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PFRDA का बड़ा कदम: पेंशन फंड्स को जिंस बाजार में निवेश करने की तैयारी
पेंशन फंडों को जिंस डेरिवेटिव्स में प्रवेश दिलाने की यह पहल निवेश विकल्पों में विविधता लाने और स्थिर रिटर्न सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम हो सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) पेंशन फंडों को जिंस डेरिवेटिव्स में निवेश की अनुमति दिलाने की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) के साथ बातचीत शुरू हो चुकी है. शुरुआती चरण में सोना, चांदी और कुछ धातुओं को निवेश विकल्प के रूप में शामिल करने की योजना है. तो आइए जानते हैं आखिर क्या होते हैं जिंस डायरेटिव्स और क्या है पीएफआरडीए की प्लानिंग?
जिंस बाजार क्या है?
जिंस बाजार वह बाजार होता है जहाँ कच्चे माल और प्राकृतिक संसाधनों जैसे सोना, चांदी, गेहूं, तेल, तांबा आदि की खरीद-बिक्री की जाती है. इसे मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जाता है: कृषि जिंसें (जैसे गेहूं, चावल, कपास) और गैर-कृषि जिंसें (जैसे सोना, चांदी, तेल). इस बाजार में व्यापार स्पॉट मार्केट (जहाँ तुरंत डिलीवरी होती है) और डेरिवेटिव मार्केट (जहाँ भविष्य की तारीख के लिए सौदे होते हैं) के जरिए किया जाता है. पेंशन फंड्स अब जिंस डेरिवेटिव्स में निवेश की तैयारी कर रहे हैं ताकि वे स्थिर और दीर्घकालिक रिटर्न पा सकें, खासकर सुरक्षित मानी जाने वाली धातुओं जैसे सोना और चांदी में निवेश करके जोखिम को कम किया जा सके.
स्थिर रिटर्न और कम जोखिम पर जोर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार PFRDA के चेयरमैन एस. रमन ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि पेंशन फंड लंबे समय के लिए स्थिर रिटर्न चाहते हैं. इसलिए उनकी प्राथमिकता उन जिंसों पर रहेगी जिनमें जोखिम अपेक्षाकृत कम है. उन्होंने स्पष्ट किया कि धातुओं में शुरुआत करना सुरक्षित विकल्प होगा, जबकि कृषि जिंसों को उच्च जोखिम के कारण शामिल नहीं किया जा सकता.
सेबी और सरकार से मिल रही सकारात्मक संकेत
रमन ने बताया कि सेबी इस विषय पर लगातार संपर्क में है और शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं. वहीं, इस सप्ताह की शुरुआत में सेबी चेयरमैन तुहित कांत पांडेय ने भी कहा था कि सरकार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है. उद्देश्य यह है कि बैंकों, बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को भी जिंस बाजार में प्रवेश की अनुमति दी जा सके.
बीमा क्षेत्र में सतर्कता बरतने की संभावना
एक बीमा कंपनी के अधिकारी ने संकेत दिया कि बीमा नियामक, कंपनियों को इस क्षेत्र में शामिल करने से पहले अधिक सतर्कता बरतेगा. उनका मानना है कि जिंस बाजार की अस्थिरता को देखते हुए बीमा क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता हो सकती है.
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