BRICS और सहयोगी देशों को उत्तर प्रदेश से 5.36 अरब डॉलर का निर्यात, राज्य के MSME, हस्तशिल्प और चमड़ा उद्योग ने बनाया नया रिकॉर्ड
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
उत्तर प्रदेश ने BRICS देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में 5.36 अरब डॉलर (करीब ₹50,000 करोड़) से अधिक का निर्यात दर्ज किया है. राज्य के हस्तशिल्प, चमड़ा उत्पाद, कालीन, रेडीमेड गारमेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) उत्पादों की BRICS देशों में मजबूत मांग देखने को मिली है. यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के MSME सेक्टर की बढ़ती वैश्विक पहचान और निर्यात क्षमता को दर्शाती है.
BRICS देशों में बढ़ी यूपी के उत्पादों की पहुंच
आगरा में आयोजित BRICS MSME फोरम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के MSME मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि राज्य लगातार BRICS देशों के साथ व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को मजबूत कर रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 5.36 अरब डॉलर के निर्यात में से 3.93 अरब डॉलर का निर्यात BRICS सदस्य देशों को और 1.43 अरब डॉलर का निर्यात सहयोगी देशों को किया गया.
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से मशीनरी, वस्त्र, चमड़ा उत्पाद, कालीन और कीमती पत्थरों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है, जिससे राज्य की वैश्विक बाजारों में पकड़ मजबूत हुई है.
96 लाख MSME इकाइयां बनीं अर्थव्यवस्था की ताकत
राज्य सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश में करीब 96 लाख MSME इकाइयां संचालित हो रही हैं, जो लगभग 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार दे रही हैं. MSME क्षेत्र राज्य की आर्थिक वृद्धि, नवाचार और रोजगार सृजन का प्रमुख आधार बनकर उभरा है.
मंत्री ने कहा कि सरकार MSME क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए लगातार नई पहल कर रही है, जिससे निर्यात में तेजी आई है और स्थानीय उद्योगों को नए अवसर मिले हैं.
ODOP योजना ने खोले वैश्विक बाजारों के दरवाजे
'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना उत्तर प्रदेश की सबसे सफल योजनाओं में शामिल हो चुकी है. इस पहल ने स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और पारंपरिक उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ODOP योजना के तहत अब तक 20,000 से अधिक लाभार्थियों को लगभग 897 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सहायता दी गई है. इससे 3.16 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं.
पारंपरिक कारीगरों को मिल रहा आधुनिक तकनीक का साथ
राज्य सरकार 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना' के जरिए पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है. अब तक 4.41 लाख से अधिक कारीगरों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि हुई है.
10 लाख नई माइक्रो यूनिट्स स्थापित करने का लक्ष्य
युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' चला रही है. इसके तहत बिना गारंटी के ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है. सरकार ने अगले 10 वर्षों में 10 लाख नई माइक्रो यूनिट्स स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है, जिससे रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा.
MSME पार्कों से मिलेगा औद्योगिक विकास को बल
राज्य में PLEDGE योजना के तहत आधुनिक MSME पार्क विकसित किए जा रहे हैं. अब तक 12 जिलों में MSME पार्कों को मंजूरी दी जा चुकी है. इन पार्कों का उद्देश्य उद्योगों को बेहतर बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और कारोबारी माहौल उपलब्ध कराना है.
निर्यात और निवेश का नया केंद्र बन रहा उत्तर प्रदेश
BRICS देशों में बढ़ती मांग और MSME सेक्टर के मजबूत प्रदर्शन ने उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में शामिल कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ODOP, MSME प्रोत्साहन योजनाओं और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में निवेश के चलते आने वाले वर्षों में राज्य का निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है.
फूड पार्क नेटवर्क में 30,000 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी, कैंपा और इंडिपेंडेंस ब्रांड की तेज बढ़त के दम पर रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की बड़ी महत्वाकांक्षा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज की उपभोक्ता इकाई रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) ने वित्त वर्ष 2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य तय किया है. कंपनी का उद्देश्य देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में शामिल होना और वैश्विक स्तर पर मजबूत उपस्थिति बनाना है. रिलायंस रिटेल वेंचर्स की कार्यकारी निदेशक ईशा अंबानी ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में इस महत्वाकांक्षी योजना का खाका पेश किया.
FMCG कारोबार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी
ईशा अंबानी ने कहा कि RCPL का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत की अग्रणी FMCG कंपनियों में जगह बनाना है. इसके लिए कंपनी उत्पादन क्षमता, वितरण नेटवर्क और ब्रांड पोर्टफोलियो को तेजी से विस्तार दे रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कंपनी उपभोक्ता उत्पादों के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करेगी.
फूड पार्क नेटवर्क पर 30,000 करोड़ रुपये का निवेश
कंपनी ने एशिया के सबसे बड़े एकीकृत फूड पार्क नेटवर्क में से एक विकसित करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की योजना बनाई है. यह नेटवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स आधारित आधुनिक तकनीकों से लैस होगा.
ईशा अंबानी के अनुसार, अब तक 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है. कंपनी ने 12 राज्यों में हाई-स्पीड बॉटलिंग लाइनों के जरिए पेय पदार्थों का उत्पादन शुरू कर दिया है. इसके अलावा बिस्कुट, चॉकलेट, मुख्य खाद्य उत्पादों और पैकेज्ड फूड की मल्टी-कैटेगरी उत्पादन इकाइयों का भी विस्तार किया जा रहा है.
