होम / बिजनेस / तेजी से बढ़ता भारतीय REIT बाजार: 2030 तक $25 अरब पार करने का अनुमान
तेजी से बढ़ता भारतीय REIT बाजार: 2030 तक $25 अरब पार करने का अनुमान
भारतीय REIT सेक्टर में 6–7% की औसत रिटर्न दर, संस्थागत निवेश में वृद्धि और नीति सुधारों ने इसे निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बना दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारत का रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) मार्केट तेजी से विकसित हो रहा है. 2019 में पहली लिस्टिंग के बाद से अब तक यह मार्केट लगभग 18 अरब डॉलर की बाजार पूंजी तक पहुंच चुका है, और 2030 तक इसके 25 अरब डॉलर पार करने का अनुमान है. CREDAI और ANAROCK कैपिटल द्वारा जारी रिपोर्ट ‘Indian REITs: A Gateway to Institutional Real Estate’ में यह जानकारी दी गई.
ANAROCK कैपिटल के सीईओ शोभित अग्रवाल के अनुसार, "भारतीय REITs की एंट्री देर से हुई, लेकिन अब ये बाजार में अग्रणी बन चुके हैं. फिलहाल इनका औसत वितरण रिटर्न 6-7% है, जो अमेरिका और सिंगापुर जैसे विकसित बाजारों से भी अधिक है. यह न केवल फिक्स्ड-इनकम विकल्पों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी है, बल्कि पूंजी बढ़ोतरी की संभावना भी रखता है."
CREDAI अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि भारत में अभी अधिकांश REIT निवेश ग्रेड-A ऑफिस परिसंपत्तियों (IT और BFSI सेक्टर से जुड़ी) तक सीमित है. लेकिन भविष्य में यह रिटेल, लॉजिस्टिक्स, हाउसिंग और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार करेगा.
भारत में फिलहाल संस्थागत रियल एस्टेट का केवल 20% हिस्सा ही REITs में है, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 96%, सिंगापुर में 55% और जापान में 51% है. इससे पता चलता है कि भारतीय बाजार में अभी बहुत संभावनाएं बाकी हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक डेटा सेंटर REITs का मूल्य 2024 में लगभग 250 अरब डॉलर था, जो अगले 7 वर्षों में दोगुना हो सकता है. भारत में भी यह ट्रेंड देखा जा रहा है – H1 2025 में इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स लीजिंग में 60% की वार्षिक वृद्धि, वेयरहाउसिंग अब्जॉर्प्शन में 30% की बढ़त, और संस्थागत निवेश में तीन गुना उछाल (2024 में 2.5 अरब डॉलर) आई है.
भारत के शीर्ष 7 शहरों में लगभग 520 मिलियन वर्गफुट ऑफिस स्पेस मौजूद है, लेकिन अभी तक इनमें से केवल 32% (लगभग 166 मिलियन वर्गफुट) ही REIT में शामिल किया गया है. जैसे-जैसे यह बाजार परिपक्व होगा, इसमें लॉजिस्टिक्स, रिटेल और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों की भागीदारी भी बढ़ेगी, जिससे परिसंपत्तियों में विविधता आएगी.
SEBI द्वारा 2014 में REIT रेगुलेशन लागू किए जाने के बाद, सरकार ने कई अहम बदलाव किए हैं – जैसे लॉट साइज कम करना, पूंजीगत लाभ पर नियम आसान करना और 2025 में डिविडेंड टैक्स में छूट देना. इससे निवेशकों का भरोसा और खुदरा भागीदारी दोनों बढ़े हैं.
हालांकि, विकसित देशों की तुलना में भारत में अब भी डिविडेंड पर कर दरें अधिक हैं, जो खुदरा निवेशकों के लिए चुनौती बन सकती हैं.
भारतीय REIT बाजार अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन तेजी से विकास की राह पर है. मजबूत डिमांड, संस्थागत निवेश, और नीति समर्थन के चलते यह सेक्टर जल्द ही वैश्विक निवेशकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है. जैसे-जैसे बाजार लॉजिस्टिक्स, रिटेल और डेटा सेंटर जैसे सेगमेंट में प्रवेश करेगा, यह भारत के रियल एस्टेट परिदृश्य को नया आकार देगा.
टैग्स