जेट एयरवेज के फिर से ऑपरेशन शुरू करने से जहां एविएशन सेक्टर की वर्कफ़ोर्स को एक और विकल्प मिलेगा. वहीं, यात्रियों को भी कुछ न कुछ फायदा ज़रूर होगा
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
जेट एयरवेज फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार है. उम्मीद है कि सितंबर से जेट के विमान आकाश में नज़र आने लगेंगे. कंपनी के फिर से ऑपरेशन शुरू करने से जहां एविएशन सेक्टर की वर्कफ़ोर्स को एक और विकल्प मिलेगा. वहीं, यात्रियों को भी कुछ न कुछ फायदा ज़रूर होगा. क्योंकि अपनी खोई हुई जमीन तलाशने के लिए जेट एयरवेज को आकर्षक फेयर रखना होगा, जिससे अन्य एयरलाइन्स भी किराए में कमी के लिए मजबूर हो जाएंगी. जेट एयरवेज ने 2019 में अपनी उड़ानें बंद करने का ऐलान किया था, यानी तीन साल कंपनी कमबैक कर रही है.
कैसे जमीन पर आई कंपनी?
ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि आखिर किसी जमाने में आसमान में राज करने वाली जेट एयरवेज जमीन पर कैसे आ गिरी और क्या अब उसके लिए इस सेक्टर में सर्वाइव करना संभव है? नरेश गोयल ने 1992 में जेट एयरलाइन की शुरुआत की थी. यह हवाई यात्रियों के लिए एयर इंडिया के विकल्प के तौर पर सामने आई थी. एक वक्त कंपनी के पास कुल 120 विमान थे. जेट एयरवेज की टैग लाइन थी, 'द ज्वॉय ऑफ फ्लाइंग'. अपने पीक टाइम में कंपनी हर रोज करीब 650 फ्लाइट्स का ऑपरेशन करती थी.
‘सहारा’ से नहीं मिला सहारा
2004 में बाजार के 40% हिस्से पर जेट का ही कब्ज़ा था, तब लग रहा था कि कंपनी को कोई टक्कर नहीं दे सकता. लेकिन नए प्लेयर्स की एंट्री और गलत नीतियों ने जेट एयरवेज को जमीन पर पटक दिया. इंडिगो और स्पाइस जेट ने जेट एयरवेज के मार्केट को प्रभावित किया. इनसे टक्कर लेने के लिए नरेश गोयल सस्ते की जंग में फंस गए. इसके अलावा, 2006 में उन्होंने 2300 करोड़ रुपये देकर एयर सहारा को खरीदा, लेकिन भारी निवेश की कीमत वसूलने में नाकाम रहे.
सस्ते टिकट बेचे
इंडिगो, स्पाइस जेट और गो एयरलाइंस जैसी बजट एयरलाइंस से अपना मार्केट बचाने के लिए जेट एयरवेज ने सही और कारगर रणनीति नहीं बनाई. इसके उलट, लागत से सस्ते टिकट बेचने की रणनीति तक खुद को सीमित कर लिया, इससे घाटे और मुनाफे के बीच का अंतर लगातार बढ़ता गया. मार्च 2019 तक कंपनी का घाटा 5,535.75 करोड़ रुपए का हो चुका था. हर तरफ से निराशा हाथ लगने के बाद नरेश गोयल ने कंपनी को बंद करने का फैसला लिया. अपने आखिरी वक्त में कंपनी के बेड़े में केवल 16 विमान ही बचे थे.
क्या है संभावना?
जेट एयरवेज ऐसे समय में एंट्री कर रही है जब इंडिगो टॉप पर पहुंच चुकी है और तमाम एयरलाइन्स बाज़ार में मौजूद हैं. निवेशक राकेश झुनझुनवाला की सस्ती एयरलाइन आकाश एयर भी जल्द उड़ान भरने वाली है. इसके अलावा, टाटा के साथ एयर इंडिया का परफॉरमेंस भी ट्रैक कर आ रहा है. इसलिए, उसके लिए अब खुद को पहले जैसी पोजीशन में पहुंचाना आसान नहीं होगा. कंपनी को बेहद सोच-समझकर रणनीति बनानी होगी. उसे एयर फेयर आकर्षक रखना होगा, लेकिन पिछले परिणामों को भी ध्यान में रखना होगा.
