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असम गैस रिसाव पर ONGC ने मांगी विदेशी विशेषज्ञों की मदद, सातवें दिन भी जारी रहा ब्लोआउट
असम के मुख्यमंत्री ने जताई चिंता, स्थानीय लोगों ने निजी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
असम के सिवसागर जिले में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) के गैस कुएं से लगातार सातवें दिन हो रहे रिसाव को नियंत्रित करने के लिए कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है. बुधवार को ONGC ने बताया कि उसने एक अंतरराष्ट्रीय वेल-कंट्रोल एजेंसी की टीम को बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो रिसाव को रोकने के अभियान में मदद करेगी.
यह ब्लोआउट 12 जून को कुएं RDS 147A में उस समय हुआ था जब एक निजी ठेकेदार एस.के. पेट्रो द्वारा सर्विसिंग का कार्य किया जा रहा था.
हालांकि ONGC ने विदेशी एजेंसी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह एजेंसी अमेरिका की हो सकती है. ONGC ने बताया कि उसकी इन-हाउस टीम अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से निरंतर परामर्श के साथ चौबीसों घंटे कार्य कर रही है और विदेशी टीम को मौके पर लाने की तैयारी भी शुरू हो गई है.
ONGC ने यह भी बताया कि उसने कुएं से निकल रही गैस को पास के उत्पादन केंद्र से जोड़ने में सफलता पाई है, जिससे कुछ मात्रा में गैस को नियंत्रित तरीके से मोड़ा गया है. हालांकि, कुएं पर दाब अब भी अत्यधिक बना हुआ है, और स्थानीय लोगों की ओर से रिसाव को शीघ्र रोकने की मांग और तेज हो गई है.
अब तक आसपास के गांवों के 330 से अधिक परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है और राज्य सरकार की ओर से उन्हें राहत एवं सुरक्षा सहायता दी जा रही है.
बुधवार शाम ONGC के चेयरमैन ए.के. सिंह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की. इससे पहले मुख्यमंत्री सरमा ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर ONGC की प्रतिक्रिया में कमी को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने पत्र में लिखा, “ONGC की वेल-कंट्रोल कोशिशों के बावजूद कुएं पर दबाव बना हुआ है और रिसाव जारी है. यह स्थिति आसपास के गांवों में गंभीर अस्वस्थता और असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है.”
इसी बीच सिवसागर में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया है. कम से कम तीन स्थानीय संगठनों ने एस.के. पेट्रो के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है. प्रदर्शनकारियों ने ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यह घटना उसकी असावधानी का परिणाम है.
राज्य प्रशासन और ONGC के प्रयास जारी हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में डर और नाराजगी बनी हुई है. अब सबकी निगाहें अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम और उनकी कार्ययोजना पर टिकी हैं.
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