माइक्रोसाइट के जरिए एलटीएफ का उद्देश्य लोगों के सपनों और आकांक्षाओं को सशक्त बनाना है. साथ ही उन्हें अपने लक्ष्यों की ओर पहला कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
देश की अग्रणी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) में से एक एलएंडटी फाइनेंस लिमिटेड (L&TF) ने एक AI संचालित माइक्रोसाइट लॉन्च की है. इसके जरिए लोगों को अपनी तस्वीरें यादगार बनाने का मौका मिल रहा है. एलटीएफ लोगों से जुड़ने के लिए AI-संचालित माइक्रोसाइट के जरिए एक अभियान चला रही है. ये अभियान 10 नवंबर तक चलाया जा रहा है, जिसमें आप अपनी सुंदर ड्रीम फोटो क्लिक करके उसे यादगार बना सकते हैं. साथ ही आपको पुरस्कार जीतने का मौका भी मिल रहा है.
ऐसे बनाएं अपनी तस्वीरों को यादगार
कंपनी द्वारा लॉन्च https://www.sapnowalidiwali.com/ इस माइक्रोसाइट पर जाकर आप अपनी पसंद का कोईभी फ्रेम चुनकर उसे अपनी तस्वीर के साथ अपलोड कर सकते हैं. इसमें आपको एआई जेनरेडिट फ्रेम जैसे आप अपने सपनों के घर, दोपहिया वाहन खरीदना, ड्रीम वेडिंग, छुट्टी की योजना बनाना, व्यवसाय का विस्तार करना आदि के जरिए अपनी AI-जनरेटेड फोटो प्राप्त कर सकते हैं. ये फोटो आपकी आकांक्षाओं को दर्शाएंगी. प्रत्येक उपयोगकर्ता दिवाली की शुभकामनाओं के साथ एक कस्टम छवि भी डाउनलोड कर करेंगे, जिसे वह दोस्तों और परिवार के साथ साझा भी कर सकते हैं.
10 नवंबर तक पुरस्कार जीतने का भी मौका
यह अभियान ब्रैंड के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव है. एलटीएफ ने ऑडियंस को प्रेरित करने और उनसे जुड़ने के लिए लाइफस्टाइल एवं एंटरटेनमेंट कैटेगरी के इन्फ्लुएंसर्स के साथ भी साझेदारी की है. इसके अलावा एलटीएफ एक प्रतियोगिता भी आयोजित कर रहा है, जिसमें ऑडियंस को रोमांचक पुरस्कार जीतने के अवसर के लिए इंस्टाग्राम (Instagram) पर अपनी एआई-जनरेटेड तस्वीरें पोस्ट करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है.
क्या है इसका उद्देश्य
इस पहल के जरिये एलटीएफ का उद्देश्य सपनों और आकांक्षाओं को सशक्त बनाने के साथ व्यक्तियों को अपने लक्ष्य की ओर पहला कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है. यह ऑडियंस को दिवाली की उत्सव भावना के साथ तालमेल बिठाते हुए एक इंटरैक्टिव और यादगार अनुभव भी देता है. ऑडियंस से जुड़ने के लिए एलटीएफ ने एआई (AI)संचालित एक माइक्रोसाइट www.sapnowalidiwali.com
एआई में बदलाव की क्षमता
अभियान के शुभारंभ अवसर पर एलटीएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ सुदीप्ता रॉय ने कहा कि एआई केवल एक प्रचलित शब्द नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली उपकरण है. इसमें बदलाव लाने की क्षमता है. एलटीएफ में हम अनुभवों को बेहतर और पर्सनलाइज्ड करने के लिए एआई की क्षमताओं का उपयोग कर रहे हैं. हमारी एआई-संचालित पहल #SapnoWaliDiwali के साथ, हम व्यक्तियों को इस बात के लिए सक्षम बना रहे हैं कि वे अपने सपनों की कल्पना करने और उन्हें हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ें. वहीं, एलटीएफ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर कविता जगतियानी ने कहा है कि इस अभियान के साथ हम इस उत्सव को एक ऐसे डिजिटल अनुभव के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं, जो जीवन में सपने लाता है. ऐसा कर हम उन सपनों को प्राप्त करने की उम्मीद को फिर से जगा रहे हैं, जिसमें एलटीएफ उनका भरोसेमंद साथी है.
एयरटेल ने बताया कि Q4 FY26 में उसका शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 33.5% घटकर ₹7,325 करोड़ रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹11,021.8 करोड़ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारती एयरटेल ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस दौरान कंपनी के नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर तेज गिरावट देखने को मिली, हालांकि रेवेन्यू और प्रति यूजर औसत आय (ARPU) में बढ़ोतरी ने कंपनी की ऑपरेशनल ग्रोथ को स्थिर बनाए रखा है.
