जानते हैं सरकार ने इन कंपनियों को और दी नए प्रोसेस से GST भरने की मोहलत, बच गए लाखों रुपये 

दरअसल सरकार इस क्षेत्र में कई तरह के सुधार करना चाह रही है. सरकार चाहती है कि इस क्षेत्र में भी जीएसटी फाइलिंग अपने समय पर हो. 

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Thursday, 11 April, 2024
Tobacco Industry

पान मसाला गुटखा बनाकर बेचने वाली कंपनियों के लिए गुरुवार को सरकार की ओर से एक अच्‍छी खबर निकलकर सामने आई. इन कंपनियों को सरकार की ओर से गुटका, पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को पंजीकरण और जीएसटी की मासिक रिटर्न दाखिल करने के लिए स्‍पेशल प्रक्रिया के पालन की समय सीमा में इजाफा कर दिया है.

अब इस तारीख तक करना होगा जमा 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार की ओर से जिस नई तारीख का ऐलान किया गया है वो 15 मई है. पान मसाला, गुटखा और तंबाकू कारोबार से जुड़ी ये कंपनियां अब विशेष प्रक्रिया का पालन करते हुए अपना पंजीकरण और अपना रिटर्न 15 मई तक फाइल कर पाएंगी. इससे पहले केन्‍द्रीय अप्रत्‍यक्ष कर एवं सीमा शुल्‍क बोर्ड की ओर से मासिक पंजीकरण और रिटर्न के लिए 1 अप्रैल तक का समय दिया था. सरकार का इस व्‍यवस्‍था को लाने के पीछे जो मकसद है वो ये है कि इस इंडस्‍ट्री के जीएसटी फाइलिंग में बदलाव लाया जाए. 

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1 लाख रुपये तक जुर्माने का रखा गया है प्रस्‍ताव 
सरकार की ओर से इससे पहले पेश किए वित्‍त विधेयक में इस इंडस्‍ट्री के लिए नियमों में सुधार करते हुए अगर वो अपनी पैकिंग मशीनरी को जीएसटी अधिकारियों के साथ पंजीकृत करने में विफल रहते हैं तो ऐसे में उन पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया था. लेकिन अब तारीखों को बढ़ाए जाने के बाद ये इंडस्‍ट्री इस जुर्माने से बच गई है. सरकार की ओर से 45 दिन का समय बढ़ाकर 15 मई कर दिया गया है. इस बीच इस क्षेत्र के कई जानकारों का कहना है कि जीएसटी सिस्‍टम ने नई प्रक्रिया पर कोई विचार विमर्श नहीं किया है और न ही फाइलिंग संबंधी जानकारी दी है. 
 
 


महंगाई का बड़ा झटका: पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा, कई शहरों में 3 रुपये से ज्यादा बढ़े दाम

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब महंगाई के आंकड़ों में भी दिखने लगा है. अप्रैल महीने में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की कीमतों में तेजी के कारण थोक महंगाई कई साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.

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Friday, 15 May, 2026
BWHindia

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय आम आदमी की जेब पर दिखाई देने लगा है. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के बाद अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है. सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में 3.29 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है. बढ़ती तेल कीमतों से न सिर्फ लोगों का यात्रा खर्च बढ़ेगा, बल्कि आने वाले दिनों में खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं.

दिल्ली से मुंबई तक बढ़े पेट्रोल के दाम

नई कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गया है. वहीं डीजल की कीमत 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है. इसके अलावा दिल्ली में सीएनजी भी 2 रुपये महंगी होकर 79.09 रुपये प्रति किलो हो गई है.

कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज्यादा 3.29 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद वहां पेट्रोल 108.74 रुपये प्रति लीटर हो गया है. मुंबई में पेट्रोल 3.14 रुपये महंगा होकर 106.68 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि चेन्नई में 2.83 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कीमत 103.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है.

डीजल की कीमतों में भी बड़ा इजाफा

डीजल की कीमतों में भी 3 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कोलकाता में डीजल 3.11 रुपये महंगा होकर 95.13 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. मुंबई में भी डीजल की कीमत 93.14 रुपये प्रति लीटर हो गई है. वहीं चेन्नई में डीजल 2.86 रुपये बढ़कर 95.25 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी, जिसका असर सब्जी, दूध, राशन और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी देखने को मिलेगा.

क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

तेल कंपनियों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आने से उनका मार्जिन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कंपनियों का दावा है कि उन्हें हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जिसके बाद कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया गया. दरअसल ईरान युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 50 फीसदी तक महंगा हो चुका है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की बड़ी हिस्सेदारी है.

होर्मुज स्ट्रेट संकट से बढ़ी मुश्किलें

विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. फिलहाल ब्रेंट क्रूड 1.35 फीसदी की तेजी के साथ 107.2 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है.

जानकारों का कहना है कि अगर ईरान युद्ध जल्द खत्म भी हो जाए, तब भी सप्लाई चेन सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है. ऐसे में आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.

महंगाई के मोर्चे पर बढ़ सकती है चिंता

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब महंगाई के आंकड़ों में भी दिखने लगा है. अप्रैल महीने में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की कीमतों में तेजी के कारण थोक महंगाई कई साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.

ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में पेट्रोल महंगाई दर 32.4 फीसदी तक पहुंच गई, जो एक महीने पहले सिर्फ 2.50 फीसदी थी. वहीं हाई-स्पीड डीजल की महंगाई 3.62 फीसदी से बढ़कर 25.19 फीसदी हो गई है. इससे साफ है कि आने वाले समय में आम आदमी पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.
 


कल बाजार में रही जोरदार तेजी, आज इन फैक्टर्स पर रहेगी निवेशकों की नजर

गुरुवार को सेंसेक्स 789.74 अंक की बढ़त के साथ 75,398.72 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 277 अंक चढ़कर 23,689.60 के स्तर पर पहुंच गया था.

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Friday, 15 May, 2026
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14 मई को घरेलू शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली थी. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स करीब 790 अंक उछला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की थी. वैश्विक संकेतों और अमेरिका-चीन संबंधों में सुधार की उम्मीद से बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा. हालांकि रुपये का ऑल टाइम लो पर पहुंचना चिंता का विषय रहा. अब 15 मई के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और अडानी, एयरटेल, जियो फाइनेंशियल जैसे बड़े शेयरों पर रहने वाली है.

कल बाजार में क्यों आई थी तेजी?

गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 789.74 अंक की बढ़त के साथ 75,398.72 पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 277 अंक चढ़कर 23,689.60 के स्तर पर पहुंच गया था. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और चीन के बीच बेहतर रिश्तों की उम्मीद रही. निवेशकों को डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की संभावित बातचीत से सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद है.

इसके अलावा फार्मा, हेल्थकेयर और मेटल सेक्टर में जोरदार खरीदारी देखने को मिली थी. भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, अडानी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयरों में मजबूत तेजी दर्ज की गई थी.

रुपये की कमजोरी आज भी बढ़ा सकती है चिंता

शेयर बाजार में तेजी के बावजूद रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था. कारोबार के दौरान रुपया 95.86 प्रति डॉलर तक फिसल गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली आज भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं.

आज इन शेयरों में रह सकती है सबसे ज्यादा हलचल

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आज के कारोबार में Adani Enterprises, Bharti Airtel, Jio Financial Services, HCL Technologies और Kirloskar Oil Engines जैसे शेयर फोकस में रह सकते हैं. Adani Enterprises में बड़ी ब्लॉक डील हुई है, जबकि HCL Technologies ने Red Hat के साथ AI सेक्टर में रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है. वहीं, Bharti Airtel के ARPU में गिरावट और Jio Financial Services में Morgan Stanley की हिस्सेदारी खरीद भी निवेशकों का ध्यान खींच सकती है. इसके अलावा Signature Global, Zaggle Prepaid Ocean Services और Davangere Sugar से जुड़ी खबरों का असर भी शेयरों पर देखने को मिल सकता है.

आज आएंगे कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे

15 मई को Tata Steel, Power Grid, NHPC, Hindustan Copper, ITC Hotels, Symphony और Gland Pharma समेत कई बड़ी कंपनियां अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इन कंपनियों के रिजल्ट्स के आधार पर आज बाजार में सेक्टरवार हलचल बढ़ सकती है और निवेशकों की रणनीति भी बदल सकती है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


भारत का डायरेक्ट सेलिंग उद्योग ₹23,000 करोड़ के पार, महिलाओं की भागीदारी में भी बढ़ोतरी

भारत का डायरेक्ट सेलिंग उद्योग लगातार विस्तार की ओर है. बढ़ता कारोबार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क इस सेक्टर की मजबूती को दर्शाते हैं.

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Thursday, 14 May, 2026
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भारत का डायरेक्ट सेलिंग उद्योग लगातार मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कारोबार ₹23,021 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के ₹22,142 करोड़ की तुलना में लगभग 4% की वृद्धि दर्शाता है. आज नई दिल्ली में इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (IDSA) की ‘डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री आउटलुक 2025’ की रिपोर्ट लॉन्च हुई, जिसमें बताया गया है कि यह उद्योग न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, बल्कि रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा कर रहा है.

पिछले छह वर्षों में स्थिर वृद्धि

रिपोर्ट के अनुसार, डायरेक्ट सेलिंग उद्योग ने पिछले छह वर्षों में 6.5% की स्थिर वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की है. वित्त वर्ष 2019-20 में जहां इस उद्योग का आकार लगभग ₹16,800 करोड़ था, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर ₹23,021 करोड़ हो गया. यह वृद्धि बढ़ते उपभोक्ता भरोसे और विस्तारित सेल्स नेटवर्क को दर्शाती है.

महिलाओं की भागीदारी में लगातार बढ़ोतरी

इस उद्योग में महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है. महिला डायरेक्ट सेलर्स की हिस्सेदारी 44% से बढ़कर 48% तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते महिला सशक्तिकरण का संकेत है. यह बदलाव बताता है कि डायरेक्ट सेलिंग अब महिलाओं के लिए आय और उद्यमिता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है.

क्षेत्रवार बिक्री में उत्तर भारत सबसे आगे

क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, कुल बिक्री में उत्तर भारत 27.6% हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है. इसके बाद पश्चिमी क्षेत्र 25.47% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा. पूर्वी क्षेत्र की हिस्सेदारी 22.47%, दक्षिणी क्षेत्र की 17.81% और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की 6.67% रही.

