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सबसे बड़ा सवाल: क्या PM Modi पर टिप्पणी से मालदीव के 'बुरे दिनों' की हो चुकी है शुरुआत?
मालदीव की इकॉनमी पर्यटन पर निर्भर है और वहां पहुंचने वालों में सबसे ज्यादा तादाद भारतीयों की ही होती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भारत को नाराज करके क्या मालदीव (India-Maldives Tension) ने अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार ली है? क्या इसे मालदीव के बुरे दिनों की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है? इन सवालों का जवाब कुछ हद तक 'हां' है. मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर टिकी है और हर साल बड़ी संख्या में भारतीय सैलानी वहां जाते हैं. ऐसे में यदि BoycottMaldives मुहिम रंग लाती है, तो मालदीव की आर्थिक सेहत खराब हो जाएगी.
अगले 20 दिनों में दिखेगा असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के खिलाफ मालदीव के मंत्रियों द्वारा की गई बदजुबानी से भारतीयों का गुस्सा भड़क उठा है. सोशल मीडिया पर मालदीव से दूरी बनाने की सलाह दी जा रही है. इसी क्रम में ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल कंपनी EaseMyTrip ने मालदीव की सभी फ्लाइट बुकिंग रद्द कर दी हैं. माना जा रहा है कि कुछ और कंपनियां भी EaseMyTrip की राह चल सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि BoycottMaldives से मालदीव का पर्यटन प्रभावित होगा और इसका असर अगले 20 से 25 दिनों में दिखेगा.
सेलेब्रिटीज भी हुए शामिल
मालदीव को सबक सिखाने के लिए चलाये जा रहे ऑनलाइन अभियान में कई सेलेब्रिटीज भी शामिल हो गए हैं. सचिन तेंदुलकर से लेकर फिल्मी दुनिया के कई बड़े नामों ने लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने का समर्थन किया है. वे #ExploreIndianIsland का हिस्सा बन गए हैं. इन हस्तियों के सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स हैं, ऐसे में उनकी अपील खाली जाए, इसकी संभावना बेहद कम है. मालदीव भारत के दक्षिण पश्चिम में स्थित 200 द्वीपों का एक समूह है. करीब 4 लाख की आबादी वाले मालदीव में धिवेही और इंग्लिश भाषा बोली जाती है. मालदीव जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहा है. इसका कोई भी द्वीप समुद्र तल से छह फुट से अधिक ऊंचा नहीं है.
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पिछले साल इतने इंडियन गए
मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर टिकी हुई है. यहां के द्वीपों की अर्थव्यवस्था भी पर्यटन पर ही निर्भर है. एक रिपोर्ट के अनुसार, इस देश की अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय का एक चौथाई से अधिक हिस्सा पर्यटन से आता है. मालदीव भारतीयों का पसंदीदा टूरिस्ट प्लेस है. बीते साल यानी 2023 में करीब दो लाख भारतीय मालदीव गए थे. 2021 में लगभग तीन लाख और 2022 में यह संख्या ढाई लाख के आसपास थी. कोरोना से पहले तक यहां हर साल दुनियाभर के करीब 20 लाख सैलानी आते थे. कोरोना के बाद इसमें कमी देखने को मिली है.
अच्छे रहे हैं व्यापारिक रिश्ते
मालदीव की इकॉनमी में भारतीय पर्यटकों का 11% योगदान बताया जाता है. कोरोना के बाद भी भारतीय टूरिस्ट वहां काफी पहुंचे, लेकिन चीनी पर्यटकों की संख्या जरूर कम हुई. अब जब मालदीव के खिलाफ भारतीय BoycottMaldives मुहिम चला रहे हैं, तो इस संख्या का प्रभावित होना लाजमी है. भारत और मालदीव के रिश्ते पिछली सरकारों में काफी अच्छे रहे हैं. दोनों देशों के बीच अच्छा-खासा कारोबार होता रहा है. पिछले साल सितंबर तक भारत ने 41.02 करोड़ डॉलर का निर्यात किया था. जबकि मालदीव से उसका आयात 61.9 लाख डॉलर था. पिछले कुछ सालों में मालदीव के साथ हमारे व्यापार में लगातार इजाफा हुआ है. जानकार मानते हैं कि मालदीव को आने वाले दिनों में भारत को नाराज करने की कीमत चुकानी होगी. उनके मुताबिक, यदि बड़ी संख्या में इंडियन टूरिस्ट मालदीव का बहिष्कार कर दें, तो वहां की राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार के होश खुद ठिकाने आ जाएंगे.
आखिर क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे मामले की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद हुई थी. पीएम मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा करने के बाद एक वीडियो शेयर किया था. उन्होंने भारतीयों से अपील की थी कि वह यहां घूमने के लिए आएं. इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग कहने लगे कि लाखों रुपए खर्च कर मालदीव जाने से बेहतर होगा कि लक्षद्वीप जाएं. बस इसी बात से मालदीव के मंत्री माल्शा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्लाह महजूम माजिद नाराज हो गए और आपत्तिजनक पोस्ट कर बैठे. इन मंत्रियों ने PM मोदी के खिलाफ टिप्पणी की साथ ही भारत में पर्यटन को लेकर भी कमेंट किए. विवाद बढ़ने के बाद मालदीव की सरकार ने तीनों मंत्रियों को निलंबित कर दिया है.
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