया गया और तुरंत भुला दिया गया.
जहाँ माधबी कर्मचारियों को सतर्क रखती थीं, पांडे ने उन्हें पंजों के बल चलना छोड़ने दिया है. BKC के गलियारे कथित तौर पर शांत हैं. परामर्श पत्र समय पर जारी होते हैं. हितधारकों से सही क्रम में परामर्श किया जाता है. किसी को भी किसी भी समय नाटकीय रूप से कहीं बुलाया नहीं जा रहा है. सेबी के कर्मचारियों का सामूहिक जबड़ा, जो वर्षों तक कसा हुआ था, अब पूरी तरह ढीला हो गया है और उस ढीलापन में कहीं सारा ड्रामा, ऊर्जा, और सच कहें तो कथा भी ढीली पड़ गई है.
सेबी एक सोप ओपेरा से सरकारी राजपत्र अधिसूचना बन गई है. तकनीकी रूप से सही. पूरी तरह अपठनीय.
निष्कर्ष
यह है जो सेबी के 38वें फाउंडेशन डे ने वास्तव में दिखाया, अनजाने में और शानदार ढंग से:
भाषणों ने हमें बताया कि सेबी ने क्या किया है, क्या करना चाहिए, और क्या करने के लिए उसे तत्काल विचार करना चाहिए. नृत्य प्रस्तुति ने हमें दिखाया कि सेबी क्या है, इंसानों का एक संगठन, जो जब आधा मौका भी मिलता है, तो भांगड़ा पोशाक पहनकर 500 लोगों और वित्त मंत्री के सामने पूरे आनंद के साथ प्रदर्शन करेगा.
इनमें से एक चीज़ ने संस्थागत विश्वसनीयता बनाई. दूसरी ने उस शाम का एकमात्र पल बनाया जिसे कोई सोमवार के बाद भी याद रखेगा.
कमलेश वर्शनेय, यदि आप यह पढ़ रहे हैं: बाज़ार जटिल हो सकते हैं, चुनौतियाँ संरचनात्मक हो सकती हैं, बॉन्ड मार्केट को गहराई की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन आपको, महोदय, आग्रह करने की ज़रूरत नहीं थी. आपने बस नृत्य किया.
एक ऐसे सेबी में जो बहुत, बहुत अच्छी तरह स्थिर खड़ा रहना सीख गया है... यह मायने रखता है. अंततः, यही नेतृत्व है.
लेखक ने भाषण और प्रस्तुति दोनों में भाग लिया और इसलिए दोनों पर राय रखने के लिए पूरी तरह उपयुक्त है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
PlaySimple Games, स्वीडन की Modern Times Group (MTG) की सब्सिडियरी है. MTG ने साल 2021 में इस कंपनी का अधिग्रहण किया था. वर्तमान में MTG समूह की कंपनी में 100% हिस्सेदारी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मोबाइल गेमिंग कंपनी PlaySimple Games ने पूंजी बाजार में कदम रखने की तैयारी तेज कर दी है. कंपनी ने ₹3,150 करोड़ तक जुटाने के लिए अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति विनियम बोर्ड (SEBI) के पास जमा कर दिया है. यह इश्यू पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल (OFS) पर आधारित होगा.
OFS के जरिए जुटेगा पूरा पैसा
IPO के तहत कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा. पूरा इश्यू ऑफर-फॉर-सेल होगा, जिसमें प्रमोटर MTGx Gaming Holding AB अपनी हिस्सेदारी बेचेगी. इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई राशि सीधे प्रमोटर के पास जाएगी, कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा.
स्वीडिश ग्रुप की सहायक कंपनी
PlaySimple Games, स्वीडन की Modern Times Group (MTG) की सब्सिडियरी है. MTG ने साल 2021 में इस कंपनी का अधिग्रहण किया था. वर्तमान में MTG समूह की कंपनी में 100% हिस्सेदारी है.
भारत की सबसे बड़ी कैजुअल गेमिंग कंपनी होने का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी वित्त वर्ष 2025 के रेवेन्यू के आधार पर खुद को भारत की सबसे बड़ी “प्योर-प्ले कैजुअल मोबाइल गेमिंग” कंपनी बताती है. भारत में इसका प्रमुख मुकाबला Nazara Technologies से है.
