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NSE ने 250 रुपये के नीचे के शेयरों के टिक साइज में किया बदलाव, जानिए क्या होगा फायदा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने एक सर्कुलर में कहा है कि 250 रुपये से कम कीमत वाले शेयरों का टिक साइज 1 पैसे का होगा. यह 10 जून से लागू होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

एनएसई ने एक बड़ा फैसला लिया है. फैसला ये है कि 250 रुपये के नीचे ट्रेड हो रहे शेयर में अब टिक-साइज में आपको 1 पैसे का फर्क नजर आएगा. अभी तक आमतौर पर 5 पैसे का टिक साइज दिखता है. एनएसई ने इसकी घोषणा तो कर दी है, जिसका सर्कुलर 24 मई को जारी किया गया, मगर यह लागू 10 जून से होगा. इस बदलाव से न सिर्फ लिक्विडिटी बढ़ेगी बल्कि प्राइस एडजस्टमेंट भी हासिल होगा. फैसला इतना ही है, मगर आपके लिए यह कैसे लाभदायक होगा, उसे जान लेना जरूरी है.

NSE ने जारी किया सर्कुलर

NSE द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक, एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाली सभी सिक्योरिटीज़ पर टिक साइज में यह अंतर दिखेगा, सिवाय ईटीएफ (ETFs) के. T+1  सेटलमेंट वाली सिक्योरिटीज़ का टिक साइज T+0 सेटलमेंट (T0) सीरीज में भी नजर आएगा. एक्सचेंज ने जानकारी दी है कि महीने के अंतिम ट्रेडिंग दिन के क्लोजिंग प्राइस के आधार पर टिक साइज को हर महीने रिव्यू और एडजस्ट भी किया जाएगा. बता दें कि 10 जून से केवल कैश में ही यह लागू होगा, मगर 8 जुलाई से यही टिक साइज फ्यूचर स्टॉक्स में भी लागू हो जाएगा.

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क्या होता है टिक साइज ?

टिक साइज दो लगातार बाय और सेल प्राइस के बीच का मिनिमम प्राइस इंक्रीमेंट है. अगर टिक साइज छोटा हो तो प्राइस एडजस्टमेंट बहुत सटीक होता है. साथ ही बेहतर प्राइस निकलकर सामने आता है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी स्टॉक का टिक प्राइस 0.10 रुपये और उसका लास्ट ट्रेडेड प्राइस 50 रुपये है तो उसका अगला बाय प्राइस 49.90, 49.80, 49.70 रुपये की सीरीज में होगा. ऐसी स्थिति में बिड प्राइस 49.85 या 49.92 रुपये नहीं हो सकती क्योंकि ये 10 पैसे टिक साइज के मापदंड पर फिट नहीं बैठती. बेचने वाला अपने हिसाब से ऑफर प्राइस डाल पाएगा और खरीदने वाला भी अपने मन मुताबिक रेट भर पाएगा.

इससे क्या होगा प्रभाव 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव NSE के प्राइसिंग सिस्टम को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के मुकाबले लाकर खड़ा कर देगा. बीएसई ने पिछले साल मार्च में ही 100 रुपये से कम कीमत वाले स्टॉक का टिक साइज 1 पैसा कर दिया था. कैश मार्केट में बीएसई की बाजार हिस्सेदारी 2023 में 7 फीसदी से बढ़कर 2024 में 8 फीसदी हो गई है. समान अवधि में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी तेजी से बढ़कर 5.3 फीसदी से 17 फीसदी हो गई है. टिक साइज घटाने से मार्केट में बेहतर प्राइस डिस्कवरी, लिक्विडिटी और अधिक कुशल ट्रेडिंग सिस्टम तैयार होने की उम्मीद है.

NSE और BSE में कंपीटिशन?

जैसा कि आप जानते हैं NSE और BSE दोनों अलग-अलग स्टॉक एक्सचेंज हैं. बड़े स्टॉक तो दोनों एक्सचेंज पर लिस्ट हैं, मगर बहुत से ऐसे स्टॉक हैं, जो केवल BSE पर लिस्टेड हैं, मगर NSE पर नहीं. 31 दिसंबर 2023 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक NSE पर कुल 2,266 स्टॉक लिस्टेड हैं. जबकि 24 जनवरी 2024 तक के उपलब्ध आंकड़ों के लिहाज से BSE पर 5,309 कंपनियां सूचीबद्ध हैं. ऐसे में NSE चाहती हैं कि उस पर भी ट्रेडिंग वॉल्यूम BSE के बराबर या उससे अधिक हो.
 


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