30 लाख आउटलेट तक पहुंचा वितरण नेटवर्क
RCPL का वितरण नेटवर्क तेजी से मजबूत हुआ है. कंपनी की पहुंच अब देशभर के 30 लाख से अधिक रिटेल आउटलेट तक हो गई है. कारोबार शुरू होने के तीन वर्षों के भीतर कंपनी ने 5,000 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स जोड़े हैं. ईशा अंबानी ने कहा कि कंपनी पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य उभरते बाजारों में तेजी से विस्तार कर रही है, जिससे उसकी पहुंच और मजबूत होगी.
कैंपा और इंडिपेंडेंस ब्रांड बने ग्रोथ इंजन
रिलायंस के FMCG कारोबार को कैंपा और इंडिपेंडेंस जैसे ब्रांडों से मजबूत समर्थन मिल रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में कैंपा ने 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की और प्रमुख बाजारों में दो अंकों की बाजार हिस्सेदारी हासिल करते हुए देश का चौथा सबसे बड़ा कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड बन गया. वहीं, दैनिक उपयोग के उत्पादों वाले ब्रांड इंडिपेंडेंस की बिक्री भी 2,600 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुकी है.
क्विक कॉमर्स और किराना कारोबार पर भी फोकस
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि क्विक कॉमर्स भारतीय उपभोक्ताओं की नई आदत बनता जा रहा है और कंपनी इस क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रही है. उन्होंने बताया कि जियोमार्ट देश के सबसे बड़े क्विक कॉमर्स नेटवर्क में शामिल हो चुका है. कंपनी के पास 3,100 से अधिक स्टोर हैं, जो 5,100 पिन कोड क्षेत्रों में फैले 1,200 से ज्यादा शहरों को सेवा दे रहे हैं. जियोमार्ट के औसत दैनिक ऑर्डर सालाना आधार पर 3.6 गुना बढ़ रहे हैं.
1,000 स्टोर के पार पहुंचा स्मार्ट बाजार नेटवर्क
मुकेश अंबानी ने बताया कि कंपनी का स्मार्ट बाजार नेटवर्क 1,000 स्टोर का आंकड़ा पार कर चुका है. उन्होंने इसे दुनिया में बड़े पैमाने पर रिटेल नेटवर्क विस्तार के सबसे तेज उदाहरणों में से एक बताया. कंपनी का मानना है कि विनिर्माण, वितरण, ब्रांड निर्माण और डिजिटल कॉमर्स के संयोजन से वह आने वाले वर्षों में भारतीय FMCG बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करेगी.
जियो का यह इश्यू, देश के सबसे बड़े IPO में से एक होगा, जिसका वैल्यूएशन का अनुमान 100 अरब डॉलर से अधिक है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस समूह की डिजिटल और दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स देश के पूंजी बाजार में बड़ा धमाका करने की तैयारी में है. कंपनी ने अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास मसौदा दस्तावेज (DRHP) दाखिल कर दिया है. प्रस्तावित IPO के जरिए कंपनी करीब 4 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रही है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है.
27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी कंपनी
सेबी के पास जमा मसौदे के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी. शेयरों की अंतिम कीमत बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के माध्यम से तय की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक, IPO के बाद कंपनी की बाजार पूंजी 100 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैल्यूएशन कई प्रमुख भारतीय कंपनियों और हाल ही में प्रस्तावित बड़े IPOs से भी अधिक हो सकता है.
मुकेश अंबानी बोले- यह भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी की 69वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में जियो IPO को समूह के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया. उन्होंने कहा कि यह केवल रिलायंस ही नहीं, बल्कि लाखों शेयरधारकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है. अंबानी के मुताबिक, जियो की लिस्टिंग भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगी.
आकाश, ईशा और अनंत संभाल रहे हैं अगला चरण
अंबानी ने बताया कि IPO प्रक्रिया और जियो के अगले विकास चरण की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के नेतृत्व के हाथों में है. कंपनी के विस्तार और मूल्य सृजन की रणनीति का नेतृत्व आकाश, ईशा और अनंत अंबानी कर रहे हैं. उनका कहना है कि जियो का भविष्य उज्ज्वल है और यह निवेशकों के लिए दीर्घकालिक अवसर प्रदान करेगा.
मेटा और गूगल नहीं बेचेंगे अपनी हिस्सेदारी
IPO में जियो के मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बिक्री के लिए नहीं रखी जाएगी. 2020 में निवेश करने वाले प्रमुख वैश्विक निवेशकों में Meta, Google, KKR, Silver Lake और General Atlantic शामिल हैं. इन निवेशकों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 30.89 प्रतिशत है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी हुई है.
IPO से जुटी रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में लगेगा
मसौदा दस्तावेज के अनुसार, IPO से प्राप्त राशि में से लगभग 27,500 करोड़ रुपये का उपयोग कर्ज भुगतान के लिए किया जाएगा. कंपनी ने इस इश्यू के लिए प्रमुख निवेश बैंकिंग संस्थानों को बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया है.