पिछले 6 महीनों में स्टॉक करीब 20% चढ़ा है. वहीं 3 साल की अवधि में इसने निवेशकों का पैसा लगभग दोगुना कर दिया है, जिससे यह एक मजबूत लॉन्ग टर्म पिक बना हुआ है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया (Coal India Limited) के शेयरों में 28 अप्रैल को जोरदार तेजी देखने को मिली. बेहतर तिमाही नतीजों और फाइनल डिविडेंड के ऐलान के बाद निवेशकों की खरीदारी बढ़ी, जिससे स्टॉक में 4% से ज्यादा की उछाल दर्ज हुई.
शेयर में जोरदार तेजी, इंट्राडे में नया हाई
सोमवार के कारोबार में Coal India का शेयर BSE पर 473.90 रुपये तक पहुंच गया, जो करीब 4.6% की तेजी को दर्शाता है. खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 3.94% की तेजी के साथ 470.35 रुपये पर कारोबार कर रहा था. एक दिन पहले घोषित Q4 नतीजों के बाद बाजार ने मंगलवार को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और स्टॉक में मजबूत खरीदारी देखी गई.
Q4 में मुनाफा और रेवेन्यू दोनों में बढ़त
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा 11.1% बढ़कर 10,839.18 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह 9,751.64 करोड़ रुपये था. इस दौरान ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर 46,490.03 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि खर्च भी बढ़कर 37,107.07 करोड़ रुपये हो गया.
पूरे वित्त वर्ष में मुनाफे में गिरावट
हालांकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन थोड़ा कमजोर रहा. सालाना शुद्ध मुनाफा घटकर 31,094.29 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल 35,505.79 करोड़ रुपये था. रेवेन्यू भी हल्की गिरावट के साथ 1,68,400.29 करोड़ रुपये रहा.
डिविडेंड का बड़ा ऐलान
कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 5.25 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड मंजूर किया है. इससे पहले कंपनी पहले ही दो अंतरिम डिविडेंड घोषित कर चुकी है. अंतिम मंजूरी अब वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों से ली जाएगी.
मजबूत मार्केट पोजिशन और योगदान
Coal India देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन का लगभग 80% और कोयले आधारित बिजली उत्पादन का करीब 75% हिस्सा देती है. कंपनी का कुल बिजली उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान है और यह देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा आधार बनी हुई है. इसका मार्केट कैप अब लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है.
लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न
पिछले 6 महीनों में स्टॉक करीब 20% चढ़ा है. वहीं 3 साल की अवधि में इसने निवेशकों का पैसा लगभग दोगुना कर दिया है, जिससे यह एक मजबूत लॉन्ग टर्म पिक बना हुआ है.
बेहतर तिमाही नतीजे, मजबूत डिविडेंड और स्थिर बिजनेस मॉडल के चलते Coal India के शेयर में निवेशकों की रुचि बढ़ी है. हालांकि सालाना मुनाफे में हल्की गिरावट के बावजूद कंपनी का ऑपरेशनल प्रदर्शन बाजार में भरोसा बनाए हुए है.
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका चीन की एडवांस चिप्स और AI तकनीक तक पहुंच को सीमित करने के लिए निर्यात प्रतिबंध कड़े कर रहा है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तकनीकी तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. चीन ने अमेरिकी टेक कंपनी मेटा (Meta Platforms) की लगभग 2 अरब डॉलर की AI स्टार्टअप खरीद डील को रोकने का आदेश दिया है. यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को और गहरा करता है.
चीन ने रोकी AI डील
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन ने मेटा और चीनी AI स्टार्टअप मानुस (Manus) के बीच होने वाली डील को रद्द करने का निर्देश दिया है. यह अब तक के सबसे हाई-प्रोफाइल हस्तक्षेपों में से एक माना जा रहा है, खासकर क्रॉस-बॉर्डर AI डील्स के मामले में.
