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महंगाई के नाम पर खूब महंगा हुआ था कर्ज, क्या इस बार मिलेगी राहत? जल्द चलेगा पता
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद भारतीय रिजर्व बैंक की MPC की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
महंगाई को नियंत्रित करने के नाम पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कुछ वक्त पहले नीतिगत ब्याज दरों में लगातार इजाफा किया था. RBI के इस कदम के चलते कर्ज लगातार महंगा होता गया और लोगों की EMI बढ़ती चली गई. पिछली कुछ बार से रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को यथावत रखा हुआ है, यानी उसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं हुआ है. ऐसे में अब यह सवाल अहम हो जाता है कि क्या 5-7 जून को अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में RBI इस मोर्चे पर कुछ राहत देगा?
इस बार कटौती की गुंजाइश नहीं
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 जून को शुरू होकर 7 जून तक चलेगी. इसी दिन बैठक में लिए गए निर्णयों की भी घोषणा की जाएगी. यानी 7 जून को यह साफ हो जाएगा की रेपो रेट में कोई कमी होती है या नहीं. इस संबंध में किए गए एक सर्वेक्षण में शामिल ज़्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI रेपो रेट को 6.50% पर बनाए रख सकता है. 17-30 मई तक चले इस सर्वे में 72 अर्थशास्त्रियों में से एक को छोड़कर सभी ने अनुमान जताया है कि रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं होगा.
चौथी तिमाही में बन सकती है संभावना
सर्वेक्षण में शामिल 71 में से 33 अर्थशास्त्रियों ने भविष्यवाणी की है कि RBI 2024 की चौथी तिमाही में पहली रेपो रेट में कटौती का विकल्प चुनेगा और इसे इसे घटाकर 6.25% किया जा सकता है. जबकि अप्रैल की शुरुआत में, अधिकांश अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि नीतिगत ब्याज दरों में पहली कटौती तीसरी तिमाही में होगी. 33 इकोनॉमिस्ट का कहना है कि रेप रेट 25 बेसिस पॉइंट (BPs) कम होकर 6.25% हो जाएंगी. जबकि 15 ने इसके 6.00% और पांच ने 5.75% या उससे कम होने का अनुमान लगाया है. वहीं, शेष अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस साल दरों में कोई बदलाव नहीं होगा.
क्या है RBI की जिम्मेदारी?
सर्वेक्षण के अनुसार, अप्रैल में मुद्रास्फीति 4.83% थी और अगली तिमाही में इसके 4.00% तक गिरने की उम्मीद है. लेकिन उसके बाद की तिमाहियों में इसमें वृद्धि हो सकती है. इस वित्तीय वर्ष और अगले वित्तीय वर्ष में यह औसतन 4.5% रहेगी. रेपो रेट की बात करें तो यह वो दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को लोन देता है. लिहाजा, जब इसमें इजाफा होता है, तो बैंक अपना कर्ज महंगा करके ग्राहकों से उसकी वसूली कर लेते हैं. वहीं, रिवर्स रेपो रेट वो दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को रुपए रखने के लिए ब्याज देता है. गौरतलब है कि आरबीआई को केंद्र की तरफ से खुदरा महंगाई दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है.
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