Q4 में मुनाफा घटकर ₹7,325 करोड़
एयरटेल ने बताया कि Q4 FY26 में उसका शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 33.5% घटकर ₹7,325 करोड़ रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹11,021.8 करोड़ था. हालांकि तिमाही आधार पर स्थिति थोड़ी बेहतर रही. पिछली तिमाही के ₹6,630 करोड़ की तुलना में मुनाफे में 10.48% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
रेवेन्यू में 15.6% की मजबूत बढ़ोतरी
कंपनी की कुल आय (Revenue from Operations) में इस तिमाही के दौरान अच्छी वृद्धि देखने को मिली. रेवेन्यू 15.6% बढ़कर ₹55,383.2 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹47,876.2 करोड़ था. तिमाही आधार पर भी रेवेन्यू में 2.5% की बढ़त दर्ज की गई, जो स्थिर और लगातार ग्रोथ को दर्शाती है.
भारत कारोबार का प्रदर्शन बेहतर
एयरटेल के भारत बिजनेस सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट की आय सालाना आधार पर 7.7% बढ़कर ₹39,566 करोड़ हो गई. मोबाइल बिजनेस से होने वाली आय में 8.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसकी वजह बेहतर प्रति-यूजर कमाई और ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी रही.
ARPU में सुधार जारी
कंपनी के अनुसार, प्रति यूजर औसत आय (ARPU) में भी सुधार देखने को मिला है. Q4 में ARPU ₹257 रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹245 था. इस बढ़ोतरी का कारण टैरिफ सुधार और बेहतर सेवा गुणवत्ता को माना जा रहा है, जिससे प्रति ग्राहक कमाई बढ़ी है.
FY26 में मुनाफा घटा, रेवेन्यू में तेज उछाल
पूरे वित्त वर्ष FY26 के दौरान एयरटेल का शुद्ध मुनाफा 20.4% घटकर ₹26,695 करोड़ रह गया, जबकि FY25 में यह ₹33,556 करोड़ था. इसके विपरीत, कंपनी की कुल वार्षिक आय 21.9% बढ़कर ₹2,10,972.8 करोड़ तक पहुंच गई.
कंपनी की रणनीति और विस्तार
कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल के अनुसार, FY26 एयरटेल के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा. इस दौरान कंपनी ने 650 मिलियन से अधिक ग्राहकों का आंकड़ा पार किया. साथ ही, कंपनी ने टेलीकॉम-ग्रेड सॉवरेन क्लाउड लॉन्च किया, लेंडिंग बिजनेस शुरू करने के लिए RBI की मंजूरी हासिल की और अपने डेटा सेंटर नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया. कुल मिलाकर, एयरटेल के नतीजे बताते हैं कि कंपनी का मुनाफा दबाव में रहा, लेकिन मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ और ARPU में सुधार से इसके बिजनेस की बुनियादी मजबूती बनी हुई है.
यह लॉन्च प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यूरोप यात्रा और ओस्लो में होने वाले तीसरे इंडिया नॉर्डिक समिट से कुछ दिन पहले विशेष महत्व के साथ किया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डेनिश इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेशन (DIA),इंडो डेनिश बिजनेस काउंसिल (IDBC) और ट्रस्ट लीगल ने इंडो-नॉर्डिक क्षेत्र के लिए एक संरचित विवाद समाधान इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इंडिया–डेनमार्क आर्बिट्रेशन कॉरिडोर का औपचारिक शुभारंभ आज कोपेनहेगन स्थित भारतीय दूतावास में किया गया.
यह डेनिश इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेशन (DIA),इंडो डेनिश बिजनेस काउंसिल (IDBC) और ट्रस्ट लीगल (Trust Legal), एड्वोकेट्स एंड कंसल्टेंट्स (Advocates & Consultants) के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के माध्यम से स्थापित हुआ. यह कॉरिडोर एक विश्वसनीय और तटस्थ कानूनी ढांचा स्थापित करता है, जो संस्थागत विवाद समाधान व्यवस्था के माध्यम से भारतीय और यूरोपीय व्यवसायों को जोड़ता है.
6.1 अरब अमेरिकी डॉलर के बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार के साथ, भारत डेनिश व्यवसायों को इस विशेष आर्बिट्रेशन कॉरिडोर के माध्यम से विवाद समाधान के लिए आमंत्रित करता है. यह महंगी मुकदमेबाजी का एक तटस्थ और तेज विकल्प है, जिसे विशेष रूप से भारत-डेनमार्क व्यापार के लिए तैयार किया गया है.
यह लॉन्च प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यूरोप यात्रा और ओस्लो में होने वाले तीसरे इंडिया नॉर्डिक समिट से कुछ दिन पहले विशेष महत्व के साथ किया गया है. जनवरी 2026 में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बाद दो अरब लोगों का मुक्त व्यापार क्षेत्र बना है और भारत-नॉर्डिक द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 19 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है. ऐसे में यह कॉरिडोर इस स्तर के व्यापार के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा प्रदान करता है.
