DMRC ने 25 अगस्त 2025 से मेट्रो किरायों में मामूली बढ़ोतरी की है. सामान्य और एयरपोर्ट एक्सप्रेस दोनों लाइनों पर किराया 1 से 5 रुपये तक बढ़ाया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
दिल्ली मेट्रो से रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने किराए में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. नए किराए आज यानी 25 अगस्त 2025 से लागू हो गए हैं. सामान्य यात्रा और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन दोनों पर ही किराए में 1 रुपये से लेकर अधिकतम 5 रुपये तक का इजाफा किया गया है.
DMRC ने दी जानकारी
डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह किराया बढ़ोतरी *“मिनिमल इंक्रीज”* के तौर पर लागू की गई है. मतलब यात्रियों पर ज्यादा बोझ न पड़े, इसके लिए केवल मामूली बढ़ोतरी की गई है.
दूरी के हिसाब से नए किराए
- 0 से 2 किलोमीटर : किराया 10 रुपये से बढ़कर 11 रुपये.
- 2 से 5 किलोमीटर : किराया 1 रुपये बढ़ा.
- 5 से 12 किलोमीटर : किराया 30 रुपये से बढ़कर 32 रुपये.
- 12 से 21 किलोमीटर : किराया 40 रुपये से बढ़कर 43 रुपये.
- 21 से 32 किलोमीटर : किराया 54 रुपये तय किया गया.
- 32 किलोमीटर से अधिक : अब 64 रुपये देना होगा.
एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी किराए में संशोधन किया गया है. यहां टिकट के दाम 1 रुपये से लेकर अधिकतम 5 रुपये तक बढ़ाए गए हैं.
रविवार और छुट्टियों पर भी असर
सामान्य दिनों की तरह संडे और पब्लिक हॉलिडे पर मिलने वाली रियायती यात्रा दरों में भी बदलाव किया गया है. अब इसमें भी दूरी के हिसाब से नया किराया लागू होगा. अधिकतम किराया 54 रुपये तक तय किया गया है.
MSC की टर्मिनल कंपनी TiL खरीदेगी 49% हिस्सेदारी. 2.85 अरब डॉलर वैल्यूएशन वाली इस साझेदारी से चीन और मध्य-पूर्व के बड़े पोर्ट्स को मिलेगी चुनौती.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी पोर्ट्स ने अपने महत्वाकांक्षी विझिंजम पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियों में शामिल MSC समूह की टर्मिनल इकाई TiL के साथ 1.397 अरब डॉलर (करीब 13 हजार करोड़ रुपये) की रणनीतिक साझेदारी की है. इस निवेश के बाद केरल स्थित विझिंजम पोर्ट को हिंद महासागर क्षेत्र के प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोर्ट भविष्य में चीन और मध्य-पूर्व के बड़े बंदरगाहों को कड़ी चुनौती दे सकता है.
TiL खरीदेगी 49 फीसदी हिस्सेदारी
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (MSC) समूह की टर्मिनल कंपनी टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (TiL) के साथ एक निर्णायक समझौता किया है. इसके तहत TiL, अडानी विझिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (AVPPL) में 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी.
इस निवेश की कुल राशि 1.397 अरब डॉलर है, जबकि कंपनी का कुल मूल्यांकन 2.85 अरब डॉलर आंका गया है. डील पूरी होने के बाद APSEZ के पास 51 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहेगी और कंपनी का प्रबंधन नियंत्रण भी उसके पास रहेगा.
दो चरणों में होगा निवेश
कंपनी के मुताबिक TiL का निवेश दो चरणों में किया जाएगा. पहले चरण में 539 मिलियन डॉलर का निवेश कर 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी जाएगी. वहीं, शेष 858 मिलियन डॉलर का निवेश दिसंबर 2028 तक पोर्ट के विस्तार कार्य पूरा होने के बाद कर्ज और इक्विटी के माध्यम से किया जाएगा.
कार्गो कारोबार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इस रणनीतिक साझेदारी से विझिंजम पोर्ट पर कार्गो ट्रैफिक बढ़ने की उम्मीद है. खास तौर पर बांग्लादेश और दक्षिण एशिया के अन्य देशों से आने वाले कार्गो को आकर्षित करने में मदद मिलेगी. कंपनियों का मानना है कि इससे पोर्ट की संचालन क्षमता बेहतर होगी और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी स्थिति एक बड़े ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में मजबूत होगी.
