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RBI हर 5-7 साल में करेगा बैंकिंग नियमों की समीक्षा, ‘रेगुलेटरी रिव्यू सेल’ का गठन
RBI का यह कदम भारतीय बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं के नियम-कायदों की समय-समय पर समीक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. अब हर 5 से 7 साल में इन नियमों की व्यवस्थित और व्यापक समीक्षा की जाएगी. इसके लिए RBI ने एक नया प्रकोष्ठ – रेगुलेटरी रिव्यू सेल (RRC) – गठित किया है, जो 1 अक्टूबर 2025 से काम शुरू करेगा. केंद्रीय बैंक का उद्देश्य इस कदम के जरिए विनियमों की समीक्षा की प्रक्रिया को संस्थागत रूप देना और इसे अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाना है.
रेगुलेटरी रिव्यू सेल: नियमों की आंतरिक समीक्षा करेगा प्रकोष्ठ
RBI ने जानकारी दी कि RRC के अंतर्गत सभी मौजूदा नियमों की हर 5 से 7 वर्षों में आंतरिक समीक्षा की जाएगी. यह सेल विनियमन विभाग के अंतर्गत कार्य करेगा और चरणबद्ध तरीके से नियमों की समीक्षा करेगा. इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समय के साथ बदलते वित्तीय परिदृश्य और तकनीकी विकास के अनुरूप नियमों को अद्यतन किया जा सके.
स्वतंत्र सलाहकार समूह की भी स्थापना, उद्योग विशेषज्ञ होंगे शामिल
RBI ने समीक्षा प्रक्रिया को और अधिक समावेशी बनाने के लिए एक स्वतंत्र सलाहकार समूह (Advisory Group on Regulation – AGR) भी गठित किया है. इसमें RBI के बाहर के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि उद्योग की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञता को नियमों की समीक्षा में शामिल किया जा सके. इस छह सदस्यीय समूह का नेतृत्व भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक राणा आशुतोष कुमार सिंह करेंगे. RBI ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर इस समूह में अतिरिक्त विशेषज्ञों को भी शामिल किया जा सकता है.
तीन साल का कार्यकाल, दो साल के लिए बढ़ाने का प्रावधान
स्वतंत्र सलाहकार समूह का प्रारंभिक कार्यकाल तीन साल का होगा, जिसे आवश्यकतानुसार अगले दो वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है. यह समूह रेगुलेटरी रिव्यू सेल को विशेषज्ञ राय देने और हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का कार्य करेगा.
मई में पेश किया गया था रेगुलेशन फ्रेमवर्क का मसौदा
इस साल मई में RBI ने नियमों को तैयार करने और संशोधित करने के लिए एक फ्रेमवर्क डॉक्युमेंट जारी किया था. इसमें कहा गया था कि किसी भी नए विनियम को लागू करने से पहले उसका प्रभाव विश्लेषण (Impact Assessment) किया जाना चाहिए. साथ ही यह प्रस्ताव भी रखा गया था कि RBI को हितधारकों और आम जनता को कम से कम 21 दिनों का समय देना चाहिए ताकि वे नियमों पर अपनी राय और सुझाव दे सकें.
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