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तकरार के बावजूद ज्यादा कम नहीं हुआ प्यार, अब भी डिमांड में है 'Made in China' माल
जिन चीनी उत्पादों की भारत में अब भी काफी डिमांड है, उनमें गैजेट, इलेक्ट्रॉनिक और मोबाइल एक्सेसरीज शामिल हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
'मेड इन चाइना' (Made in China) प्रोडक्ट्स के बहिष्कार की मांग काफी समय से की जा रही है. खासकर, गलवान घाटी हिंसा के बाद से इस मांग ने जोर पकड़ लिया था. लेकिन इसके बावजूद चीनी उत्पादों से प्यार करने वालों की संख्या अच्छी-खासी है. एक सर्वे में यह आमने आया है कि पिछले एक साल में 55 प्रतिशत लोगों ने चीन निर्मित उत्पाद खरीदे हैं. हालांकि, 45 फीसदी ऐसे भी हैं जिन्होंने चीनी सामान से दूरी बना ली है.
एक से ज्यादा प्रोडक्ट खरीदे
लोकल सर्कल्स ने हाल ही में एक सर्वे किया था. जिसमें लोगों से पूछा गया कि क्या आपने पिछले 12 महीने में कोई 'मेड इन चाइना' प्रोडक्ट खरीदा है? इनमें से 55% ने हां में जवाब दिया. जबकि 45% लोगों ने कहा कि उन्होंने चीन में निर्मित कोई भी उत्पाद नहीं खरीदा. सर्वेक्षण में 12767 लोगों ने भाग लिया था. सर्वे में शामिल 7,022 लोगों ने कहा कि उन्होंने पिछले 12 महीनों में एक से ज्यादा चीनी उत्पाद खरीदे हैं. खास बात ये रही कि ऐसे लोगों की तादाद बढ़ी है, जो चीनी ऐप के इस्तेमाल को 'ना' कह रहे हैं.
Chinese App से बनाई दूरी
सर्वे में शामिल 64% लोगों ने कहा कि उन्होंने अपने फोन में कोई भी चीनी ऐप इन्स्टॉल नहीं किया है. पिछले साल यानी 2022 में हुए एक सर्वेक्षण में 59% ने कहा था कि इनके मोबाइल में कोई Chinese app नहीं है. उस हिसाब से देखें तो चीनी ऐप से दूरी बढ़ाने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है. दरअसल, चीनी ऐप को लेकर कई तरह की शिकायतें मिल चुकी हैं और इन ऐप्स को खतरनाक माना जाता है, इसलिए लोग इनके इस्तेमाल से बच रहे हैं. कई देशों में बहुत से चीनी ऐप्स बैन भी किए जा चुके हैं.
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इन कैटेगरी में हुई खरीदारी
जिन चीनी उत्पादों की भारत में अब भी काफी डिमांड है, उनमें गैजेट, इलेक्ट्रॉनिक और मोबाइल एक्सेसरीज शामिल हैं. भारतीय इस तरह के प्रोडक्ट ज्यादा खरीदते हैं. सर्वे में शामिल 56 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने पिछले 12 महीनों में चीनी स्मार्टफोन, स्मार्ट वॉच, पावर बैंक और अन्य इलेक्ट्रॉनिक या मोबाइल एक्सेसरीज खरीदी हैं. जबकि 49 प्रतिशत ने बताया कि उन्होंने चीन निर्मित फेस्टिव लाइटिंग, लैंप, कैंडल्स, वॉटर गन आदि खरीदे. तीसरे नंबर पर खिलौने और स्टेशनरी रहे, करीब 33 प्रतिशत ने इन्हें खरीदने की बात स्वीकारी. इसके अलावा, 29 प्रतिशत ने चाइनीज गिफ्ट आइटम्स, 26 प्रतिशत ने TV, Air Purifiers, Kettle जैसे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और एप्लायंसेज खरीदने की बात स्वीकार की. साथ ही 26 प्रतिशत ने लाइटिंग, फर्नीचर जैसे घरेलू उत्पाद और 15 प्रतिशत ने मेड इन चाइना फैशन प्रोडक्ट्स भी खरीदे.
मेड इन इंडिया बेहतर
सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि 'मेड इन चाइना' उत्पादों से दूरी बनाने वालों ने ऐसा क्यों किया. 63 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने जियो-पॉलिटिकल स्थिति के कारण भारत में बने उत्पादों को अधिक तवज्जो दी. 16 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने चीनी उत्पादों को छोड़कर मेड इन इंडिया विकल्पों को इसलिए चुना, क्योंकि वो दाम और क्वॉलिटी दोनों में बेहतर हैं. वहीं, 13 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने 'मेड इन चाइना' उत्पाद खरीदना कम नहीं किया है. सर्वे में यह बात भी सामने आई कि हर चार में से एक स्मार्टफोन यूजर एक या उससे अधिक चीनी ऐप इस्तेमाल कर रहा है.
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