2028 तक तीन गुना से ज्यादा बढ़ेगी क्षमता
दिसंबर 2024 में शुरू हुआ विझिंजम पोर्ट भारत का पहला डीप-ड्राफ्ट मेगा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है. वर्तमान में इसकी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 1.6 मिलियन TEU है. पोर्ट के विस्तार के बाद दिसंबर 2028 तक इसकी क्षमता बढ़कर 5.7 मिलियन TEU तक पहुंच जाएगी, जिससे यह एशिया के प्रमुख कंटेनर हब्स में शामिल हो सकता है.
अडानी और MSC की तीसरी बड़ी साझेदारी
मुंद्रा और एन्नोर पोर्ट्स में सहयोग के बाद APSEZ और TiL के बीच यह तीसरी रणनीतिक साझेदारी है. अडानी पोर्ट्स के होल-टाइम डायरेक्टर और सीईओ अश्वनी गुप्ता ने कहा कि MSC के साथ यह सहयोग वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और भारत की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को और बेहतर बनाएगा.
भारत के लिए क्यों अहम है यह डील?
विझिंजम पोर्ट की भौगोलिक स्थिति अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट के बेहद करीब है. ऐसे में यह पोर्ट भारत के लिए एक बड़े ट्रांसशिपमेंट केंद्र के रूप में उभर सकता है. इससे विदेशी बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता कम होगी और देश के समुद्री व्यापार को नई गति मिलेगी.
यस बैंक ने कहा कि प्रस्तावित इक्विटी इश्यू के कारण मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में 10 प्रतिशत से अधिक की कमी नहीं होगी. इससे मौजूदा निवेशकों के हितों पर सीमित प्रभाव पड़ेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक यस बैंक (Yes Bank) ने अपनी पूंजी स्थिति को और मजबूत करने के लिए 16,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना को मंजूरी दे दी है. बैंक के निदेशक मंडल ने इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से धन जुटाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है.
इक्विटी और डेट के जरिए जुटाए जाएंगे 16,000 करोड़ रुपये
बैंक द्वारा जारी नियामकीय सूचना के अनुसार, यस बैंक लगभग 7,500 करोड़ रुपये इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए और 8,500 करोड़ रुपये डेट इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से जुटाएगा. हालांकि बैंक ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इसके लिए कौन-कौन से वित्तीय साधनों का उपयोग किया जाएगा और फंड जुटाने की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी.
शेयरधारकों की हिस्सेदारी पर सीमित असर
यस बैंक ने कहा कि प्रस्तावित इक्विटी इश्यू के कारण मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में 10 प्रतिशत से अधिक की कमी (डायल्यूशन) नहीं होगी. इससे मौजूदा निवेशकों के हितों पर सीमित प्रभाव पड़ेगा.
कारोबारी विस्तार को मिलेगा समर्थन
बैंक ने बताया कि यह फंड जुटाने की योजना भविष्य की व्यावसायिक वृद्धि और मजबूत पूंजी आधार बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है. बैंक अपने ऋण कारोबार और अन्य वित्तीय गतिविधियों के विस्तार के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध रखना चाहता है.
पूंजी पर्याप्तता अनुपात मजबूत
31 मार्च 2026 तक यस बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio) 15.3 प्रतिशत रहा. यह एक वर्ष पहले के 15.6 प्रतिशत के स्तर से थोड़ा कम है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित न्यूनतम 9 प्रतिशत की नियामकीय आवश्यकता से काफी अधिक है. मजबूत पूंजी आधार के कारण बैंक भविष्य में अपने कारोबार के विस्तार और संभावित जोखिमों से निपटने की बेहतर स्थिति में बना हुआ है.
सरकार ने पेट्रोल और डीजल की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एहतियातन ये प्रतिबंध लगाए थे. सोमवार को जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, बुधवार से सभी अस्थायी प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर इस महीने की शुरुआत में लगाए गए अस्थायी प्रतिबंधों को वापस लेने का फैसला किया है. सरकार के इस निर्णय के बाद 1 जुलाई 2026 से देशभर में ईंधन की सामान्य बिक्री फिर से शुरू हो जाएगी. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पैदा हुई चिंताएं अब कम होती दिखाई दे रही हैं.