किन उत्पादों की सबसे ज्यादा बिक्री

डायरेक्ट सेलिंग उद्योग में वेलनेस उत्पाद सबसे प्रमुख श्रेणी बने हुए हैं. इसके बाद कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर उत्पाद दूसरे सबसे बड़े सेगमेंट के रूप में उभरे हैं. यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है.

राज्यों में महाराष्ट्र सबसे आगे

राज्यवार प्रदर्शन में महाराष्ट्र ने शीर्ष स्थान हासिल किया है. राज्य की कुल बिक्री में हिस्सेदारी 15.3% रही, जो देश में सबसे अधिक है. यह राज्य डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्क और उपभोक्ता आधार दोनों में मजबूत स्थिति बनाए हुए है.

उद्योग को लेकर विशेषज्ञ और नीति-निर्माताओं की राय

रिपोर्ट लॉन्च कार्यक्रम में सांसद और CAIT महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भारत आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और ऐसे उद्योग ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. उन्होंने डायरेक्ट सेलिंग को स्वरोजगार, उद्यमिता और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने वाला मजबूत माध्यम बताया.

उन्होंने यह भी कहा कि यह उद्योग आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती दे रहा है और लाखों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है. साथ ही उन्होंने उद्योग से नैतिक व्यापार, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद और मजबूत उपभोक्ता सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया.

भारत का डायरेक्ट सेलिंग उद्योग लगातार विस्तार की ओर है. बढ़ता कारोबार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क इस सेक्टर की मजबूती को दर्शाते हैं. आने वाले वर्षों में यह उद्योग रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में और बड़ी भूमिका निभा सकता है.
 


महंगाई का डबल झटका: अप्रैल में WPI 8.3% पर पहुंची, ईंधन और ऊर्जा ने बढ़ाया दबाव

अप्रैल में WPI में मासिक आधार पर भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मार्च की तुलना में 3.86% अधिक रही. इसके मुकाबले मार्च में यह वृद्धि सिर्फ 1.52% थी, जिससे यह साफ होता है कि थोक बाजार में कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है.

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Thursday, 14 May, 2026
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देश में थोक महंगाई ने अप्रैल 2026 में अचानक तेज रफ्तार पकड़ ली है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई बढ़कर 8.3% पर पहुंच गई है, जबकि मार्च में यह सिर्फ 3.88% थी. करीब साढ़े तीन साल बाद यह स्तर सबसे ऊंचा माना जा रहा है. इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण ईंधन, ऊर्जा, कच्चे तेल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई तेज महंगाई है, जिसका सीधा असर उत्पादन लागत और बाजार कीमतों पर दिख रहा है.

ईंधन और ऊर्जा की कीमतों ने बढ़ाया सबसे ज्यादा दबाव

अप्रैल में महंगाई बढ़ने में सबसे बड़ी भूमिका फ्यूल एंड पावर सेक्टर की रही. इस श्रेणी की महंगाई मार्च के 1.05% से उछलकर अप्रैल में 24.71% तक पहुंच गई. इसी दौरान ऊर्जा से जुड़े इंडेक्स में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 153.7 से बढ़कर 181.7 हो गया. यह स्पष्ट संकेत है कि ऊर्जा लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

कच्चे तेल से लेकर पेट्रोल-डीजल तक महंगा हुआ ईंधन

ईंधन क्षेत्र में सबसे तेज उछाल कच्चे तेल और गैस की कीमतों में देखा गया. क्रूड पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर 67.18% तक पहुंच गई, जबकि कच्चे तेल की महंगाई 88.06% दर्ज की गई. इसी अवधि में पेट्रोल की महंगाई 32.40% और डीजल (HSD) की 25.19% रही. एलपीजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई, जिसकी महंगाई दर 10.92% दर्ज हुई.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बढ़ा लागत दबाव

अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महंगाई बढ़कर 4.62% हो गई, जो मार्च में 3.39% थी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 22 में से 21 मैन्युफैक्चरिंग समूहों में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे यह साफ होता है कि उद्योगों में उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है.

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा

टेक्सटाइल सेक्टर में महंगाई बढ़कर 7.30% तक पहुंच गई, जबकि केमिकल्स और केमिकल प्रोडक्ट्स में यह 5.09% रही. बेसिक मेटल्स में महंगाई 7% दर्ज की गई. इसके अलावा फूड प्रोडक्ट्स और मशीनरी जैसे सेक्टरों में भी कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जिससे औद्योगिक लागत और तैयार उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.

खाद्य महंगाई में हल्की बढ़ोतरी, लेकिन स्थिति नियंत्रण में

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अप्रैल के दौरान हल्की बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है. WPI फूड इंडेक्स मार्च के 1.85% से बढ़कर अप्रैल में 2.31% पर पहुंच गया, जबकि खाद्य वस्तुओं की कुल महंगाई 1.98% दर्ज की गई. इस दौरान फल, दूध, अंडा, मांस, मछली और सब्जियों जैसी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जिससे घरेलू बजट पर हल्का असर पड़ा है.

कुछ जरूरी चीजें अभी भी सस्ती

कुछ प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई है, जिससे महंगाई का दबाव कुछ हद तक संतुलित रहा है. प्याज की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई, जिसकी महंगाई दर -26.45% रही. आलू की कीमतें भी काफी कम हुईं और इसकी महंगाई दर -30.04% दर्ज की गई. दालों की कीमतों में भी कमी देखी गई, जहां महंगाई दर -4.03% रही.