अब आसमान से भी इंटरनेट पहुंचाएगी जियो
AGM में जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने कंपनी की भविष्य की रणनीति का भी खुलासा किया. उन्होंने कहा कि जियो निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में अपना स्वदेशी संचार उपग्रह विकसित करने की संभावना पर काम कर रही है. इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के गांवों, सीमावर्ती क्षेत्रों और द्वीपों तक कनेक्टिविटी पहुंचाना है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है.
AI और 5G पर रहेगा बड़ा फोकस
जियो आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G और सैटेलाइट ब्रॉडबैंड को अपनी विकास रणनीति का केंद्र बनाएगी. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक अपने पूरे ग्राहक आधार को 5G नेटवर्क पर लाना है.
साथ ही, कंपनी इस वर्ष के अंत तक नेटवर्क में सीधे एकीकृत AI एजेंट लॉन्च करने की योजना बना रही है, जो हर भारतीय भाषा में उपलब्ध होंगे और अलग से डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी.
जियो की अगली विकास रणनीति
कंपनी ने भविष्य के लिए पांच प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताएं तय की हैं. इनमें 5G विस्तार, जियोएयर फाइबर के जरिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंच, छोटे व्यवसायों का डिजिटलीकरण, क्लाउड आधारित सेवाओं का विस्तार और AI-संचालित ग्राहक सेवाओं को बढ़ावा देना शामिल है. जियो का यह IPO न केवल रिलायंस समूह के लिए, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है.
सरकार ने इस अवधि के दौरान करदाताओं को 89,026 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.19 प्रतिशत अधिक है. इसके बावजूद शुद्ध कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत सरकार के लिए उत्साहजनक रही है. 17 जून तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर (Net Direct Tax) संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. प्रत्यक्ष कर संग्रह (Direct tax collection) में यह वृद्धि कॉरपोरेट टैक्स, गैर-कॉरपोरेट टैक्स और एडवांस टैक्स कलेक्शन में मजबूत बढ़ोतरी के कारण दर्ज की गई है. इससे सरकार की आय में इजाफा होने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत भी मिले हैं.
कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन में 22 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 जून तक शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 22.47 प्रतिशत बढ़कर 2.08 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF), फर्मों और अन्य संस्थाओं से प्राप्त गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 8.40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.94 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
STT से सरकार की कमाई में जोरदार उछाल*
शेयर बाजार में बढ़ती गतिविधियों का असर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) संग्रह पर भी दिखाई दिया. 17 जून तक STT के जरिए सरकार को 18,856 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 13,013 करोड़ रुपये था. इससे स्पष्ट है कि पूंजी बाजार में निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है.
टैक्स रिफंड में भी हुई बढ़ोतरी
सरकार ने इस अवधि के दौरान करदाताओं को 89,026 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.19 प्रतिशत अधिक है. इसके बावजूद शुद्ध कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई.
सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 6.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा
17 जून तक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह (Gross Direct Tax Collection) 12.46 प्रतिशत बढ़कर 6.10 लाख करोड़ रुपये हो गया. एक वर्ष पहले समान अवधि में यह आंकड़ा 5.42 लाख करोड़ रुपये था. कुल संग्रह में सकल कॉरपोरेट टैक्स का योगदान 2.77 लाख करोड़ रुपये और गैर-कॉरपोरेट टैक्स का योगदान 3.15 लाख करोड़ रुपये रहा.
एडवांस टैक्स से मिले सकारात्मक संकेत
वित्त वर्ष 2026-27 में एडवांस टैक्स संग्रह 15.3 प्रतिशत बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसमें कॉरपोरेट एडवांस टैक्स संग्रह 16.01 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.41 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि गैर-कॉरपोरेट एडवांस टैक्स संग्रह 12.73 प्रतिशत बढ़कर 37,620 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि एडवांस टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में तेज वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनियों की आय और मुनाफे की स्थिति मजबूत बनी हुई है. साथ ही, करदाताओं की आय में भी सुधार देखने को मिल रहा है. ऐसे में मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को समर्थन मिलने की उम्मीद है.
कंपनी का मानना है कि यह सौदा उसे विभिन्न रिटेल सेगमेंट्स में अपने B2B कारोबार का विस्तार करने में मदद करेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो ने भारत के किराना और जनरल ट्रेड इकोसिस्टम में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कम्युनिटी-आधारित B2B कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘किराना क्लब’ का अधिग्रहण कर लिया है. करीब 202 करोड़ रुपये नकद में हुए इस सौदे से मीशो को देशभर के 41 लाख से अधिक किराना दुकानदारों तक सीधी पहुंच मिलेगी और वह तेजी से बढ़ते ग्रॉसरी बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सकेगा.
41 लाख से अधिक किराना रिटेलर्स का नेटवर्क मिलेगा
साल 2020 में अंशुल गुप्ता और ऐश्वर्या जैन द्वारा स्थापित किराना क्लब ने भारत के सबसे बड़े डिजिटल किराना समुदायों में से एक का निर्माण किया है. प्लेटफॉर्म पर 41 लाख से अधिक पंजीकृत किराना रिटेलर्स जुड़े हुए हैं.
मोबाइल-फर्स्ट मॉडल पर आधारित यह प्लेटफॉर्म छोटे दुकानदारों को FMCG और ग्रॉसरी उत्पादों की खोज, तुलना और सीधे ब्रांड्स से खरीदारी की सुविधा देता है. इसका विशेष फोकस टियर-3, टियर-4 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों पर रहा है.
