शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता काफी महत्वपूर्ण है. इस सप्ताह कई आंकड़े जारी होने वाले हैं जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
शेयर बाजार (Stock Market) के लिए पिछला हफ्ता अच्छा रहा. बाजार हरे निशान पर बंद हुआ था. यह सप्ताह मार्केट के लिए काफी अहम रहने वाला है, क्योंकि इस हफ्ते आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक के नतीजे सहित कई आंकड़े जारी होंगे. आज यानी सोमवार को बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिल सकता है. चलिए जानते हैं कि आज कौनसे शेयर ट्रेंड में रह सकते हैं.
MACD का रुझान
मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डिवर्जेंस यानी MACD आज ने Suzlon Energy, Tata Steel, Bharat Electronics, RIL और IRFC में तेजी के संकेत दिए हैं. इसका मतलब है कि इन शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है. वहीं, MACD ने VRL Logistics, Sunflag Iron, HPCL और ABM International के शेयरों में मंदी का रुख दर्शाया है. यानी इनमें गिरावट आ सकती है.
ऐसा रहा पिछला प्रदर्शन
तेजी के संकेत वाले शेयरों के पिछले प्रदर्शन की बात करें, तो बीते कारोबारी दिन यह 0.63% की गिरावट के साथ 7.90 रुपए पर बंद हुआ था. पिछले एक महीने में गिरावट का आंकड़ा 7.06% रहा है. इस शेयर का 52 वीक का हाई लेवल 12.15 रुपए है. इस लिहाज से इसे अभी काफी दौड़ लगानी है. टाटा स्टील शुक्रवार को बढ़त के साथ 104.50 रुपए पर ट्रेड कर रहा था. बीते 5 कारोबारी दिनों में इसमें 0.24% की मामूली बढ़त देखने को मिली है.
6.50% की लगाई छलांग
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए शुक्रवार शानदार रहा. इस दौरान, कंपनी के शेयरों ने 6.50% की छलांग लगाई. 97.50 के भाव पर मिल रहा ये शेयर तेजी से अपने 52 वीक के हाई लेवल (114.65 रुपए) की तरफ बढ़ रहा है. पिछले 5 कारोबारी दिनों में इसमें 4.95% की तेजी आई है. इसी तरह, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी शुक्रवार को 4.31% की बढ़त के साथ 2,330.95 रुपए पर बंद हुए थे. पिछले पांच दिनों की बात की जाए, तो इसमें 4.62% का उछाल आया है. इसी तरह, IRFC यानी Indian Railway Finance Corporation का शेयर पिछले कारोबारी दिन 1.14% की बढ़त के साथ बंद हुआ. 26.65 रुपए कीमत वाले इस शेयर का 52 वीक का हाई लेवल 37.10 रुपए है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर और अपने विवेक के आधार पर ही निवेश करें).
हाइपरस्केलर और क्लाउड कंपनियों की बढ़ती मांग से जनवरी-जून 2026 के दौरान 258 मेगावाट आईटी क्षमता जुड़ी. देश की कुल परिचालन डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर 1.8 गीगावाट आईटी पहुंची.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है. प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म सैविल्स इंडिया (Savills India) की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में देश में 258 मेगावाट (MW IT) नई डेटा सेंटर क्षमता जुड़ी, जो पिछले साल की समान अवधि के 162 मेगावाट की तुलना में 59.3% अधिक है. इसी अवधि में डेटा सेंटर स्पेस का अवशोषण (Absorption) भी सालाना आधार पर 31.1% बढ़कर 278 मेगावाट आईटी हो गया. नई क्षमता जुड़ने के साथ देश की कुल परिचालन डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर 1.8 गीगावाट (GW IT) पहुंच गई है.
हाइपरस्केलर कंपनियां बनीं सबसे बड़ी मांग का स्रोत
रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर बाजार में तेजी का प्रमुख कारण हाइपरस्केलर, क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर और बड़े उद्यमों (एंटरप्राइज) की लगातार बढ़ती मांग रही. जनवरी-जून 2026 के दौरान कुल डेटा सेंटर अवशोषण में हाइपरस्केलर कंपनियों की हिस्सेदारी 80% से अधिक रही. इस अवधि में देश के प्रमुख बाजारों में डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए 120 एकड़ से अधिक जमीन के सौदे भी किए गए, जो इस क्षेत्र में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है.
मुंबई और चेन्नई रहे सबसे बड़े बाजार
डेटा सेंटर लीजिंग के मामले में मुंबई देश का सबसे बड़ा बाजार बना रहा. पहली छमाही में कुल अवशोषण का 38% हिस्सा अकेले मुंबई का रहा, जबकि चेन्नई की हिस्सेदारी 26% रही. दोनों शहरों ने मिलकर इस अवधि के दौरान देश की कुल लीजिंग गतिविधि का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हासिल किया, जिससे भारत के डेटा सेंटर इकोसिस्टम में उनकी मजबूत स्थिति बनी रही.
बिजली और जमीन की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती
सैविल्स इंडिया में डायरेक्टर एवं लीड- डेटा सेंटर सर्विसेज श्रीहरि श्रीनिवासन ने कहा कि यह क्षेत्र स्थापित ऑपरेटरों के साथ-साथ नए डेवलपर्स को भी आकर्षित कर रहा है, जो तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि क्लाउड सेवाओं के बढ़ते उपयोग के कारण पारंपरिक एंटरप्राइज मांग कुछ धीमी हुई है, लेकिन हाइपरस्केलर और बड़े उद्यमों की मांग बाजार के विस्तार को लगातार समर्थन दे रही है.