इस अवसर पर डेनमार्क में भारत के राजदूत एच.ई. मनीष प्रभात उपस्थित रहे, जो इस साझेदारी के प्रति भारत के कूटनीतिक समर्थन को दर्शाता है. भारत में डेनमार्क के सेवानिवृत्त राजदूत और IDBC चेयर एच.ई. फ्रेडी स्वाने, जिनकी भारत-डेनमार्क संबंधों के प्रति दीर्घकालिक व्यक्तिगत प्रतिबद्धता ने इस पहल की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, भी मौजूद रहे. साथ ही Society of Indian Law Firms (SILF) के अध्यक्ष और IDBC चेयर डॉ. ललित भसीन भी कार्यक्रम में शामिल हुए, जिनकी भारत में संस्थागत आर्बिट्रेशन के समर्थन में लंबी वकालत ने इस लॉन्च को गंभीरता और दृष्टि प्रदान की. DIA के चेयरमैन हॉकुन ज्युरहूस, राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा और DIA व साझेदार लॉ फर्मों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई.
“यह केवल एक दृष्टि नहीं है; यह दोनों countries के लिए एक अवसर है.”
- एच.ई. मनीष प्रभात, डेनमार्क में भारत के राजदूत
“यह MoU केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, यह एक एक्सप्रेसवे है. यह भारत के साथ संबंधों को साबित और मजबूत करता है.”
- एच.ई. फ्रेडी स्वाने, भारत में डेनमार्क के सेवानिवृत्त राजदूत और IDBC चेयर
“जब विवादों का निष्पक्ष समाधान होता है, तब व्यापार फलता-फूलता है. यह कॉरिडोर कोपेनहेगन और दिल्ली को पहले से कहीं अधिक करीब लाता है, क्योंकि भारत-नॉर्डिक व्यापार के 19 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर एक मजबूत विवाद समाधान तंत्र अब विलासिता नहीं बल्कि आवश्यकता है.”
- डॉ. ललित भसीन, अध्यक्ष SILF, IDBC चेयर
“यह कॉरिडोर कई प्रतिबद्ध व्यक्तियों और संस्थानों के वर्षों के शांत प्रयासों को दर्शाता है. हमें गर्व है कि हमने इस पहल के भारतीय कानूनी एंकर के रूप में कार्य किया और हम एच.ई. फ्रेडी स्वाने, एच.ई. मनीष प्रभात, डॉ. ललित भसीन और अपने सभी साझेदारों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिनके विश्वास ने इसे वास्तविकता बनाया.”
- सुधीर मिश्रा, मैनेजिंग पार्टनर एवं संस्थापक, ट्रस्ट लीगल
इस MoU के तहत, सभी पक्ष मिलकर भारत-डेनमार्क लेनदेन के लिए मॉडल आर्बिट्रेशन क्लॉज और ADR नीतियां विकसित करेंगे, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और आर्बिट्रेटर प्रशिक्षण आयोजित करेंगे, तथा स्टार्टअप्स, SMEs और सीमा-पार निवेशकों के लिए रिसर्च और दिशा-निर्देश प्रकाशित करेंगे. वैश्विक आर्बिट्रेशन की संरचना को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है और भारत व डेनमार्क इसके उपकरण अपने हाथ में लिए हुए हैं.
बुधवार को BSE सेंसेक्स 49.74 अंक यानी 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ 74,608.98 पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी 33.05 अंक यानी 0.14 फीसदी मजबूत होकर 23,412.60 के स्तर पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बुधवार को घरेलू शेयर बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट के बाद राहत की सांस ली. दिनभर के उतार-चढ़ाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी हल्की बढ़त के साथ बंद हुए, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये का ऑल टाइम लो निवेशकों की चिंता बढ़ाता रहा. अब आज यानी 14 मई को बाजार की नजर टाटा मोटर्स, भारती एयरटेल, DLF, ऑयल इंडिया और TVS Holdings समेत कई कंपनियों के तिमाही नतीजों और बड़े अपडेट पर रहेगी, जिससे बाजार में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
सेंसेक्स-निफ्टी ने संभाली बढ़त
बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स कारोबार के दौरान 75,191.57 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि एक समय यह 74,134.48 तक फिसल गया था. अंत में सेंसेक्स 49.74 अंक यानी 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ 74,608.98 पर बंद हुआ. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 33.05 अंक यानी 0.14 फीसदी मजबूत होकर 23,412.60 के स्तर पर बंद हुआ.
इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 16 गिरावट के साथ बंद हुए. महिंद्रा एंड महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, सन फार्मा, टेक महिंद्रा, पावरग्रिड और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयरों में दबाव रहा. दूसरी ओर एशियन पेंट्स ने सबसे ज्यादा 4.37 फीसदी की तेजी दर्ज की. इसके अलावा टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, एलएंडटी, आईटीसी और ट्रेंट के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली.