महीने-दर-महीने भी तेज बढ़ोतरी

अप्रैल में WPI में मासिक आधार पर भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मार्च की तुलना में 3.86% अधिक रही. इसके मुकाबले मार्च में यह वृद्धि सिर्फ 1.52% थी, जिससे यह साफ होता है कि थोक बाजार में कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है.

विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल में WPI का यह उछाल उम्मीदों से काफी ज्यादा रहा है. अनुमानित 5.50% के मुकाबले यह 8.30% तक पहुंच गया, जो अर्थव्यवस्था में बढ़ते लागत दबाव का संकेत है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, ईंधन और बिजली की लागत में इजाफा, आयातित महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारण रहे हैं.

अप्रैल 2026 की WPI महंगाई यह दिखाती है कि थोक स्तर पर कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है. ईंधन और ऊर्जा इसकी सबसे बड़ी वजह बने हुए हैं, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और कच्चे माल की लागत भी लगातार महंगाई को बढ़ा रही है. अगर यही रुझान जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में इसका असर खुदरा महंगाई और आम उपभोक्ताओं की जेब पर और अधिक देखने को मिल सकता है.
 

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Ixigo का AI ट्रैवल में बड़ा कदम, ‘तारा’ AI असिस्टेंट करेगा ट्रैवल प्लानिंग से रिफंड तक मदद

Ixigo का नया AI असिस्टेंट “तारा” यूजर की ट्रैवल हिस्ट्री, पसंद, फैमिली कॉन्टेक्स्ट और पुराने बुकिंग पैटर्न को समझकर पर्सनलाइज्ड सुझाव भी देगा.

रितु राणा by
Published - Thursday, 14 May, 2026
Last Modified:
Thursday, 14 May, 2026
BWHindia

भारत की प्रमुख ट्रैवल टेक कंपनी Ixigo ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अपने नए प्लेटफॉर्म “Ixigo Next” की घोषणा की है. कंपनी का दावा है कि यह सिर्फ एक ट्रैवल बुकिंग प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि यात्रियों को भरोसा, सुविधा और रियल टाइम सहायता देने वाला स्मार्ट ट्रैवल इकोसिस्टम होगा.

लॉन्च इवेंट के दौरान कंपनी के को-फाउंडर रजनीश कुमार ने कहा कि यात्रा केवल टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके पीछे भावनाएं जुड़ी होती हैं. चाहे परिवार के साथ छुट्टियां हों, हनीमून, परीक्षा देने जा रहा छात्र या लंबे समय बाद घर लौटता कोई सदस्य, हर सफर अपने साथ भावनात्मक जुड़ाव लेकर आता है. ऐसे में यात्रियों को सिर्फ सस्ती टिकट नहीं, बल्कि भरोसेमंद सहायता और मानसिक शांति की जरूरत होती है.

2012 से AI और मशीन लर्निंग पर काम

कंपनी के मुताबिक, Ixigo ने 2012 में ही मशीन लर्निंग और AI पर काम शुरू कर दिया था, जब यह तकनीक शुरुआती दौर में थी. ट्रैवल इंडस्ट्री की जटिल समस्याओं को हल करने, अनिश्चितताओं को कम करने और यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के लिए कंपनी लगातार AI आधारित सिस्टम विकसित कर रही है.

क्या है “Ixigo Next”?

Rajnish Kumar ने कहा कि दुनिया इस समय AI क्रांति के सबसे बड़े दौर से गुजर रही है और यह तकनीक सॉफ्टवेयर की प्रकृति को पूरी तरह बदल रही है. उनके मुताबिक, AI अब केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह योजना बना सकता है, निर्णय ले सकता है और कई काम अपने आप कर सकता है.

कंपनी के अनुसार “Ixigo Next” चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:

1. इंटेलिजेंट वॉइस मॉडल
2. यूजर बिहेवियर और ट्रैवल डेटा
3. रियल टाइम सप्लाई और बुकिंग डेटा
4. कंपनी का खुद का AI इंटेलिजेंस लेयर

“तारा” बनेगा स्मार्ट ट्रैवल साथी

Ixigo ने अपने नए मल्टीमॉडल AI असिस्टेंट “तारा” को ऐप का कन्वर्सेशन कोर बनाया है. यूजर्स हिंदी, अंग्रेजी और हिंग्लिश में वॉइस, टेक्स्ट या टैप के जरिए तारा से बातचीत कर सकेंगे. कंपनी का कहना है कि जल्द ही इसमें कई अन्य भारतीय भाषाओं का सपोर्ट भी जोड़ा जाएगा.