मध्य पूर्व संकट के बीच लगाए गए थे प्रतिबंध
सरकार ने पेट्रोल और डीजल की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एहतियातन ये प्रतिबंध लगाए थे. मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके कारण देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया था.
1 जुलाई से सामान्य होगी बिक्री
सोमवार को जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, 1 जुलाई से सभी अस्थायी प्रतिबंध समाप्त कर दिए जाएंगे. इसके बाद देशभर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की सामान्य बिक्री फिर से शुरू हो जाएगी.
व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर लगी थी रोक
लागू किए गए प्रतिबंधों के तहत व्यावसायिक उपभोक्ताओं को खुदरा ईंधन स्टेशनों से पेट्रोल और डीजल खरीदने की अनुमति नहीं थी. इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर ईंधन की कमी से बचने के लिए डीजल की दैनिक खरीद की सीमा भी तय की गई थी.
आपूर्ति संबंधी चिंताओं में आई कमी
सरकार का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं अब काफी हद तक कम हो गई हैं. इसी के मद्देनजर अस्थायी प्रतिबंधों को वापस लेने और ईंधन वितरण व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य करने का निर्णय लिया गया है.
उपभोक्ताओं और उद्योगों को मिलेगी राहत
पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगी पाबंदियां हटने से आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को भी राहत मिलने की उम्मीद है. इससे ईंधन आपूर्ति और वितरण व्यवस्था में स्थिरता आएगी तथा बाजार में सामान्य स्थिति बहाल होगी.
सेबी से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी आईपीओ प्रबंधन, पूंजी जुटाने की सलाह और अन्य कॉर्पोरेट फाइनेंस सेवाएं प्रदान कर सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकरेज कंपनी जेरोधा अब अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है. कंपनी ने निवेश बैंकिंग कारोबार में प्रवेश के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया है. मंजूरी मिलने के बाद कंपनी आईपीओ प्रबंधन, पूंजी जुटाने की सलाह और अन्य कॉर्पोरेट फाइनेंस सेवाएं प्रदान कर सकेगी.
सेबी से मांगी कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेरोधा ने अपनी इकाई 'जेरोधा कॉरपोरेट एडवाइजर्स' के जरिए अप्रैल 2026 में सेबी के पास कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था. फिलहाल यह आवेदन नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रहा है. कंपनी ने भी इस आवेदन की पुष्टि की है, हालांकि लाइसेंस मिलने तक उसने अपने विस्तृत कारोबारी योजनाओं का खुलासा नहीं किया है.
लाइसेंस मिलने पर क्या कर सकेगी कंपनी?
कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस मिलने के बाद जेरोधा को निवेश बैंकिंग से जुड़ी कई सेवाएं देने की अनुमति मिल जाएगी. इनमें आईपीओ प्रबंधन, कंपनियों को पूंजी जुटाने संबंधी सलाह, इश्यू मैनेजमेंट, अंडरराइटिंग और अन्य कॉर्पोरेट फाइनेंस सेवाएं शामिल हैं.
तेजी से बढ़ रहा है IPO बाजार
जेरोधा का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत का प्राथमिक बाजार लगातार मजबूत बना हुआ है. बड़ी संख्या में स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी कंपनियां और स्थापित कारोबारी समूह शेयर बाजार के जरिए पूंजी जुटाने की तैयारी कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में देश में आईपीओ गतिविधियां तेज बनी रह सकती हैं, जिससे निवेश बैंकिंग कारोबार में अवसर बढ़ेंगे.
बड़ी कंपनियों को मिलेगी चुनौती
यदि जेरोधा को सेबी से मंजूरी मिल जाती है तो कंपनी निवेश बैंकिंग क्षेत्र में पहले से मौजूद बड़ी कंपनियों को चुनौती दे सकती है. फिलहाल आईपीओ सलाह और कैपिटल मार्केट कारोबार में JM Financial, Kotak Mahindra Capital, Axis Capital और ICICI Securities जैसी कंपनियों का दबदबा है.
