रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल भारतीय बैंकों तक सीमित नहीं रहेगी. विदेशी शाखाओं और सहयोगी संस्थाओं को भी सीधे डेटा देने की अनुमति दी गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत की मुद्रा को वैश्विक बाजारों में अधिक स्थिर और पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. अब सिर्फ देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में होने वाले रुपये से जुड़े सौदों पर भी नजर रखी जाएगी. जुलाई 2027 से लागू होने वाले नए नियम फॉरेक्स मार्केट की तस्वीर बदल सकते हैं.
ऑफशोर डील्स पर भी होगी निगरानी
अब तक RBI की निगरानी मुख्य रूप से घरेलू बाजार तक सीमित थी, लेकिन नए नियमों के तहत विदेशों में होने वाले रुपये-आधारित डेरिवेटिव सौदे भी दायरे में आ जाएंगे. खासतौर पर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) जैसे सेगमेंट, जहां बड़े स्तर पर ट्रेडिंग होती है, अब रेगुलेटरी निगाह में रहेंगे. इससे रुपये की वास्तविक कीमत तय करने में मदद मिलेगी और विदेशी बाजारों के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा.
बैंकों को देनी होगी हर बड़ी डील की जानकारी
RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने ग्रुप या विदेशी शाखाओं द्वारा किए गए हर महत्वपूर्ण डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी साझा करें. इसमें कॉन्ट्रैक्ट की नॉशनल वैल्यू, मैच्योरिटी अवधि, काउंटरपार्टी की जानकारी और करेंसी स्ट्रक्चर जैसी अहम जानकारियां शामिल होंगी. इस विस्तृत रिपोर्टिंग से यह स्पष्ट हो सकेगा कि रुपये से जुड़ा जोखिम कहां पैदा हो रहा है और कैसे फैल रहा है.
छोटे सौदों को राहत
नए नियमों में कुछ राहत भी दी गई है. 1 मिलियन डॉलर से कम के सौदों को रिपोर्टिंग से बाहर रखा गया है और बैक-टू-बैक ट्रांजैक्शंस को भी छूट दी गई है. यह कदम बैंकों पर अतिरिक्त बोझ को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है.
विदेशी संस्थाओं की भी होगी भागीदारी
रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल भारतीय बैंकों तक सीमित नहीं रहेगी. विदेशी शाखाओं और सहयोगी संस्थाओं को भी सीधे डेटा देने की अनुमति दी गई है. इससे ऑफशोर बाजार की गतिविधियों को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा और पूरी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी.
चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे नियम
RBI ने इन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है. जुलाई 2027 तक कुल FX डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन का 70% डेटा रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा, जनवरी 2028 तक यह 80% तक बढ़ेगा और जुलाई 2028 तक इसे 100% कर दिया जाएगा. इस धीरे-धीरे लागू होने वाली प्रक्रिया से सिस्टम को नए ढांचे में ढलने का पर्याप्त समय मिलेगा.
विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक रुपये की कीमत का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों में तय होता रहा है, जिससे घरेलू नीतियों का प्रभाव सीमित रह जाता था. नए नियम इस अंतर को कम करेंगे और ऑनशोर व ऑफशोर बाजारों के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करेंगे. कुल मिलाकर यह कदम रुपये की स्थिरता, पारदर्शिता और वैश्विक विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है.
ऑयल इंडिया ने यह महत्वपूर्ण खोज लीबिया के गदामेस बेसिन में की है, जो हाइड्रोकार्बन संसाधनों के लिए जाना जाता है. कंपनी ने ऑनशोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक 95/96 में ड्रिलिंग के दौरान तेल और गैस के नए भंडार का पता लगाया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऊर्जा के मोर्चे पर भारत को बड़ी अंतरराष्ट्रीय कामयाबी मिली है. दरअसल, ऑयल इंडिया (Oil India Limited) ने अफ्रीकी देश लीबिया (Libya) में तेल और गैस का नया भंडार खोज निकाला है. यह खोज ऐसे समय में सामने आई है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है.
लीबिया के रेगिस्तान में मिला तेल-गैस का भंडार
ऑयल इंडिया ने यह महत्वपूर्ण खोज लीबिया के गदामेस बेसिन में की है, जो हाइड्रोकार्बन संसाधनों के लिए जाना जाता है. कंपनी ने ऑनशोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक 95/96 में ड्रिलिंग के दौरान तेल और गैस के नए भंडार का पता लगाया. इस प्रोजेक्ट में इंडिया ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) के साथ मिलकर एक भारतीय कंसोर्टियम काम कर रहा है, जिसमें ऑयल इंडिया की 25% हिस्सेदारी है. करीब 6,630 वर्ग किलोमीटर के इस बड़े क्षेत्र का संचालन SIPEX कर रही है.