रजनीश ने बिजनेस वर्ल्ड हिंदी से बातचीत में बताया कि तारा केवल सामान्य सर्च तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जटिल और इंटेंट आधारित ट्रैवल रिक्वेस्ट को भी समझ सकेगा. उदाहरण के तौर पर कोई यूजर पूछ सकता है,  “मुझे दुबई में ऐसा होटल दिखाओ जहां इन्फिनिटी पूल हो और बुर्ज खलीफा का व्यू मिलता हो.” AI सिस्टम यूजर की जरूरत को समझते हुए उसी के अनुसार सुझाव देगा. इसके अलावा यह AI असिस्टेंट यूजर की ट्रैवल हिस्ट्री, पसंद, फैमिली कॉन्टेक्स्ट और पुराने बुकिंग पैटर्न को समझकर पर्सनलाइज्ड सुझाव भी देगा. उन्होंने बताया कि तारा अभी केवल हिंदी, अंग्रेजी और हिंग्लिश भाषा को समझने में सक्षम हैं, लेकिन आगे चलकर इसमें और भी क्षेत्रीय भाषाओं को जोड़ा जाएगा.

यात्रा के दौरान भी मिलेगा रियल टाइम सपोर्ट

कंपनी के अनुसार तारा केवल यात्रा की योजना बनाने तक सीमित नहीं रहेगा. यह फ्लाइट शेड्यूल मॉनिटर करेगा, कैंसिलेशन और रिफंड मैनेज करेगा, साथ ही मौसम, टर्मिनल, गेट और अन्य जरूरी ट्रैवल अपडेट रियल टाइम में देगा.

AI सिस्टम एयरपोर्ट लाउंज, वैकल्पिक रूट और दूसरी ट्रैवल सुविधाओं के सुझाव भी देगा, जिससे यात्रियों को अधिक सहज अनुभव मिल सके. कंपनी का कहना है कि नया AI सिस्टम यात्रियों की पसंद, सर्च हिस्ट्री और यात्रा पैटर्न को समझकर हाइपर-पर्सनलाइज्ड अनुभव तैयार करेगा.

“ट्रिप मोड” देगा हर चरण में सहायता

Ixigo ने अपने नए ऐप में “ट्रिप मोड” फीचर भी जोड़ा है. यह एक बिल्ट-इन ट्रैवल साथी की तरह काम करेगा, जिसमें बोर्डिंग पास, गेट डिटेल्स, बैगेज बेल्ट अपडेट और अन्य रियल टाइम अलर्ट एक ही स्क्रीन पर उपलब्ध होंगे. यह फीचर यात्रा के हर चरण में यूजर की मदद करेगा. इसमें एयरपोर्ट के लिए सही समय पर निकलने के सुझाव, ट्रैफिक अपडेट और यात्रा से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी शामिल होगी.

AI एजेंट संभालेंगे कई जरूरी काम

कंपनी ने “एजेंटिक ट्रैवल फ्लो” की भी शुरुआत की है. इसके तहत AI एजेंट बैकग्राउंड में कई जरूरी ट्रैवल टास्क अपने आप पूरा करेगा. AI एजेंट सीधे व्हाट्सऐप पर बोर्डिंग पास भेज सकेगा, Apple Wallet, और Google Wallet में सेव करने का विकल्प देगा और डिजीयात्रा इंटीग्रेशन के जरिए एयरपोर्ट अनुभव को आसान बनाएगा.

अगर फ्लाइट में देरी, बदलाव या कैंसिलेशन होता है, तो AI एजेंट तुरंत यूजर को अलर्ट करेगा और जरूरत पड़ने पर रिफंड प्रक्रिया भी मैनेज करेगा. कंपनी ने स्पष्ट किया कि इन फीचर्स में यूजर की अनुमति और प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा.

“कंपनियों को खुद को खुद ही डिसरप्ट करना होगा”

रजनीश ने बताया कि केवल AI फीचर जोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी कंपनी को AI-फ्रेंडली बनाना जरूरी है. इसके लिए Ixigo ने अलग टीम तैयार की है, जो कंपनी के डेटा, सिस्टम और वर्कफ्लो को AI-रीडेबल बना रही है. उन्होंने कहा, “अगर कंपनियां समय रहते खुद को नहीं बदलतीं, तो कोई नई और तेज कंपनी उन्हें पीछे छोड़ सकती है. इसलिए जरूरी है कि कंपनियां खुद को खुद ही डिसरप्ट करें.” उन्होंने यह भी कहा कि AI के दौर में केवल प्रोडक्ट नहीं, बल्कि पूरी संगठनात्मक संरचना को बदलना जरूरी हो गया है.

ट्रैवल सेक्टर में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

Ixigo का दावा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर लाखों यूजर्स की 4.8+ रेटिंग है और बड़ी संख्या में यात्री रिफंड प्रोटेक्शन जैसी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. कंपनी के अनुसार औसतन 3 घंटे के भीतर रिफंड प्रोसेस किया जाता है.

AI आधारित ट्रैवल प्लेटफॉर्म आने वाले वर्षों में ग्राहकों को ज्यादा स्मार्ट, तेज और व्यक्तिगत सेवाएं देंगे. ऐसे में Ixigo का यह कदम भारतीय ट्रैवल टेक सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है.
 

 


महंगाई के डर से खर्च घटा रहे भारतीय उपभोक्ता, जरूरी सामान का स्टॉक बढ़ा: सर्वे

सर्वे में यह भी सामने आया है कि एलपीजी सिलेंडर, आटा, खाद्य तेल, चीनी, दवाइयां और ईंधन जैसी वस्तुओं की खरीद सामान्य से करीब ढाई गुना तक बढ़ गई है.

