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Amul बनाम Nandini के बाद अब केरल में Nandini और Milma में छिड़ी जंग! जानें क्या है मामला 

'मिल्मा' केरल का फेमस मिल्क ब्रैंड है. राज्य में नंदिनी की एंट्री से मिल्मा का बाजार प्रभावित होना लाजमी है, इसलिए उसका विरोध किया जा रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

दूध पर कर्नाटक में मचे बवाल के बीच, केरल में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है. गुजरात के फेमस मिल्क ब्रैंड अमूल (Amul) की कर्नाटक में एंट्री को लेकर बीते दिनों काफी हंगामा हुआ था. विपक्ष ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार स्थानीय ब्रैंड नंदिनी को खत्म करना चाहती है. अब 'नंदिनी' (Nandini) पर केरल के दूध ब्रैंड 'मिल्मा' (Milma) को खत्म करने के आरोप लग रहे हैं. दरअसल, केरल में कर्नाटक के फेमस ब्रैंड नंदिनी की एंट्री हुई है, जिसकी वजह से 'मिल्मा' चलाने वाली को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन नाराज हो गई है.

केरल में कुछ आउटलेट्स खोले
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने 'नंदिनी' दूध ब्रैंड के कुछ आउटलेट्स केरल में खोले हैं. इतना ही नहीं, उसने पूरे राज्य में इसके विस्तार करने की घोषणा भी कर दी है, जिससे केरल में बवाल मच गया है. बता दें कि केरल सहकारी समिति में 15 लाख डेयरी किसान सदस्य और 3,000 से अधिक सहकारी समितियां हैं. मिल्मा के अध्यक्ष केएस मणि का कहना है कि कुछ राज्यों की कंपनियों में अपनी सीमा से बाहर उत्पाद बेचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है. जो संघीय सिद्धांतों और सहकारी भावना का उल्लंघन है. यह कदम सहकारिता की भावना के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. 

इसे उचित कैसे कहा जाए?
उन्होंने कहा कि जब अमूल के अपने राज्य में उत्पाद बेचने के फैसले का कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने विरोध किया था, तो केरल में 'नंदिनी' के प्रवेश को कैसे उचित ठहराया जा सकता है? मणि ने यह भी कहा कि जब केरल में दूध की कमी होती है, तो हम कर्नाटक से थोक में दूध खरीदते हैं. कई मौकों पर हम नंदिनी से एक दिन में 2 लाख लीटर दूध तक खरीदते हैं, लेकिन कर्नाटक मिल्क फेडरेशन का यह कदम किसी भी लिहाज से उचित नहीं है. 

1995 में हुई थी शुरुआत
'मिल्मा' केरल का फेमस मिल्क ब्रैंड है. एक रिपोर्ट के अनुसार, मिल्मा अपने नेटवर्क में सहकारी समितियों के माध्यम से अपने टर्नओवर का 83% डेयरी किसानों को देती है. राज्य में 'मिल्मा' ब्रैंड के दूध को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. केरल मिल्क फेडरेशन को लग रहा है कि 'नंदिनी' की एंट्री से उसका बाजार प्रभावित होगा. नंदिनी कर्नाटक का काफी लोकप्रिय ब्रैंड है. इसकी स्थापना 1955 में कोडगू जिले में डेयरी के तौर पर रखी गई थी. हालांकि, इसका नंदिनी नाम काफी बाद में रखा गया. 

कितना बड़ा ब्रैंड है नंदिनी?
नंदिनी पर कर्नाटक कॉपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन लिमिटेड (KMF) का मालिकाना हक है. इसे देश का दूसरा और दक्षिण भारत का सबसे बड़ा डेयरी को-ऑपरेटिव कहा जाता है. नंदिनी नाम पवित्र गाय के नाम पर रखा गया है. मौजूदा वक्त में नंदिनी कर्नाटक का सबसे ब्रैंड है. इसकी पहुंच 22000 गांवों तक है 24 लाख से अधिक किसान एवं पशुपालक नंदिनी के साथ जुड़े हैं. कंपनी रोजाना 84 लाख लीटर दूध खरीदती है. बाजार में कंपनी के 65 से अधिक प्रोडक्ट्स आते हैं. वैसे, नंदिनी के प्रोडक्ट्स अमूल की तुलना में काफी सस्ते हैं. अमूल के एक लीटर टोंड दूध की कीमत 54 रुपए/ लीटर है. जबकि नंदिनी के दूध की कीमत 39 रुपए. इसके बावजूद कंपनी को लगता है कि अमूल के आने से उसका बाजार प्रभावित होगा.


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