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निजीकरण पर बदला मन, अब बेचने के बजाए सरकारी कंपनियों को मजबूत करेगी सरकार!
सहयोगियों के कंधों पर टिकी मोदी सरकार ने शायद निजीकरण की योजना पर ब्रेक लगा दिया है. सरकार अब प्रॉफिट बढ़ाने पर जोर देगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
इस बार की मोदी सरकार (Modi Govt) कुछ अलग है. अलग इस लिहाज से कि सरकार इस बार गठबंधन सहयोगियों के कंधों पर खड़ी है. JDU प्रमुख नीतीश कुमार और TDP चीफ चंद्रबाबू नायडू सरकार का सहारा हैं. यदि इनमें से एक सहारा भी हटा तो मोदी सरकार धड़ाम से नीचे आ गिरेगी. गठबंधन सरकार की अपनी मजबूरियां होती हैं, यानी मनमर्जी से फैसले नहीं लिए जा सकती. नीतीश और नायडू दोनों निजीकरण विरोधी रहे हैं. ऐसे में यह संभावना तो शुरू से जताई जा रही थी कि इस दिशा में पहले की तरह बढ़ना PM मोदी के लिए आसान नहीं होगा. अब सामने आई एक रिपोर्ट ने इस संभावना को बल दिया है.
प्रॉफिट बढ़ाने पर फोकस
एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार 200 से ज्यादा सरकारी कंपनियों का प्रॉफिट बढ़ाने पर काम कर रही है, जो संकेत है कि सरकार निजीकरण यानी प्राइवेटाइजेशन पर फिलहाल आगे बढ़ने के मूड में नहीं है. मोदी सरकार ने 2021 में सरकारी संपत्तियों क निजी हाथों में सौंपने की योजना की शुरुआत की थी. सरकार ने बड़े पैमाने पर PSU कंपनियों के निजीकरण का खाका तैयार किया था. लेकिन अब लगता है कि उसने फिलहाल के लिए इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. हाल ही में सरकार ने भारत पेट्रोलियम लिमिटेड (BPCL) के निजीकरण से कदम वापस खींचने की बात कही थी.
नाराज़गी का खामियाजा
निजीकरण का विरोध किया जा रहा है. खासकर सरकारी कर्मचारियों में इसे लेकर सरकार के खिलाफ गुस्सा है. यही वजह रही कि लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने अपनी इस महत्वकांक्षी योजना की रफ्तार सुस्त कर दी थी. हालांकि, इसके बावजूद भाजपा को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा. माना जा रहा है कि नाराज सरकारी कर्मचारियों ने भाजपा के खिलाफ वोट दिया. नतीजतन पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने में विफल रही. चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के समर्थन से इस बार की मोदी सरकार अस्तित्व में आई है.
पुरी ने कही थी ये बात
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार संपत्ति की बिक्री से ध्यान हटाकर अब अपनी कंपनियों के आंतरिक मूल्य को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है. साथ ही सरकार मैज्योरिटी स्टेक वाली कंपनियों में उत्तराधिकार योजना शुरू करने पर भी विचार कर रही है. बता दें कि हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि BPCL के निजीकरण की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उच्च राजस्व अर्जित करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचने की जरूरत नहीं है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कार्यभार संभालते हुए पुरी ने कहा था कि BPCL ने पहली तीन तिमाहियों में जो मुनाफा कमाया है, वो उसकी हिस्सेदारी बेचकर मिलने वाली राशि से अधिक है.
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