श्रीनिवासन के मुताबिक, नियो-क्लाउड (Neo-Cloud) सेवा प्रदाताओं की बढ़ती मांग आने वाले वर्षों में बाजार को और मजबूती देगी. भारत की लागत संबंधी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त और तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण वैश्विक कंपनियां इसे रणनीतिक गंतव्य के रूप में देख रही हैं.
हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रमुख डेटा सेंटर बाजारों में पर्याप्त बिजली आपूर्ति और उपयुक्त भूमि की उपलब्धता अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.
नई क्षमता जोड़ने में मुंबई सबसे आगे
नई क्षमता जोड़ने के मामले में भी मुंबई पहले स्थान पर रहा. पहली छमाही में देश में जुड़ी कुल नई डेटा सेंटर क्षमता का 55% हिस्सा मुंबई में विकसित हुआ. इसके बाद चेन्नई की हिस्सेदारी 20% और हैदराबाद की 10% रही.
वहीं, टियर-2 शहरों ने भी कुल नई आपूर्ति में 7% योगदान दिया, जिससे संकेत मिलता है कि डेवलपर्स अब पारंपरिक डेटा सेंटर हब से बाहर भी विस्तार कर रहे हैं.
2030 तक 7 गीगावाट से अधिक क्षमता का अनुमान
सैविल्स इंडिया का अनुमान है कि तेज डिजिटलाइजेशन, क्लाउड सेवाओं का बढ़ता उपयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वर्कलोड और डेटा लोकलाइजेशन की बढ़ती जरूरतों के चलते वर्ष 2030 तक भारत की परिचालन डेटा सेंटर क्षमता 7 गीगावाट (GW IT) से अधिक हो जाएगी.
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के अंत तक नई क्षमता और डेटा सेंटर स्पेस का अवशोषण दोनों 600 मेगावाट आईटी के आंकड़े को पार कर सकते हैं. इस दौरान हैदराबाद, मुंबई और कई टियर-2 शहर डेटा सेंटर उद्योग के प्रमुख ग्रोथ मार्केट के रूप में उभरने की संभावना है.
कम मात्रा में कच्चा तेल खरीदने के बावजूद भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा. अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक बाजार में तेल की ऊंची कीमतों का असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर भारत के आयात खर्च पर साफ नजर आने लगा है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश का कच्चे तेल का आयात बिल सालाना आधार पर 61% बढ़कर 49.8 अरब डॉलर पहुंच गया. दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान भारत ने पिछले साल की तुलना में कम कच्चा तेल आयात किया, लेकिन ऊंची वैश्विक कीमतों के कारण आयात पर खर्च काफी बढ़ गया.
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भारत ने 59.8 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 62.6 मिलियन टन था. यानी आयात की मात्रा करीब 4% घट गई, लेकिन कुल आयात बिल 49.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
जून महीने में भी यही रुझान देखने को मिला. इस दौरान भारत ने 18.9 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जो एक साल पहले की तुलना में 7% कम है. इसके बावजूद जून का आयात बिल 48% बढ़कर 14.7 अरब डॉलर हो गया.
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ीं वैश्विक कीमतें
विशेषज्ञों के मुताबिक, आयात बिल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया.
अप्रैल और मई के दौरान ब्रेंट क्रूड कई बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया. अप्रैल में युद्धविराम की खबरों के बाद कीमतें कुछ समय के लिए करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक आईं, लेकिन तनाव बढ़ने पर यह 126 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. मई में भी कीमतें लंबे समय तक 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहीं.
हालांकि जून में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत घटकर 83.22 डॉलर प्रति बैरल रह गई, लेकिन पूरे तिमाही के दौरान ऊंची कीमतों का असर भारत के आयात बिल पर दिखाई दिया.
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85% से अधिक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डालती है.
यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे देश का आयात बिल बढ़ सकता है, चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) गहरा सकता है और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है. इसका असर रुपये की विनिमय दर और सरकार के वित्तीय संतुलन पर भी पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत हर साल करीब 1.8 से 2 अरब बैरल कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में यदि कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की बढ़ोतरी होती है, तो देश का वार्षिक आयात बिल लगभग 2 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक मांग पर निर्भर करेगी. यदि तनाव बना रहता है, तो भारत के लिए ऊर्जा आयात लागत और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ सकता है.
NRI निवेशकों ने FCNR-B जमा में दिखाई मजबूत दिलचस्पी. RBI की स्वैप सुविधा के तहत कुल 20.7 अरब डॉलर जुटे, विशेषज्ञों ने आगे और तेज पूंजी प्रवाह की जताई उम्मीद.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विदेशी मुद्रा आकर्षित करने की विशेष FCNR (B) डिपॉजिट योजना को शुरुआती चरण में ही जोरदार प्रतिक्रिया मिली है. योजना शुरू होने के महज 42 दिनों के भीतर अनिवासी भारतीयों (NRI) ने भारतीय बैंकों में 17.41 अरब डॉलर का FCNR-B डिपॉजिट किया है. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) को मजबूती मिली है और रुपए को सहारा मिलने की उम्मीद बढ़ी है.