वित्तीय सेवाओं के विस्तार पर फोकस
पिछले कुछ वर्षों में जेरोधा ने अपनी सेवाओं का लगातार विस्तार किया है. कंपनी निवेश और वेल्थ मैनेजमेंट से जुड़े कई उत्पाद पेश कर चुकी है. हाल ही में कंपनी ने अपने Coin प्लेटफॉर्म पर फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश की सुविधा शुरू की है, जिससे ग्राहक साझेदार बैंकों की एफडी में निवेश कर सकते हैं और एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनका प्रबंधन कर सकते हैं.
टेक्नोलॉजी और निवेशक नेटवर्क का मिलेगा फायदा
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश बैंकिंग कारोबार में प्रवेश से जेरोधा अपनी मजबूत तकनीकी क्षमता और बड़े रिटेल निवेशक आधार का लाभ उठा सकती है. उभरती कंपनियों और स्टार्टअप्स को पूंजी जुटाने में सहायता देने के साथ कंपनी अपने कारोबार को नई दिशा दे सकती है.
पूंजी बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
भारत का आईपीओ बाजार लगातार विस्तार कर रहा है, खासकर नई तकनीक आधारित और स्टार्टअप कंपनियों के बीच. ऐसे में जेरोधा की संभावित एंट्री निवेश बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है और देश के पूंजी बाजार परिदृश्य में नए बदलाव ला सकती है.
सोमवार को सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48 फीसदी टूटकर 76,728.37 अंक पर बंद हुआ था. वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स 109.75 अंक यानी 0.46 फीसदी गिरकर 23,946.25 अंक पर आ गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत आज सतर्कता के साथ हो सकती है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर रहेगी. पिछले कारोबारी सत्र में बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था और आज भी भू-राजनीतिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं.
पिछले कारोबारी सत्र में दबाव में रहा बाजार
सोमवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48 फीसदी टूटकर 76,728.37 अंक पर बंद हुआ था. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 इंडेक्स 109.75 अंक यानी 0.46 फीसदी गिरकर 23,946.25 अंक पर आ गया था. कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 400 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि निफ्टी 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया था.
पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर नजर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उससे जुड़ी अनिश्चितताएं निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही हैं. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों के संकेत भी आज के कारोबार की दिशा तय कर सकते हैं.
इन शेयरों पर रहा था दबाव
पिछले सत्र में सेंसेक्स के 30 में से 16 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए थे. कोटक महिंद्रा बैंक में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई थी. इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली थी. वहीं, इटरनल, ट्रेंट, बीईएल, एनटीपीसी, पावर ग्रिड और टाटा स्टील के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए थे.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी
ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव देखने को मिला था. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.37 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.62 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो फार्मा, मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में मजबूती रही, जबकि ऑटो, केमिकल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली.
बाजर विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों के संकेत और रुपये की चाल पर रहेगी. इन कारकों के आधार पर बाजार की दिशा तय हो सकती है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
30 जून को शेयर बाजार में कई बड़ी कॉरपोरेट और सेक्टोरल खबरों का असर देखने को मिल सकता है. एक्सिस बैंक और बंधन बैंक के CFO के इस्तीफे, यस बैंक के 16,000 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने की योजना, एसआईएस के 120 करोड़ रुपये के बायबैक प्रस्ताव और जूनिपर होटल्स के CFO के इस्तीफे पर निवेशकों की नजर रहेगी. वहीं RITES और CONCOR के बीच लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर समझौता, जगसनपाल फार्मा द्वारा Aequitas Healthcare में 85 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का फैसला, एसबीआई की 30 करोड़ डॉलर की बॉन्ड इश्यू योजना और SJVN के गुजरात को ग्रीन पावर आपूर्ति समझौते भी चर्चा में रहेंगे. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एविएशन, पेंट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में हलचल संभव है, जबकि ONGC और ऑयल इंडिया पर दबाव बन सकता है. Arihant Capital Markets को रेगुलेटरी मंजूरी, Muthoot Capital Services के स्ट्रेस्ड लोन सौदे और GeeCee Ventures के निवेश जैसे घटनाक्रम भी मंगलवार के कारोबार में चुनिंदा शेयरों को प्रभावित कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कंपनी का लक्ष्य हर साल 67 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली की आपूर्ति करना है, जिससे लगभग 4.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
राजस्थान देश के नवीकरणीय ऊर्जा हब के रूप में तेजी से उभर रहा है. इसी कड़ी में सेरेंटिका रिन्यूएबल्स ने राज्य में 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना की घोषणा की है. कंपनी इस निवेश के जरिए औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, ऊर्जा भंडारण और चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी.