टेक्नोलॉजी और AI टैलेंट पर सख्त रुख
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका चीन की एडवांस चिप्स और AI तकनीक तक पहुंच को सीमित करने के लिए निर्यात प्रतिबंध कड़े कर रहा है. इसके जवाब में चीन भी अपने देश की उभरती AI तकनीक और टैलेंट को अमेरिकी कंपनियों के हाथों जाने से रोकने की कोशिश कर रहा है.
Meta की बड़ी AI रणनीति को झटका
मेटा जोकि फेसबुक की मूल कंपनी है, ने दिसंबर में Manus को 2 अरब डॉलर से अधिक में खरीदने पर सहमति जताई थी. कंपनी का लक्ष्य AI “एजेंट्स” विकसित करना था, जो बिना ज्यादा मानव हस्तक्षेप के जटिल काम कर सकें और पारंपरिक चैटबॉट्स से कहीं अधिक सक्षम हों.
रेगुलेटरी जांच और यात्रा प्रतिबंध
मार्च में इस डील पर जांच और तेज हो गई थी, जब मानुस के सीईओ शियाओ हॉंग (Xiao Hong) और मुख्य वैज्ञानिक जी यीचाओ (Ji Yichao) को चीन छोड़ने से रोक दिया गया था. अधिकारियों द्वारा डील की समीक्षा के चलते यह कदम उठाया गया था.
Manus और चीन की AI दौड़
मानुस ने पिछले साल तब सुर्खियां बटोरी थीं जब उसने खुद को दुनिया का पहला जनरल AI एजेंट बताया था. इसके बाद इसे चीन के उभरते डीपसीक (DeepSeek) जैसे AI प्रोजेक्ट्स का संभावित प्रतिद्वंदी माना जाने लगा था.
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए Manus ने हाल ही में अपना मुख्यालय सिंगापुर स्थानांतरित कर दिया है. यह कदम उन चीनी टेक कंपनियों की बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जो अमेरिका-चीन तनाव से बचने के लिए ऑफशोर बेस बना रही हैं.
इस फैसले ने अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी टेक और AI प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है. साथ ही यह संकेत भी देता है कि भविष्य में AI और हाई-टेक डील्स पर भू-राजनीतिक प्रभाव और बढ़ सकता है.
बैंकों की कुल जमा राशि 15 अप्रैल 2026 तक ₹256.5 लाख करोड़ रही, जो साल-दर-साल 12.2% की वृद्धि दर्शाती है. लेकिन तिमाही आधार पर जमा में ₹5.8 लाख करोड़ यानी 2.2% की गिरावट दर्ज की गई.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में बैंकिंग सेक्टर की स्थिति मजबूत बनी हुई है, भले ही मार्च के बाद मौसमी सामान्यीकरण के चलते तिमाही आधार पर आंकड़ों में गिरावट देखी गई हो. एक रिपोर्ट के अनुसार, साल-दर-साल आधार पर बैंक क्रेडिट ग्रोथ अभी भी जमा वृद्धि से आगे चल रही है.
क्रेडिट ग्रोथ में सालाना मजबूती बरकरार
केयरएज (CareEdge Ratings) की रिपोर्ट के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 तक कुल बैंक ऋण ₹209.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया. यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15.0% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि पिछले वर्ष यह वृद्धि 10.3% थी. हालांकि तिमाही आधार पर देखें तो बैंक क्रेडिट में ₹4.40 लाख करोड़ यानी 2.1% की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट मार्च के अंत में लोन ग्रोथ के तेज उछाल के बाद सामान्यीकरण का परिणाम है.
जमा में भी दिखा मौसमी असर
बैंकों की कुल जमा राशि 15 अप्रैल 2026 तक ₹256.5 लाख करोड़ रही, जो साल-दर-साल 12.2% की वृद्धि दर्शाती है. लेकिन तिमाही आधार पर जमा में ₹5.8 लाख करोड़ यानी 2.2% की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट आम तौर पर मार्च के अंत में कॉरपोरेट और सरकारी फंड मूवमेंट के बाद देखी जाती है.
लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो बढ़ा
क्रेडिट ग्रोथ जमा से तेज रहने के कारण लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो बढ़कर 81.6% हो गया, जो पिछले फोर्टनाइट में 81.4% था. हालांकि यह मार्च के मध्य के 83% के उच्च स्तर से नीचे है, लेकिन सालाना आधार पर अभी भी ऊंचा बना हुआ है.