RBI के मुताबिक, 17 जुलाई तक उसकी डॉलर स्वैप सुविधा के तहत कुल 20.72 अरब डॉलर का प्रवाह हुआ, जिसमें सबसे बड़ा योगदान FCNR-B डिपॉजिट का रहा. इसके अलावा विदेशी मुद्रा ऋण (Foreign Currency Borrowing) के जरिए 1.97 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के माध्यम से 1.34 अरब डॉलर आए. केंद्रीय बैंक ने कहा कि 8 जून से योजना के तहत लगातार विदेशी मुद्रा का प्रवाह बना हुआ है और बाजार से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है.
सितंबर तक खुली रहेगी FCNR-B विंडो
RBI ने 5 जून को इस विशेष योजना की घोषणा की थी, जिसे 8 जून से लागू किया गया. इसका उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पूंजी आकर्षित करना, भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को मजबूत करना और रुपये पर दबाव कम करना है.
योजना के तहत बैंक नए FCNR-B डिपॉजिट जुटाकर डॉलर को RBI के साथ रियायती दर पर स्वैप कर सकते हैं. FCNR-B विंडो 30 सितंबर तक खुली रहेगी, जबकि OFCB और ECB से जुड़ी सुविधाएं 31 दिसंबर तक उपलब्ध रहेंगी.
अनुमान से अधिक निवेश की उम्मीद
IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने इस योजना को "बेहद अच्छी शुरुआत" बताया है. उनका कहना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए FCNR-B के जरिए कुल 50 अरब डॉलर से अधिक का निवेश भी आ सकता है. उन्होंने अगस्त और सितंबर में पूंजी प्रवाह और तेज होने की संभावना जताई है.
वहीं, ECB के जरिए अतिरिक्त 20 अरब डॉलर आने का अनुमान भी बरकरार रखा गया है. उनके मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का भुगतान संतुलन अधिशेष (BoP Surplus) करीब 25 अरब डॉलर रह सकता है, जिससे रुपये की स्थिरता को समर्थन मिलेगा.
PNB समेत कई बैंकों को मजबूत प्रतिक्रिया
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक चंद्रा ने कहा कि शुरुआती आंकड़े उम्मीद से बेहतर हैं और यह योजना के प्रति निवेशकों की मजबूत रुचि को दर्शाते हैं. उन्होंने कहा कि बैंक को उम्मीद थी कि 15 अगस्त के बाद निवेश बढ़ेगा, लेकिन मौजूदा रुझान इससे पहले ही सकारात्मक संकेत दे रहे हैं. PNB का लक्ष्य इस योजना के तहत 2.5 अरब डॉलर के FCNR-B डिपॉजिट जुटाने का है, जिसमें अब तक 425 मिलियन डॉलर प्राप्त हो चुके हैं.
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी फंडिंग की लागत बढ़ने से बैंक बड़े FCNR-B डिपॉजिट को प्राथमिकता दे रहे हैं. वहीं, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे बाजारों में टैक्स नियमों और अनुपालन संबंधी चिंताओं के कारण कुछ NRI अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं.
बार्कलेज की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अगले कुछ महीनों में 25-30 अरब डॉलर तक का FCNR प्रवाह संभव है, हालांकि 2013 जैसी रिकॉर्ड पूंजी आमद की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक है, लेकिन बाजार की 40-50 अरब डॉलर की ऊंची उम्मीदों तक पहुंचने के लिए अगले कुछ महीनों का प्रदर्शन अहम रहेगा.
जून तिमाही में राजस्व 65% बढ़कर ₹21,689 करोड़ पहुंचा. घरेलू और निर्यात बाजार में रिकॉर्ड बिक्री से कंपनी ने बनाया नया कीर्तिमान, विशेषज्ञों ने आगे भी सकारात्मक रुख जताया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दोपहिया और तिपहिया वाहन निर्माता बजाज ऑटो (Bajaj Auto) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं. जून तिमाही में कंपनी के कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 46% बढ़ोतरी दर्ज हुई है. जबकि परिचालन से होने वाला राजस्व 65% की तेज बढ़ोतरी के साथ 21,689 करोड़ रुपये रहा. रिकॉर्ड एक्सपोर्ट, घरेलू बाजार में मजबूत मांग और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स ने कंपनी के प्रदर्शन को नई ऊंचाई पर पहुंचाया.
खर्च बढ़ा, लेकिन मुनाफे पर नहीं पड़ा असर
कंपनी ने मंगलवार को जारी नतीजों में बताया कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान उसका कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 3,225.63 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 45.9% अधिक है. परिचालन से राजस्व बढ़कर 21,688.83 करोड़ रुपये हो गया, जबकि कुल आय 22,376.69 करोड़ रुपये रही, जिसमें 687.86 करोड़ रुपये की अन्य आय भी शामिल है.
तिमाही के दौरान कंपनी का कुल खर्च 68% बढ़कर 17,949.85 करोड़ रुपये हो गया. कच्चे माल और कंपोनेंट की लागत बढ़कर 13,261.30 करोड़ रुपये रही, जबकि कर्मचारी लाभ पर खर्च भी बढ़कर 1,387.09 करोड़ रुपये हो गया. इसके बावजूद बेहतर कीमत, अनुकूल प्रोडक्ट मिक्स, विदेशी मुद्रा से हुई कमाई और लागत नियंत्रण के चलते कंपनी ने मजबूत लाभप्रदता बनाए रखी.