जूलरी शेयरों में लगातार तीसरे दिन गिरावट
जूलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा. सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किए जाने का असर इस सेक्टर पर साफ दिखाई दिया. कल्याण जूलर्स, टाइटन और सेन्को गोल्ड जैसे शेयरों में 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई. केवल तीन दिनों में निवेशकों को करीब 60,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार में गुरुवार 14 मई को कई बड़े स्टॉक्स में हलचल देखने को मिल सकती है. टाटा मोटर्स, भारती एयरटेल, DLF, ऑयल इंडिया और TVS Holdings समेत कई कंपनियों ने अपने तिमाही नतीजे जारी किए हैं, जबकि कुछ कंपनियों ने डिविडेंड और नए बिजनेस अपडेट का ऐलान किया है. टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल कारोबार का मुनाफा 33.8 फीसदी बढ़ा और कंपनी ने 4 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड घोषित किया. भारती एयरटेल का कंसोलिडेटेड मुनाफा 7,325 करोड़ रुपये पहुंच गया. भारती हेक्साकॉम ने 18 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान किया, जबकि DLF का मुनाफा लगभग स्थिर रहा लेकिन रेवेन्यू और मार्जिन में गिरावट दर्ज की गई. ल्यूपिन को US FDA से Famotidine Injection के लिए मंजूरी मिली है, जिससे स्टॉक में एक्शन देखने को मिल सकता है. ऑयल इंडिया का मुनाफा दोगुने से ज्यादा बढ़ा, वहीं क्रॉम्पटन ग्रीव्स को चौथी तिमाही में भारी घाटा हुआ. मैन इंफ्राकंस्ट्रक्शन के कमजोर नतीजों ने निवेशकों को निराश किया, जबकि NBCC इंडिया को 131 करोड़ रुपये का नया वर्क ऑर्डर मिला है. TVS Holdings, Zaggle Prepaid Ocean Services और ZF Commercial Vehicle Control Systems India ने मजबूत नतीजे पेश किए हैं, जबकि Kaynes Technology का मुनाफा घटा लेकिन आय में अच्छी बढ़त रही. ऐसे में इन सभी स्टॉक्स पर ट्रेडर्स और निवेशकों की खास नजर रहने वाली है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
भारत से दुनिया के लिए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर फोकस, साल के अंत तक तैयार हो सकता है नया सेंटर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
उबर (Uber) ने भारत में अपना पहला डेटा सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है. कंपनी यह डेटा सेंटर अडानी ग्रुप (Adani Group) के साथ साझेदारी में बनाएगी. उबर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दारा खोसरोशाही ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी.
गौतम अडानी से मुलाकात के बाद हुआ ऐलान
दारा खोसरोशाही ने गौतम अडानी से मुलाकात के बाद इस नई साझेदारी का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि यह डेटा सेंटर उबर की टेक्नोलॉजी के परीक्षण और तैनाती के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी का लक्ष्य इस साल के अंत तक इसे तैयार करना है. खोसरोशाही ने अपने पोस्ट में लिखा, भारत तेजी से उबर के लिए एक बड़े इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है. इसी को देखते हुए हम अडानी ग्रुप के साथ मिलकर देश में अपना पहला डेटा सेंटर स्थापित कर रहे हैं, जहां उबर की टेक्नोलॉजी का परीक्षण और तैनाती की जाएगी. इस साल के अंत तक तैयार होने वाला यह निवेश हमें बड़े स्तर पर काम करने में मदद करेगा, भारत से, दुनिया के लिए.
भारत में टेक और ऑपरेशन विस्तार पर Uber का जोर
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब उबर भारत में अपने टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. भारत दौरे के दौरान उबर सीईओ ने कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की है. सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को दारा खोसरोशाही ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहम नायडू से भी मुलाकात की.
मुंबई और बेंगलुरु दौरे का भी कार्यक्रम
भारत यात्रा के दौरान उबर सीईओ मुंबई में राज्य सरकार के अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे. इसके बाद वह बेंगलुरु स्थित उबर के टेक्नोलॉजी सेंटर का दौरा करेंगे, जो कंपनी के इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट का बड़ा केंद्र माना जाता है.
Uber के लिए क्यों अहम है भारत?
भारत उबर के लिए सिर्फ बड़ा राइड-हेलिंग बाजार ही नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग टैलेंट का भी महत्वपूर्ण केंद्र है. देश में बड़ी संख्या में ड्राइवर पार्टनर्स और यूजर्स होने के साथ-साथ Uber यहां अपने टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट नेटवर्क को भी मजबूत कर रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी ग्रुप के साथ डेटा सेंटर साझेदारी Uber की भारत में लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है और इससे देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा टेक निवेश को भी बढ़ावा मिल सकता है.
बजट दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में RBI, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से डिविडेंड और अधिशेष के रूप में करीब 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार को चालू वित्त वर्ष में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड मिलने की संभावना है. मजबूत बैंकिंग प्रदर्शन, रिकॉर्ड मुनाफे और बढ़ते गैर-कर राजस्व के बीच यह राशि सरकार के लिए ऐसे समय में राहत बन सकती है, जब पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का दबाव बढ़ रहा है. माना जा रहा है कि RBI का यह अधिशेष ट्रांसफर सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ विकास योजनाओं और राजकोषीय प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाएगा.
