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अब रेल से हाथियों की जान बचाएगा ये नया एआई सॉफ्टवेयर, पहले ही मिल जाएगा अलर्ट
हाथियों की मौत तो पहले भी होती रही है लेकिन अब रेलवे एआई की मदद से इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर लगाने जा रहा है. इससे उनकी जान बचाई जा सकेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
रेल की चपेट में आकर हाथियों के मरने की खबर अक्सर आती रहती है. कई बार इसकी वजह हादसे भी होते-होते रहते हैं. लेकिन अब भारतीय रेलवे ने इस समस्या का उपाय निकाल लिया है. रेलवे उन इलाकों में इसके लिए एआई का इस्तेमाल करने जा रहा है, जिन क्षेत्रों में रेलवे को इस समस्या से जूझना पड़ता है. इनमें पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्य और उत्तर भारत के भी कई राज्य शामिल हैं.
आखिर क्या होगा इस तकनीक में?
रेलवे ने इस सॉफ्टवेयर का नाम गजराज रखा है. इसे उन क्षेत्रों में लगाया जाएगा जिन इलाकों में रेलवे को इस समस्या का सामना करना पड़ा. इस एआई में ऑप्टीकल फाइबर केबल का इस्तेमाल किया जाएगा. इस तकनीक में 181 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. इस सॉफ्टवेयर के लगने के बाद अगर कोई भी ऑबजेक्ट रेलवे ट्रैक पर आएगा तो सामने से आ रही ट्रेन को उसका अलर्ट चला जाएगा. इससे ट्रेन और हाथियों की टक्कर नहीं होगी. इस सॉफ्टवेयर के जरिए लोकोपायलट, कंट्रोल रूम और स्टेशन मास्टर को ये भी पता चल जाता है कि आखिर ये कंपन किसकी है. क्या ये हाथी है और या ये कोई और जानवर या किसी आदमी.
रेलमंत्री ने दी ये जानकारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस तकनीक को असम में टेस्ट किया जा चुका है. वहां पर ये तकनीक पूरी तरह से सफल रही है. उन्होंने ये भी बताया कि अगले 8 महीने में इसे देश के 700 किलोमीटर के नेटवर्क में लगाया जाएगा. इसे इस पूरे नेटवर्क पर स्थापित करने में 181 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.
3 साल में 45 हाथियों की गई जान
वैसे तो रेल की चपेट में आकर हाथियों के मरने का ये घटनाक्रम काफी पुराना है लेकिन अगर पिछले तीन साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इससे 45 हाथियों की जान गई है. सोमवार को ही पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के राजाभाट खावा में एक मालगाड़ी से टक्कर के बाद एक बछड़े सहित तीन हाथियों की मौत हो गई थी. इस साल अगस्त में भी पश्चिम बंगाल में इसी तरह से एक हाथी की मौत हो गई थी.
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