कंपनी अब तक राज्य में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है. कंपनी की कुल सौर ऊर्जा क्षमता का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा राजस्थान में स्थापित है. बीकानेर और जैसलमेर इसके प्रमुख केंद्र हैं, जबकि अगले चरण में भड़ला तक विस्तार किया जाएगा.
27,000 मेगावाट की पाइपलाइन पर काम
कंपनी की प्रस्तावित 27,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा पाइपलाइन में राजस्थान की परियोजनाओं की अहम भूमिका है. वर्तमान में कंपनी के पास 2,500 मेगावाट से अधिक की परिचालन क्षमता है, जबकि 3,000 मेगावाट से ज्यादा की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. कंपनी का लक्ष्य हर साल 67 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली की आपूर्ति करना है, जिससे लगभग 4.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी.
बीकानेर में बनेगी बड़ी बैटरी स्टोरेज परियोजना
सेरेंटिका बीकानेर में क्षेत्र की सबसे बड़ी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं में से एक विकसित कर रही है. पहले चरण में 200 मेगावाट-घंटा क्षमता स्थापित की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में 800 मेगावाट-घंटा क्षमता जोड़ी जाएगी, जिसके अगले तीन महीनों में चालू होने की उम्मीद है. यह परियोजना उद्योगों को चौबीसों घंटे निर्बाध स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगी.
फतेहगढ़ में बढ़ेगी सौर ऊर्जा क्षमता
वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी फतेहगढ़ स्थित अपने सौर ऊर्जा प्लेटफॉर्म का विस्तार करेगी. पहले चरण में 1,270 मेगावाट पीक क्षमता जोड़ी जाएगी. इसके बाद 500 मेगावाट अतिरिक्त सौर क्षमता और 2,500 मेगावाट-घंटा की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी.
सीईओ ने क्या कहा?
सेरेंटिका रिन्यूएबल्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अक्षय हीरानंदानी ने कहा कि राजस्थान कंपनी की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह राज्य नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से अग्रणी बन रहा है. उन्होंने कहा कि उद्योगों को चौबीसों घंटे विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना भारत के ऊर्जा परिवर्तन का अहम आधार है और बीकानेर की बैटरी स्टोरेज परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
सामाजिक विकास पर भी फोकस
बुनियादी ढांचे के विकास के साथ कंपनी सामाजिक क्षेत्र में भी निवेश कर रही है. एडइंडिया और 'विकास' कार्यक्रमों के माध्यम से कंपनी ने राजस्थान में शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और स्थानीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 3.8 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है.
औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन का नया केंद्र बनेगा राजस्थान
देश में औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के एकीकृत मॉडल के जरिए सेरेंटिका राजस्थान को स्वच्छ, किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है.
इन निवेशों से न सिर्फ राज्य में ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि राजस्थान औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी उभर सकता है.
ANAROCK रिसर्च के अनुसार, दूसरी तिमाही में देश के सात प्रमुख शहरों में करीब 90,715 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 96,285 यूनिट था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के शीर्ष सात शहरों में आवासीय बाजार की रफ्तार दूसरी तिमाही में कुछ धीमी पड़ती दिखाई दी है. ANAROCK की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में घरों की बिक्री सालाना आधार पर 6 फीसदी घटकर 90,715 यूनिट रह गई. हालांकि, इस दौरान नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, सप्लाई चेन में व्यवधान और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर रियल एस्टेट बाजार पर देखने को मिला.
6 फीसदी घटी घरों की बिक्री
ANAROCK रिसर्च के अनुसार, दूसरी तिमाही में देश के सात प्रमुख शहरों में करीब 90,715 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 96,285 यूनिट था. तिमाही आधार पर भी बिक्री में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) और बेंगलुरु ने कुल बिक्री में सबसे बड़ा योगदान दिया. दोनों शहरों में मिलाकर लगभग 43,995 घरों की बिक्री हुई, जो कुल बिक्री का करीब 48 फीसदी है.