रिकॉर्ड डिविडेंड देने की तैयारी में RBI
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरबीआईI इस महीने होने वाली अपनी केंद्रीय बोर्ड बैठक में सरकार को दिए जाने वाले डिविडेंड की अंतिम राशि पर फैसला कर सकता है. पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में आरबीआई ने केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था. यह उससे पिछले वर्ष दिए गए 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में करीब 27 प्रतिशत अधिक था. अब उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त वर्ष 2026-27 में यह राशि और अधिक हो सकती है, जिससे सरकार को अतिरिक्त वित्तीय मजबूती मिलेगी.
इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क के तहत तय होता है अधिशेष
आरबीआई द्वारा सरकार को दिया जाने वाला अधिशेष केंद्रीय बैंक के संशोधित इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क (ECF) के आधार पर तय किया जाता है. इस ढांचे के तहत आकस्मिक जोखिम बफर (CRB) को आरबीआई की बैलेंस शीट के 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना अनिवार्य है. इसी व्यवस्था के अनुसार केंद्रीय बैंक अपनी आय, निवेश और जोखिम प्रबंधन का आकलन करने के बाद सरकार को अधिशेष राशि ट्रांसफर करता है.
सरकार को ₹3.16 लाख करोड़ मिलने का अनुमान
बजट दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में RBI, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से डिविडेंड और अधिशेष के रूप में करीब 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. यह मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 3.75 प्रतिशत अधिक है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह अनुमान सतर्कता के साथ लगाया गया है और वास्तविक राशि बजट अनुमान से ज्यादा हो सकती है.
PSU बैंकों ने दर्ज किया रिकॉर्ड मुनाफा
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के शानदार वित्तीय प्रदर्शन ने सरकार की उम्मीदों को और मजबूत किया है. बेहतर एसेट क्वालिटी, तेज क्रेडिट ग्रोथ और ब्याज आय में बढ़ोतरी के चलते FY26 में सरकारी बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ा सुधार देखने को मिला.
सरकारी बैंकों का कुल ऑपरेटिंग प्रॉफिट बढ़कर 3.21 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गया. लगातार चौथे वर्ष PSBs ने सामूहिक रूप से मुनाफा दर्ज किया है.
गैर-कर राजस्व पर सरकार की नजर
सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य निवेशों से भी वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 75,000 करोड़ रुपये के डिविडेंड की उम्मीद है. चालू वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 71,000 करोड़ रुपये रहा था. आरबीआई का अधिशेष ट्रांसफर और विभिन्न संस्थानों से मिलने वाला डिविडेंड सरकार के गैर-कर राजस्व का अहम हिस्सा होता है. अगले वित्त वर्ष में सरकार को कुल गैर-कर राजस्व के रूप में 6.66 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है.
वहीं, टैक्स रेवेन्यू 28.66 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 7.18 प्रतिशत अधिक है.
पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ेगी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच RBI से मिलने वाला बड़ा डिविडेंड सरकार के लिए वित्तीय सुरक्षा कवच साबित हो सकता है. इससे सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने और विकास खर्च जारी रखने में मदद मिलेगी.
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि ओमान की टीम के साथ हुई हालिया बैठक काफी सकारात्मक रही है और संभावना है कि भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता जून की शुरुआत से प्रभावी हो जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और ओमान के बीच व्यापारिक रिश्ते जल्द ही एक नए चरण में प्रवेश कर सकते हैं. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA 1 जून 2026 से लागू हो सकता है. इस समझौते के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में बड़ी राहत मिलेगी, जबकि दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है.
1 जून से लागू हो सकता है भारत-ओमान समझौता
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि ओमान की टीम के साथ हुई हालिया बैठक काफी सकारात्मक रही है और संभावना है कि भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता जून की शुरुआत से प्रभावी हो जाएगा. यह समझौता दिसंबर 2025 में हस्ताक्षरित किया गया था और अब इसके क्रियान्वयन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं.
गोयल के अनुसार, ओमान का प्रतिनिधिमंडल इस समय भारत दौरे पर है, जहां दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को और मजबूत करने के विकल्पों पर चर्चा की जा रही है.
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस CEPA समझौते के तहत भारत के लगभग 98 प्रतिशत निर्यात को ओमान में शुल्क मुक्त पहुंच मिलने की संभावना है. इसमें वस्त्र, कृषि उत्पाद, चमड़ा और कई अन्य प्रमुख सेक्टर शामिल हैं. इससे भारतीय कंपनियों को ओमान के बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात लागत में कमी आएगी.
वहीं दूसरी ओर भारत भी ओमान से आने वाले कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा. इनमें खजूर, संगमरमर और पेट्रोकेमिकल उत्पाद प्रमुख रूप से शामिल हैं.
