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Kotak Mahindra Bank इकट्ठा करेगा 7000 करोड़ रुपए, जानिए क्या है पूरा मामला?

एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया गया है कि बैंक का उद्देश्य वित्त वर्ष 24 के दौरान 7,000 करोड़ रुपए जितनी राशि इकट्ठा करना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

दुनिया भर में इस वक्त अनिश्चितताएं बनी हुई हैं और पश्चिमी देशों में बैंकिंग संकट की वजह से ग्लोबल इकॉनमी में स्लोडाउन भी देखने को मिल रहा है. इसके साथ ही दुनिया के सभी देशों को इसी प्रकार के संकट का डर भी सताने लगा है लेकिन भारतीय इकॉनमी काफी स्थिर नजर आ रही है और भारतीय बैंक भी इस प्रकार के संकटों से सुरक्षित दिख रहे हैं. इसी बीच प्राइवेट बैंक कोटक महिंद्रा (Kotak Mahindra Bank) ने एक भारी-भरकम राशि इकट्ठा करने की घोषणा कर दी है. 

बैंक इस माध्यम से इकट्ठा करेगा पैसे
कोटक महिंद्रा बैंक, प्राइवेट क्षेत्र का एक बैंक है और हाल ही में इस बैंक ने प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर असुरक्षित, वापस लिए जा सकने वाले, NCDs (नॉन कनवर्टिबल डिबेंचर्स) को जारी करने की अनुमति दे दी है. एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया गया है कि बैंक का उद्देश्य वित्त वर्ष 24 के दौरान 7,000 करोड़ रुपए जितनी राशि इकट्ठा करना है. इसके साथ ही फाइलिंग में यह भी बताया गया है कि इस विषय में बैंक के बोर्ड मेंबर्स की शेयर ट्रान्सफर और अन्य मामलों की देख-रेख करने वाली कमेटी को आतंरिक रूप से, जारी किए जाने वाले इन NCDs के स्ट्रक्चर, शर्तों और नियमों को तय करने की अनुमति दे दी गई है.

क्या होती हैं NCDs
NCD एक तरह का डेट इंस्ट्रूमेंट होती है जिसे कंपनियों द्वारा पब्लिक या फिर संस्थागत इन्वेस्टर्स से फंड इकट्ठा करने के लिए जारी किया जाता है. यह एक ‘फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट’ है जिसका मैच्योरिटी पीरियड भी तय होता है और इसमें पहले से ही तय किया गया कूपन या फिर इंटरेस्ट रेट भी शामिल होते हैं. कनवर्टिबल डिबेंचर्स के विपरीत NCDs को जारी किए जाने वाली कंपनी के शेयर्स में नहीं बदला जा सकता और अपनी पूरी अवधि के दौरान यह सिर्फ एक डेट इंस्ट्रूमेंट बनकर ही रहती हैं. NCD का इस्तेमाल करके कंपनियां इन्वेस्टर्स से लॉन्ग-टर्म कैपिटल इकट्ठा करती हैं और तय समय पर ब्याज के भुगतान के साथ-साथ मूल रकम की कुल वापसी का वादा करती हैं. 

कहां जारी होती हैं NCDs?
वह इन्वेस्टर्स जो NCDs खरीदते हैं वह एक तरह से कंपनी के लिए उधारदाता बन जाते हैं और NCD जारी करने वाली कंपनी को इन इन्वेस्टर्स से तय किये गए समय और तय की गई शर्तों और नियमों के अनुसार नियमित रूप से राशी मिलती रहती हैं. और इसीलिए NCDs को ‘फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट’ की श्रेणी में रखा जाता है. मैच्योरिटी पीरियड खत्म होने पर NCDs जारी करने वाली कंपनी मूल रकम को इन्वेस्टर्स को वापस कर देती है. NCDs को आमतौर पर स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट किया जाता है जिससे इन्वेस्टर्स इन्हें मैच्योरिटी पूरी होने से पहले किसी अन्य मार्केट में ट्रेड कर सकते हैं. इक्विटी शेयर्स के मुकाबले NCDs को ज्यादा सुरक्षित इन्वेस्टमेंट माना जाता है. 
 

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