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क्रिप्‍टो को लेकर RBI गवर्नर ने दिया फिर अहम बयान, जानिए क्‍या है ये 

RBI गवर्नर हमेशा ही क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बहुत स्‍पष्‍ट हैं. उनका मानना है कि ये वो करेंसी है जिसकी परिभाषा बहुत अस्पष्ट है, और ये एक तरह का जुआं है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक बार फिर क्रिप्‍टो करेंसी को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्‍होंने कहा कि क्रिप्टोकरंसी को देश में पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, उन्‍होंने इस करेंसी को लेकर कहा कि ये एक तरह का 'जुआ' है.

क्‍या बोले शक्तिकांत दास 
मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि RBI के गवर्नर ने ये बात मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान कही. इस कार्यक्रम में जब RBI गवर्नर से पूछा गया कि क्रिप्टो पर उनका क्‍या रुख है तो उन्‍होंने कहा, RBI की स्थिति बहुत स्पष्ट है, सभी क्रिप्टो पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. हालाँकि, ब्लॉकचेन की तकनीक को समर्थन देने की आवश्यकता है क्योंकि इसके कई अन्‍य पहलू हैं.
जब उनसे ऐसा करने के कारणों के बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने कहा, टेरर फंडिंग के सामान्य रूप से ज्ञात खतरे के अलावा, क्रिप्टोकरेंसी की परिभाषा बहुत साफ नहीं है. कुछ लोग इसे एक संपत्ति के रूप में कहते हैं, जबकि अन्य इसे एक वित्तीय उत्पाद के रूप में कहते हैं और अगर ऐसा है, तो इसे परिभाषित करना होगा. क्रिप्टो की कोई परिभाषा नहीं है.

क्रिप्‍टो का उतार-चढ़ाव असामान्‍य है
RBI गवर्नर क्रिप्‍टो पर अपनी बात रखते हुए यहीं नहीं रुके. उन्‍होंने क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर कहा कि ये असामान्‍य है, जो इसे अविश्वसनीय बनाता है. कीमतों में अस्थिरता विश्वास की सोच पर आधारित है जहां एक विशेष क्रिप्टो की कीमत ऊपर या नीचे जा सकती है. इसलिए, कोई भी चीज जो बिना किसी परिभाषा के आती है, जिसका मूल्यांकन पूरी तरह से विश्वास पर निर्भर है, वह सिर्फ 100 प्रतिशत सट्टा है या इसे स्पष्ट रूप से जुआ भी कहा जा सकता है.
भारत किसी भी तरह से जुए की अनुमति नहीं देता है और यदि क्रिप्टोकरेंसी को जुए के रूप में माना जाना चाहिए, तो उसके लिए विशिष्ट नियम होने चाहिए. उन्‍होंने ये भी कहा कि क्रिप्टो एक वित्तीय उत्पाद नहीं है, इसलिए एक वित्तीय उत्पाद या संपत्ति के रूप में क्रिप्टोकरंसी पूरी तरह से एक गलत तर्क है.

RBI अपना नियंत्रण खो देगा
उन्होंने कहा, वृहद स्तर पर लेन-देन करने के लिए क्रिप्टोकरेंसी में आदान-प्रदान का साधन बनने की क्षमता है. इसमें से अधिकांश डॉलर मूल्यवर्ग का है और यदि कोई इसकी अनुमति देता है तो उसका अर्थ होगा कि  20 प्रतिशत लेनदेन क्रिप्टो के माध्यम से हो रहा है, इसका मतलब है कि यह केंद्रीय बैंक द्वारा नहीं हो रहा है और यह पूरी दुनिया में निजी कंपनियों द्वारा जारी किया जाता है. 
यदि लेन-देन क्रिप्टो के माध्यम से होने लगे, तो RBI अर्थव्यवस्था में रुपयों की सप्‍लाई पर नियंत्रण खो देगा. मौद्रिक नीति और लिक्विडिटी के स्तर को बनाए रखने की आवश्यकता के बारे में निर्णय लेने के लिए RBI के अधिकार को कम करके आंका जाएगा. इससे अर्थव्यवस्था का डॉलरीकरण होगा. एफटीएक्स की विफलता को देखते हुए RBI ने पहले भविष्यवाणी की थी कि क्रिप्टो के आसपास का पूरा हवामहल ढहने वाला है और, यह स्पष्ट रूप से माना जा सकता है कि क्रिप्टोकरंसी का भविष्य अंधकारमय दिखता है.
 


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