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इस पुराने दोस्त के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट हथियारों पर काम करने की योजना बना रहा है भारत
अगर ये बातचीत अंतिम चरण में पहुंचती है तो इससे सबसे बड़ा फायदा इंडियन एयर फोर्स को होगा. उसकी क्षमता में और इजाफा हो पाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भारत अपने आत्मनिर्भर अभियान को हर क्षेत्र में लाने के लिए कोशिश कर रहा है. इसी कड़ी में अब भारत सरकार रूस के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट विमानों के हथियार बनाने को लेकर काम करने की योजना पर काम कर रही है. अगर ऐसा होता है तो ये पहली बार होगा जब भारत किसी देश के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट हथियार बनाने के अभियान में जुटने की तैयारी कर रहा है. इस सिलसिले में रोजोबोरेनएक्सपोर्ट भारत की कई कंपनियों से बात कर रही है.
क्या है ये पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रसियन सरकार के हथियार निर्यातक रोसोबोरेनेक्सपोर्ट भारतीय उद्यमों के साथ इंडियन एयरलाइन के लिए संयुक्त हथियार उत्पादन को लेकर बातचीत कर रहा है. हालांकि अभी बातचीत किन कंपनियों के साथ चल रही है इसका खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन कंपनी के डायरेक्टर जनरल अलेक्जेंडर मिखेयेव के हवाले से कहा गया है कि रोसोबोरेनेक्सपोर्ट भारत की निजि और सार्वजनिक कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा है.
भारत के रक्षा आयात में रूस की है इतनी हिस्सेदारी
भारत के रक्षा आयात में रूस की एक बड़ी हिस्सेदारी शामिल है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की इस वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में भारतीय रक्षा आयात में रूस का शेयर 45 प्रतिशत रहा है. रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है. रोसोबोरेनेक्सपोर्ट इससे पहले भारत को Su-30MKI फाइटइ जेट, टैंक बख्तरबंद गाड़ी और गोले उपलब्ध करवा चुकी है. भारत और रूस ने इस साल की शुरूआत में ही AK-203 कलाशिकोव असॉल्ट राइफल्स का संयुक्त उत्पादन भी शुरू कर दिया है.
कई और देशों से भी हथियार लेता है भारत
भारत और रूस के बीच हथियारों का सौदा आज का नहीं बल्कि कई दशक पुराना है. लेकिन भारत को हथियार देने वालों में दूसरे नंबर पर फ्रांस है जिसका प्रतिशत 29 प्रतिशत है. वहीं तीसरे नंबर पर अमेरिका की हिस्सेदारी है वो भारत को 11 प्रतिशत हथियार देता है. मीडिया रिपोर्ट कहती हैं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीददार है. हालांकि पिछले कुछ समय में इसकी हथियार खरीद में 11 प्रतिशत की कमी आई है.
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