30 लाइव गेम्स और ग्लोबल यूजर बेस
बेंगलुरु स्थित कंपनी के पोर्टफोलियो में 5 प्रमुख कैटेगरी, सर्च, क्रॉसवर्ड, एनाग्राम, वर्ड गेम्स और नॉन-वर्ड पजल शामिल हैं. इन श्रेणियों में कंपनी के पास 30 लाइव कैजुअल मोबाइल गेम्स हैं.
दिसंबर 2025 तक, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में कंपनी के करीब 49.9 लाख डेली एक्टिव यूजर्स थे. इसके अलावा, कंपनी की सहायक कंपनियां इजरायल और सिंगापुर में भी मौजूद हैं.
किन बैंकों को मिली जिम्मेदारी
इस IPO को मैनेज करने के लिए Axis Capital, J.P. Morgan India और Morgan Stanley India को मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया गया है.
वित्तीय प्रदर्शन: मुनाफा घटा, रेवेन्यू बढ़ा
कंपनी का कैलेंडर ईयर 2025 में मुनाफा 359 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 521.1 करोड़ रुपये के मुकाबले 31.1% कम है. हालांकि, इसी दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 20.4% बढ़कर 2,259.8 करोड़ रुपये हो गया, जो 2024 में 1,876.9 करोड़ रुपये था.
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### **ग्लोबल स्तर पर कड़ी टक्कर**
अंतरराष्ट्रीय बाजार में PlaySimple Games का मुकाबला Roblox Corporation और Take-Two Interactive Software जैसी दिग्गज कंपनियों से है.
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### **निष्कर्ष**
PlaySimple Games का IPO ऐसे समय आ रहा है जब भारत में गेमिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है. हालांकि, OFS स्ट्रक्चर और घटता मुनाफा निवेशकों के लिए अहम फैक्टर रहेंगे. आने वाले समय में इस IPO को बाजार से कैसा रिस्पॉन्स मिलता है, इस पर नजर रहेगी.
JSW और JFE की यह साझेदारी न सिर्फ ओडिशा बल्कि पूरे भारत के स्टील सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. इससे उत्पादन क्षमता, तकनीक और रोजगार, तीनों क्षेत्रों में बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) और जापान की जेएफई स्टील (JFE Steel Corporation) ने ओडिशा में स्टील उत्पादन बढ़ाने के लिए 50:50 की संयुक्त साझेदारी (JV) बनाने का ऐलान किया है. इस प्रोजेक्ट में करीब ₹32,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जो हाल के वर्षों में इस क्षेत्र का सबसे बड़ा विदेशी समर्थित निवेश माना जा रहा है.
संबलपुर प्लांट की क्षमता 10 MTPA तक बढ़ेगी
इस ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत ओडिशा के संबलपुर स्थित प्लांट में 6 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी. इससे प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 10 MTPA हो जाएगी. देश में इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार किया जा रहा है.
BPSL के ऑपरेशन नई कंपनी में ट्रांसफर होंगे
समझौते के तहत Bhushan Power and Steel Ltd (BPSL) के इंटीग्रेटेड स्टील ऑपरेशंस को नई जॉइंट वेंचर कंपनी में ट्रांसफर किया जाएगा. इस नई कंपनी का नाम JSW JFE Steel Ltd रखा जाएगा. इसमें JFE की 50% हिस्सेदारी होगी, जिसकी वैल्यू करीब ₹15,750 करोड़ आंकी गई है.
हाई-ग्रेड और स्पेशल स्टील पर फोकस
दोनों कंपनियों ने कहा कि यह साझेदारी न सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि हाई-ग्रेड और स्पेशलाइज्ड स्टील के उत्पादन को भी तेज करेगी. इससे भारत के स्टील सेक्टर को तकनीकी मजबूती मिलेगी.
सरकार की मौजूदगी में लॉन्च हुआ नया ब्रांड
इस जॉइंट वेंचर की नई पहचान का अनावरण ओडिशा में आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया. इसमें राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारी, दोनों कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और भारत में जापान के राजदूत भी मौजूद रहे.
ओडिशा के लिए सबसे बड़ा जापानी निवेश
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि यह राज्य में अब तक का सबसे बड़ा जापानी निवेश है. उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक स्टील उत्पादन को 100 MTPA तक पहुंचाना है. इस प्रोजेक्ट से करीब ₹1 लाख करोड़ के निवेश और 2 लाख से ज्यादा नौकरियों के अवसर पैदा हो सकते हैं.
