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मेक इन इंडिया को बड़ा बूस्ट, अमेरिका भेजे गए 12.5 अरब डॉलर के फोन
अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में आई यह रिकॉर्डतोड़ बढ़त भारत के लिए सिर्फ एक सेक्टर की सफलता नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक सप्लाई चेन में देश की मजबूत होती भूमिका का संकेत है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है. वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से नवंबर के बीच यह निर्यात सालाना आधार पर 200 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 12.54 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इस ऐतिहासिक बढ़त के पीछे सबसे बड़ी भूमिका ऐपल की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट रणनीति की मानी जा रही है. वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा सिर्फ 4.1 अरब डॉलर था.
कई सेक्टर गिरे, लेकिन स्मार्टफोन ने बचाई एक्सपोर्ट ग्रोथ
जहां एक ओर रत्न और आभूषण, वाहन पुर्जे और पेट्रोलियम उत्पाद जैसे सेक्टरों के निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं स्मार्टफोन एक्सपोर्ट ने इन सभी नुकसानों की भरपाई कर दी. रत्न और आभूषण के निर्यात में 44 प्रतिशत, वाहन पुर्जों में 6.8 प्रतिशत और पेट्रोलियम उत्पादों में 7.78 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है. अमेरिका को निर्यात होने वाली 98 प्रमुख वस्तुओं में से 59 वस्तुएं इस दौरान निगेटिव जोन में रहीं.
फिर भी कुल निर्यात में 11.28% की बढ़त
इन तमाम चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2026 के पहले आठ महीनों में अमेरिका को भारत का कुल निर्यात 11.28 प्रतिशत बढ़ा है. इसकी बड़ी वजह यह रही कि जहां कुल निर्यात में 5.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, वहीं अकेले स्मार्टफोन के निर्यात में 8.3 अरब डॉलर का इजाफा हुआ. इसके अलावा इंजीनियरिंग गुड्स और स्टील प्रोडक्ट्स ने भी निर्यात को पॉजिटिव बनाए रखने में मदद की.
स्मार्टफोन पर नहीं लगता अमेरिकी टैरिफ, मिला बड़ा फायदा
एक अहम वजह यह भी है कि स्मार्टफोन को अमेरिका के ऊंचे टैरिफ से बाहर रखा गया है. ये प्रोडक्ट जीरो ड्यूटी पर अमेरिकी बाजार में एंट्री पा रहे हैं. इसी कारण भारत में बने iPhone और दूसरे स्मार्टफोन अमेरिका में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं.
भारत के अमेरिका एक्सपोर्ट में स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 20% के पार
इस सेक्टर की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से नवंबर के बीच अमेरिका को भारत के कुल निर्यात में स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है. जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह हिस्सा सिर्फ 8 प्रतिशत था.
‘मेक इन इंडिया’ को मिला बड़ा बूस्ट
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह उछाल ‘मेक इन इंडिया’ और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता है. खासतौर पर ऐपल जैसी दिग्गज कंपनी का भारत पर बढ़ता भरोसा आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट को और नई ऊंचाई दे सकता है.
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