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कुर्सी संभालते ही मोदी विनिवेश पर लेंगे ताबड़तोड़ फैसले, सबसे पहले इनका होगा सौदा!
विनिवेश मोदी सरकार की प्राथमिकता में रहा है. हालांकि, चुनावी मौसम में इसकी रफ़्तार धीमी हो गई थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
अब से कुछ ही देर में यह साफ हो जाएगा कि क्या अभी भी देश में मन में मोदी हैं? इस बात की संभावना काफी ज्यादा है लोकसभा चुनाव के नतीजे एग्जिट पोल्स की तरह ही आएंगे. यानी कि मोदी तीसरी बार देश के नेतृत्व करेंगे. नई सरकार के गठन के बाद कुछ मुद्दों पर तेजी से काम होने की उम्मीद है, इसमें विनिवेश भी शामिल है. सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपना मोदी सरकार की प्राथमिकता रही है. चुनावी मौसम में नुकसान की आशंका के चलते सरकार ने इस पर काम लगभग रोक दिया था, लेकिन प्रचंड बहुमत से वापसी के बाद उसके फिर से रफ्तार पकड़ने की संभावना है.
SCI पर सबसे पहले निर्णय
माना जा रहा है कि नई मोदी सरकार अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों में विनिवेश पर फोकस कर सकती है. सबसे पहले आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Shipping Corporation of India) में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को तेजी से निपटाया जा सकता है. एक रिपोर्ट में बताया गया है कि नई सरकार आईडीबीआई बैंक और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) में हिस्सेदारी बेचने को लेकर जल्द कोई बड़ा फैसला ले सकती है. शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में सरकार की 63.75% हिस्सेदारी है. शुरुआत में SCI के लिए बोलियां आमंत्रित किए जाने की संभावना है. बता दें कि SCI की लैंड असेट यूनिट को पहले ही अलग किया जा चुका है और उसे एक्सचेंजों पर अलग से लिस्ट किया गया था.
IDBI में है इतनी हिस्सेदारी
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि आईडीबीआई बैंक के विनिवेश प्रक्रिया में भी तेजी आएगी, जो चुनावी माहौल के चलते ठंडे बस्ते में थी. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया IDBI के संभावित खरीदारों के तौर पर उनके नामों पर विचार कर रहा है, जिन्होंने बैंक के अधिग्रहण में रुचि दिखाई थी. RBI से हरी झंडी मिलने के बाद निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) इस पर फाइनल अप्रूवल देगा. आईडीबीआई बैंक में सरकार के पास 49.24% और एलआईसी की 45.48% हिस्सेदारी है.
LIC और GIC का भी नंबर
इसके अलावा, नई मोदी सरकार जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) में भी अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है. इसी साल अप्रैल में खरब आई थी कि सरकार को GIC के लिए निवेशकों से अच्छा रिस्पांस मिला है. ऐसे में सरकार अब अपने शेयरों मूल्य के आधार पर कंपनी की 10% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है. इसी तरह, सरकार LIC में भी अपनी हिस्सेदारी घटाने पर फोकस कर सकती है. 2022 में LIC की स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग हुई थी. तब से अगले 10 वर्षों में सरकार ने 25% हिस्सेदारी बेचने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
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