650 अरब डॉलर के ग्रॉसरी बाजार में बढ़ेगी पकड़
इस अधिग्रहण से मीशो को भारत के 650 अरब डॉलर से अधिक के ग्रॉसरी बाजार में गहरी पैठ बनाने का अवसर मिलेगा. देश में किराना और जनरल ट्रेड चैनल कुल ग्रॉसरी बिक्री में 90 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं. कंपनी का मानना है कि यह सौदा उसे विभिन्न रिटेल सेगमेंट्स में अपने B2B कारोबार का विस्तार करने में मदद करेगा.
स्वतंत्र रूप से काम करता रहेगा किराना क्लब
अधिग्रहण के बाद भी किराना क्लब मीशो समूह के भीतर स्वतंत्र इकाई के रूप में काम करता रहेगा. हालांकि, उसे मीशो के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, सप्लायर बेस और मार्केटप्लेस इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा, जिससे वह अपने कारोबार और रिटेलर नेटवर्क का विस्तार कर सकेगा.
क्या बोले मीशो के सीईओ?
मीशो के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विदित आत्रेय ने कहा कि किराना क्लब को अपने इकोसिस्टम में शामिल कर कंपनी कॉमर्स के लोकतंत्रीकरण के अपने विजन को उपभोक्ताओं और उद्यमियों से आगे बढ़ाकर उन रिटेलर्स तक ले जा रही है, जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियां मिलकर तकनीक आधारित ऐसा भरोसेमंद प्लेटफॉर्म तैयार करेंगी, जो उत्पाद खोज को बेहतर बनाएगा, सोर्सिंग को अधिक प्रभावी करेगा और देशभर के लाखों किराना कारोबारियों के लिए नए विकास अवसर पैदा करेगा.
छोटे कारोबारियों के लिए नए अवसर
विदित आत्रेय के अनुसार, किराना क्लब ने अपने कम लागत वाले और कम्युनिटी-केंद्रित मॉडल के जरिए छोटे रिटेलर्स के बीच मजबूत भरोसा बनाया है. कंपनी को उम्मीद है कि इस साझेदारी से देश के कम सेवा प्राप्त बाजारों में पारदर्शिता, उत्पादों की उपलब्धता और सोर्सिंग क्षमता को मजबूत किया जा सकेगा.
किराना क्लब ने क्या कहा?
किराना क्लब के सह-संस्थापक और सीईओ अंशुल गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने समुदाय, स्थानीय समझ और कॉमर्स को जोड़कर किराना दुकानदारों के बीच मजबूत विश्वास कायम किया है. उन्होंने कहा कि मीशो भारत के विशाल उपभोक्ता आधार को अच्छी तरह समझता है और तकनीक के जरिए कम सेवा प्राप्त ग्राहकों तक पहुंच बनाने के उनके विजन को साझा करता है.
1.3 करोड़ किराना दुकानों को डिजिटल बनाने की तैयारी
कंपनी के अनुसार, यह अधिग्रहण इंटरनेट कॉमर्स को अधिक लोकतांत्रिक बनाने और भारत के 1.3 करोड़ से अधिक किराना रिटेलर्स तक डिजिटल कॉमर्स की पहुंच बढ़ाने की उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है.
मीशो का मानना है कि किराना क्लब के मजबूत रिटेलर नेटवर्क और उसके तकनीक-संचालित मार्केटप्लेस मॉडल का संयोजन छोटे कारोबारियों के लिए उत्पाद खोज, खरीद प्रक्रिया और पारदर्शिता को बेहतर बनाएगा.
फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूरोसैटरी डिफेंस एक्सपो के दौरान इस साझेदारी पर मुहर लगी. समझौते का उद्देश्य दुनियाभर की सेनाओं के लिए अत्याधुनिक 155mm मोबाइल आर्टिलरी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए भारत फोर्ज की रक्षा इकाई कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (KSSL) ने अमेरिकी रक्षा कंपनी AM General के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. दोनों कंपनियां मिलकर अत्याधुनिक 155mm मोबाइल आर्टिलरी गन सिस्टम विकसित करेंगी, जिसे दुनिया भर की सेनाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा. इस समझौते को भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
पेरिस डिफेंस एक्सपो में हुआ समझौता
फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूरोसैटरी डिफेंस एक्सपो के दौरान इस साझेदारी पर मुहर लगी. समझौते का उद्देश्य दुनियाभर की सेनाओं के लिए अत्याधुनिक 155mm मोबाइल आर्टिलरी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है.
AM General ने अमेरिकी सेना के मोबाइल टैक्टिकल कैनन (MTC) कार्यक्रम के लिए प्रस्ताव भी सौंपा है. इस परियोजना में भारत फोर्ज के MArG (Mounted Artillery Gun) प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए नया हथियार सिस्टम विकसित किया जाएगा. यदि अमेरिकी सेना से मंजूरी मिलती है, तो इसकी आपूर्ति 2027 से शुरू हो सकती है.
40 किलोमीटर से ज्यादा मारक क्षमता
इस साझेदारी के केंद्र में भारत फोर्ज का MArG प्लेटफॉर्म है, जिसमें 52-कैलिबर की 155mm तोप लगाई गई है. यह सिस्टम 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक उच्च-विस्फोटक गोले दागने में सक्षम है. तोप में अत्याधुनिक सॉफ्ट रिकॉइल तकनीक, ऑटोमेटेड लोड-असिस्ट सिस्टम और आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम दिया गया है, जिससे हर मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी सटीक निशाना लगाया जा सकता है. यह प्लेटफॉर्म 20 से अधिक गोले और आवश्यक बारूद अपने साथ ले जाने की क्षमता रखता है, जिससे युद्ध के दौरान तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी.