JSW और JFE की ताकत का होगा मेल
सज्जन जिंदल, चेयरमैन, JSW ग्रुप ने कहा कि यह साझेदारी JSW की मजबूत क्रियान्वयन क्षमता और JFE की उन्नत तकनीक को एक साथ लाएगी, जिससे भारत में स्टील उत्पादन को नई दिशा मिलेगी. वहीं, योशिहिसा कितानो ने इसे दोनों कंपनियों के सहयोग का अगला चरण बताया.
लोकेशन का मिलेगा बड़ा फायदा
संबलपुर स्थित यह प्लांट रेल और सड़क नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. साथ ही, यह भारत के प्रमुख आयरन ओर (लौह अयस्क) बेल्ट के करीब स्थित है, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता और लागत दोनों में फायदा मिलेगा.
JSW का विस्तार प्लान
JSW Steel की मौजूदा कच्चे स्टील की क्षमता 35.9 MTPA है, जिसमें 1.5 MTPA अमेरिका में शामिल है. कंपनी अगले तीन साल में इसे बढ़ाकर 43.9 MTPA करने की योजना बना रही है. वहीं, JFE Steel जापान की प्रमुख स्टील कंपनियों में से एक है, जो एडवांस टेक्नोलॉजी और स्पेशल स्टील के लिए जानी जाती है.
भारत-केंद्रित फंड्स में बिकवाली का दबाव कम हुआ है. साप्ताहिक आउटफ्लो 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर 180 मिलियन डॉलर रह गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक बाजारों में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है और इसका असर भारत पर भी दिखने लगा है. Elara Capital की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव में कमी के बाद लगातार चौथे हफ्ते वैश्विक लिक्विडिटी मजबूत बनी हुई है. इसी बीच भारत में भी सात हफ्तों बाद पहली बार इक्विटी में शुद्ध निवेश (इनफ्लो) दर्ज किया गया है.
अमेरिका और ग्लोबल फंड्स में मजबूत निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक महीने में अमेरिकी इक्विटी बाजारों में हर हफ्ते 10 से 22 अरब डॉलर के बीच मजबूत निवेश देखने को मिला. ग्लोबल-मैंडेटेड फंड्स में भी पांच हफ्तों का उच्चतम स्तर दर्ज हुआ, जहां 16 अरब डॉलर का इनफ्लो आया. वहीं, ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट (GEM) फंड्स में हर हफ्ते 1 से 2 अरब डॉलर का स्थिर निवेश जारी रहा.
इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में रिकॉर्ड इनफ्लो
इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में 1.4 अरब डॉलर का साप्ताहिक रिकॉर्ड निवेश दर्ज किया गया. इसमें ताइवान आधारित निवेश रणनीतियों का बड़ा योगदान रहा. हालांकि, यूरोप और चीन में पिछले पांच हफ्तों से लगातार निवेशकों की निकासी (रिडेम्प्शन) जारी है, जो वहां के बाजारों पर दबाव बनाए हुए है.
भारत में 7 हफ्तों बाद लौटी पॉजिटिव फ्लो
भारत के लिए यह एक सकारात्मक संकेत रहा कि सात हफ्तों के बाद पहली बार शुद्ध निवेश देखने को मिला. एलोकेशन और डेडिकेटेड फंड्स के जरिए कुल 106 मिलियन डॉलर का नेट इनफ्लो दर्ज हुआ. इससे पहले लगातार छह हफ्तों में करीब 5 अरब डॉलर की निकासी हुई थी.
बिकवाली का दबाव घटा, लेकिन आउटफ्लो जारी
भारत-केंद्रित फंड्स में बिकवाली का दबाव कम हुआ है. साप्ताहिक आउटफ्लो 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर 180 मिलियन डॉलर रह गया. फिर भी, यह भारत-डेडिकेटेड रणनीतियों में लगातार नौवां हफ्ता रहा जब आउटफ्लो दर्ज किया गया.
ETF में निवेश बढ़ा, लॉन्ग-ओनली फंड्स में निकासी
भारतीय बाजार में ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) के जरिए 220 मिलियन डॉलर का निवेश आया. वहीं, लॉन्ग-ओनली फंड्स में 400 मिलियन डॉलर की निकासी जारी रही. अच्छी बात यह रही कि अमेरिकी फंड्स में 225 मिलियन डॉलर का इनफ्लो दर्ज हुआ, जबकि इससे पहले सात हफ्तों में 3.3 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी थी. यह बाजार में स्थिरता के शुरुआती संकेत माने जा रहे हैं.