छठे कुएं ने दिलाई बड़ी सफलता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 8 खोजी कुओं की खुदाई की योजना है. इससे पहले 5 कुओं की ड्रिलिंग हो चुकी थी, जिनमें से 4 में 2012–2014 के बीच तेल और गैस के संकेत मिले थे.हाल ही में छठे कुएं (A1-96/02) की ड्रिलिंग के दौरान एक नए भंडार की खोज हुई है, जिसने इस पूरे प्रोजेक्ट को नई रफ्तार दे दी है. शुरुआती परीक्षणों के बाद लीबिया की नेशनल ऑयल कॉर्पोरेशन (National Oil Corporation) ने इसे इस ब्लॉक की पांचवीं बड़ी खोज घोषित किया है.
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा सहारा
यह खोज भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. देश अभी भी अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. ऐसे में विदेशी जमीन पर भारतीय कंपनियों द्वारा संसाधनों की खोज भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव का मजबूत आधार तैयार करती है. इस तरह की परियोजनाएं भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करती हैं.
शेयर बाजार में भी दिखा असर
इस खबर का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला. सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ऑयल इंडिया का शेयर हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ. कारोबार के अंत में शेयर 2.50 रुपये यानी 0.53% चढ़कर 476.20 रुपये पर पहुंच गया. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में इसमें करीब 1.05% की तेजी दर्ज की गई है.
लीबिया में यह नई खोज न सिर्फ ऑयल इंडिया के वैश्विक विस्तार को मजबूत करती है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति को भी मजबूती देती है. आने वाले समय में इस ब्लॉक में और खोज व उत्पादन गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है, जिससे भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में बेहतर स्थिति हासिल करने में मदद मिल सकती है.
यह प्रोजेक्ट भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर होगा, जो आकार में Google के 1 गीगावाट प्रोजेक्ट से भी बड़ा बताया जा रहा है. राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन समिति से इसे मंजूरी मिल चुकी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिजिटल और AI की तेज होती दौड़ में भारत को वैश्विक ताकत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 1.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर स्थापित करने जा रही है, जो भारत के डेटा इकोसिस्टम को नई ऊंचाई दे सकता है.
मेगा निवेश से बदलेगा डिजिटल परिदृश्य
भारत के डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने विशाखापट्टनम में गीगा-स्केल AI डेटा सेंटर क्लस्टर बनाने की योजना तैयार की है. इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 1.5 गीगावाट क्षमता का डेटा सेंटर और कैप्टिव सोलर-बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित किया जाएगा. यह निवेश तेजी से बढ़ती AI, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं की मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा और भारत को ग्लोबल डेटा हब बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगा.
देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर होगा, जो आकार में Google के 1 गीगावाट प्रोजेक्ट से भी बड़ा बताया जा रहा है. राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन समिति से इसे मंजूरी मिल चुकी है, जिससे आंध्र प्रदेश डेटा सेंटर हब बनने के अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच गया है.
तीन चरणों में होगा विकास
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा.
1. पहले चरण में पोलिपल्ली गांव में 500 मेगावाट का डेटा सेंटर बनाया जाएगा, जो अक्टूबर 2028 तक शुरू हो सकता है.
2. दूसरे चरण में 1 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता 2030 तक जोड़ी जाएगी.
3. पूरा क्लस्टर भोगापुरम के नए एयरपोर्ट के पास स्थापित होगा.
जमीन, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 935 एकड़ जमीन की मांग की है. इसमें डेटा सेंटर के साथ केबल लैंडिंग स्टेशन और डीसैलिनेशन प्लांट भी शामिल होंगे. कुल निवेश में से लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे, जबकि करीब 51,300 करोड़ रुपये नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर लगाए जाएंगे.
विशाखापट्टनम बन रहा डेटा हब
विशाखापट्टनम तेजी से डेटा सेंटर निवेश का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है. यहां Sify Technologies, Digital Connexion और Anant Raj जैसी कंपनियां भी बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं. राज्य सरकार की डेटा सेंटर पॉलिसी 4.0 के तहत कंपनियों को GST रिइम्बर्समेंट, कैपिटल सब्सिडी और डायरेक्ट पावर परचेज जैसे कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं.