स्टैंडअलोन कारोबार में भी रिकॉर्ड प्रदर्शन
स्टैंडअलोन आधार पर बजाज ऑटो का राजस्व 37% बढ़कर रिकॉर्ड 17,244 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी ने बताया कि इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) और इलेक्ट्रिक वाहनों, घरेलू और निर्यात बाजारों के साथ-साथ दोपहिया और तिपहिया दोनों श्रेणियों में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई.
कंपनी का स्टैंडअलोन EBITDA पहली बार 3,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, जबकि कर पश्चात लाभ (PAT) 2,983 करोड़ रुपये रहा. दोनों आंकड़ों में सालाना आधार पर 40% से अधिक की वृद्धि हुई.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा एक्सपोर्ट
बजाज ऑटो ने कहा कि जून तिमाही में कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक तिमाही एक्सपोर्ट वॉल्यूम और एक्सपोर्ट रेवेन्यू दर्ज किया. पहली बार निर्यात 7 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर गया.
लैटिन अमेरिका में मजबूत मांग, अफ्रीका में तेज वृद्धि और खासतौर पर नाइजीरिया में कारोबार तीन गुना होने से कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़ा फायदा मिला. वहीं, कमर्शियल वाहनों के निर्यात में भी करीब 70% की वृद्धि दर्ज की गई.
घरेलू बाजार में भी सभी प्रमुख सेगमेंट में डबल डिजिट ग्रोथ रही, जिससे घरेलू राजस्व 26% बढ़ा. कंपनी ने कहा कि आने वाले समय में 125cc-160cc मोटरसाइकिल पोर्टफोलियो में अपग्रेड से उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मजबूत होगी.
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञों के अनुसार, बजाज ऑटो के पहली तिमाही के नतीजे बाजार के अनुमान से बेहतर रहे हैं. मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ और बेहतर मार्जिन ने सप्लाई चेन और इनपुट लागत की चुनौतियों के बावजूद प्रदर्शन को सहारा दिया. उनका मानना है कि EV और एक्सपोर्ट कारोबार को लेकर मैनेजमेंट की आगे की रणनीति निवेशकों के लिए अहम रहेगी.
विशेषज्ञों ने कहा कि घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में मजबूत मांग के चलते कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है. हालांकि, उन्होंने निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में मार्जिन, मानसून के असर और मांग की स्थिरता पर नजर रखने की सलाह दी.
नतीजों के बाद बजाज ऑटो का शेयर शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद लगभग सपाट कारोबार करता दिखा. हालांकि कारोबार के समय करीब 1% की गिरावट रही. इसके बावजूद वर्ष 2026 में अब तक कंपनी का शेयर करीब 9% का रिटर्न दे चुका है.
इस पहल का उद्देश्य खिलाड़ियों और आम लोगों की उन प्रेरक कहानियों को सामने लाना है, जिन्होंने बीमारी, चोट या अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों से उबरकर दमदार वापसी की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस ने ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के ऑफिशियल हेल्थ इंश्योरेंस प्रिंसिपल पार्टनर बनने की घोषणा की है. इसके साथ कंपनी ने 'सेटबैक से कमबैक तक' नाम से नया ब्रांड अभियान भी शुरू किया है, जो स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बाद दोबारा मजबूत होकर खड़े होने वाले लोगों के जज्बे को सलाम करता है. कंपनी का कहना है कि खिलाड़ियों की असली जीत केवल मेडल तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी शुरुआत चोट, असफलता और मुश्किल परिस्थितियों से उबरने की प्रक्रिया से होती है. यही कहानी हर उस व्यक्ति की भी है, जो गंभीर बीमारी, दुर्घटना या बड़ी सर्जरी के बाद सामान्य जीवन में लौटता है.
साइना और मीराबाई बनेंगी अभियान का चेहरा
इस अभियान में ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल तथा ओलंपिक पदक विजेता, विश्व चैंपियन और कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट मीराबाई चानू को साथ लाया गया है. दोनों खिलाड़ियों की संघर्ष और वापसी की कहानी के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि चुनौतियां किसी विजेता की पहचान नहीं, बल्कि उनसे उबरने का साहस ही उसकी असली ताकत है.
निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस के डिजिटल बिजनेस यूनिट के डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर निमिष अग्रवाल ने कहा कि ग्लासगो 2026 के साथ यह साझेदारी कंपनी के उस विश्वास को मजबूत करती है कि स्वास्थ्य संबंधी झटके के बाद भी लोग आत्मविश्वास के साथ नई शुरुआत कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि 'सेटबैक से कमबैक तक' अभियान उन लाखों लोगों को समर्पित है, जो कठिन स्वास्थ्य परिस्थितियों से बाहर निकलकर अपनी जिंदगी को फिर से संवारते हैं.