रिटेल और MSME लोन से मिला सपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रेडिट ग्रोथ को मुख्य रूप से रिटेल लोन से सपोर्ट मिला है, खासकर गोल्ड और वाहन ऋणों से. इसके अलावा MSME सेक्टर में फाइनेंसिंग, NBFC को बैंक एक्सपोजर और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में भी स्थिर वृद्धि देखने को मिली है.
जमा संरचना में बदलाव
टाइम डिपॉजिट, जो कुल जमा का 87.4% हिस्सा है, 10.9% बढ़कर ₹224.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया. वहीं, डिमांड डिपॉजिट में तेज उछाल देखा गया और यह 22.1% बढ़कर एक साल पहले के 7.3% की तुलना में काफी मजबूत रहा.
बाजार में लिक्विडिटी स्थिति स्थिर
मनी मार्केट में वेटेड एवरेज कॉल रेट 5.08% पर रहा, जो रेपो रेट से नीचे है. इससे संकेत मिलता है कि सिस्टम में लिक्विडिटी की स्थिति फिलहाल आरामदायक बनी हुई है.
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के बाद बैंक बैलेंस शीट में मौसमी नरमी दिख रही है, लेकिन मूल रूप से क्रेडिट ग्रोथ अभी भी जमा से तेज बनी हुई है. इससे संकेत मिलता है कि नए वित्तीय वर्ष में भी बैंकिंग सिस्टम में लोन डिमांड मजबूत बनी रह सकती है.
रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल भारतीय बैंकों तक सीमित नहीं रहेगी. विदेशी शाखाओं और सहयोगी संस्थाओं को भी सीधे डेटा देने की अनुमति दी गई है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की मुद्रा को वैश्विक बाजारों में अधिक स्थिर और पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. अब सिर्फ देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में होने वाले रुपये से जुड़े सौदों पर भी नजर रखी जाएगी. जुलाई 2027 से लागू होने वाले नए नियम फॉरेक्स मार्केट की तस्वीर बदल सकते हैं.
ऑफशोर डील्स पर भी होगी निगरानी
अब तक RBI की निगरानी मुख्य रूप से घरेलू बाजार तक सीमित थी, लेकिन नए नियमों के तहत विदेशों में होने वाले रुपये-आधारित डेरिवेटिव सौदे भी दायरे में आ जाएंगे. खासतौर पर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) जैसे सेगमेंट, जहां बड़े स्तर पर ट्रेडिंग होती है, अब रेगुलेटरी निगाह में रहेंगे. इससे रुपये की वास्तविक कीमत तय करने में मदद मिलेगी और विदेशी बाजारों के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा.
बैंकों को देनी होगी हर बड़ी डील की जानकारी
RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने ग्रुप या विदेशी शाखाओं द्वारा किए गए हर महत्वपूर्ण डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी साझा करें. इसमें कॉन्ट्रैक्ट की नॉशनल वैल्यू, मैच्योरिटी अवधि, काउंटरपार्टी की जानकारी और करेंसी स्ट्रक्चर जैसी अहम जानकारियां शामिल होंगी. इस विस्तृत रिपोर्टिंग से यह स्पष्ट हो सकेगा कि रुपये से जुड़ा जोखिम कहां पैदा हो रहा है और कैसे फैल रहा है.
छोटे सौदों को राहत
नए नियमों में कुछ राहत भी दी गई है. 1 मिलियन डॉलर से कम के सौदों को रिपोर्टिंग से बाहर रखा गया है और बैक-टू-बैक ट्रांजैक्शंस को भी छूट दी गई है. यह कदम बैंकों पर अतिरिक्त बोझ को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है.
विदेशी संस्थाओं की भी होगी भागीदारी
रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल भारतीय बैंकों तक सीमित नहीं रहेगी. विदेशी शाखाओं और सहयोगी संस्थाओं को भी सीधे डेटा देने की अनुमति दी गई है. इससे ऑफशोर बाजार की गतिविधियों को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा और पूरी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी.
चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे नियम
RBI ने इन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है. जुलाई 2027 तक कुल FX डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन का 70% डेटा रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा, जनवरी 2028 तक यह 80% तक बढ़ेगा और जुलाई 2028 तक इसे 100% कर दिया जाएगा. इस धीरे-धीरे लागू होने वाली प्रक्रिया से सिस्टम को नए ढांचे में ढलने का पर्याप्त समय मिलेगा.
विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक रुपये की कीमत का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों में तय होता रहा है, जिससे घरेलू नीतियों का प्रभाव सीमित रह जाता था. नए नियम इस अंतर को कम करेंगे और ऑनशोर व ऑफशोर बाजारों के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करेंगे. कुल मिलाकर यह कदम रुपये की स्थिरता, पारदर्शिता और वैश्विक विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है.
ऑयल इंडिया ने यह महत्वपूर्ण खोज लीबिया के गदामेस बेसिन में की है, जो हाइड्रोकार्बन संसाधनों के लिए जाना जाता है. कंपनी ने ऑनशोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक 95/96 में ड्रिलिंग के दौरान तेल और गैस के नए भंडार का पता लगाया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऊर्जा के मोर्चे पर भारत को बड़ी अंतरराष्ट्रीय कामयाबी मिली है. दरअसल, ऑयल इंडिया (Oil India Limited) ने अफ्रीकी देश लीबिया (Libya) में तेल और गैस का नया भंडार खोज निकाला है. यह खोज ऐसे समय में सामने आई है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है.
लीबिया के रेगिस्तान में मिला तेल-गैस का भंडार
ऑयल इंडिया ने यह महत्वपूर्ण खोज लीबिया के गदामेस बेसिन में की है, जो हाइड्रोकार्बन संसाधनों के लिए जाना जाता है. कंपनी ने ऑनशोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक 95/96 में ड्रिलिंग के दौरान तेल और गैस के नए भंडार का पता लगाया. इस प्रोजेक्ट में इंडिया ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) के साथ मिलकर एक भारतीय कंसोर्टियम काम कर रहा है, जिसमें ऑयल इंडिया की 25% हिस्सेदारी है. करीब 6,630 वर्ग किलोमीटर के इस बड़े क्षेत्र का संचालन SIPEX कर रही है.
छठे कुएं ने दिलाई बड़ी सफलता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 8 खोजी कुओं की खुदाई की योजना है. इससे पहले 5 कुओं की ड्रिलिंग हो चुकी थी, जिनमें से 4 में 2012–2014 के बीच तेल और गैस के संकेत मिले थे.हाल ही में छठे कुएं (A1-96/02) की ड्रिलिंग के दौरान एक नए भंडार की खोज हुई है, जिसने इस पूरे प्रोजेक्ट को नई रफ्तार दे दी है. शुरुआती परीक्षणों के बाद लीबिया की नेशनल ऑयल कॉर्पोरेशन (National Oil Corporation) ने इसे इस ब्लॉक की पांचवीं बड़ी खोज घोषित किया है.
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा सहारा
यह खोज भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. देश अभी भी अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. ऐसे में विदेशी जमीन पर भारतीय कंपनियों द्वारा संसाधनों की खोज भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव का मजबूत आधार तैयार करती है. इस तरह की परियोजनाएं भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करती हैं.
शेयर बाजार में भी दिखा असर
इस खबर का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला. सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ऑयल इंडिया का शेयर हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ. कारोबार के अंत में शेयर 2.50 रुपये यानी 0.53% चढ़कर 476.20 रुपये पर पहुंच गया. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में इसमें करीब 1.05% की तेजी दर्ज की गई है.
लीबिया में यह नई खोज न सिर्फ ऑयल इंडिया के वैश्विक विस्तार को मजबूत करती है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति को भी मजबूती देती है. आने वाले समय में इस ब्लॉक में और खोज व उत्पादन गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है, जिससे भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में बेहतर स्थिति हासिल करने में मदद मिल सकती है.
यह प्रोजेक्ट भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर होगा, जो आकार में Google के 1 गीगावाट प्रोजेक्ट से भी बड़ा बताया जा रहा है. राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन समिति से इसे मंजूरी मिल चुकी है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिजिटल और AI की तेज होती दौड़ में भारत को वैश्विक ताकत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 1.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर स्थापित करने जा रही है, जो भारत के डेटा इकोसिस्टम को नई ऊंचाई दे सकता है.