वैश्विक रक्षा बाजार पर नजर
भारत फोर्ज के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की उन्नत रक्षा तकनीकों पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है. उनके अनुसार, कंपनी ऐसे युद्ध-सिद्ध और आधुनिक हथियार प्रणालियों के विकास पर फोकस कर रही है जो भविष्य की सैन्य जरूरतों को पूरा कर सकें.
वहीं AM General के प्रेसिडेंट और सीईओ जॉन चैडबोर्न ने कहा कि उनकी कंपनी की पेटेंटेड सॉफ्ट रिकॉइल तकनीक और KSSL के मोबाइल प्लेटफॉर्म का संयोजन सेनाओं को अधिक प्रभावी और लचीली युद्ध क्षमता प्रदान करेगा.
दोनों कंपनियों की नजर केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं है. वे वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही मोबाइल आर्टिलरी सिस्टम की मांग को भी भुनाना चाहती हैं.
भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना अमेरिकी सेना के लिए चयनित होती है, तो यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी. इससे न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि रक्षा निर्यात बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका मजबूत करने में भी मदद मिलेगी.
निवेशकों की नजर भारत फोर्ज पर
इस बड़े रक्षा समझौते के बाद निवेशकों की नजर भारत फोर्ज के शेयर पर भी बनी हुई है. 18 जून को एनएसई पर कंपनी का शेयर 0.85 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2,017.20 रुपये पर बंद हुआ था. हालांकि लंबी अवधि में स्टॉक का प्रदर्शन मजबूत रहा है.
पिछले एक वर्ष में भारत फोर्ज के शेयर में 43 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है, जबकि कुल रिटर्न लगभग 55 प्रतिशत रहा है. कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 96,670 करोड़ रुपये है.
आगे क्या रहेगा फोकस
बाजार की नजर अब अमेरिकी सेना के मोबाइल टैक्टिकल कैनन कार्यक्रम पर रहेगी. यदि इस परियोजना को मंजूरी मिलती है, तो भारत फोर्ज और KSSL के लिए यह न केवल बड़ा कारोबारी अवसर होगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी दिला सकता है.
NSE के आईपीओ से शुरुआती निवेशकों की खुलेगी किस्मत, SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा और बीमा कंपनियों को मिल सकता है हजारों करोड़ रुपये का लाभ
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ कई सरकारी वित्तीय संस्थानों के लिए बड़ी कमाई का अवसर लेकर आ रहा है. एनएसई के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) से पता चलता है कि शुरुआती दौर में निवेश करने वाले संस्थानों को इस आईपीओ से हजारों करोड़ रुपये का लाभ हो सकता है. अगरआईपीओ का मूल्य 2,000 रुपये प्रति शेयर तय होता है, तो देश के सबसे बड़े बैंक SBI को अकेले लगभग 4,950 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो सकती है. यह भारतीय वित्तीय क्षेत्र के सबसे सफल दीर्घकालिक निवेशों में से एक माना जा रहा है.
SBI को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा
SBI ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 2.475 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है. 2,000 रुपये प्रति शेयर के अनुमानित मूल्य पर इससे बैंक को करीब 4,950 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन शेयरों की औसत खरीद लागत महज 0.80 रुपये प्रति शेयर रही है. यानी बैंक ने कुल मिलाकर करीब 1.98 करोड़ रुपये का निवेश किया था और अब उसे लगभग 4,948 करोड़ रुपये का अनुमानित लाभ मिल सकता है.
बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य संस्थानों को भी भारी मुनाफा
सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य संस्थानों को भी एनएसई आईपीओ से उल्लेखनीय लाभ होने की संभावना है. बैंक ऑफ बड़ौदा ने एनएसई में अपनी हिस्सेदारी औसतन 0.54 रुपये प्रति शेयर की लागत पर खरीदी थी. अब वह लगभग 2,197 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेच सकता है, जबकि उसकी मूल निवेश लागत करीब 59 लाख रुपये रही थी.
इसी तरह, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने 0.46 रुपये प्रति शेयर की औसत लागत पर निवेश किया था. कंपनी की हिस्सेदारी की मौजूदा अनुमानित कीमत करीब 2,178 करोड़ रुपये है, जबकि उसका मूल निवेश लगभग 50 लाख रुपये था.
बीमा कंपनियों की भी खुलेगी किस्मत
एनएसई के शुरुआती निवेशकों में शामिल सरकारी बीमा कंपनियों को भी इस आईपीओ से बड़ा फायदा मिलने वाला है. न्यू इंडिया एश्योरेंस और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने अपने शेयर औसतन 0.32 रुपये प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे. अनुमानित मूल्यांकन के आधार पर न्यू इंडिया एश्योरेंस को करीब 2,100 करोड़ रुपये और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को लगभग 1,200 करोड़ रुपये मिल सकते हैं.
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, जिसने 0.50 रुपये प्रति शेयर के भाव पर निवेश किया था, उसे भी करीब 1,200 करोड़ रुपये की प्राप्ति होने की संभावना है.