रोजगार और AI इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट
यह मेगा प्रोजेक्ट न सिर्फ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा. साथ ही AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सर्विसेज के क्षेत्र में तेजी आएगी. भारत में बढ़ती डेटा खपत और डिजिटल सेवाओं की मांग को देखते हुए, यह निवेश देश को वैश्विक डेटा और AI हब बनाने की दिशा में एक गेमचेंजर साबित हो सकता है.
सोमवार को BSE बीएसई सेंसेक्स 639.42 अंक की बढ़त के साथ 77,303.63 पर बंद हुआ. वहीं, NSE इंडेक्स 194.75 अंक चढ़कर 24,092.70 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने राहत की सांस ली है. निवेशकों की सतर्कता के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों ने बाजार में भरोसा लौटाया, जिससे हफ्ते की शुरुआत सकारात्मक रही और प्रमुख सूचकांकों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली.
लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोमवार को शेयर बाजार में जोरदार वापसी हुई. दिनभर के कारोबार के दौरान बाजार में खरीदारी हावी रही, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बीएसई सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक उछल गया. अंत में सेंसेक्स 639.42 अंक यानी 0.83% की बढ़त के साथ 77,303.63 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) इंडेक्स 194.75 अंक यानी 0.81% चढ़कर 24,092.70 के स्तर पर पहुंच गया.
प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन
सेंसेक्स के 30 में से 22 शेयर हरे निशान में बंद हुए, जो बाजार की मजबूती को दर्शाता है. फार्मा सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जहां सन फार्मा के शेयर करीब 7% तक उछल गए. इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी पोर्ट्स, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, टीसीएस, एचसीएल टेक और महिंद्रा एंड महिंद्रा में भी अच्छी खरीदारी रही. हालांकि, कुछ शेयरों में दबाव बना रहा. एक्सिस बैंक, बीईएल, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट और बजाज फिनसर्व गिरावट के साथ बंद हुए. मुद्रा बाजार में भी हल्की मजबूती दिखी और रुपया डॉलर के मुकाबले 0.06% चढ़कर 94.19 पर बंद हुआ.
ब्रॉडर मार्केट में बेहतर प्रदर्शन
बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले व्यापक बाजार में ज्यादा तेजी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 1.47% और स्मॉलकैप 1.90% तक उछले. सेक्टर के लिहाज से फार्मा, रियल्टी और आईटी शेयरों में मजबूती रही, जबकि प्राइवेट बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर दबाव में रहे. इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही. ब्रेंट क्रूड 2.30% चढ़कर 107.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो आगे बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज बाजार में कई कंपनियों के तिमाही नतीजे और कॉर्पोरेट अपडेट्स के चलते हलचल देखने को मिल सकती है. मारुति सुजुकी, बंधन बैंक, कास्ट्रोल इंडिया, सीएट, डालमिया भारत, पिरामल फार्मा, आरईसी और स्टार हेल्थ जैसी कंपनियां अपने नतीजे जारी करेंगी.
इसके अलावा कुछ अहम कॉर्पोरेट गतिविधियां भी फोकस में रहेंगी. समवर्धना मदरसन इंटरनेशनल जापान की कंपनी से हिस्सेदारी खरीद रही है. रेलटेल को 145.5 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जिससे कंपनी की पकड़ मजबूत होगी. मेटास्पोर्ट्स इंटरएक्टिव ने 20 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है, जिससे उसके विस्तार को गति मिलेगी.
बाजार में आई यह तेजी फिलहाल राहत का संकेत है, लेकिन वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के नतीजे आगे की दिशा तय करेंगे. निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और खबरों पर नजर बनाए रखने का है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस मिलने के बाद मोबिक्विक अब अपनी फाइनेंशियल सर्विसेज को बड़े स्तर पर विस्तार दे सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फिनटेक कंपनी वन मोबिक्विक (One MobiKwik Systems) के लिए बड़ी खबर सामने आई है. कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) से NBFC लाइसेंस मिल गया है. इस ऐलान के बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और यह करीब 16% तक उछल गया. अब कंपनी लोन और क्रेडिट बिजनेस में सीधे उतरने की तैयारी में है.
NBFC लाइसेंस मिलने का क्या मतलब
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस मिलने के बाद मोबिक्विक अब अपनी फाइनेंशियल सर्विसेज को बड़े स्तर पर विस्तार दे सकेगी. कंपनी “मोबिक्विक फाइनेंशियल सर्विसेज” के जरिए ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को सीधे लोन ऑफर कर पाएगी. इसमें सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों तरह के लोन शामिल होंगे.