मेगा निवेश से बदलेगा डिजिटल परिदृश्य
भारत के डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने विशाखापट्टनम में गीगा-स्केल AI डेटा सेंटर क्लस्टर बनाने की योजना तैयार की है. इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 1.5 गीगावाट क्षमता का डेटा सेंटर और कैप्टिव सोलर-बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित किया जाएगा. यह निवेश तेजी से बढ़ती AI, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं की मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा और भारत को ग्लोबल डेटा हब बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगा.
देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर होगा, जो आकार में Google के 1 गीगावाट प्रोजेक्ट से भी बड़ा बताया जा रहा है. राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन समिति से इसे मंजूरी मिल चुकी है, जिससे आंध्र प्रदेश डेटा सेंटर हब बनने के अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच गया है.
तीन चरणों में होगा विकास
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा.
1. पहले चरण में पोलिपल्ली गांव में 500 मेगावाट का डेटा सेंटर बनाया जाएगा, जो अक्टूबर 2028 तक शुरू हो सकता है.
2. दूसरे चरण में 1 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता 2030 तक जोड़ी जाएगी.
3. पूरा क्लस्टर भोगापुरम के नए एयरपोर्ट के पास स्थापित होगा.
जमीन, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 935 एकड़ जमीन की मांग की है. इसमें डेटा सेंटर के साथ केबल लैंडिंग स्टेशन और डीसैलिनेशन प्लांट भी शामिल होंगे. कुल निवेश में से लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे, जबकि करीब 51,300 करोड़ रुपये नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर लगाए जाएंगे.
विशाखापट्टनम बन रहा डेटा हब
विशाखापट्टनम तेजी से डेटा सेंटर निवेश का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है. यहां Sify Technologies, Digital Connexion और Anant Raj जैसी कंपनियां भी बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं. राज्य सरकार की डेटा सेंटर पॉलिसी 4.0 के तहत कंपनियों को GST रिइम्बर्समेंट, कैपिटल सब्सिडी और डायरेक्ट पावर परचेज जैसे कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं.
रोजगार और AI इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट
यह मेगा प्रोजेक्ट न सिर्फ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा. साथ ही AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सर्विसेज के क्षेत्र में तेजी आएगी. भारत में बढ़ती डेटा खपत और डिजिटल सेवाओं की मांग को देखते हुए, यह निवेश देश को वैश्विक डेटा और AI हब बनाने की दिशा में एक गेमचेंजर साबित हो सकता है.
सोमवार को BSE बीएसई सेंसेक्स 639.42 अंक की बढ़त के साथ 77,303.63 पर बंद हुआ. वहीं, NSE इंडेक्स 194.75 अंक चढ़कर 24,092.70 के स्तर पर पहुंच गया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने राहत की सांस ली है. निवेशकों की सतर्कता के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों ने बाजार में भरोसा लौटाया, जिससे हफ्ते की शुरुआत सकारात्मक रही और प्रमुख सूचकांकों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली.
लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोमवार को शेयर बाजार में जोरदार वापसी हुई. दिनभर के कारोबार के दौरान बाजार में खरीदारी हावी रही, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बीएसई सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक उछल गया. अंत में सेंसेक्स 639.42 अंक यानी 0.83% की बढ़त के साथ 77,303.63 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) इंडेक्स 194.75 अंक यानी 0.81% चढ़कर 24,092.70 के स्तर पर पहुंच गया.
प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन
सेंसेक्स के 30 में से 22 शेयर हरे निशान में बंद हुए, जो बाजार की मजबूती को दर्शाता है. फार्मा सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जहां सन फार्मा के शेयर करीब 7% तक उछल गए. इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी पोर्ट्स, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, टीसीएस, एचसीएल टेक और महिंद्रा एंड महिंद्रा में भी अच्छी खरीदारी रही. हालांकि, कुछ शेयरों में दबाव बना रहा. एक्सिस बैंक, बीईएल, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट और बजाज फिनसर्व गिरावट के साथ बंद हुए. मुद्रा बाजार में भी हल्की मजबूती दिखी और रुपया डॉलर के मुकाबले 0.06% चढ़कर 94.19 पर बंद हुआ.