कमोडिटी बाजार में निवेश सुस्त
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि युद्ध के दौरान कमोडिटी आधारित शेयरों में निवेश घटा था और अब तनाव कम होने के बावजूद इसमें खास सुधार नहीं हुआ है. एनर्जी इक्विटी फंड्स में पिछले तीन हफ्तों से आउटफ्लो धीरे-धीरे कम हुआ है.
सोने में निवेश स्थिर हुआ है, लेकिन यह पहले की तुलना में धीमा है. वहीं, चांदी में जनवरी 2026 से ही कमजोरी बनी हुई है.
विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक धीरे-धीरे जोखिम वाले एसेट्स की ओर लौट रहे हैं. भारत में निवेश प्रवाह का स्थिर होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, खासकर तब जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता दिख रहा है.
वैश्विक स्तर पर बेहतर माहौल और घरेलू बाजार में घटती बिकवाली भारत के लिए राहत भरी खबर है. आने वाले समय में अगर यह रुझान जारी रहता है, तो भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है.
एक तरफ जहां कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली. वैश्विक चुनौतियों के बीच कंपनी ने अपने विविध कारोबार के दम पर संतुलन बनाए रखा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का प्रदर्शन मिश्रित रहा. एक तरफ जहां मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली. वैश्विक चुनौतियों के बीच कंपनी ने अपने विविध कारोबार के दम पर संतुलन बनाए रखा.
मुनाफा 13% घटा, 16,971 करोड़ रुपये पर आया
मार्च तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 13% घटकर 16,971 करोड़ रुपये रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में यह 19,407 करोड़ रुपये था. वहीं, पिछली तिमाही के मुकाबले भी मुनाफे में करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई.
रेवेन्यू में 13% की बढ़त, 2.98 लाख करोड़ तक पहुंचा
हालांकि, कंपनी की कुल आय में मजबूती बनी रही. ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 13% बढ़कर 2.98 लाख करोड़ रुपये हो गया. यह इशारा करता है कि कंपनी के मुख्य बिजनेस सेगमेंट अब भी मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं.
EBITDA और मार्जिन पर दबाव
ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस की बात करें तो EBITDA में मामूली गिरावट आई और यह 0.3% घटकर 48,588 करोड़ रुपये रह गया. वहीं, EBITDA मार्जिन 200 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 14.9% पर आ गया, जो लागत दबाव और बाजार की चुनौतियों को दर्शाता है.
डिविडेंड का ऐलान
कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 6 रुपये के डिविडेंड की सिफारिश की है, जिससे निवेशकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.
कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा कि पूरे वित्त वर्ष के दौरान भू-राजनीतिक अस्थिरता, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और बदलते वैश्विक व्यापार माहौल का असर कारोबार पर पड़ा. उन्होंने कहा कि कंपनी की विविध बिजनेस मौजूदगी और घरेलू बाजार में मजबूत पकड़ ने इन चुनौतियों से निपटने में मदद की.
मुख्य कारोबार से मिली मजबूती
कंपनी के O2C (ऑयल-टू-केमिकल्स), डिजिटल सेवाएं और रिटेल सेगमेंट ने डबल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की. डिजिटल और रिटेल कारोबार की मजबूती ने ऊर्जा क्षेत्र में आई कमजोरी की भरपाई की.
जियो का प्रदर्शन दमदार, मुनाफा 13% बढ़ा
रिलायंस जियो ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया. कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा 13% बढ़कर 7,935 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 7,022 करोड़ रुपये था.
ARPU और यूजर बेस में भी इजाफा
जियो का औसत प्रति यूजर रेवेन्यू (ARPU) 3.8% बढ़कर 214 रुपये हो गया. साथ ही, कंपनी का ग्राहक आधार लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे भविष्य में डिजिटल सेवाओं से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.
आगे की रणनीति: डिजिटल और AI पर फोकस
जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने संकेत दिया कि कंपनी अब एडवांस कनेक्टिविटी और कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं को देशभर में विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज का चौथी तिमाही का प्रदर्शन यह दिखाता है कि वैश्विक दबावों के बावजूद कंपनी की बुनियादी ताकत बरकरार है. मुनाफे में गिरावट जरूर चिंता का विषय है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और डिजिटल बिजनेस की मजबूती भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है.