ग्राहक-केंद्रित प्रोडक्ट रणनीति और इनोवेशन से 2.5 गुना बढ़ी मार्केट हिस्सेदारी
निमिष अग्रवाल ने बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत में बताया कि निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस ने पिछले छह वर्षों में अपनी मार्केट हिस्सेदारी में बड़ा सुधार दर्ज किया है. कंपनी के अनुसार, 5-6 साल पहले उसकी मार्केट हिस्सेदारी करीब 4% थी, जो अब बढ़कर पहली तिमाही के नतीजों के मुताबिक करीब 11% हो गई है. यानी इस अवधि में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी लगभग 2.5 गुना बढ़ी है. उन्होंने बताया कि इस वृद्धि के पीछे ग्राहक-केंद्रित प्रोडक्ट रणनीति और इनोवेशन की अहम भूमिका रही है. कंपनी का फोकस केवल इंश्योरेंस प्रोडक्ट बेचने पर नहीं, बल्कि ग्राहकों की जरूरतों के आधार पर समाधान तैयार करने पर है. इसी रणनीति के तहत कंपनी ने ऐसे हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट पेश किए हैं, जो ग्राहकों की बदलती जरूरतों और मेडिकल महंगाई को ध्यान में रखते हैं.
निमिष अग्रवाल ने आगे बताया कि कंपनी ने हाल ही में ReAssure 3.0 लॉन्च किया है, जिसमें अनलिमिटेड सब-इंश्योरेंस की सुविधा दी गई है. इससे पहले हेल्थ इंश्योरेंस में सब-इंश्योरेंस की सीमा आमतौर पर 5 लाख, 10 लाख या 15 लाख रुपये तक होती थी. बढ़ती मेडिकल महंगाई को देखते हुए कंपनी ने ऐसा प्रोडक्ट तैयार किया है, जिससे ग्राहकों को लंबे समय तक पर्याप्त हेल्थ कवर मिल सके.
उन्होंने क्लेम सेटलमेंट को अपनी प्रमुख ताकत बताया है. उन्होंने कहा कि कंपनी 30 मिनट में कैशलेस क्लेम की शुरुआती मंजूरी देने का दावा करती है और वर्तमान में इस प्रक्रिया में औसत समय करीब 19 मिनट है. कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक के जरिए इस समय को और कम करने पर काम कर रही है.
कंपनी के अनुसार, हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में भरोसा सबसे अहम फैक्टर है और इसके लिए वह तीन प्रमुख क्षेत्रों- ग्राहक संवाद, निरंतर सेवा और तेज क्लेम सेटलमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रही है. कंपनी का मानना है कि बेहतर प्रोडक्ट और आसान क्लेम प्रक्रिया के जरिए वह बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है.
साइना नेहवाल ने कही यह बात
साइना नेहवाल ने कहा कि लोग अक्सर खिलाड़ियों की जीत और मेडल को याद रखते हैं, लेकिन असली लड़ाई कोर्ट के बाहर लड़ी जाती है. चोट केवल शरीर की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और धैर्य की भी परीक्षा लेती है. उन्होंने कहा कि कमबैक की शुरुआत मैदान में वापसी से पहले ही हो जाती है और असली चैंपियन रिकवरी के दौरान तैयार होते हैं.
डिजिटल और सोशल मीडिया पर भी पहुंचेगा अभियान
कंपनी ने बताया कि 'सेटबैक से कमबैक तक' अभियान को डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा, ताकि ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले देशभर में स्वास्थ्य, रिकवरी और मजबूत वापसी का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके.
वन97 कम्युनिकेशंस का परिचालन राजस्व 28% बढ़ा, पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस में मजबूत ग्रोथ से मिली रफ्तार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 79 फीसदी बढ़कर 220 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी के मुताबिक, पेमेंट बिजनेस और फाइनेंशियल सर्विसेज में मजबूत वृद्धि के चलते मुनाफे में यह बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
कंपनी ने सोमवार को जून तिमाही के नतीजे जारी किए. इस दौरान वन97 कम्युनिकेशंस की कुल आय 22 फीसदी बढ़कर 2,630 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 2,159 करोड़ रुपये थी.
परिचालन राजस्व और EBITDA में भी मजबूत बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 2,448 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, कंपनी का EBITDA पिछले साल के मुकाबले 182 फीसदी की तेज बढ़त के साथ रिकॉर्ड 203 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसके साथ ही EBITDA मार्जिन बढ़कर 8 फीसदी हो गया.
कंपनी ने बताया कि मर्चेंट पेमेंट वॉल्यूम में सालाना आधार पर 31 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज से होने वाली आय में 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
GMV 31% बढ़ा, नेट पेमेंट रेवेन्यू में भी तेजी
वन97 कम्युनिकेशंस के अनुसार, जून तिमाही में कंपनी का ग्रॉस मर्चेंट वैल्यू (GMV) सालाना आधार पर 31 फीसदी बढ़कर 7.1 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, नेट पेमेंट रेवेन्यू में भी 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 601 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी ने कहा कि पेमेंट इकोसिस्टम में बढ़ती गतिविधियों और फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस के विस्तार से प्रदर्शन को मजबूती मिली है.
पेटीएम शेयर सपाट बंद
नतीजों के दिन शेयर बाजार में गिरावट के बीच पेटीएम के शेयर में ज्यादा बदलाव नहीं देखने को मिला. बीएसई पर कंपनी का शेयर 0.04 फीसदी की गिरावट के साथ 1,348 रुपये पर बंद हुआ. सोमवार को शेयर 1,355 रुपये पर खुला था और कारोबार के दौरान 1,357.15 रुपये के ऊपरी स्तर और 1,335.10 रुपये के निचले स्तर तक गया. कंपनी के शेयर का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 1,407 रुपये है.