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Thursday, 14 May, 2026
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देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शहरी भारतीय उपभोक्ता अब अपने घरेलू खर्चों में कटौती करने लगे हैं. एक नए सर्वे में सामने आया है कि लोग गैर-जरूरी खर्च टाल रहे हैं, जरूरी सामान का स्टॉक बढ़ा रहे हैं और तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं. इप्सोस इंडिया के “कंज्यूमर पल्स सर्वे” के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता ने उपभोक्ताओं के बीच आर्थिक चिंता बढ़ा दी है.

10 में से 9 उपभोक्ता खर्च घटाने को तैयार

सर्वे के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत शहरी उपभोक्ता महंगाई बढ़ने की स्थिति में अपने घरेलू बजट को और सख्त करने की तैयारी कर रहे हैं. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं ने लोगों को लंबे समय तक महंगाई बने रहने का संकेत दिया है. करीब दो-तिहाई लोगों ने कहा कि वे बड़े खर्च और महंगी खरीदारी फिलहाल टाल देंगे. वहीं, 60 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने यात्रा और छुट्टियों पर होने वाला खर्च कम करने की बात कही. इसके अलावा, आधे से ज्यादा लोगों ने बाहर खाना खाने, समारोहों और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्चों में कटौती की योजना बनाई है.

जरूरी सामान का बढ़ा स्टॉक

सर्वे में यह भी सामने आया कि उपभोक्ता अब एहतियात के तौर पर जरूरी वस्तुओं का ज्यादा स्टॉक जमा कर रहे हैं. एलपीजी सिलेंडर, आटा, खाद्य तेल, चीनी, दवाइयां और ईंधन जैसी वस्तुओं की खरीद सामान्य से करीब ढाई गुना तक बढ़ गई है. लोग अब कम कीमत वाले विकल्प, छोटे पैक और डिस्काउंट ऑफर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. उपभोक्ताओं के बीच “वैल्यू फॉर मनी” सोच तेजी से बढ़ रही है.

पेट्रोल महंगा होने पर बढ़ेगी EV की मांग

ईंधन महंगाई का असर अब लोगों की वाहन खरीद पसंद पर भी दिखाई देने लगा है. सर्वे के मुताबिक, अगले छह महीनों में दोपहिया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हर दो में से एक उपभोक्ता इलेक्ट्रिक मॉडल पर विचार कर रहा है. करीब दो-तिहाई संभावित खरीदारों ने कहा कि अगर पेट्रोल की कीमतों में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है, तो वे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदना पसंद करेंगे. दिलचस्प बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत 5,000 से 8,000 रुपये तक बढ़ने के बावजूद आधे से ज्यादा लोग EV खरीदने का फैसला नहीं बदलेंगे.

कंपनियों से कीमतें स्थिर रखने की उम्मीद

सर्वे में शामिल लगभग तीन-चौथाई उपभोक्ताओं का मानना है कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में कंपनियों को कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी से बचना चाहिए. लोगों की अपेक्षा है कि कंपनियां जरूरी सामान की सप्लाई बनाए रखें और सस्ते विकल्प उपलब्ध कराएं. इप्सोस India के CEO सुरेश रामालिंगम ने कहा कि वैश्विक संघर्ष अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की आर्थिक चिंताओं को प्रभावित कर रहे हैं. इससे महंगाई, आय सुरक्षा और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कंपनियों को उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं और “किफायती खरीदारी” की बढ़ती मांग के अनुसार अपनी रणनीति बनानी होगी.

ब्यूटी और फिटनेस पर खर्च बरकरार

हालांकि, खर्च में कटौती के बीच कुछ लाइफस्टाइल श्रेणियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं. सर्वे के अनुसार, ब्यूटी और पर्सनल केयर उत्पाद लोगों की पसंदीदा “सेल्फ-इंडल्जेंस” कैटेगरी बनी हुई है. इसके बाद कैफे बेवरेज, स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन और फिटनेस मेंबरशिप जैसी सेवाओं पर लोग अब भी खर्च कर रहे हैं.

रामालिंगम ने कहा कि फिलहाल सरकार द्वारा खुदरा ईंधन कीमतों को स्थिर रखने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है. हालांकि, कमर्शियल एलपीजी की बढ़ती कीमतें आने वाले महीनों में बाहर खाना खाने और फूड डिलीवरी को महंगा बना सकती हैं.


अमूल के बाद मदर डेयरी ने बढ़ाए दूध के दाम, आज से नई कीमतें लागू

कंपनी के मुताबिक दूध उत्पादन को बनाए रखने और किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. इससे डेयरी सेक्टर में सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.

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Thursday, 14 May, 2026
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देशभर में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है. अमूल के बाद अब मदर डेयरी ने भी दूध के दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. कंपनी ने विभिन्न श्रेणियों के दूध पर 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें 14 मई 2026 से लागू हो गई हैं. कंपनी का कहना है कि किसानों से दूध खरीदने की लागत, पशु चारा, ईंधन और पैकेजिंग खर्च बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा.

किसानों से खरीद महंगी होने का असर

मदर डेयरी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पिछले एक साल में किसानों से दूध खरीदने की लागत करीब 6 प्रतिशत तक बढ़ गई है. कंपनी ने लंबे समय तक ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ती लागत के चलते कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया था.

