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Rahul Bajaj: बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर बनाकर आज ही के दिन रुखसत हो गए थे 'हमारे बजाज'
राहुल बजाज ने 1965 में बजाज ग्रुप की जिम्मेदारी संभाली थी और उनकी अगुवाई में बजाज ऑटो का टर्नओवर 12 हजार करोड़ तक पहुंच गया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
बजाज समूह (Bajaj Group) को बुलंदियों पर पहुंचाने वाले राहुल बजाज (Rahul Bajaj) आज ही के दिन दुनिया से रुखसत हो गए थे. पिछले साल 12 फरवरी को उनका पुणे में निधन हुआ था. राहुल उद्योग जगत का ऐसा चमकता सितारा थे, जिसकी रोशनी में हमेशा दूसरों को मार्गदर्शन मिला. अपने बेटों को कंपनी की जिम्मेदारी सौंपने के बाद उन्होंने 2021 में बजाज ऑटो के गैर-कार्यकारी चेयरमैन पद से भी इस्तीफा दे दिया था, लेकिन वह कंपनी के मानद चेयरमैन बने रहे.
नेहरू ने दिया था नाम
राहुल बजाज (Rahul Bajaj) का जन्म 1938 में हुआ था. उनके दादा जमनालाल बजाज स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1926 में बजाज कंपनी की शुरुआत की थी. जमनालाल बजाज के बेटे यानी राहुल बजाज के पिता कमलनयन बजाज ने 1942 में बजाज ग्रुप को संभाला और इसके कुछ समय बाद Bajaj Auto की शुरुआत हुई. राहुल बजाज ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके परिवार के देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के साथ अच्छे तालुक्कात थे और उन्हें राहुल नाम नेहरू ने ही दिया था.
जुबां पर चढ़ा ‘हमारा बजाज’
राहुल बजाज ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज और बॉम्बे यूनिर्सिटी में पढ़ाई की थी. एमबीए के लिए वह अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल गए. उसके बाद 1965 में जब लौटकर आए तो 'बजाज ऑटो' में काम करना शुरू किया और 1968 में कंपनी के सीईओ बन गए. राहुल के कार्यकाल में बजाज ऑटो ने बुलंदियों को छूआ. 1972 में बजाज ने ‘चेतक’ ब्रैंड नाम से स्कूटर बाजार में उतारा, जिसका स्लोगन ‘हमारा बजाज’ ऐसा हिट हुआ कि बच्चे-बच्चे की जुबां पर चढ़ गया. आज भी इसे हिंदुस्तान के सबसे सफल मार्केटिंग कैंपेन में से एक माना जाता है.
बेटों को सौंपी जिम्मेदारी
राहुल बजाज हमेशा कुछ नया करने में यकीन रखते थे. 1990 में बजाज ने यंग जनरेशन खासकर, युवतियों को टारगेट कर 60CC का हल्का स्कूटर 'सनी' लॉन्च किया, जो देखते-देखते इंडियन यूथ की पहली पसंद बन गया. हालांकि, कंपनी ने 1997 में इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया था. कई सालों तक बिना थके कंपनी की बागडोर संभालने के बाद राहुल बजाज ने 2005 में अपनी जिम्मेदारियां बेटे राजीव बजाज और संजीव बजाज को सौंप दीं. इसके बाद 2008 में उन्होंने बजाज ग्रुप का बंटवारा बजाज ऑटो, बजाज फिनसर्व और एक होल्डिंग कंपनी में कर दिया था.
राज्यसभा सांसद भी रहे
राहुल बजाज की पहचान एक ऐसे कारोबारी की थी, जो साफ बोलने में यकीन रखते थे. वह बेबाकी से हर मुद्दे पर अपनी राय जाहिर किया करते थे. कारोबार की दुनिया के साथ-साथ उन्होंने राजनीति में भी अपना योगदान दिया. वह राज्यसभा सांसद भी रहे थे. उद्योग जगत में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2001 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. राहुल बजाज ने 1965 में बजाज ग्रुप की जिम्मेदारी संभाली थी और उनकी अगुआई में बजाज ऑटो का टर्नओवर 7.2 करोड़ से 12 हजार करोड़ तक पहुंच गया था.
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