लेंडिंग बिजनेस में मिलेगा बड़ा फायदा
अब तक मोबिक्विक को लेंडिंग के लिए पार्टनर संस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन NBFC लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी अपने क्रेडिट ऑपरेशंस को इन-हाउस ला सकेगी. इससे कंपनी का मार्जिन बेहतर होगा और लोन प्रोडक्ट्स को तेजी से लॉन्च करने में मदद मिलेगी. साथ ही ग्राहकों को अधिक कस्टमाइज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी मिल सकेंगे.
शेयर बाजार में दिखा जबरदस्त असर
इस बड़ी खबर का सीधा असर शेयर बाजार में देखने को मिला. बीएसई पर कंपनी का शेयर 203 रुपये के आसपास खुला और कारोबार के दौरान उछलकर 243 रुपये तक पहुंच गया और बाद में शेयर में थोड़ी गिरावट देखी गई और यह 11. 26 प्रतिशत की तेजी के साथ 224.94 रुपये पर बंद हुआ. पिछले सत्र में यह करीब 202.55 रुपये पर बंद हुआ था. स्टॉक का 52 हफ्तों का उच्च स्तर 333.95 रुपये और निचला स्तर 151.95 रुपये रहा है.
कब शुरू होगा लेंडिंग ऑपरेशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करने के बाद केंद्रीय बैंक से सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) मिलेगा. इसके बाद ही मोबिक्विक आधिकारिक तौर पर नॉन-बैंक लेंडिंग ऑपरेशंस शुरू कर पाएगी.
डिजिटल वॉलेट से फुल-फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म की ओर
मोबिक्विक पहले से डिजिटल वॉलेट और पेमेंट सर्विसेज में सक्रिय है. इसके अलावा कंपनी क्रेडिट और निवेश जैसे सेगमेंट में भी धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. NBFC लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी अब खुद को एक फुल-स्टैक फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी.
मोबिक्विक के लिए NBFC लाइसेंस एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. इससे कंपनी के बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू और ग्रोथ संभावनाओं को नई मजबूती मिलेगी. बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया भी इसी भरोसे को दर्शाती है.
मुनाफे के इस शानदार प्रदर्शन के बाद कंपनी ने निवेशकों को बड़ा तोहफा दिया है. कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹7.50 का डिविडेंड घोषित किया है. प्रतिशत के
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महिंद्रा फाइनेंस (Mahindra & Mahindra Financial Services) ने मार्च 2026 तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ा सरप्राइज दिया है. कंपनी का मुनाफा दोगुना होने के साथ शेयरों में जोरदार तेजी आई, वहीं शेयरधारकों के लिए 375% के बंपर डिविडेंड का ऐलान किया गया है, जिससे बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला.
तिमाही नतीजों में जबरदस्त उछाल
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो मार्च तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 106% बढ़कर ₹940 करोड़ हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह ₹456 करोड़ था. वहीं, स्टैंडअलोन स्तर पर भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा और शुद्ध लाभ 55% बढ़कर ₹873 करोड़ पहुंच गया, जो एक साल पहले ₹563 करोड़ था.
रेवेन्यू और मार्जिन में सुधार
कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 13% बढ़कर ₹5,539 करोड़ हो गया, जो पहले ₹4,886 करोड़ था. तिमाही आधार पर भी मुनाफे में लगभग 13.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह प्रदर्शन मुख्य रूप से बेहतर मार्जिन और मजबूत लोन ग्रोथ के कारण संभव हुआ.
निवेशकों को मिला बंपर डिविडेंड
मुनाफे के इस शानदार प्रदर्शन के बाद कंपनी ने निवेशकों को बड़ा तोहफा दिया है. कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹7.50 का डिविडेंड घोषित किया है. प्रतिशत के हिसाब से यह 375% का डिविडेंड है, जो निवेशकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बना.
शेयरों में जोरदार तेजी
नतीजों के बाद बाजार में कंपनी के शेयरों में तेज खरीदारी देखने को मिली. स्टॉक 311 रुपये पर खुला और जल्द ही 331 रुपये के स्तर तक पहुंच गया. हालांकि बाद में हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली, खबर लिखे जाने तक यह शेयर करीब 8.02 प्रतिशत की तेजी के साथ 318 रुपये पर कारोबार करता नजर आया.
मजबूत नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्मों ने भी इस शेयर पर भरोसा जताया है.
1. Nomura ने ‘Buy’ रेटिंग के साथ ₹400 का टारगेट दिया
2. Motilal Oswal ने ₹350 का लक्ष्य तय किया
3. Emkay Global ने ‘Add’ रेटिंग के साथ ₹340 का टारगेट बढ़ाया
4. JM Financial ने ₹350 का टारगेट प्राइस दिया
महिंद्रा फाइनेंस ने मजबूत तिमाही नतीजों, बेहतर मार्जिन और निवेशकों के लिए आकर्षक डिविडेंड के दम पर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की है. आने वाले समय में भी कंपनी के प्रदर्शन को लेकर बाजार का रुख सकारात्मक बना रह सकता है.
