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म्यूचुअल फंड: भारत की 300 लाख करोड़ की निवेश यात्रा का इंजन
भारत में निवेश का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जिसमें पारंपरिक बैंक जमा से हटकर म्यूचुअल फंड जैसी मार्केट लिंक्ड उत्पादों की ओर रिटेल निवेशक बढ़ रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
भारत में निवेश का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है क्योंकि अधिक परिवार परंपरागत बैंक जमा से हटकर मार्केट लिंक्ड उत्पादों की ओर रुख कर रहे हैं. Bain & Co और Groww की रिपोर्ट के अनुसार, म्यूचुअल फंड सबसे तेजी से बढ़ती एसेट क्लास बन गई हैं, जिसे बेहतर वित्तीय साक्षरता, दीर्घकालिक निवेश जागरूकता और आसान डिजिटल पहुँच ने गति दी है. वित्त वर्ष 2025 के अंत तक व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड संपत्तियाँ 41 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गई हैं, जो रिटेल निवेश का मजबूत आधार बन चुकी हैं.
घरेलू निवेशक पहुंच दोगुनी हुई
पिछले पांच वर्षों में घरेलू निवेशक पहुंच लगभग दोगुनी हो गई है और 5-6 प्रतिशत से बढ़कर 10-11 प्रतिशत तक पहुँच गई है. फिर भी भारत में वित्तीय परिसंपत्तियों का वितरण विकसित देशों जैसे अमेरिका और कनाडा की तुलना में पीछे है, जहां म्यूचुअल फंड और इक्विटी घरेलू वित्तीय परिसंपत्तियों का 50-60 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं. यह अंतर भारत में म्यूचुअल फंड के विस्तार की विशाल संभावना को दर्शाता है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म बढ़ा रहे भागीदारी
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने निवेश में भागीदारी को तेज किया है. लगभग 35 प्रतिशत म्यूचुअल फंड निवेशक अब ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से निवेश करते हैं. युवा निवेशकों ने इस बदलाव को गति दी है, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत निवेशक 35 वर्ष से कम उम्र के हैं. क्षेत्रों की विविधता भी बढ़ी है. टॉप 30 शहरों के बाहर के शहर अब नए SIP रजिस्ट्रेशन का 55-60 प्रतिशत हिस्सा दे रहे हैं. इन क्षेत्रों में महिला निवेशकों का हिस्सा पिछले पांच वर्षों में 20 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत हो गया है. इस प्रवृत्ति ने निवेश में समावेशिता की दिशा को स्पष्ट किया है.
निवेशक व्यवहार में परिपक्वता
निवेशक अब छोटी अवधि की बाज़ी लगाने की बजाय सिस्टमैटिक निवेश योजनाओं (SIP) को प्राथमिकता दे रहे हैं. इक्विटी-ओरिएंटेड फंड कुल म्यूचुअल फंड संपत्तियों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं, और पांच साल से अधिक अवधि के लिए निवेश का अनुपात दोगुना हो गया है. यह वित्तीय बाजारों में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.
आगामी दशक में भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग का अनुमान है कि यह 300 लाख करोड़ रुपये से अधिक तक पहुँच जाएगा. यह वृद्धि अनुशासित SIP निवेश, वितरक नेटवर्क के विस्तार, रिटायरमेंट-फोकस्ड योजनाओं और सतत नियामक जागरूकता प्रयासों से प्रेरित होगी. यह परिवर्तन रिटेल निवेश को भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में स्थापित करता है.
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