GIC Re को भी होगा बड़ा लाभ
जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) ने अपेक्षाकृत ऊंचे मूल्य पर निवेश किया था. उसकी औसत खरीद लागत 5.26 रुपये प्रति शेयर रही है. इसके बावजूद कंपनी 2,131 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर बेच सकती है, जबकि उसका मूल निवेश करीब 5.6 करोड़ रुपये था.
विदेशी निवेशकों को भी मिलेगा मल्टीबैगर रिटर्न
घरेलू संस्थानों की तुलना में विदेशी निवेशकों ने एनएसई में कहीं अधिक कीमत पर निवेश किया था, फिर भी उन्हें आईपीओ से शानदार रिटर्न मिलने की संभावना है. MS Strategic (Mauritius) ने अपनी हिस्सेदारी 66.54 रुपये प्रति शेयर की औसत लागत पर खरीदी थी, जबकि Aranda Investments (Mauritius) की खरीद लागत 62.38 रुपये प्रति शेयर रही थी.
खुलासे के अनुसार, Canada Pension Plan Investment Board की खरीद लागत सबसे अधिक 324.13 रुपये प्रति शेयर रही है. इसके बावजूद 2,000 रुपये प्रति शेयर के संभावित आईपीओ मूल्य पर उसे भी कई गुना रिटर्न मिलने की उम्मीद है.
तीन दशक की वैल्यू क्रिएशन की मिसाल
एनएसई की स्थापना 1992 में हुई थी. डीआरएचपी में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन दशकों में एक्सचेंज ने अपने निवेशकों के लिए जबरदस्त संपत्ति का सृजन किया है. SBI और अन्य शुरुआती संस्थानों के लिए यह आईपीओ न केवल निवेश भुनाने का अवसर है, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार के विकास और एनएसई की सफलता की कहानी का भी प्रतीक माना जा रहा है.
गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 82.30 अंक बढ़कर 24,168 अंक पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की. अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते तथा कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई, जिसके दम पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 82.30 अंक बढ़कर 24,168 अंक पर बंद हुआ. अब शुक्रवार के कारोबार में बाजार की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल और चुनिंदा शेयरों से जुड़ी खबरों पर रहेगी.
गुरुवार को अंतिम घंटे में लौटी थी तेजी
गुरुवार को बाजार की शुरुआत कमजोर रही थी और दिनभर उतार-चढ़ाव देखने को मिला. हालांकि अंतिम कारोबारी घंटे में बैंकिंग, एविएशन और पावर शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 में से 20 शेयर हरे निशान में बंद हुए थे. इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), ट्रेंट, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), HDFC Bank, SBI और Power Grid के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी. वहीं Infosys, Tech Mahindra, TCS और HCL Tech जैसे आईटी शेयरों में दबाव देखने को मिला था.
कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर
बाजार को सबसे बड़ा सहारा अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते से मिला है. समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कम हुई हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 77 डॉलर प्रति बैरल के करीब और डब्ल्यूटीआई क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखा.
तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाता घाटे पर दबाव कम हो सकता है. यदि कच्चे तेल में गिरावट का रुख जारी रहता है तो इसका असर आज के कारोबार में भी सकारात्मक दिखाई दे सकता है.
आईटी शेयरों पर रह सकता है दबाव
वैश्विक आईटी कंपनी Accenture के ताजा नतीजे बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहे हैं. ऐसे में शुक्रवार को Infosys, TCS, Wipro, HCL Tech और Tech Mahindra जैसे आईटी शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी.
इन शेयरों में दिख सकती है हलचल
आज के कारोबार में HDFC Bank, Wipro, Bharat Forge, Manappuram Finance, Brigade Enterprises, Tata Capital, Quick Heal Technologies, Diamond Power Infrastructure, MSP Steel & Power और Rajratan Global Wire जैसे शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं.
HDFC Bank को RBI से चेयरमैन के कार्यकाल विस्तार की मंजूरी मिली है. Bharat Forge की सहयोगी कंपनी ने अमेरिकी रक्षा कंपनी के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. Wipro ने यूरोप में बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट पूरा किया है, जबकि Quick Heal Technologies ने नए CEO की नियुक्ति की है. Manappuram Finance फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करने वाली है. इसके अलावा Diamond Power Infrastructure को 2,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी मिली है, MSP Steel & Power में प्रमोटर समूह ने हिस्सेदारी बढ़ाई है और Brigade Enterprises की चेन्नई परियोजना की पर्यावरण मंजूरी रद्द होने से उसके शेयर पर नजर रहेगी.
निवेशकों की रणनीति क्या हो?
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक तनाव में कमी और कच्चे तेल की नरम कीमतें फिलहाल बाजार को सहारा दे रही हैं. हालांकि पांच दिनों की लगातार तेजी के बाद निवेशक मुनाफावसूली भी कर सकते हैं. ऐसे में आज का कारोबार वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और खबरों वाले शेयरों की चाल से प्रभावित रह सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
मजबूत तिमाही नतीजों, बेहतर एसेट क्वालिटी और रणनीतिक साझेदारी के दम पर चढ़ा बैंक का शेयर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख बैंकों में शामिल यस बैंक के शेयरों में हाल के दिनों में शानदार तेजी देखने को मिली है. गुरुवार को बैंक का शेयर 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. बीएसई पर शेयर करीब 3 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25.77 रुपये तक पहुंच गया. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में शेयर करीब 16 प्रतिशत उछल चुका है, जिससे निवेशकों को मजबूत रिटर्न मिला है.