भारत-न्यूजीलैंड FTA एक संतुलित समझौता माना जा रहा है, जिसमें व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू हितों की भी रक्षा की गई है. यह डील आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार और निर्यात को नई गति दे सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आज हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देगा. इस डील से जहां कई उत्पाद सस्ते हो सकते हैं, वहीं निवेश, सेवाओं और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़े अवसर खुलने की उम्मीद है. हालांकि, भारत ने किसानों और MSME सेक्टर को ध्यान में रखते हुए कई संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है.
FTA क्या है और क्यों अहम है
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या अधिक देशों के बीच ऐसा करार होता है, जिसमें व्यापार होने वाले अधिकांश सामानों पर कस्टम ड्यूटी घटाई या खत्म की जाती है. इसके साथ ही व्यापार और निवेश से जुड़े नियमों को आसान बनाया जाता है, जिससे कारोबार बढ़े.
समझौते की टाइमलाइन
भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA की बातचीत लंबी रही है.
1. 2010 में बातचीत शुरू हुई
2. 2015 में 9 दौर के बाद ठहराव आया
3. मार्च 2025 में बातचीत फिर शुरू हुई
4. दिसंबर 2025 में समझौता पूरा हुआ
5. 27 अप्रैल 2026 को इस पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं
इस समझौते में व्यापार, सेवाएं, निवेश, कस्टम नियम और विवाद समाधान समेत 20 अध्याय शामिल हैं.
भारत को क्या मिलेगा
इस समझौते से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं. टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर के उत्पाद न्यूजीलैंड में जीरो ड्यूटी पर निर्यात हो सकेंगे. आईटी, शिक्षा, फाइनेंस, पर्यटन और कंस्ट्रक्शन जैसे सर्विस सेक्टर में नए अवसर खुलेंगे. भारतीय पेशेवरों को 5,000 वीजा कोटा के तहत 3 साल तक काम करने का मौका मिलेगा.
इसके अलावा, न्यूजीलैंड ने अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है.
न्यूजीलैंड को क्या फायदा
भारत न्यूजीलैंड को लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच देगा. करीब 54% उत्पादों को पहले दिन से ही ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी. इनमें ऊन, कोयला, लकड़ी और कुछ कृषि उत्पाद शामिल हैं.
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा
इस समझौते के बाद कुछ आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं. सेब, कीवी, मनुका शहद और कुछ डेयरी उत्पादों पर ड्यूटी में छूट मिलेगी, हालांकि इन पर कोटा और न्यूनतम कीमत की शर्तें लागू होंगी. समुद्री उत्पादों और कुछ अन्य वस्तुओं पर चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी खत्म की जाएगी.
संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित
भारत ने अपने किसानों और MSME सेक्टर की सुरक्षा के लिए कई उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है. इनमें डेयरी, चीनी, कुछ कृषि उत्पाद, तांबा और एल्युमीनियम जैसे सेक्टर शामिल हैं. इन पर कोई ड्यूटी छूट नहीं दी जाएगी.
निवेश और रणनीतिक महत्व
न्यूजीलैंड का 20 अरब डॉलर निवेश का वादा इस समझौते को और अहम बनाता है. यह भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आर्थिक रणनीति मजबूत करने में मदद करेगा. वहीं न्यूजीलैंड को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था तक बेहतर पहुंच मिलेगी.
कंपनी का लक्ष्य लगभग ₹16,600 करोड़ से ₹20,750 करोड़ के बीच वैल्यूएशन हासिल करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख डिजिटल इंश्योरटेक कंपनी ACKO ने शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने अपने प्रस्तावित IPO के लिए प्रमुख निवेश बैंकों की नियुक्ति कर दी है और लगभग 2 से 2.5 अरब डॉलर (करीब ₹16,000 करोड़ से ₹21,000 करोड़) के वैल्यूएशन का लक्ष्य रखा है. यह डील भारतीय इंश्योरटेक सेक्टर में एक और बड़ी पब्लिक लिस्टिंग साबित हो सकती है.
