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प्रोजेक्ट लोन पर RBI की बड़ी राहत: अब केवल 1% प्रावधान अनिवार्य

RBI की ये नई गाइडलाइंस परियोजना वित्त के क्षेत्र में ऋणदाताओं को लिक्विडिटी और जोखिम प्रबंधन में राहत देने के उद्देश्य से लाई गई हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों और अन्य ऋणदाताओं को बड़ी राहत देते हुए परियोजना वित्त से जुड़े नए मानदंड जारी किए हैं. अब वाणिज्यिक रियल एस्टेट को छोड़कर सभी परियोजनाओं के निर्माण चरण में सिर्फ 1% सामान्य प्रावधान अनिवार्य होगा. इससे पहले मई 2023 में जारी मसौदे में इसे 5% तक प्रस्तावित किया गया था.

वाणिज्यिक रियल एस्टेट के लिए प्रावधानों में आंशिक राहत

नई गाइडलाइंस के अनुसार, वाणिज्यिक रियल एस्टेट (CRE) के लिए निर्माण चरण में 1.25% सामान्य प्रावधान, और वाणिज्यिक रिहायशी परियोजनाओं (CRE-RH) के लिए 1% प्रावधान रखा गया है. एक बार जब परियोजना परिचालन में आ जाती है (यानी ब्याज और मूलधन की अदायगी शुरू होती है), तो प्रावधान की आवश्यकता घट जाएगी. CRE के लिए 1%, CRE-RH के लिए 0.75% और अन्य परियोजनाओं के लिए 0.40% तक हो जाएगी.

मौजूदा परियोजनाओं पर लागू नहीं होंगे नए प्रावधान

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि ये प्रावधान केवल नई परियोजनाओं पर लागू होंगे, और पहले से चल रही परियोजनाओं पर इनकी आवश्यकता नहीं होगी. यह ऋणदाताओं के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, क्योंकि मसौदा मानदंडों में मौजूदा परियोजनाओं पर भी उच्च प्रावधान प्रस्तावित थे.

 ऋणदाताओं के निवेश के लिए नई सीमाएं तय

आरबीआई ने परियोजना में ऋणदाताओं के न्यूनतम निवेश की सीमा भी तय की है. इसमें ₹1,500 करोड़ तक के कुल निवेश वाली परियोजनाओं में किसी भी व्यक्तिगत ऋणदाता का निवेश कुल का कम से कम 10% होना चाहिए. अगर कुल निवेश ₹1,500 करोड़ से अधिक है, तो व्यक्तिगत ऋणदाता को कम से कम ₹150 करोड़ या कुल का 5% (जो अधिक हो) निवेश करना होगा.

ऋणदाताओं को राहत

रेटिंग एजेंसी इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ए.एम. कार्तिक ने कहा कि, "परियोजना वित्त पर अंतिम दिशानिर्देश ऋणदाताओं के लिए राहत हैं क्योंकि प्रावधान अब परिचालन परियोजनाओं के लिए केवल 0.4% पर कायम हैं. मसौदे में यह 1% से 2.5% तक था." उन्होंने यह भी जोड़ा कि एनबीएफसी पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है क्योंकि वे पहले से ही अपेक्षित ऋण नुकसान के आकलन के अनुसार पर्याप्त प्रावधान कर चुके हैं.

भूमि अधिकार और न्यूनतम खर्च की शर्तें

नए दिशानिर्देशों में यह अनिवार्य किया गया है कि ऋण जारी करने से पहले परियोजना के लिए आवश्यक भूमि और मार्ग संबंधी अधिकार सुनिश्चित किए जाएं.

- पीपीपी मॉडल की परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 50% लागत का वहन होना चाहिए.
- गैर-पीपीपी और गैर-बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए यह सीमा 75% तय की गई है.

डिफॉल्ट और समाधान प्रक्रिया के लिए सख्त दिशा-निर्देश

नई नीति के तहत अगर कोई परियोजना दबाव में आती है तो ऋणदाता को डिफॉल्ट की तारीख से 30 दिन के भीतर समाधान योजना की प्रारंभिक समीक्षा करनी होगी.

- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए डीसीसीओ (DCCO) की समय-सीमा तीन साल और
- गैर-बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए दो साल तक बढ़ाई जा सकेगी.

क्लियरेंस में देरी, लागत में वृद्धि या परियोजना के दायरे में बदलाव को ध्यान में रखते हुए डीसीसीओ का विस्तार अनुमत होगा.

 


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