109 साल पुराने फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FTCCI) ने नई नेतृत्व टीम का किया चुनाव
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित उद्योग संगठनों में शामिल फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FTCCI) ने कृष्ण कुमार माहेश्वरी (केके माहेश्वरी) को अध्यक्ष और श्रीनिवास गरिमेला को वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना है. बुधवार को हैदराबाद के रेड हिल्स स्थित FTCCI कार्यालय में आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग में सदस्यों ने दोनों पदाधिकारियों का चुनाव किया.
केके माहेश्वरी ने आर. रवि कुमार का स्थान लिया है और बुधवार से ही उन्होंने पदभार संभाल लिया. इससे पहले 2025-26 के दौरान केके माहेश्वरी सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और श्रीनिवास गरिमेला वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत थे.
दोनों नए पदाधिकारी कई वर्षों से FTCCI से जुड़े हुए हैं और विभिन्न भूमिकाओं में संगठन को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने नीति निर्माण, औद्योगिक विकास, व्यापार संवर्धन और उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. दोनों का कार्यकाल एक वर्ष का होगा.
चार दशक से अधिक का कारोबारी अनुभव रखते हैं केके माहेश्वरी
कृष्ण कुमार माहेश्वरी एक अनुभवी उद्यमी और वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं. उनके पास चार दशक से अधिक का कारोबारी अनुभव है. वह विविध वित्तीय सेवा कंपनी CIL Securities Limited के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. इसके अलावा वह CIL ग्रुप की कई कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं.
ग्रुप की प्रमुख कंपनी CIL Securities Limited बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया की सदस्य है. कंपनी रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट, मर्चेंट बैंकर और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट के रूप में भी सेवाएं प्रदान करती है.
माहेश्वरी ने कई उद्योग संगठनों में नेतृत्व की जिम्मेदारियां निभाई हैं. वह एसोसिएशन ऑफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) के पूर्व अध्यक्ष और निदेशक तथा डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं.
वह तेलंगाना स्टेट टेबल टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष और टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया की ऑल इंडिया वेटरन्स कमेटी के चेयरमैन भी हैं.
समावेशी विकास में विश्वास रखने वाले माहेश्वरी चिन्नीलाल जाजू चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की पहलों का समर्थन करते हैं. वह गिरिजन विकास केंद्र, वेदुरुनगरम के उपाध्यक्ष भी हैं, जो आदिवासी बच्चों के लिए शैक्षणिक संस्थान संचालित करता है.
श्रीनिवास गरिमेला बने वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी
नवनिर्वाचित वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीनिवास गरिमेला एक अनुभवी उद्यमी, उद्योगपति और रणनीतिक सलाहकार हैं. उन्हें मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन, लॉजिस्टिक्स और फूड टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में व्यापक अनुभव है.
वह HETC Foods Pvt. Ltd. में निदेशक और रणनीतिक सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं. यह कंपनी स्प्राउटिंग रिसर्च और फूड साइंस के क्षेत्र में काम करती है. इसके अलावा वह जापानी बहुराष्ट्रीय कंपनी Daifuku की भारतीय सहायक कंपनी Daifuku Intralogistics India Pvt. Ltd. के चेयरमैन हैं.
गरिमेला ने Vega Conveyors & Automation Ltd. की सह-स्थापना की थी, जो Daifuku द्वारा अधिग्रहण से पहले भारत की प्रमुख ऑटोमेशन और मटेरियल हैंडलिंग कंपनियों में शामिल हो गई थी.
वह एक दशक से अधिक समय से FTCCI से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और मैनेजिंग कमेटी सदस्य तथा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमेटी के चेयरमैन के रूप में योगदान दे चुके हैं. वह MSME, मैन्युफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा, उद्यमिता, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग के मजबूत समर्थक रहे हैं.
गरिमेला विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की अकादमिक परिषदों से भी जुड़े हैं और स्टार्टअप्स तथा युवा उद्यमियों को मार्गदर्शन देते हैं. वह उद्योग मंचों और शैक्षणिक संस्थानों में उद्यमिता, तकनीक अपनाने, नवाचार, सतत विकास और मेक इन इंडिया पहल पर नियमित रूप से विचार रखते हैं.
उद्योग और सरकार के बीच सहयोग मजबूत करने पर रहेगा फोकस: माहेश्वरी
चुनाव के बाद FTCCI अध्यक्ष केके माहेश्वरी ने कहा कि FTCCI ने एक सदी से अधिक समय में तेलंगाना और भारत के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
उन्होंने कहा, "मेरा फोकस उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करने, MSME क्षेत्र को समर्थन देने, निवेश को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और तेलंगाना के कारोबारों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने पर रहेगा. हम समावेशी और सतत विकास के लिए काम करते हुए उद्योग की मजबूत आवाज बने रहेंगे."
श्रीनिवास गरिमेला ने कहा कि भारत तकनीक, उद्यमिता और मैन्युफैक्चरिंग विकास के माध्यम से आर्थिक बदलाव के एक महत्वपूर्ण दौर में है.
