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गर्मी से राहत देने वाली बारिश से आखिर RBI के माथे पर क्यों आ रहा है पसीना?  

महंगाई के मुद्दे पर RBI को पहले काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है. उसे इतिहास में पहली बार स्पष्टीकरण भी देना पड़ा था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

गर्मी से राहत देने वाली बारिश भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI की टेंशन बढ़ा रही है. दरअसल, तेज बारिश से सब्जियों की कीमतों में और बढ़ोत्तरी की आशंका बढ़ गई है. यदि ये आशंका सही साबित होती है, तो खुदरा मुद्रास्फीति दर में इजाफा हो सकता है. अगर मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो RBI को उसे नीचे लाने के लिए फिर मशक्कत करनी पड़ेगी और नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की आस फिर टूट जाएगी. महंगाई के चलते पिछला कुछ समय RBI के लिए परेशानी वाला रहा है. उसे इतिहास में पहली बार इस बारे में स्पष्टीकरण भी देना पड़ा है.  

आज जारी होंगे आंकड़े
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सब्जियों की ऊंची कीमत के चलते जून की खुदरा मुद्रास्फीति 4.9% हो सकती है, जो मई में 4.75% पर थी. एक सर्वेक्षण में शामिल 18 अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सब्जियों के चढ़ते भाव महंगाई दर बढ़ा सकते हैं. यह छह महीनों में खुदरा मुद्रास्फीति में पहली वृद्धि हो सकती है. सर्वेक्षण में अर्थशास्त्रियों ने  मुद्रास्फीति का अनुमान 4.56% से 5.14% के बीच दर्शाया है. खुदरा मुद्रास्फीति का आधिकारिक डेटा 12 जुलाई यानी आज जारी होने वाला है।

कृषि को पहुंचा नुकसान
रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर औसतन 4.5% पर रह सकती है. हालांकि, लगातार बढ़ती खाद्य मुद्रास्फीति RBI के लिए एक बड़ा सिरदर्द रही है. सब्जियों के अलावा, दाल और दूध की कीमतों में भी इजाफा हुआ है.खाद्य मुद्रास्फीति ने नवंबर 2023 से लगातार 8% से अधिक की वृद्धि दर्ज की है. टमाटर के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं. कई शहरों में इसकी कीमतों ने शतक लगा लिया है.  पहले भीषण गर्मी और अब बारिश से उत्तरी भारत में कृषि को नुकसान पहुंचा है. इससे टमाटर, आलू और प्याज की कीमतें काफी चढ़ गई हैं.

रेपो रेट पर क्या होगा? 
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पिछली कई बार से नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखता आ रहा है. जून में हुई RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला लिया गया था. हालांकि, यह माना जा रहा है कि MPC की अगली बैठक में रेपो रेट में कटौती का ऐलान किया जा सकता है. यानी कर्ज कुछ सस्ता हो सकता है. लेकिन महंगाई इस राह में फिर बाधा बनती नजर आ रही है. यदि महंगाई का पहिया इसी रफ्तार से घूमता रहा, तो रिजर्व बैंक कटौती की आस को तोड़ते हुए नीतिगत ब्याज दरों में इजाफे को मजबूर हो सकता है. यदि ऐसा हुआ, तो फिर आपकी EMI बढ़ने की आशंका भी जन्म ले लेगी.

तब देना पड़ा था स्पष्टीकरण
बढ़ती महंगाई RBI के लिए भी मुश्किल पैदा कर सकती है. चढ़ते दामों के चलते ही उसे 2022-23 में शर्मसार होना पड़ा था. अब तक के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था कि RBI को महंगाई नियंत्रित न करने पाने के लिए सरकार को स्पष्टीकरण देना पड़ा. दरअसल, रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत अगर महंगाई के लिए तय लक्ष्य को लगातार तीन तिमाहियों तक हासिल नहीं किया जाता, तो RBI को केंद्र सरकार के समक्ष स्पष्टीकरण देना होता है. उसे बताना होता है कि महंगाई नीचे नहीं आने के क्या कारण है और उसने अब तक क्या कदम उठाए हैं. मौद्रिक नीति रूपरेखा के 2016 में प्रभाव में आने के बाद से यह पहली बार था जब RBI को इस संबंध में केंद्र को रिपोर्ट भेजनी पड़ी.

क्या है RBI की जिम्मेदारी?
आरबीआई को केंद्र की तरफ से खुदरा महंगाई दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है. इसी साल मई में खुदरा महंगाई दर 4.75 प्रतिशत दर्ज की गई. मार्च में यह 4.80% थी. जबकि पिछले साल अगस्त में यह 6.83 प्रतिशत थी. सितंबर 2023 के बाद से रिटेल इन्फ्लेशन में नरमी देखने को मिली है, लेकिन अब जिस तरह से लगभग सभी वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं ये आंकड़ा भी तेजी से बढ़ सकता है. उस स्थिति में RBI महंगाई नियंत्रित करने के नाम पर नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में इजाफा कर सकती है और बैंक इसक भार आम ग्राहकों पर डाल सकते हैं. 


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