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किंगफिशर के कर्मचारियों की भी सुन लो सरकार, अब तक नहीं मिली खून-पसीने की कमाई
विजय माल्या को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में 4 महीने कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
करोड़ों डकारने के बाद देश छोड़कर भागे विजय माल्या को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में 4 महीने कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है. कोर्ट के इस फैसले के साथ ही उन कर्मचारियों का मुद्दा एक बार फिर सामने आ गया है, जो सालों से बकाया का बाट जोह रहे हैं.
खाली ही रहे हाथ
विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस के अधिकांश कर्मचारियों को अब तक अपना पैसा नहीं मिला है. ये कर्मचारी सरकार से लेकर अदालत तक का रुख कर चुके हैं, लेकिन हाथ खाली के खाली हैं. ‘बिज़नेस स्टैण्डर्ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, माल्या की बंद पड़ी विमानन कंपनी किंगफिशर के कर्मचारी दस साल बाद भी अपने बकाए के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं. सरकार और बैंकों ने गिरवी शेयरों की बिक्री और परिसंपत्तियों की जब्ती से अपने बकाए की आंशिक वसूली की थी, लेकिन कर्मचारियों का भुगतान अब तक नहीं हो सका है.
2012 में हुई थी बंद
अपनी आलिशान लाइफस्टाइल और किंगफिशर कैलेंडर के चलते सुर्खियों में रहने वाले विजय माल्या की एयरलाइन अक्टूबर, 2012 में बंद हो गई थी. कर्मचारियों से इससे पहले से पैसा नहीं मिल रहा था और इसके बाद उनकी उम्मीद लगातार दम तोड़ती गई. कर्मचारियों ने तब कहा था कि उन्हें सैलरी के अलावा, प्रोविडेंट फंड ग्रैच्युटी का पैसा नहीं मिला है. आज इतने सालों बाद भी उनकी वही मांग है – बकाया का भुगतान.
प्रदर्शन, अपील, समर्थन
किंगफिशर के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन भी किया था. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मदद की गुहार लगाई थी. कई सियासी दलों ने उनकी हर-संभव सहायता कर रहे थे, लेकिन स्थिति जस की तस है. अधिकांश कर्मचारी अब भी बकाया की रकम का इंतजार कर रहे हैं. भले ही वह अब दूसरी नौकरियों में व्यस्त हो गए हों, लेकिन अपने खून-पसीने की कमाई कौन छोड़ना चाहता है.
‘एक रुपया भी नहीं मिला’
रिपोर्ट में कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी अनिरुद्ध बलाल का भी जिक्र है. उनका कहना है, ‘हमने 2019 में ही कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त परिसमापक के पास बकाए के भुगतान के लिए सभी दावे कर दिए थे, मगर अब तक हमें एक रुपया भी नहीं मिला है और न ही यह पता चला कि रकम कैसे मिलेगी’. उन्होंने आगे कहा कि सरकार को भगोड़े कारोबारी के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालना चाहिए. माल्या की जीवनशैली में तो कोई बदलाव नहीं आया, जबकि उनके पूर्व कर्मचारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
क्यों डूबी किंगफिशर?
किंगफिशर एयरलाइन्स के डूबने की वजह थी कर्ज का बढ़ता बोझ और यह बोझ माल्या की खराब रणनीति, तत्काल ध्यान देने वाले मुद्दों की अनदेखी के चलते कंपनी पर आया था. हालांकि, ये बात अलग है कि उन्होंने पूरा दोष सरकार पर मढ़ते हुए खुद को 'बेचारा' साबित करने की कोशिश ज़रूर की थी. दरअसल, विजय माल्या चाहते थे कि सरकार उन्हें वित्तीय संकट से बाहर निकाले. उन्होंने सवाल किया था कि जब सरकार एयर इंडिया को संकट से उबारने के लिए जनता का पैसा इस्तेमाल कर सकती है, तो भारत की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन को बचाने के लिए वह आगे क्यों नहीं आई?
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