ब्रॉडर मार्केट में बेहतर प्रदर्शन
बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले व्यापक बाजार में ज्यादा तेजी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 1.47% और स्मॉलकैप 1.90% तक उछले. सेक्टर के लिहाज से फार्मा, रियल्टी और आईटी शेयरों में मजबूती रही, जबकि प्राइवेट बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर दबाव में रहे. इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही. ब्रेंट क्रूड 2.30% चढ़कर 107.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो आगे बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज बाजार में कई कंपनियों के तिमाही नतीजे और कॉर्पोरेट अपडेट्स के चलते हलचल देखने को मिल सकती है. मारुति सुजुकी, बंधन बैंक, कास्ट्रोल इंडिया, सीएट, डालमिया भारत, पिरामल फार्मा, आरईसी और स्टार हेल्थ जैसी कंपनियां अपने नतीजे जारी करेंगी.
इसके अलावा कुछ अहम कॉर्पोरेट गतिविधियां भी फोकस में रहेंगी. समवर्धना मदरसन इंटरनेशनल जापान की कंपनी से हिस्सेदारी खरीद रही है. रेलटेल को 145.5 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जिससे कंपनी की पकड़ मजबूत होगी. मेटास्पोर्ट्स इंटरएक्टिव ने 20 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है, जिससे उसके विस्तार को गति मिलेगी.
बाजार में आई यह तेजी फिलहाल राहत का संकेत है, लेकिन वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के नतीजे आगे की दिशा तय करेंगे. निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और खबरों पर नजर बनाए रखने का है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस मिलने के बाद मोबिक्विक अब अपनी फाइनेंशियल सर्विसेज को बड़े स्तर पर विस्तार दे सकेगी.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फिनटेक कंपनी वन मोबिक्विक (One MobiKwik Systems) के लिए बड़ी खबर सामने आई है. कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) से NBFC लाइसेंस मिल गया है. इस ऐलान के बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और यह करीब 16% तक उछल गया. अब कंपनी लोन और क्रेडिट बिजनेस में सीधे उतरने की तैयारी में है.
NBFC लाइसेंस मिलने का क्या मतलब
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस मिलने के बाद मोबिक्विक अब अपनी फाइनेंशियल सर्विसेज को बड़े स्तर पर विस्तार दे सकेगी. कंपनी “मोबिक्विक फाइनेंशियल सर्विसेज” के जरिए ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को सीधे लोन ऑफर कर पाएगी. इसमें सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों तरह के लोन शामिल होंगे.
लेंडिंग बिजनेस में मिलेगा बड़ा फायदा
अब तक मोबिक्विक को लेंडिंग के लिए पार्टनर संस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन NBFC लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी अपने क्रेडिट ऑपरेशंस को इन-हाउस ला सकेगी. इससे कंपनी का मार्जिन बेहतर होगा और लोन प्रोडक्ट्स को तेजी से लॉन्च करने में मदद मिलेगी. साथ ही ग्राहकों को अधिक कस्टमाइज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी मिल सकेंगे.
शेयर बाजार में दिखा जबरदस्त असर
इस बड़ी खबर का सीधा असर शेयर बाजार में देखने को मिला. बीएसई पर कंपनी का शेयर 203 रुपये के आसपास खुला और कारोबार के दौरान उछलकर 243 रुपये तक पहुंच गया और बाद में शेयर में थोड़ी गिरावट देखी गई और यह 11. 26 प्रतिशत की तेजी के साथ 224.94 रुपये पर बंद हुआ. पिछले सत्र में यह करीब 202.55 रुपये पर बंद हुआ था. स्टॉक का 52 हफ्तों का उच्च स्तर 333.95 रुपये और निचला स्तर 151.95 रुपये रहा है.
कब शुरू होगा लेंडिंग ऑपरेशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करने के बाद केंद्रीय बैंक से सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) मिलेगा. इसके बाद ही मोबिक्विक आधिकारिक तौर पर नॉन-बैंक लेंडिंग ऑपरेशंस शुरू कर पाएगी.