व्यापार के साथ निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगा. भारत और ओमान के बीच लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत हो सकती है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक मौजूदगी को भी इससे नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
चिली के साथ भी आगे बढ़ रही बातचीत
पीयूष गोयल ने चिली के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत और चिली के बीच आर्थिक आकार और अवसरों में अंतर होने के कारण कुछ चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन दोनों देश नए और व्यावहारिक समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.
गोयल ने संकेत दिए कि यदि महत्वपूर्ण खनिजों और खनन रियायतों को लेकर सकारात्मक सहमति बनती है, तो चिली के साथ भी व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है.
भारत के लिए क्यों अहम है चिली समझौता
भारत और चिली पहले से ही 2006 से एक तरजीही व्यापार समझौते के तहत जुड़े हुए हैं. अब दोनों देश इसे विस्तार देकर व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं.
इस प्रस्तावित समझौते में डिजिटल सेवाएं, निवेश सहयोग, MSME सेक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है. चिली दुनिया के सबसे बड़े लिथियम भंडार वाले देशों में गिना जाता है और तांबे का प्रमुख उत्पादक भी है. ऐसे में यह समझौता भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा सेक्टर के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का कहना है कि ओमान और चिली जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं. इन समझौतों के जरिए भारत नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और निर्यात आधारित विकास को गति देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है. एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका असर हवाई किराए पर भी पड़ने लगा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में अप्रैल 2026 के दौरान खुदरा महंगाई दर मामूली बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है. यह लगातार चौथा महीना है जब मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. Elara Securities की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य पदार्थों, शिक्षा और सेवाओं की बढ़ती लागत के कारण महंगाई पर दबाव बढ़ने लगा है.
मार्च के मुकाबले अप्रैल में बढ़ी महंगाई
मार्च 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति दर 3.4 प्रतिशत थी, जो अप्रैल में बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि वाणिज्यिक एलपीजी कीमतों में वृद्धि का असर रेस्तरां और होटल सेवाओं पर दिखाई देने लगा है. हालांकि कोर इंफ्लेशन अप्रैल में 3.4 प्रतिशत पर स्थिर रहा, जिससे संकेत मिलता है कि मांग आधारित दबाव फिलहाल नियंत्रित हैं.
खाद्य मुद्रास्फीति में फिर तेजी
अप्रैल में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई, जबकि मार्च में यह 3.7 प्रतिशत थी. खाद्य तेल, फल, मछली और प्रोसेस्ड फूड की कीमतों में बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण रही. दूसरी ओर सब्जियों, दालों और कंद वाली फसलों की कीमतों में मासिक आधार पर गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान और मौसमी कारणों से आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा ऊर्जा संकट
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है. एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका असर हवाई किराए पर भी पड़ने लगा है.
इसी के साथ रेस्तरां की कीमतों में अप्रैल में 4.2 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मार्च में यह 2.88 प्रतिशत थी. इसका कारण एलपीजी की ऊंची कीमतें और फूड डिलीवरी कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए प्लेटफॉर्म शुल्क बताए गए हैं.
पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा
Elara Securities ने चेतावनी दी है कि यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो महंगाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार ईंधन कीमतों में 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि से हेडलाइन इंफ्लेशन में लगभग 47 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है. सप्लाई चेन और सेवाओं पर इसके दूसरे चरण के प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं.
एल नीनो का भी मंडरा रहा खतरा
रिपोर्ट में संभावित एल नीनो मौसम पैटर्न को भी बड़ा जोखिम बताया गया है. इससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और खाद्य कीमतों में तेजी आ सकती है. सप्लाई चेन बाधाओं और बढ़ती उत्पादन लागत के साथ मिलकर यह स्थिति आने वाली तिमाहियों में महंगाई के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है.
आरबीआई फिलहाल रख सकता है सतर्क रुख
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल ब्याज दरों पर सतर्क रुख बनाए रख सकता है. केंद्रीय बैंक ऊर्जा लागत, रुपये की कमजोरी और बढ़ती इनपुट लागत के असर पर करीबी नजर रखेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक महंगाई लगातार 6 प्रतिशत से ऊपर नहीं रहती, तब तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम है.
वित्त वर्ष 2027 में बढ़ सकते हैं जोखिम
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 4.8 से 4.9 प्रतिशत के बीच बरकरार रखा गया है. हालांकि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई जोखिम और बढ़ सकते हैं.
रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार फिलहाल महंगाई नियंत्रण में दिखाई दे रही है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु संबंधी जोखिम आने वाले महीनों में मूल्य स्थिरता और नीतिगत लचीलेपन की बड़ी परीक्षा ले सकते हैं.
