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क्या SBI छोड़कर निजी हाथों में जाएंगे सभी सरकारी बैंक? पढ़ें क्या कहती है ये रिपोर्ट
नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की रिपोर्ट में प्राइवेटाइजेशन को बढ़ावा देने वालीं बातें कही गई हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
आर्थिक विकास के नाम पर केंद्र सरकार अपनी संपत्तियों को बेच रही है. LIC, BPCL के साथ ही सरकारी बैंक भी प्राइवेटाइजेशन के दायरे में आएंगे. मोदी सरकार कई मौकों पर बैंकों को निजी हाथों में बेचने की इच्छा जाहिर कर चुकी है. चूंकि सरकार के पास पूर्ण बहुमत है, इसलिए उसे किसी भी तरह के विरोध की कोई परवाह नहीं. इस बीच, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की रिपोर्ट में भी प्राइवेटाइजेशन को बढ़ावा देने की बातें कही गई हैं.
इक्विटी पर रिटर्न कम
NCAER की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दशक में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को छोड़कर अधिकांश सरकारी बैंक (PSB), प्राइवेट बैंकों से पिछड़ गए हैं. उन्होंने अपने प्राइवेट सेक्टर के समकक्षों की तुलना में संपत्ति और इक्विटी पर कम रिटर्न प्राप्त किया है. ऐसे में SBI को छोड़कर सभी सरकारी बैंकों को प्राइवेट किया जाना चाहिए.
जारी है खराब प्रदर्शन
बिजनेस स्टैंडर्ड ने NCAER की रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि 2014-15 के बाद से, बैंकिंग सेक्टर में बढ़ोतरी की लगभग पूरी जिम्मेदारी प्राइवेट बैंकों और SBI के कंधों पर ही है. इस दौरान अपने प्रदर्शन को बढ़ाने के उद्देश्य से कई नीतिगत पहलों के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का खराब प्रदर्शन जारी है. सरकारी बैंक डिपॉजिट और लोन दोनों के मामले में निजी बैंकों के सामने कमजोर हैं. PSB का NPA प्राइवेट बैंकों की तुलना में बढ़ा है.
इन 2 बैंकों से हो शुरुआत
रिपोर्ट में यह भी कहा कि कम सरकारी स्वामित्व वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करना आसान होगा. बता दें कि नीति आयोग ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक के निजीकरण का सुझाव दिया है. जबकि इस रिपोर्ट में इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को निजीकरण के लिए टॉप विकल्प बताया गया है. इन दोनों को संपत्ति पर रिटर्न, इक्विटी पर रिटर्न, NPA, सरकारी हिस्सेदारी और परिसंपत्ति के मानदंडों के आधार पर चुना गया है.
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