उन्होंने कहा, "FTCCI हर आकार के व्यवसायों को समर्थन देना जारी रखेगा, नवाचार को बढ़ावा देगा, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करेगा, कौशल विकास पहलों को मजबूत करेगा और भविष्य के लिए तैयार उद्योगों के लिए अवसर पैदा करेगा. हम औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
नई नेतृत्व टीम से उम्मीद है कि वह व्यापार, उद्योग और आर्थिक विकास के लिए FTCCI की भूमिका को और मजबूत करेगी तथा उद्योग, सरकार और समाज के बीच एक भरोसेमंद सेतु के रूप में संगठन की स्थिति को आगे बढ़ाएगी.
पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, एएसजी समेत पैनल के सदस्यों ने बेंगलुरु में आयोजित गोलमेज चर्चा में 1951 के उस संशोधन पर विचार किया, जिसने कानूनों को न्यायिक समीक्षा से सुरक्षा प्रदान की थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के संविधान में पहला संशोधन किए जाने के 75 साल बाद, शनिवार को कर्नाटक के कुछ प्रमुख कानूनी विशेषज्ञ यहां एक असहज सवाल पर विचार करने के लिए एकत्र हुए: क्या संविधान में किए गए पहले ही बदलाव ने ऐसे कानूनों के लिए रास्ता खोल दिया, जिनका जवाब किसी अदालत के प्रति नहीं है?
संविधान (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 1951 के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित गोलमेज चर्चा का आयोजन जैन पीयू कॉलेज, वी.वी. पुरम में किया गया. इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े, कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.वी. चंद्रशेखर, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अरविंद कामथ और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीधर पोताराजू, के.जी. राघवन, उदय होला, जयना कोठारी और ए.पी.एस. अहलूवालिया समेत कई अन्य न्यायविद शामिल हुए.
ज्योत और गीतार्थ गंगा द्वारा जैन (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी) तथा एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ बैंगलोर के सहयोग से आयोजित यह चर्चा ‘वसुधैव कुटुम्बकम की ओर 5.0 कॉन्क्लेव सीरीज’ के पहले लीगल प्रीकर्सर सत्र के रूप में आयोजित की गई.
संविधान लागू होने के 16 महीने के भीतर लागू किए गए पहले संशोधन के जरिए अनुच्छेद 31A और 31B जोड़े गए और नौवीं अनुसूची बनाई गई, एक ऐसा संवैधानिक सुरक्षा कवच, जिसमें ऐसे कानून रखे जा सकते थे, जिन्हें न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रखा जा सके. पैनल के सदस्यों ने कहा कि यही व्यवस्था इस संशोधन की सबसे अधिक विवादित विरासत बनी हुई है.
वरिष्ठ अधिवक्ता उदय होला ने कहा, "एक बार जब आप किसी कानून को नौवीं अनुसूची में डाल देते हैं, तो अदालतें उसे छू नहीं सकतीं, भले ही वह अमान्य हो. यह पूरी तरह असंवैधानिक है. यही कारण है कि आई.आर. कोएल्हो मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई प्रावधान मूल संरचना का उल्लंघन करता है, तो अदालतों के पास अब भी उसकी समीक्षा करने का अधिकार है और मुझे लगता है कि यही सही दृष्टिकोण है."
कामथ ने इस समस्या को कानून और न्याय के बीच टूटन के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा, "कोई व्यवस्था पूरी तरह कानूनी हो सकती है, लेकिन वह न्यायसंगत होने में विफल हो सकती है. नौवीं अनुसूची ने ऐसा स्थान बनाया, जिसमें यदि कोई कानून डाल दिया जाए तो उसे खुद को समझाने की जरूरत नहीं होती. यह कानूनी है, लेकिन जवाबदेह नहीं है." संस्कृत व्याकरणाचार्य पाणिनि के सूत्र ध्रुवमपाये अपादानम् का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "किसी गतिशील वस्तु का वर्णन करने के लिए आपको ऐसी चीज की जरूरत होती है जो गतिहीन हो. किसी चीज के गति करने को निर्धारित करने के लिए एक स्थिर बिंदु आवश्यक होता है."
यह सत्र जैनाचार्य युगभूषणसूरी जी महाराज, जो तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी के 79वें उत्तराधिकारी हैं, के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया. उन्होंने 1951 की बहसों को व्यापक सभ्यतागत न्यायशास्त्र के संदर्भ में रखा. उन्होंने कहा, "शासन का उद्देश्य न्याय और सुरक्षा प्रदान करना है. इसलिए शासकीय प्राधिकरण को यह जिम्मेदारी निभाने के लिए शक्ति दी जाती है. पूर्ण शक्ति इस सिद्धांत का मूल रूप से विरोध करती है; यह अनैतिकता और अन्याय को बढ़ावा देती है."
चर्चाओं के साथ-साथ संविधान, प्रथम संशोधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक इंटरैक्टिव प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें "व्हाट इफ एआई वेयर द कॉन्स्टिट्यूशन" शीर्षक वाला प्रदर्शन भी शामिल था. इस प्रदर्शनी ने छात्रों और कानूनी पेशेवरों का काफी ध्यान आकर्षित किया.
यह श्रृंखला जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले ‘वसुधैव कुटुम्बकम की ओर 5.0 मेन कॉन्क्लेव, ध्रुव तत्वम्, टाइमलेस प्रिंसिपल्स’ की ओर अग्रसर है. अगला प्रीकर्सर सत्र आर्थिक क्षेत्र पर केंद्रित होगा, जो 8–9 अगस्त 2026 को आयोजित किया जाएगा. इसमें एस. गुरुमूर्ति, शौर्य डोभाल और सचिन चतुर्वेदी समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे.
परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूती देने के लिए दोनों कंपनियों ने किया MoU पर हस्ताक्षर, कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम से लेकर साइबर सिक्योरिटी समाधान तक विकसित किए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) ने दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां मौजूदा और आगामी परमाणु रिएक्टरों के लिए स्वदेशी तकनीकों का संयुक्त रूप से विकास करेंगी.
दोनों संस्थान परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अंतर्गत आते हैं. इस सहयोग का उद्देश्य भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ-साथ महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है.
स्वदेशी परमाणु तकनीकों के विकास पर जोर
इस साझेदारी के तहत परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए स्वदेशी कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन (C&I) सिस्टम, कंप्यूटर आधारित सिस्टम, न्यूक्लियर इंस्ट्रूमेंटेशन, ट्रेनिंग सिमुलेटर, साइबर सिक्योरिटी समाधान और अन्य उन्नत तकनीकों को विकसित किया जाएगा.
इसके अलावा, यह सहयोग मौजूदा परमाणु रिएक्टरों के लिए लंबे समय तक लाइफसाइकिल सपोर्ट उपलब्ध कराने, पुरानी हो रही तकनीकों के समाधान और परमाणु बेड़े में महत्वपूर्ण प्रणालियों के मानकीकरण में भी मदद करेगा.
आयात पर निर्भरता कम करने की पहल
NPCIL और ECIL की यह साझेदारी भारत के परमाणु बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगी.
स्वदेशी तकनीकों के विकास और उन्हें वर्तमान व भविष्य की परमाणु परियोजनाओं में लागू करने से भारत का घरेलू परमाणु तकनीकी इकोसिस्टम मजबूत होगा. यह पहल देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और एक मजबूत व सुरक्षित ऊर्जा व्यवस्था तैयार करने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है.
रिपोर्ट के अनुसार, ऑफलाइन UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए POS टर्मिनल बनाने वाली कंपनियों को NPCI से सर्टिफिकेशन लेना होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है. दरअसल, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ऐसी UPI सुविधा विकसित कर रहा है, जिससे इंटरनेट उपलब्ध न होने पर भी भुगतान किया जा सकेगा. नई व्यवस्था के तहत NFC (Near Field Communication) तकनीक की मदद से यूजर्स ऑफलाइन पॉइंट ऑफ सेल (POS) टर्मिनल पर फोन टैप कर ₹2,000 तक का भुगतान कर सकेंगे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NPCI इस साल प्रमुख POS टर्मिनल निर्माता कंपनियों के डिवाइस का सर्टिफिकेशन शुरू कर सकता है. इसके बाद व्यापारी ऑफलाइन UPI भुगतान स्वीकार कर सकेंगे. यह सुविधा खासतौर पर हवाई जहाज, भूमिगत मेट्रो और कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में उपयोगी होगी, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं होती.
कैसे करेगा काम?
इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए ग्राहकों को पहले इंटरनेट उपलब्ध होने पर अपने UPI Lite वॉलेट में रकम लोड करनी होगी. इसके बाद NFC-इनेबल्ड स्मार्टफोन को POS मशीन पर टैप करते ही भुगतान हो जाएगा. ऑफलाइन ट्रांजैक्शन के लिए UPI PIN दर्ज करने की भी जरूरत नहीं होगी. POS टर्मिनल भुगतान की जानकारी अपने सिस्टम में सुरक्षित रखेगा और जैसे ही नेटवर्क उपलब्ध होगा, ट्रांजैक्शन को वेरिफिकेशन के लिए सर्वर पर भेज देगा.
POS कंपनियों को लेना होगा NPCI का सर्टिफिकेशन
रिपोर्ट के अनुसार, ऑफलाइन UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए POS टर्मिनल बनाने वाली कंपनियों को NPCI से सर्टिफिकेशन लेना होगा. सर्टिफिकेशन मिलने के बाद कंपनियां अपने डिवाइस में इस फीचर को सक्षम कर सकेंगी. वहीं, बैंक और थर्ड-पार्टी UPI ऐप प्रदाता भी अपने ऐप में इस सुविधा को जोड़ने पर काम कर रहे हैं.
UPI Lite X का होगा विस्तार
NPCI ने सितंबर 2023 में UPI Lite X लॉन्च किया था, जिससे दो NFC-सक्षम स्मार्टफोन के बीच ऑफलाइन भुगतान संभव हुआ था. अब नए फीचर के जरिए इसी तकनीक को पहली बार POS टर्मिनलों तक विस्तारित किया जा रहा है. इससे व्यापारी भी बिना इंटरनेट के UPI भुगतान स्वीकार कर सकेंगे.
कार्ड पेमेंट का मजबूत विकल्प बनेगा UPI
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा कार्ड आधारित 'टैप-टू-पे' और UPI के बीच मौजूद अंतर को काफी हद तक खत्म कर देगी. एयरलाइंस और अन्य ऑफलाइन वातावरण में जहां कार्ड पेमेंट का इस्तेमाल होता है, वहां अब UPI भी एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेगा.
जून में रिकॉर्ड UPI ट्रांजैक्शन
NPCI के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में UPI के जरिए 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य 28.92 लाख करोड़ रुपये रहा. ऐसे में ऑफलाइन UPI पेमेंट की शुरुआत डिजिटल भुगतान को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.