सिर्फ तीन शहरों में बढ़ी बिक्री
सालाना आधार पर केवल कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु में ही घरों की बिक्री बढ़ी. कोलकाता में 10 फीसदी, हैदराबाद में 2 फीसदी और बेंगलुरु में 1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं पुणे में सबसे ज्यादा 15 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. एनसीआर, मुंबई और चेन्नई में भी बिक्री में कमी दर्ज की गई.
नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में बढ़ोतरी
बिक्री में नरमी के बावजूद नई आवासीय परियोजनाओं की लॉन्चिंग में तेजी बनी रही. दूसरी तिमाही में लगभग 1.06 लाख नई यूनिट्स लॉन्च की गईं, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7 फीसदी अधिक हैं. हालांकि, तिमाही आधार पर नई सप्लाई में 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि खरीदारों की कमजोर होती धारणा और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते डेवलपर्स ने नई परियोजनाओं की रफ्तार कुछ धीमी की है.
MMR और बेंगलुरु रहे सबसे आगे
नई सप्लाई के मामले में मुंबई महानगर क्षेत्र और बेंगलुरु सबसे आगे रहे. दोनों शहरों ने कुल नई सप्लाई में 53 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की. मुंबई में 34,555 नई यूनिट्स लॉन्च की गईं, जबकि बेंगलुरु में 21,670 यूनिट्स बाजार में आईं. हैदराबाद में नई लॉन्चिंग में सबसे ज्यादा 53 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई.
प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग मजबूत
रिपोर्ट के मुताबिक, 80 लाख रुपये से 1.5 करोड़ रुपये कीमत वाले घरों की सप्लाई सबसे ज्यादा 27 फीसदी रही. इसके बाद 1.5 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये के सेगमेंट की हिस्सेदारी 25 फीसदी रही. वहीं 2.5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लग्जरी घरों की हिस्सेदारी 22 फीसदी रही. किफायती आवास की हिस्सेदारी घटकर केवल 6 फीसदी रह गई है.
प्रॉपर्टी कीमतों में भी बढ़ोतरी
शीर्ष सात शहरों में औसत आवासीय कीमतों में सालाना आधार पर 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, तिमाही आधार पर कीमतों में सिर्फ 1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. एनसीआर में सबसे ज्यादा 13 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बेंगलुरु में कीमतें 8 फीसदी बढ़ीं.
इन्वेंट्री बढ़ी, बेंगलुरु सबसे आगे
दूसरी तिमाही के अंत तक शीर्ष सात शहरों में उपलब्ध आवासीय इन्वेंट्री बढ़कर 6.16 लाख यूनिट से अधिक हो गई, जो पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा है. बेंगलुरु में सबसे अधिक 34 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एनसीआर ऐसा एकमात्र शहर रहा जहां इन्वेंट्री लगभग स्थिर बनी रही.
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, सप्लाई चेन में व्यवधान और आईटी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर खरीदारों के रुख पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि अब बाजार पहले की तुलना में अधिक संतुलित दिखाई दे रहा है, जहां नई सप्लाई और मांग के बीच संतुलन बन रहा है. प्रीमियम हाउसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर और रोजगार केंद्रों वाले शहरों में मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है.
सेशेल्स में UPI सेवा शुरू होने से भारतीय पर्यटक बिना विदेशी मुद्रा की चिंता किए सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे. इससे भुगतान प्रक्रिया आसान, तेज और सुरक्षित बनेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लगातार वैश्विक पहचान हासिल कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान हुए समझौते के बाद अब अफ्रीकी देश सेशेल्स में भी भारतीय UPI सेवा शुरू होगी. इसके साथ ही भारत की यह डिजिटल पेमेंट प्रणाली दुनिया के 10 देशों तक पहुंच गई है, जिससे भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों को विदेशों में आसान और सुरक्षित भुगतान की सुविधा मिलेगी.
सेशेल्स में भी शुरू होगी UPI सेवा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इनमें सेशेल्स में UPI लागू करने का समझौता भी शामिल है. इस कदम से भारत और सेशेल्स के बीच डिजिटल भुगतान और फिनटेक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सेशेल्स यात्रा के दौरान कई अहम समझौते हुए हैं, जिनमें UPI और जन औषधि से जुड़े समझौते प्रमुख हैं. इसके अलावा दोनों देश जलवायु परिवर्तन, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाएंगे.