IMD के अनुसार नया AI मॉडल हर बुधवार को मॉनसून की प्रगति और सक्रियता का अनुमान जारी करेगा. यह मॉडल मौजूदा संख्यात्मक मौसम मॉडल और AI तकनीक को जोड़कर तैयार किया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में बदलते मौसम और जलवायु संकट के बीच अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI मौसम पूर्वानुमान को और सटीक बनाने में अहम भूमिका निभाने जा रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश का पहला AI आधारित मॉनसून अग्रिम पूर्वानुमान मॉडल लॉन्च किया है. इस नई तकनीक के जरिए अब ब्लॉक स्तर तक चार सप्ताह पहले मॉनसून की गतिविधियों का अनुमान लगाया जा सकेगा. इससे खास तौर पर किसानों को फसल योजना बनाने और मौसम जोखिम कम करने में मदद मिलेगी.
हर बुधवार जारी होगा मॉनसून अपडेट
IMD के अनुसार नया AI मॉडल हर बुधवार को मॉनसून की प्रगति और सक्रियता का अनुमान जारी करेगा. यह मॉडल मौजूदा संख्यात्मक मौसम मॉडल और AI तकनीक को जोड़कर तैयार किया गया है. मौसम विभाग का कहना है कि पूर्वानुमान में लगभग चार दिनों तक का विचलन संभव रहेगा, लेकिन इसके बावजूद यह पारंपरिक मॉडलों की तुलना में अधिक उपयोगी और प्रभावी साबित हो सकता है.
उत्तर प्रदेश के लिए शुरू हुआ हाई-रिजॉल्यूशन रेनफॉल मॉडल
मौसम विभाग ने इसके साथ ही राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) द्वारा विकसित एक पायलट प्रोजेक्ट भी लॉन्च किया है. यह परियोजना AI आधारित उन्नत प्रणाली के जरिए उत्तर प्रदेश में एक किलोमीटर ग्रिड तक अत्यधिक सटीक वर्षा पूर्वानुमान देने में सक्षम होगी. इससे छोटी से छोटी भौगोलिक इकाई तक बारिश के पैटर्न को समझना आसान होगा.
जलवायु परिवर्तन के दौर में अहम पहल
विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का अनुमान लगाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. ऐसे में AI आधारित यह पहल मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को आधुनिक और अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. खासकर सूखा, बाढ़ और अनियमित बारिश जैसी स्थितियों से निपटने में यह तकनीक मददगार हो सकती है.
कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर तैयार हुआ सिस्टम
IMD ने स्पष्ट किया कि इन दोनों AI मॉडल को कृषि मंत्रालय के मार्गदर्शन में विकसित किया गया है. किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए इन्हें कृषि मंत्रालय के API और एग्रीस्टैक प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा. इसका उद्देश्य देशभर में प्रभाव आधारित और अति-स्थानीय मौसम सेवाएं उपलब्ध कराना है.
15 राज्यों के 3196 ब्लॉकों तक पहुंचेगी सुविधा
पृथ्वी विज्ञान मंत्री Jitendra Singh ने बताया कि यह ब्लॉक स्तर पूर्वानुमान प्रणाली फिलहाल 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 3196 ब्लॉकों तक पहुंचेगी. इनमें अधिकांश क्षेत्र वर्षा आधारित कृषि वाले हैं, जहां समय पर मौसम जानकारी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.
सामान्य से कमजोर रह सकता है 2026 का मॉनसून
इन मॉडलों की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया गया है. हालांकि IMD ने साफ किया है कि नए AI मॉडल और इस अनुमान के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है.
सरकार ने बुधवार को 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी के साथ 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (Agriculture Infrastructure and Development Cess-AIDC) लगाया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और लगातार कमजोर होते रुपये के बीच केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने बुधवार को गोल्ड और सिल्वर पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है, जो पहले 6 प्रतिशत थी. सरकार ने 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी के साथ 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (Agriculture Infrastructure and Development Cess-AIDC) लगाया है. माना जा रहा है कि इस फैसले का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में ज्वेलरी खरीदना और महंगा हो सकता है.
रुपये पर दबाव और बढ़ते आयात बिल के बीच सरकार की सख्ती
सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद सोना-चांदी के आयात को कम करना, व्यापार घाटा नियंत्रित करना और रुपये को मजबूती देना है. हाल के दिनों में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.75 तक पहुंच गया था. ऐसे में सरकार विदेशी मुद्रा की बचत को लेकर लगातार कदम उठा रही है.
पीएम मोदी की अपील के बाद आया बड़ा फैसला
यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की सलाह दी थी. प्रधानमंत्री ने कहा था कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देश को विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत है. हालांकि, कुछ दिन पहले तक सरकार की ओर से यह संकेत दिए जा रहे थे कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है, लेकिन अब अचानक लिया गया यह फैसला बाजार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना आयातक देश है, जबकि चांदी की खपत में दुनिया में शीर्ष स्थानों पर आता है. देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में ड्यूटी बढ़ने से सोना और चांदी की मांग पर असर पड़ सकता है, खासकर तब जब दोनों धातुओं की कीमतें पहले से ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर बनी हुई हैं.