कंपनी के मुताबिक दूध उत्पादन को बनाए रखने और किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. इससे डेयरी सेक्टर में सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.

अमूल ने भी बढ़ाए थे दाम

मदर डेयरी से पहले अमूल ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी. अमूल का कहना है कि दूध बिक्री से होने वाली आय का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा किसानों को भुगतान किया जाता है. ऐसे में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कीमतों में बदलाव किया गया है. कंपनी ने यह भी बताया कि पिछली बार दूध के दाम अप्रैल 2025 में बदले गए थे.

जानिए नई कीमतें

नई दरें लागू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में दूध की कीमतें इस प्रकार हो गई हैं.

1. खुला टोंड दूध, 56 रुपये से बढ़कर 58 रुपये प्रति लीटर
2. फुल क्रीम दूध, 72 रुपये प्रति लीटर
3. टोंड मिल्क, 58 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति लीटर
4. डबल टोंड दूध, 54 रुपये प्रति लीटर
5. गाय का दूध, 60 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति लीटर

इन नई कीमतों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ने वाला है, क्योंकि दूध रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल है.

दिल्ली-एनसीआर में रोज 35 लाख लीटर दूध की बिक्री

मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर में प्रतिदिन करीब 35 लाख लीटर दूध की बिक्री करती है. कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में डेयरी उत्पादों और खाद्य तेलों की मजबूत मांग के चलते 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 20,300 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया.

उधर, डेयरी कंपनियों का कहना है कि किसानों को अधिक भुगतान करने से उत्पादन बनाए रखने और सप्लाई मजबूत करने में मदद मिलेगी. हालांकि, लगातार बढ़ती महंगाई के बीच दूध के दाम बढ़ने से आम लोगों की रसोई का बजट और प्रभावित हो सकता है.


सरकार ने लगाया चीनी निर्यात पर प्रतिबंध: घरेलू आपूर्ति घटने और कीमतों में उछाल के बीच बड़ा फैसला

यह फैसला सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना और घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखना प्राथमिकता है. हालांकि इससे वैश्विक चीनी व्यापार और सप्लाई चेन पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है.

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Thursday, 14 May, 2026
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भारत सरकार ने तत्काल प्रभाव से चीनी (Sugar) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह रोक 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगी. सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना और आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है.

DGFT ने जारी किया आदेश

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत जारी आदेश में कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. यह कदम नीति में बड़ा बदलाव है, जिसके तहत चीनी को “restricted” से हटाकर “prohibited” श्रेणी में डाल दिया गया है.

घरेलू उत्पादन में गिरावट बनी वजह

भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और ब्राजील के बाद प्रमुख निर्यातक है, पहले 1.59 मिलियन मीट्रिक टन तक निर्यात की अनुमति दे चुका था. लेकिन अब लगातार दूसरे साल उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है, जिससे घरेलू मांग पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है.

मौसम और एल नीनो का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में कमजोर उपज और आगामी मानसून पर एल नीनो के संभावित प्रभाव ने स्थिति और गंभीर कर दी है. इसी कारण सरकार ने घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है.

पहले से किए गए निर्यात सौदों पर आंशिक राहत

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 8 लाख टन चीनी के निर्यात अनुबंध पहले ही किए जा चुके थे, जिनमें से 6 लाख टन से अधिक पहले ही भेजे जा चुके हैं. सरकार ने उन शिपमेंट्स को अनुमति दी है जो पहले से प्रक्रिया में थे या जहाज लोडिंग, पोर्ट पर आगमन या कस्टम क्लियरेंस की स्थिति में थे.

वैश्विक बाजार पर असर

भारत के इस फैसले से वैश्विक चीनी बाजार पर असर पड़ने की संभावना है. अब ब्राजील और थाईलैंड जैसे देश एशिया और अफ्रीका के बाजारों में अपनी आपूर्ति बढ़ा सकते हैं.

अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल

घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखी गई. न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स 2% से अधिक बढ़े, जबकि लंदन में व्हाइट शुगर फ्यूचर्स लगभग 3% तक चढ़ गए.

घरेलू आपूर्ति और महंगाई नियंत्रण

यह फैसला सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना और घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखना प्राथमिकता है. हालांकि इससे वैश्विक चीनी व्यापार और सप्लाई चेन पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है.
 

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कोयले से बनेगी गैस और केमिकल्स: सरकार ने लॉन्च की ₹37,500 करोड़ की मेगा योजना

कोयला गैसीफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदला जाता है. इस गैस का उपयोग ईंधन, मेथेनॉल, यूरिया और विभिन्न केमिकल्स के उत्पादन में किया जा सकता है.

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Thursday, 14 May, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ₹37,500 करोड़ की एक बड़ी योजना को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत देश में कोयले से गैस और उससे जुड़े अन्य रासायनिक उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का उद्देश्य महंगे आयातित एलएनजी, यूरिया और अन्य रसायनों पर निर्भरता को कम करना है.

क्या है कोयला गैसीफिकेशन तकनीक?

कोयला गैसीफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदला जाता है. इस गैस का उपयोग ईंधन, मेथेनॉल, यूरिया और विभिन्न केमिकल्स के उत्पादन में किया जा सकता है. सरकार का मानना है कि भारत के पास विशाल कोयला भंडार है, जिसका उपयोग देश को आत्मनिर्भर बनाने में किया जा सकता है.