मार्केट कैप में 8,600 करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा
शेयर में आई तेजी का असर बैंक के बाजार पूंजीकरण पर भी दिखाई दिया है. पिछले पांच सत्रों में यस बैंक का मार्केट कैप 8,662 करोड़ रुपये से अधिक बढ़कर 80,912 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. पिछले कारोबारी सत्र में शेयर 25.11 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि गुरुवार को यह 25.27 रुपये पर खुला.
एक महीने में 17%, तीन महीने में 50% की छलांग
यस बैंक के शेयर ने हाल के महीनों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 15 प्रतिशत, एक महीने में 17 प्रतिशत और वर्ष 2026 में अब तक 19 प्रतिशत चढ़ चुका है. वहीं, पिछले तीन वर्षों में इसमें 56 प्रतिशत और पांच वर्षों में 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
मार्च 2026 में बैंक का शेयर 17.20 रुपये के 52-सप्ताह के निचले स्तर तक फिसल गया था. इसके बाद तीन महीने से भी कम समय में इसमें करीब 50 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है.
नॉर्दर्न आर्क कैपिटल के साथ साझेदारी बनी ट्रिगर
विश्लेषकों का मानना है कि शेयर में तेजी का दौर बैंक द्वारा नॉर्दर्न आर्क कैपिटल के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा के बाद शुरू हुआ. इस साझेदारी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और बैंक के विकास की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया.
मार्च तिमाही में दमदार प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में यस बैंक का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा. बैंक का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) सालाना आधार पर 45 प्रतिशत बढ़कर 1,068 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसी दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 16 प्रतिशत बढ़कर 2,638 करोड़ रुपये रही. बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 20 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 2.7 प्रतिशत हो गया, जो परिचालन प्रदर्शन में सुधार का संकेत देता है.
एसेट क्वालिटी में भी सुधार
बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है. ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) अनुपात घटकर 1.3 प्रतिशत रह गया, जबकि नेट एनपीए (NNPA) अनुपात घटकर 0.2 प्रतिशत पर आ गया. इससे बैंक की बैलेंस शीट और जोखिम प्रबंधन क्षमता मजबूत हुई है.
आगे क्या कहते हैं तकनीकी संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यस बैंक का तकनीकी ढांचा फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है. हालांकि शेयर अब 26 रुपये के आसपास एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन के करीब पहुंच गया है, जहां मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है.
विश्लेषकों के अनुसार 23-24 रुपये का दायरा अब शेयर के लिए प्रमुख सपोर्ट जोन है. जब तक स्टॉक इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक इसकी निकट अवधि की चाल सकारात्मक मानी जा सकती है.
निवेशकों की नजर अगले ट्रिगर्स पर
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, बेहतर एसेट क्वालिटी और रणनीतिक साझेदारियों के कारण यस बैंक एक बार फिर निवेशकों के रडार पर आ गया है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों को आगे के कारोबारी प्रदर्शन और बैंक की विकास रणनीति पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
युवा प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और ग्रासरूट लीग्स को मिलेगा समर्थन, 2034 तक भारत को वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मीडिया एवं मनोरंजन कंपनी जी एंटरटेंमेंट एंटरप्राइसेज (ZEEL) ने भारतीय फुटबॉल के विकास को गति देने के लिए एक नई पहल की घोषणा की है. कंपनी ने कहा है कि Zee5 के फुटबॉल से जुड़े सब्सक्रिप्शन राजस्व का 15 प्रतिशत हिस्सा देशभर में प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण और ग्रासरूट फुटबॉल कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा.
कंपनी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से पहचानना और उन्हें पेशेवर अवसर उपलब्ध कराना है. इसके जरिए शहर, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक एक मजबूत फुटबॉल इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा.
युवा प्रतिभाओं को मिलेगा मंच
ZEEL के अनुसार यह कार्यक्रम देशभर में फुटबॉल प्रतिभाओं की खोज और उनके विकास पर केंद्रित होगा. इसके तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और लीग प्रारूप विकसित किए जाएंगे ताकि खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिल सकें. कंपनी अपने Zee5 सब्सक्राइबर्स को भी इस मिशन का हिस्सा बनाएगी, जिससे दर्शकों की भागीदारी सीधे युवा खिलाड़ियों के विकास में योगदान दे सके.
FIFA साझेदारी से मिलेगा लाभ
यह पहल ZEEL और FIFA के बीच 2034 तक के लिए हुए साझेदारी समझौते के बाद शुरू की गई है. कंपनी का मानना है कि वैश्विक फुटबॉल संस्थाओं के अनुभव और मॉडल का उपयोग कर भारत में प्रतिभा खोज, कोचिंग, खिलाड़ी विकास और लीग संरचना को मजबूत किया जा सकता है.
देशभर में शुरू होंगी ग्रासरूट लीग्स
कार्यक्रम के तहत विभिन्न शहरों, जिलों और राज्यों में ग्रासरूट फुटबॉल लीग्स और विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे. इनका उद्देश्य उभरते खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल और पेशेवर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है. कंपनी फुटबॉल विशेषज्ञों, अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय फुटबॉल संघों के साथ मिलकर प्रतिभा पहचान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगी.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी
ZEEL का लक्ष्य ऐसा तंत्र विकसित करना है जो खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर प्रदान करे. कंपनी का मानना है कि मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार कर भारत फुटबॉल में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर सकता है.