IPO की तैयारी में तेजी, बैंकर्स की नियुक्ति
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ACKO ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए ICICI Securities, Morgan Stanley और Kotak Securities को बुक-रनिंग लीड मैनेजर के रूप में चुना है. कंपनी आने वाले महीनों में सेबी के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकती है. यह कदम कंपनी की लिस्टिंग प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
वैल्यूएशन और इश्यू स्ट्रक्चर
IPO में फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) का मिश्रण शामिल होने की संभावना है. कंपनी का लक्ष्य लगभग ₹16,600 करोड़ से ₹20,750 करोड़ के बीच वैल्यूएशन हासिल करना है. यह लिस्टिंग सफल होने पर इंश्योरटेक सेक्टर में Policybazaar के बाद दूसरी बड़ी सार्वजनिक पेशकशों में से एक होगी.
कंपनी का विस्तार और बिजनेस मॉडल
ACKO की स्थापना 2016 में Varun Dua द्वारा की गई थी. कंपनी ने शुरुआत में डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ऑटो इंश्योरेंस सेगमेंट में काम शुरू किया था. मार्च 2023 में कंपनी ने हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट में भी प्रवेश किया और अपने विस्तार को मजबूत करने के लिए Parentlane का अधिग्रहण किया.
बड़े प्लेटफॉर्म्स के साथ साझेदारी
ACKO ने डिजिटल इकोसिस्टम में मजबूत पकड़ बनाई है. कंपनी PhonePe और MyGate जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ साझेदारी कर चुकी है ताकि ग्राहकों को सीधे इंश्योरेंस सेवाएं मिल सकें. इसके अलावा OYO, RedBus, Zomato, HDB Financial Services और Urban Company सहित 50 से अधिक प्लेटफॉर्म्स के साथ एम्बेडेड इंश्योरेंस डील्स भी की गई हैं.
मजबूत ग्राहक आधार और रेवेन्यू ग्रोथ
कंपनी के अनुसार, अब तक 7.8 करोड़ (78 मिलियन) से अधिक ग्राहकों को इंश्योरेंस पॉलिसी दी जा चुकी हैं और 1 अरब से ज्यादा पॉलिसी जारी की गई हैं. वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का रेवेन्यू ₹2,837 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 35% की वृद्धि दर्शाता है. यह ग्रोथ व्यापक इंश्योरेंस सेक्टर की तुलना में काफी तेज रही है.
घाटे में सुधार और निवेशकों का भरोसा
ACKO ने अपने नेट लॉस में भी 37% की कमी दर्ज की है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार का संकेत देता है. कंपनी ने अब तक जनरल अटलांटिक, एक्सेल, एलीवेशन कैपिटल और अन्य निवेशकों से लगभग 450-460 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है.
ACKO का संभावित IPO भारतीय स्टार्टअप और इंश्योरटेक सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है. मजबूत ग्रोथ, बढ़ता ग्राहक आधार और तेजी से बढ़ता डिजिटल इंश्योरेंस नेटवर्क इसे बाजार में एक महत्वपूर्ण लिस्टिंग बना सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर क्षेत्र में नया तनाव नहीं बढ़ता और होर्मुज सुरक्षित रूप से खुल जाता है, तो खाड़ी देशों के तेल उत्पादन में तेज सुधार संभव है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सुरक्षित रूप से दोबारा खुल जाता है, तो खाड़ी देशों का कच्चे तेल का उत्पादन कुछ महीनों के भीतर तेजी से बहाल हो सकता है. हालांकि, पूरी तरह से प्री-कॉन्फ्लिक्ट स्तर पर उत्पादन पहुंचने में कई तिमाहियां लग सकती हैं.
होर्मुज खुलते ही तेज रिकवरी की संभावना
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 57% घटकर करीब 14.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था. अगर आने वाले महीनों में यह जलमार्ग सुरक्षित रूप से फिर से खुलता है और तेल परिसंपत्तियों पर हमले नहीं होते, तो अधिकतर उत्पादन तेजी से वापस आ सकता है.
पूरी रिकवरी में लग सकता है समय
गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि उत्पादन को पूरी तरह पुराने स्तर पर लाने में ज्यादा समय लग सकता है, खासकर अगर तनाव या संघर्ष दोबारा बढ़ता है. रिपोर्ट के अनुसार, रिकवरी की गति कई तकनीकी और लॉजिस्टिक बाधाओं पर निर्भर करेगी, जिनमें पाइपलाइन क्षमता, खाली टैंकरों की उपलब्धता, श्रमिकों और सामग्री की आपूर्ति तथा कुओं की उत्पादन क्षमता शामिल हैं.