सरकार का आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगी, निवेश को बढ़ावा देगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी. यह हमारी तकनीक और नवाचार प्रणाली को सशक्त बनाने के प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करेगी.'

वहीं, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार ऐसी तकनीकों को बढ़ावा दे रही है जिससे देश की आयात निर्भरता घटे और घरेलू उत्पादन बढ़े. इस योजना को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

आयात बिल में भारी कमी का लक्ष्य

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत ने LNG, यूरिया, अमोनिया, मेथेनॉल और कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर लगभग ₹2.77 लाख करोड़ खर्च किए. नई योजना का लक्ष्य इन वस्तुओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयात खर्च को कम करना है.

कंपनियों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

इस योजना के तहत कोयला गैसीफिकेशन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी. किसी भी प्रोजेक्ट को मशीनरी और प्लांट लागत पर अधिकतम 20 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिल सकता है, जबकि एक परियोजना को अधिकतम ₹5,000 करोड़ तक की सहायता दी जा सकती है. साथ ही कंपनियों को 30 साल तक कोयला आपूर्ति की गारंटी भी दी जाएगी.

निवेश और रोजगार की संभावनाएं

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से देश में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक का निवेश आ सकता है. इससे लगभग 50,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है. यह परियोजनाएं मुख्य रूप से कोयला-समृद्ध राज्यों में स्थापित की जा सकती हैं.

देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा फायदा

सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर गैस और रसायनों का उत्पादन बढ़ने से विदेशी बाजारों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम होगा. इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा.

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

इस योजना में घरेलू तकनीक के उपयोग को भी प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार का उद्देश्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि देश में इस क्षेत्र की पूरी औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को विकसित करना भी है.
 


Airtel Q4 Results: मुनाफे में 33.5% गिरावट, लेकिन रेवेन्यू और ARPU में मजबूती बरकरार

एयरटेल ने बताया कि Q4 FY26 में उसका शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 33.5% घटकर ₹7,325 करोड़ रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹11,021.8 करोड़ था.

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Thursday, 14 May, 2026
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भारती एयरटेल ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस दौरान कंपनी के नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर तेज गिरावट देखने को मिली, हालांकि रेवेन्यू और प्रति यूजर औसत आय (ARPU) में बढ़ोतरी ने कंपनी की ऑपरेशनल ग्रोथ को स्थिर बनाए रखा है.

Q4 में मुनाफा घटकर ₹7,325 करोड़

एयरटेल ने बताया कि Q4 FY26 में उसका शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 33.5% घटकर ₹7,325 करोड़ रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹11,021.8 करोड़ था. हालांकि तिमाही आधार पर स्थिति थोड़ी बेहतर रही. पिछली तिमाही के ₹6,630 करोड़ की तुलना में मुनाफे में 10.48% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

रेवेन्यू में 15.6% की मजबूत बढ़ोतरी

कंपनी की कुल आय (Revenue from Operations) में इस तिमाही के दौरान अच्छी वृद्धि देखने को मिली. रेवेन्यू 15.6% बढ़कर ₹55,383.2 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹47,876.2 करोड़ था. तिमाही आधार पर भी रेवेन्यू में 2.5% की बढ़त दर्ज की गई, जो स्थिर और लगातार ग्रोथ को दर्शाती है.

भारत कारोबार का प्रदर्शन बेहतर

एयरटेल के भारत बिजनेस सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट की आय सालाना आधार पर 7.7% बढ़कर ₹39,566 करोड़ हो गई. मोबाइल बिजनेस से होने वाली आय में 8.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसकी वजह बेहतर प्रति-यूजर कमाई और ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी रही.

ARPU में सुधार जारी

कंपनी के अनुसार, प्रति यूजर औसत आय (ARPU) में भी सुधार देखने को मिला है. Q4 में ARPU ₹257 रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹245 था. इस बढ़ोतरी का कारण टैरिफ सुधार और बेहतर सेवा गुणवत्ता को माना जा रहा है, जिससे प्रति ग्राहक कमाई बढ़ी है.

FY26 में मुनाफा घटा, रेवेन्यू में तेज उछाल

पूरे वित्त वर्ष FY26 के दौरान एयरटेल का शुद्ध मुनाफा 20.4% घटकर ₹26,695 करोड़ रह गया, जबकि FY25 में यह ₹33,556 करोड़ था. इसके विपरीत, कंपनी की कुल वार्षिक आय 21.9% बढ़कर ₹2,10,972.8 करोड़ तक पहुंच गई.

कंपनी की रणनीति और विस्तार

कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल के अनुसार, FY26 एयरटेल के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा. इस दौरान कंपनी ने 650 मिलियन से अधिक ग्राहकों का आंकड़ा पार किया. साथ ही, कंपनी ने टेलीकॉम-ग्रेड सॉवरेन क्लाउड लॉन्च किया, लेंडिंग बिजनेस शुरू करने के लिए RBI की मंजूरी हासिल की और अपने डेटा सेंटर नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया. कुल मिलाकर, एयरटेल के नतीजे बताते हैं कि कंपनी का मुनाफा दबाव में रहा, लेकिन मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ और ARPU में सुधार से इसके बिजनेस की बुनियादी मजबूती बनी हुई है.