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जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और कर्नाटक के बाद अब Jharkhand में मिला लिथियम का गढ़!
देश भर में मौजूद कुल कोयले का 32% हिस्सा भी झारखंड में ही मौजूद है और अब झारखंड में Lithium रिजर्व पाए गए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
आपको याद होगा कुछ ही महीनों पहले जम्मू एवं कश्मीर, राजस्थान और कर्नाटक में लिथियम (Lithium) का भंडार मिला था. अब फिलहाल झारखंड (Jharkhand) को लेकर काफी बड़ी खबर सामने आ रही है. दावा किया जा रहा है कि जम्मू एवं कश्मीर, राजस्थान और कर्नाटक के बाद अब झारखंड में भी लिथियम के भंडार मिले हैं.
झारखंड और मिनरल्स
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों से घिरे इस पूर्वी राज्य में पहले से ही यूरेनियम (Uranium), माइका (Mica), बॉक्साईट (Bauxite), ग्रेनाईट (Granite), गोल्ड (Gold), सिल्वर (Silver), ग्रेफाईट (Graphite), मैगनेटाईट (Magnetite), डोलोमाइट (Dolomite), फायरक्ले (Fireclay), क्वार्ट्ज (Quartz), आयरन (Iron) और कॉपर (Copper) जैसे खनिजों के भंडार मिल चुके हैं. इतना ही नहीं देश भर में मौजूद कुल कोयले का 32% हिस्सा इस राज्य में ही मौजूद है.
लिथियम का खेल और चीन
लिथियम (Lithium) को ‘सफेद सोने’ (White Gold) के नाम से भी जाना जाता है. दुनिया भर में इस वक्त इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर जोर दिया जा रहा है और इसीलिए झारखंड (Jharkhand) में मिले इस लिथियम भंडार की अहमियत कहीं ज्यादा बढ़ जाती है. आपको बता दें कि दुनिया भर में केवल कुछ ही देश हैं जिनमें लिथियम के भंडार पाए गए हैं. लिथियम के खनन और इसकी प्रोसेसिंग को लेकर चीन सबसे आगे नजर आता है जबकि चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम रिजर्व मौजूद नहीं है.
भारत के लक्ष्य और Lithium
भारत का लक्ष्य है कि साल 2030 तक नए वाहनों की बिक्री में से 30% हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का हो. इसके साथ ही भारत का लक्ष्य है कि नॉन-फॉसिल फ्यूल से पैदा होने वाली ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाकर 500 गीगावाट कर दिया जाए. लेकिन फिलहाल भारत लिथियम (Lithium) की अपनी जरूरत के लिए अपने पड़ोसी देशों पर निर्भर है. भारतीय लिथियम बैटरी मार्केट भी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है और ऐसे में देश को लिथियम के भंडारों की जरूरत पड़ेगी. इन सभी वजहों से भी झारखंड में मिले इस लिथियम भंडार का महत्त्व और ज्यादा बढ़ जाता है.
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