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'कड़वे डोज' से 'अच्छे दिनों' की जमीन तैयार कर रहीं हैं निर्मला सीतारमण
निर्मला सीतारमण इस बात को अच्छे से जानती हैं कि मर्ज दूर करने के लिए कड़वी दवा पिलानी पड़ती है, इसलिए वह कड़े और कठोर फैसले लेने से नहीं हिचकतीं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
किसी भी देश की तरक्की उसकी अर्थव्यवस्था की मजबूती पर टिकी होती है और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सबसे मुश्किल काम है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) इसी मुश्किल काम को अंजाम दे रही हैं. अपने अब तक के कार्यकाल में उन्होंने कई क्रांतिकारी फैसले लिए हैं. इनमें से कुछ फैसले ऐसे भी रहे, जिन पर हो-हल्ला, शोर-शराबा और विवाद भी हुआ, लेकिन एक व्यापक दृष्टिकोण में वह देश के लिए फलदायी साबित हुए. उदाहरण के तौर पर सरकारी बैंकों का मर्जर. बैंकों के विलय से उनकी संख्या में कमी आई और उनकी आर्थिक सेहत में भी सुधार हुआ.
बेहिचक लेती हैं कड़े फैसले
निर्मला सीतारमण इस बात को अच्छे से जानती हैं कि मर्ज दूर करने के लिए कड़वी दवा पिलानी पड़ती है, इसलिए वह कड़े और कठोर फैसले लेने से नहीं हिचकतीं. बतौर वित्तमंत्री सीतारमण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के 3 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं. उन्हें बखूबी पता है कि नीतियों को कब, कहां, कितना कड़ा करना है या लचीला बनाना है, ताकि निर्धारित समयसीमा में इस लक्ष्य को हासिल किया जा सके. इस साल के बजट में उन्होंने महिलाओं के लिए महिला सेविंग सर्टिफिकेट स्कीम शुरू करके और न्यू टैक्स रिजीम का ऐलान करके यह भी साबित किया है कि उन्हें आमजन की उम्मीदों का भी ख्याल है.
महिलाओं के लिए हैं प्रेरणा
अपनी बेहतरीन कार्यप्रणाली के लिए निर्मला सीतारमण अब तक कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं. उदाहरण के तौर पर 2019 में जेएनयू ने उन्हें स्पेशल एक्स स्टूडेंट पुरस्कार से सम्मानित किया था. 2019 में फोर्ब्स मैगजीन ने उन्हें दुनिया की 34वीं सबसे पॉवरफुल महिला का दर्जा दिया था. निर्मला सीतारमण देश की सबसे ताकतवर महिलाओं में से शुमार हैं. पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री से लेकर रक्षा मंत्रालय तक की जिम्मेदारी संभालने वालीं सीतारमण देश की सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं.
JNU में हुई थी पहली मुलाकात
आज यानी 18 अगस्त को अपना 64वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहीं निर्मला सीतारमण ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विषय में एमफिल किया था. यहीं उनकी मुलाकात परकला प्रभाकर से हुई थी. जल्द ही दोनों को अहसास हो गया कि वह एक-दूसरे के लिए ही बने हैं. बाद में दोनों शादी के बंधन में बंध गए. लव मैरिज के बाद निर्मला सीतारमण अपने पति के साथ लंदन शिफ्ट हो गईं. 1991 में वह वापस भारत लौटीं और हैदराबाद को अपना ठिकाना बनाया. कुछ समय बाद उन्होंने सियासत का रुख किया. भाजपा के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और आज वह एक ऐसे मुकाम पर हैं, जहां तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं.
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