There are substantive outcomes in this Seychelles visit. Key MoUs have been signed. These include an MoU for the implementation of UPI in Seychelles, MoU on Jan Aushadhi and more.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 29, 2026
We will keep working in futuristic sectors like climate action, green hydrogen, energy, the Blue… https://t.co/moEuVd05At
अब 10 देशों तक पहुंचा भारतीय UPI
भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI तेजी से वैश्विक विस्तार कर रही है. सेशेल्स के जुड़ने के बाद अब भारतीय पर्यटक और उपभोक्ता कुल 10 देशों में UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे. इन देशों में सिंगापुर, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, फ्रांस, कंबोडिया और अब सेशेल्स शामिल हैं.
भारतीय पर्यटकों को मिलेगा बड़ा फायदा
सेशेल्स हिंद महासागर में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो अपने खूबसूरत समुद्र तटों, समुद्री पर्यटन और लक्जरी रिसॉर्ट्स के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. हर साल करीब 15 हजार भारतीय पर्यटक इस द्वीपीय देश की यात्रा करते हैं. UPI सेवा शुरू होने से भारतीय पर्यटक बिना विदेशी मुद्रा की चिंता किए सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे. इससे भुगतान प्रक्रिया आसान, तेज और सुरक्षित बनेगी.
भारतीयों के लिए वीजा-फ्री है सेशेल्स
भारतीय नागरिकों को सेशेल्स की यात्रा के लिए पहले से वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होती. हालांकि पर्यटन के उद्देश्य से जाने वाले यात्रियों को हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद विजिटर परमिट लेना होता है. सेशेल्स की कुल आबादी में करीब 5 प्रतिशत लोग भारतीय मूल के हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी काफी मजबूत हैं.
व्यापारिक रिश्ते भी हो रहे मजबूत
भारत और सेशेल्स के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं. भारत से चावल, दवाइयां, कपड़े, वाहन और उनके स्पेयर पार्ट्स, मशीनरी तथा प्लास्टिक उत्पादों का निर्यात सेशेल्स को किया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि UPI की शुरुआत से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और डिजिटल अर्थव्यवस्था को और गति मिलेगी.
Kratikal Tech का SME IPO 30 जून 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और निवेशक 2 जुलाई तक इसमें बोली लगा सकेंगे. एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 29 जून को ही खुल जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार में निवेशकों के लिए एक और नया अवसर आने वाला है. एआई आधारित साइबर सुरक्षा कंपनी Kratikal Tech अपना 39.7 करोड़ रुपये का SME IPO 30 जून से खोलने जा रही है. कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड 128 से 135 रुपये प्रति शेयर तय किया है. निवेशक 2 जुलाई तक इस आईपीओ में आवेदन कर सकते हैं. जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने विदेशी कारोबार के विस्तार, नए प्रोडक्ट्स और बिजनेस ग्रोथ पर करेगी.
30 जून से खुलेगा IPO, 2 जुलाई तक निवेश का मौका
Kratikal Tech का SME IPO 30 जून 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और निवेशक 2 जुलाई तक इसमें बोली लगा सकेंगे. एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 29 जून को ही खुल जाएगा. कंपनी इस इश्यू के जरिए 29.4 लाख नए इक्विटी शेयर जारी करेगी. यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है, यानी इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है. इससे जुटाई गई पूरी राशि कंपनी के विस्तार और कारोबारी जरूरतों में इस्तेमाल की जाएगी.
7 जुलाई को हो सकती है लिस्टिंग
कंपनी के अनुसार, शेयरों का आवंटन पूरा होने के बाद Kratikal Tech के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 7 जुलाई 2026 को BSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है. इस इश्यू का प्रबंधन Beeline Capital Advisors कर रही है.
विदेशी कारोबार बढ़ाने पर रहेगा फोकस
आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मजबूत करने में करेगी. कंपनी अपनी यूएई स्थित सहायक इकाई Threatcop FZ LLC और अमेरिका स्थित Threatcop AI Inc में निवेश की योजना बना रही है. इसके अलावा, कंपनी बिक्री और मार्केटिंग गतिविधियों को बढ़ाने, नई नियुक्तियां करने, नए उत्पाद विकसित करने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों को पूरा करने पर भी खर्च करेगी.