गोल्ड ETF में रिकॉर्ड निवेश
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और सोने की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों का रुझान तेजी से गोल्ड निवेश की ओर बढ़ा है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, मार्च तिमाही में भारत के गोल्ड ETF में निवेश 186 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 20 मीट्रिक टन तक पहुंच गया. इससे साफ है कि निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं.
पहले भी आयात पर सख्ती कर चुकी है सरकार
सरकार हाल के हफ्तों में सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए लगातार कदम उठा रही थी. इससे पहले सोना और चांदी के आयात पर 3 प्रतिशत IGST लगाए जाने के बाद कई बैंकों ने करीब एक महीने तक आयात रोक दिया था. इसका असर यह हुआ कि अप्रैल में सोने का आयात लगभग 30 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.
ज्वेलरी बाजार और ग्राहकों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में और तेजी आ सकती है. इससे शादी-ब्याह के सीजन और ज्वेलरी कारोबार पर असर पड़ सकता है. साथ ही निवेशकों के लिए गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्पों की मांग भी बढ़ सकती है.
मंगलवार को BSE सेंसेक्स 1,456.04 अंक गिरकर 74,559.24 अंक पर बंद हुआ. वहीं, BSE का निफ्टी 436.30 अंक टूटकर 23,379.55 अंक पर आ गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और रुपये में रिकॉर्ड गिरावट के चलते मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मौजूदा हालात को कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ा वैश्विक संकट बताए जाने के बाद बाजार का सेंटिमेंट और कमजोर पड़ गया. सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए. अब आज यानी बुधवार के कारोबार में निवेशकों की नजर ग्लोबल मार्केट संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और उन शेयरों पर रहेगी जिनमें तिमाही नतीजों, बड़े ऑर्डर और ब्लॉक डील के चलते बड़ा एक्शन देखने को मिल सकता है.
मार्केट कैप में 10 लाख करोड़ रुपये की गिरावट
शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को भी जबरदस्त नुकसान हुआ. मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1,456.04 अंक यानी 1.92 प्रतिशत गिरकर 74,559.24 अंक पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का निफ्टी 436.30 अंक यानी 1.83 प्रतिशत टूटकर 23,379.55 अंक पर आ गया. पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल 2,700 अंक से अधिक लुढ़क चुका है.
बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 10 लाख करोड़ रुपये घटकर 458 लाख करोड़ रुपये रह गया. इसी दौरान भारतीय रुपया भी दबाव में दिखाई दिया. डॉलर के मुकाबले रुपया 95.62 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक तनाव के कारण रुपये पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
आईटी और फाइनेंशियल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 गिरावट के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा गिरावट Tech Mahindra में दर्ज की गई, जिसके शेयर 4.40 प्रतिशत टूट गए. इसके अलावा Adani Ports, HCLTech, Tata Consultancy Services, Titan Company, Infosys, Bharat Electronics Limited, Trent, Bajaj Finance, Bajaj Finserv और UltraTech Cement के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली. हालांकि, कुछ चुनिंदा शेयरों ने बाजार को थोड़ी राहत दी. NTPC, State Bank of India और Bharti Airtel के शेयर मामूली बढ़त के साथ बंद हुए.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली
ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी साफ दिखाई दी. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 2.54 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 3.17 प्रतिशत तक टूट गए. सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया सेक्टर में भी दबाव बना रहा. दूसरी ओर मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. सोमवार को एफआईआई ने 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे. विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 20 अरब डॉलर से अधिक की निकासी कर चुके हैं. इसका सीधा असर रुपये और घरेलू बाजार दोनों पर दिखाई दे रहा है. इस साल अब तक भारतीय रुपया करीब 6.5 प्रतिशत कमजोर हो चुका है और एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, बुधवार 13 मई को तिमाही नतीजों, बड़े ऑर्डर, ब्लॉक डील, फंड जुटाने और डिविडेंड जैसे अहम अपडेट्स के चलते कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार हलचल देखने को मिल सकती है. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Dixon Technologies ने उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे पेश किए हैं, जबकि Vodafone Idea का बोर्ड 16 मई को फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करेगा. वहीं Tata Power का चौथी तिमाही मुनाफा घटा है, लेकिन कंपनी ने 2.50 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश की है. रेलवे सेक्टर की Texmaco Rail and Engineering को साउथ अफ्रीका से 4045 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिला है, जबकि Rail Vikas Nigam Limited को South East Central Railway से 221 करोड़ रुपये का EPC कॉन्ट्रैक्ट मिला है. फार्मा सेक्टर में Pfizer, Neuland Laboratories और Dr. Reddy's Laboratories के नतीजे चर्चा में हैं. इसके अलावा Berger Paints India, Nazara Technologies, Kalpataru Projects International और Torrent Power के शेयर भी नतीजों और कारोबार अपडेट्स के चलते निवेशकों की नजर में रहेंगे. वहीं Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में 5326 करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील ने भी बाजार का ध्यान खींचा है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)