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भारत में बिजली की कमी हुई दोगुनी से ज्यादा, जनवरी-मई 2026 में सप्लाई संकट बढ़ा: IEA
पहली छमाही में बिजली मांग में 6% की बढ़ोतरी, रिकॉर्ड गर्मी और बढ़ती कूलिंग जरूरतों ने डाला दबाव
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 59 minutes ago
भारत में बिजली की मांग में तेजी के साथ ही सप्लाई पर दबाव भी बढ़ रहा है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारत की बिजली मांग करीब 6 फीसदी बढ़ी है. वहीं, जनवरी से मई 2026 के बीच बिजली आपूर्ति में कमी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले दोगुनी से अधिक रही.
IEA की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली मांग में बढ़ोतरी की मुख्य वजह उद्योग और सेवा क्षेत्र में मजबूत गतिविधियां तथा भीषण गर्मी के कारण बढ़ी कूलिंग जरूरतें रहीं. अप्रैल के मध्य से जून की शुरुआत तक चली हीटवेव के दौरान बिजली खपत में तेज उछाल देखने को मिला.
मई में बिजली खपत 11% बढ़ी
गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग में तेजी आई. मई 2026 में बिजली खपत सालाना आधार पर 11 फीसदी बढ़ी, जबकि कूलिंग डिग्री डेज (Cooling Degree Days) में 7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. इसके चलते एसी, कूलर और अन्य कूलिंग उपकरणों के इस्तेमाल में बढ़ोतरी हुई और बिजली की मांग पर अतिरिक्त दबाव पड़ा.
18 मई से 21 मई के बीच लगातार चार दिनों तक देश में बिजली की पीक डिमांड रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची. 21 मई को यह 270.8 गीगावाट (GW) तक पहुंच गई. हालांकि, थर्मल और रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में बढ़ोतरी की मदद से इस मांग को पूरा किया गया.
IEA के अनुसार, दिन के समय सोलर फोटोवोल्टिक (Solar PV) उत्पादन ने अहम भूमिका निभाई और करीब 60 GW बिजली का योगदान दिया, जो दिन के पीक लोड का लगभग 22 फीसदी था.
शाम के समय बिजली उत्पादन पर बढ़ा दबाव
हालांकि दिन के समय पीक डिमांड पूरी कर ली गई, लेकिन शाम के समय बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया. IEA ने बताया कि शाम के वक्त सोलर जैसी वैरिएबल रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन घट जाता है, जबकि बिजली की मांग ऊंची बनी रहती है.
ऐसे में कोयला और गैस आधारित बिजली संयंत्रों को तेजी से उत्पादन बढ़ाना पड़ता है, जिससे संचालन संबंधी चुनौतियां पैदा होती हैं. कई मामलों में इसका असर बिजली आपूर्ति की कमी के रूप में देखने को मिला.
इसका सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तरी भारत के कुछ राज्यों में दिखाई दिया. IEA के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में बिजली की आपूर्ति में कमी का स्तर सबसे अधिक रहा. अप्रैल में कुछ क्षेत्रों में बिजली की कमी मासिक मांग के 2 फीसदी तक पहुंच गई.
2026 में बिजली मांग 7% तक बढ़ने का अनुमान
IEA का अनुमान है कि वर्ष 2026 के बाकी महीनों में बिजली की मांग और तेज गति से बढ़ सकती है. पूरे साल में बिजली मांग वृद्धि करीब 7 फीसदी रहने की संभावना है.
यह वृद्धि देश में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और तेजी से हो रहे विद्युतीकरण (Electrification) से प्रेरित होगी. यह 2025 की तुलना में काफी अधिक होगी, जब मानसून जल्दी आने के कारण बिजली मांग में सालाना आधार पर केवल 1.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी.
मौसम की स्थिति भी 2026 में बिजली खपत के रुझान को प्रभावित करने वाली अहम भूमिका निभाएगी. भारत में मानसून की शुरुआत 4 जून को हुई, जो सामान्य समय से तीन दिन देरी से थी. वहीं, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल मानसून में 11 वर्षों में सबसे कम बारिश का अनुमान जताया है.
कम बारिश की स्थिति में सिंचाई पंपों के अधिक इस्तेमाल से कृषि क्षेत्र में बिजली खपत बढ़ सकती है, जबकि गर्मी के कारण कूलिंग की मांग भी ऊंची बनी रह सकती है.
JM Financial ने जताई सप्लाई जोखिम की आशंका
ब्रोकरेज फर्म JM Financial का अनुमान है कि एल नीनो (El Niño) की स्थिति मजबूत होने से बिजली की अधिक मांग वाला सीजन सामान्य गर्मियों के महीनों से आगे बढ़ सकता है.
फर्म के अनुसार, बिजली मांग का संबंध केवल तापमान से नहीं बल्कि वेट-बल्ब तापमान (Wet-bulb Temperature), यानी गर्मी और नमी दोनों से होता है. 2023 के एल नीनो के दौरान अधिक नमी के कारण मई-जून के बाद भी कूलिंग की मांग ऊंची बनी रही थी.
FY24 में बिजली की पीक डिमांड सितंबर में 243 GW तक पहुंच गई थी, जबकि सामान्य रूप से अधिक मांग वाले मई-जून में यह 224 GW रही थी. इससे पता चलता है कि एल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियां बिजली की अधिक मांग वाले समय को बढ़ा सकती हैं.
जुलाई-सितंबर में विंड और हाइड्रो पावर पर दबाव
JM Financial के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच हवा आधारित बिजली उत्पादन में मौसमी गिरावट आ सकती है. फर्म का अनुमान है कि पीक विंड पावर सप्लाई 15-18 GW से घटकर अगस्त-सितंबर तक करीब 10 GW रह सकती है.
इसके अलावा जलविद्युत उत्पादन पर भी दबाव बना हुआ है. जलाशयों में ऊर्जा उपलब्धता पिछले साल की तुलना में 50 फीसदी कम बताई गई है.
ब्रोकरेज के मुताबिक, थर्मल पावर क्षमता पहले से ही 90 फीसदी से अधिक प्लांट लोड फैक्टर (PLF) पर काम कर रही है, जिससे अचानक बढ़ी मांग को पूरा करने की गुंजाइश सीमित है. गैस आधारित बिजली संयंत्र कुछ अतिरिक्त सहायता दे सकते हैं, लेकिन JM Financial का अनुमान है कि जुलाई के मध्य से अगस्त के अंत तक बिजली घाटे की स्थिति बनी रह सकती है.
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