2034 तक विश्व कप में भारत की मजबूत मौजूदगी का लक्ष्य
कंपनी ने कहा कि उसकी दीर्घकालिक योजना पुरुष और महिला दोनों वर्गों में विभिन्न आयु समूहों के FIFA विश्व कप में भारत की भागीदारी को मजबूत करने की है. इसके लिए जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकास को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है.
'भारत में फुटबॉल प्रतिभा की कोई कमी नहीं'
ZEEL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पुनीत गोयंका ने कहा कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं का विशाल भंडार मौजूद है, जिसे सही अवसर और संसाधन मिलने पर वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह पहल केवल खेल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों युवा भारतीयों के सपनों को साकार करने का प्रयास है. कंपनी का लक्ष्य दर्शकों की रुचि को वास्तविक सामाजिक प्रभाव में बदलना और भविष्य की पीढ़ियों के नेतृत्व में भारत को वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर स्थापित करना है.
स्वामी विवेकानंद के संदेश से प्रेरित पहल
कंपनी ने बताया कि यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद के उस संदेश से प्रेरित है जिसमें युवाओं को शक्ति, अनुशासन, आत्मविश्वास और कर्मशीलता विकसित करने के लिए फुटबॉल जैसे खेल अपनाने की प्रेरणा दी गई थी.
ZEEL का कहना है कि यह पहल भारत में फुटबॉल की बुनियाद को मजबूत करने और दीर्घकालिक प्रतिभा विकास मॉडल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
बारिश की भारी कमी से धान और सोयाबीन की बुआई प्रभावित, सूखे की आशंका ने बढ़ाई सरकार और किसानों की चिंता
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में मानसून की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत बेहद कमजोर रही है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 18 जून तक देशभर में मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि विकसित हो रहा अल-नीनो प्रभाव मानसून को कमजोर कर रहा है, जिससे कृषि उत्पादन, जल आपूर्ति और औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
शुरुआती मानसून ने बढ़ाई चिंता
जून से सितंबर तक चलने वाला मानसून भारत की वार्षिक वर्षा का प्रमुख स्रोत है. लेकिन इस बार मानसून की कमजोर शुरुआत ने किसानों और नीति-निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है. धान, सोयाबीन और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है, जबकि निर्माण क्षेत्र समेत कई उद्योगों की गतिविधियों पर भी असर पड़ने लगा है.
सबसे शक्तिशाली अल-नीनो में से एक बनने के संकेत
अंतरराष्ट्रीय मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा अल-नीनो हाल के वर्षों के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक साबित हो सकता है. विभिन्न मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि जुलाई और अगस्त में भी उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल ऐसा कोई मजबूत संकेत नहीं दिख रहा है जिससे देशभर में वर्षा की कमी की भरपाई हो सके. अगले कुछ दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ सकती है, लेकिन इससे पूरे देश में मानसून की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद नहीं है.
कृषि और खाद्य सुरक्षा पर मंडराया खतरा
भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल, चीनी और कपास उत्पादक देशों में शामिल है. देश का कृषि क्षेत्र बड़े पैमाने पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करता है. यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर उत्पादन की स्थिति में सरकार को कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, ताकि घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.
जल संकट के संकेत भी दिखने लगे
कमजोर मानसून का असर अब शहरी क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है. मुंबई की जलापूर्ति एजेंसी ने निर्माण स्थलों को पानी की आपूर्ति रोक दी है. पिछले 12 वर्षों में यह पहली बार है जब ऐसा कदम उठाया गया है. इसके अलावा व्यवसायों, कारखानों और खेल क्लबों के लिए जल आपूर्ति में कटौती की गई है, जबकि स्विमिंग पूलों को पानी देना भी बंद कर दिया गया है.
अगले सप्ताह बारिश में सुधार की उम्मीद
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले सप्ताह कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. दक्षिण-पश्चिमी नम हवाएं मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी और इसके जुलाई की शुरुआत तक उत्तर भारत तक पहुंचने की संभावना है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के समग्र प्रदर्शन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है और व्यापक मौसम परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं दिख रही हैं.
सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की चेतावनी
कृषि मौसम विशेषज्ञों ने देश के प्रमुख सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक इलाकों के लिए गंभीर सूखे की चेतावनी जारी की है. उनका मानना है कि यदि जुलाई तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो सोयाबीन की बुआई में देरी हो सकती है और फसल की वृद्धि अवधि भी कम हो सकती है.
खरीफ सीजन के लिए निर्णायक साबित होंगे अगले कुछ सप्ताह
वर्तमान में किसान साल के सबसे बड़े बुआई सीजन के बीच हैं. ऐसे में अगले कुछ सप्ताह खरीफ फसलों के भविष्य के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. यदि जल्द बारिश में सुधार होता है तो स्थिति संभल सकती है, लेकिन मौसम विभाग और वैश्विक एजेंसियों के पूर्वानुमान एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसून की आशंका जता रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत होता अल-नीनो भारतीय मानसून को कमजोर और असमान बना सकता है, जिससे कृषि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ने का जोखिम बढ़ गया है.