लॉजिस्टिक और तकनीकी बाधाएं बनेंगी चुनौती
रिपोर्ट में बताया गया है कि खाड़ी क्षेत्र में खाली टैंकर क्षमता लगभग 50% तक घट चुकी है, जो करीब 130 मिलियन बैरल के बराबर है. इससे न केवल भंडारित तेल को बाहर भेजने में दिक्कत होगी, बल्कि नए उत्पादन को भी तेजी से शुरू करने में बाधा आएगी.
लंबे समय तक बंदी से बढ़ सकता है नुकसान
गोल्डमैन सैक्स ने यह भी कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो तेल उत्पादन की रिकवरी और धीमी हो सकती है. लंबे व्यवधान से तेल भंडार में दबाव (reservoir pressure) संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिससे उत्पादन को फिर से शुरू करने से पहले अतिरिक्त मरम्मत और तकनीकी काम की जरूरत पड़ेगी.
मजबूत रिकवरी का आधार भी मौजूद
चुनौतियों के बावजूद रिपोर्ट में निकट भविष्य में मजबूत रिकवरी की संभावना भी जताई गई है. गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि तेल क्षेत्रों को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है, जबकि सऊदी अरामको ने संकेत दिया है कि उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा सऊदी अरब और यूएई अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के जरिए बाजार को स्थिर करने में सक्षम हैं.
सऊदी और UAE से मिल सकता है बड़ा सपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब और यूएई मिलकर प्री-वॉर स्तर की तुलना में 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ सकते हैं. यह वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
पूरी रिकवरी में लग सकते हैं कई तिमाहियां
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से खुलने के तीन महीने के भीतर लगभग 70% उत्पादन वापस आ सकता है, जबकि छह महीनों में यह आंकड़ा 88% तक पहुंच सकता है. हालांकि, पूरी रिकवरी में कई तिमाहियां लग सकती हैं क्योंकि अलग-अलग देशों में भूगर्भीय परिस्थितियां, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिबंधों का असर अलग-अलग होगा.
पोस्ट-अर्निंग्स कॉल में बैंक के मैनेजमेंट ने चेतावनी दी कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में क्रेडिट कार्ड बिजनेस पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, बैंक का मानना है कि दूसरी छमाही में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मार्च 2025 तिमाही के मजबूत नतीजों के बावजूद आरबीएल बैंक (RBL Bank) के शेयरों में आज जोरदार बिकवाली देखने को मिली. बैंक के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद मैनेजमेंट की भविष्य को लेकर दी गई सतर्क टिप्पणी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते शेयर इंट्रा-डे में करीब 5% तक टूट गए.
तिमाही नतीजों में जबरदस्त उछाल
आरबीएल बैंक ने मार्च 2025 तिमाही में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया. बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 6.9% बढ़कर ₹1,671 करोड़ पहुंच गई, जबकि शुद्ध मुनाफा तीन गुना से अधिक बढ़कर ₹230 करोड़ हो गया. पूरे वित्त वर्ष के दौरान भी बैंक के नतीजों में सुधार देखा गया, जिससे शुरुआत में निवेशकों की धारणा सकारात्मक रही, लेकिन बाद में मैनेजमेंट की टिप्पणी ने सेंटीमेंट बदल दिया.
मैनेजमेंट की चेतावनी से बढ़ी चिंता
पोस्ट-अर्निंग्स कॉल में बैंक के मैनेजमेंट ने चेतावनी दी कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में क्रेडिट कार्ड बिजनेस पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, बैंक का मानना है कि दूसरी छमाही में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा. अनुमान के मुताबिक, इस अवधि में क्रेडिट कार्ड स्लिपेज 7% से 7.5% के स्तर तक आ सकता है, जबकि क्रेडिट कॉस्ट करीब 5.5% रहने की संभावना है.
डिपॉजिट ग्रोथ और माइक्रोफाइनेंस पर भी नजर
मैनेजमेंट ने यह भी संकेत दिया कि एमिरेट्स एनबीडी के निवेश के बाद बैंक अधिक महंगे डिपॉजिट जुटाने पर फोकस नहीं करेगा, जिससे वित्त वर्ष 2027 में डिपॉजिट ग्रोथ सिंगल या लो-डबल डिजिट में रह सकती है. वहीं, माइक्रोफाइनेंस से जुड़े दबाव को बैंक ने अपने चरम पर बताया है. जैसे-जैसे स्लिपेज कम होंगे, प्रोविजंस में गिरावट आने की उम्मीद है.
शेयर बाजार में तेज गिरावट
मैनेजमेंट की टिप्पणी के बाद निवेशकों में घबराहट देखी गई. बीएसई पर आरबीएल बैंक का शेयर 11:00 बजे के आसपास 3.43 प्रतिशत गिरकर 310.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इंट्रा-डे में यह करीब 4.96 प्रतिशत तक गिरकर 305.90 रुपये तक पहुंच गया. खबर लिखे जाने तक बैंक का शेयर 2.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 313.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था.