क्या करती है Kratikal Tech?
Kratikal Tech एआई आधारित साइबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने वाली SaaS कंपनी है. कंपनी अपने ‘Threatcop’ प्लेटफॉर्म के जरिए संस्थानों और कंपनियों को साइबर सुरक्षा से जुड़े आधुनिक समाधान प्रदान करती है. कंपनी अपने Kratikal ब्रांड के तहत विभिन्न साइबर सिक्योरिटी सेवाएं भी उपलब्ध कराती है. वर्तमान में कंपनी के पास 677 से अधिक ग्राहकों का मजबूत आधार मौजूद है.
वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है. इस दौरान कंपनी ने 36.72 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया, जबकि शुद्ध लाभ 6.14 करोड़ रुपये रहा. साइबर सुरक्षा और एआई जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर में काम करने वाली इस कंपनी का आईपीओ निवेशकों के लिए एक नया अवसर माना जा रहा है. हालांकि, किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, जोखिम और वैल्यूएशन का आकलन करना जरूरी है.
11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संयुक्त लोन बुक के साथ उभरेगा नया वित्तीय दिग्गज, शेयरधारकों को मिलेगा शेयर-स्वैप का लाभ
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकारी क्षेत्र की दो प्रमुख पावर फाइनेंस कंपनियां पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के प्रस्तावित विलय की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. दोनों कंपनियों के बोर्ड ने मर्जर योजना को मंजूरी दे दी है. इस विलय के बाद 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त लोन बुक वाली देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी अस्तित्व में आएगी. सरकार के पुनर्गठन कार्यक्रम के तहत हो रहा यह विलय न केवल पावर सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है, बल्कि निवेशकों के लिए भी कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा.
शेयर-स्वैप रेश्यो तय
मर्जर योजना के तहत REC का PFC में विलय किया जाएगा. इसके लिए शेयर-स्वैप रेश्यो भी तय कर दिया गया है. योजना के अनुसार REC के प्रत्येक 100 शेयरों (प्रत्येक मूल्य 10 रुपये) के बदले निवेशकों को PFC के 88 शेयर दिए जाएंगे. यदि किसी निवेशक के पास रिकॉर्ड डेट पर REC के 100 शेयर होंगे, तो विलय के बाद उसे PFC के 88 शेयर मिलेंगे और REC के उसके मौजूदा शेयर समाप्त हो जाएंगे.
सरकार और PFC की हिस्सेदारी
वर्तमान में PFC के पास REC में 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी है. वहीं केंद्र सरकार की PFC में 55.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है. हालांकि REC में सरकार की कोई प्रत्यक्ष हिस्सेदारी नहीं है. सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 के दौरान दोनों कंपनियों के पुनर्गठन का संकेत दिया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में इस दिशा में कदम उठाने की घोषणा की थी.
अभी कई मंजूरियां मिलना बाकी
हालांकि बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद भी यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. मर्जर योजना को लागू करने के लिए शेयरधारकों, स्टॉक एक्सचेंजों, सेबी, एनसीएलटी और अन्य नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी आवश्यक होगी. इसके अलावा रिकॉर्ड डेट का भी अभी ऐलान नहीं किया गया है. इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही विलय प्रभावी होगा.
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
मर्जर की खबर के बाद शेयर बाजार में दोनों कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली. आज खबर लिखे जाने तक PFC के शेयरों में 1.69 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि REC के शेयरों में 0.27 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल मर्जर की शर्तों और भविष्य के प्रभावों का आकलन कर रहे हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, PFC अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में दिखाई देता है. वहीं REC फिलहाल मर्जर-आर्बिट्रेज की स्थिति में है, जहां इवेंट आधारित जोखिम अधिक बना हुआ है. उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तीय कंपनियों में केवल कमाई ही नहीं, बल्कि कंपनी की संरचना और दीर्घकालिक रणनीति भी निवेश निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
पावर सेक्टर को मिल सकती है नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों कंपनियों के विलय से पूंजी की लागत कम करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी. इससे बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्तपोषण देने की क्षमता भी मजबूत होगी. देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी बनने के बाद नई इकाई पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपनी भूमिका और प्रभाव को और मजबूत कर सकती है.