वैश्विक ब्रोकरेज CLSA ने कहा कि बैंक का मुनाफा उम्मीद से लगभग 20% कम रहा, हालांकि लोन और डिपॉजिट ग्रोथ को सकारात्मक संकेत माना गया है. CLSA ने ₹320 के टारगेट के साथ ‘होल्ड’ रेटिंग दी है. वहीं सिटी ने ₹390 के टारगेट प्राइस के साथ ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है, हालांकि कमाई के अनुमान में 3% की कटौती की गई है. कुल मिलाकर 22 एनालिस्ट्स में से 12 ने खरीदारी, 6 ने होल्ड और 4 ने सेल की सलाह दी है.
एक साल में शानदार रिटर्न, फिर भी दबाव
पिछले एक साल में आरबीएल बैंक के शेयरों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है. अप्रैल 2025 में ₹186.85 के स्तर से यह फरवरी 2026 में ₹340.30 तक पहुंच गया था, यानी करीब 82% की तेजी. हालांकि आरबीएल बैंक के तिमाही नतीजे मजबूत रहे, लेकिन भविष्य को लेकर मैनेजमेंट की सावधानी भरी टिप्पणी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है. निवेशक अब क्रेडिट कार्ड और डिपॉजिट ग्रोथ से जुड़ी आगे की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं.
कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि इस सौदे के तहत सन फार्मा, ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की दर से खरीदेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय दवा कंपनी सन फार्मा (Sun Pharmaceutical Industries) ने अमेरिका स्थित Organon & Co को 11.75 अरब डॉलर (कर्ज सहित) के ऑल-कैश सौदे में खरीदने पर सहमति जताई है. यह भारतीय फार्मा क्षेत्र की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों में से एक माना जा रहा है.
कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि इस सौदे के तहत सन फार्मा, ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की दर से खरीदेगी.
वैश्विक विस्तार को मिलेगा बढ़ावा
ऑर्गेनॉन को 2021 में मर्क से अलग किया गया था और यह कंपनी मुख्य रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य और बायोसिमिलर्स पर केंद्रित है. इसके पास 140 देशों में बिकने वाले 70 से अधिक उत्पादों का पोर्टफोलियो है, जिससे सन फार्मा को वैश्विक बाजारों में मजबूत विस्तार मिलेगा.
इस अधिग्रहण के बाद सन फार्मा, भारत की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी, दुनिया की शीर्ष 25 फार्मा कंपनियों में शामिल हो जाएगी. संयुक्त राजस्व लगभग 12.4 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
कंपनी नेतृत्व की प्रतिक्रिया
सन फार्मा के कार्यकारी अध्यक्ष दीलिप सांघवी ने कहा कि ऑर्गेनॉन का पोर्टफोलियो और वैश्विक पहुंच कंपनी के मौजूदा कारोबार के साथ पूरी तरह मेल खाती है. वहीं, प्रबंध निदेशक कीर्ति गनोर्कर ने इसे कंपनी के वैश्विक विस्तार, विशेष रूप से अमेरिका जैसे प्रमुख बाजार में मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.
रणनीति और भविष्य की योजना
यह सौदा सन फार्मा की नवोन्मेषी दवाओं (innovative medicines) के व्यवसाय को मजबूत करने की रणनीति के अनुरूप है. फिलहाल यह सेगमेंट कंपनी की कुल बिक्री का लगभग 20% योगदान देता है, जो अधिग्रहण के बाद बढ़कर लगभग 27% होने की उम्मीद है.
ऑर्गेनॉन की उपस्थिति अमेरिका, यूरोप, चीन, कनाडा और ब्राजील जैसे बड़े बाजारों में है और इसके पास यूरोपियन यूनियन व उभरते बाजारों में छह उत्पादन इकाइयाँ भी हैं.
ऑर्गेनॉन की कार्यकारी अध्यक्ष Carrie Cox ने कहा कि बोर्ड ने कई रणनीतिक विकल्पों की समीक्षा के बाद पाया कि यह ऑल-कैश सौदा शेयरधारकों के लिए तत्काल और आकर्षक मूल्य प्रदान करता है.
भारतीय फार्मा सेक्टर की वैश्विक महत्वाकांक्षा
यह अधिग्रहण इस बात का संकेत है कि भारतीय फार्मा कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति, नवाचार और विकसित बाजारों तक पहुंच को बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठा रही हैं.