डिजिटल वॉलेट से फुल-फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म की ओर
मोबिक्विक पहले से डिजिटल वॉलेट और पेमेंट सर्विसेज में सक्रिय है. इसके अलावा कंपनी क्रेडिट और निवेश जैसे सेगमेंट में भी धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. NBFC लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी अब खुद को एक फुल-स्टैक फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी.
मोबिक्विक के लिए NBFC लाइसेंस एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. इससे कंपनी के बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू और ग्रोथ संभावनाओं को नई मजबूती मिलेगी. बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया भी इसी भरोसे को दर्शाती है.
मुनाफे के इस शानदार प्रदर्शन के बाद कंपनी ने निवेशकों को बड़ा तोहफा दिया है. कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹7.50 का डिविडेंड घोषित किया है. प्रतिशत के
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महिंद्रा फाइनेंस (Mahindra & Mahindra Financial Services) ने मार्च 2026 तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ा सरप्राइज दिया है. कंपनी का मुनाफा दोगुना होने के साथ शेयरों में जोरदार तेजी आई, वहीं शेयरधारकों के लिए 375% के बंपर डिविडेंड का ऐलान किया गया है, जिससे बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला.
तिमाही नतीजों में जबरदस्त उछाल
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो मार्च तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 106% बढ़कर ₹940 करोड़ हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह ₹456 करोड़ था. वहीं, स्टैंडअलोन स्तर पर भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा और शुद्ध लाभ 55% बढ़कर ₹873 करोड़ पहुंच गया, जो एक साल पहले ₹563 करोड़ था.
रेवेन्यू और मार्जिन में सुधार
कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 13% बढ़कर ₹5,539 करोड़ हो गया, जो पहले ₹4,886 करोड़ था. तिमाही आधार पर भी मुनाफे में लगभग 13.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह प्रदर्शन मुख्य रूप से बेहतर मार्जिन और मजबूत लोन ग्रोथ के कारण संभव हुआ.
निवेशकों को मिला बंपर डिविडेंड
मुनाफे के इस शानदार प्रदर्शन के बाद कंपनी ने निवेशकों को बड़ा तोहफा दिया है. कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹7.50 का डिविडेंड घोषित किया है. प्रतिशत के हिसाब से यह 375% का डिविडेंड है, जो निवेशकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बना.
शेयरों में जोरदार तेजी
नतीजों के बाद बाजार में कंपनी के शेयरों में तेज खरीदारी देखने को मिली. स्टॉक 311 रुपये पर खुला और जल्द ही 331 रुपये के स्तर तक पहुंच गया. हालांकि बाद में हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली, खबर लिखे जाने तक यह शेयर करीब 8.02 प्रतिशत की तेजी के साथ 318 रुपये पर कारोबार करता नजर आया.
मजबूत नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्मों ने भी इस शेयर पर भरोसा जताया है.
1. Nomura ने ‘Buy’ रेटिंग के साथ ₹400 का टारगेट दिया
2. Motilal Oswal ने ₹350 का लक्ष्य तय किया
3. Emkay Global ने ‘Add’ रेटिंग के साथ ₹340 का टारगेट बढ़ाया
4. JM Financial ने ₹350 का टारगेट प्राइस दिया
महिंद्रा फाइनेंस ने मजबूत तिमाही नतीजों, बेहतर मार्जिन और निवेशकों के लिए आकर्षक डिविडेंड के दम पर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की है. आने वाले समय में भी कंपनी के प्रदर्शन को लेकर बाजार का रुख सकारात्मक बना रह सकता है.
भारत-न्यूजीलैंड FTA एक संतुलित समझौता माना जा रहा है, जिसमें व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू हितों की भी रक्षा की गई है. यह डील आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार और निर्यात को नई गति दे सकती है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आज हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देगा. इस डील से जहां कई उत्पाद सस्ते हो सकते हैं, वहीं निवेश, सेवाओं और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़े अवसर खुलने की उम्मीद है. हालांकि, भारत ने किसानों और MSME सेक्टर को ध्यान में रखते हुए कई संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है.
FTA क्या है और क्यों अहम है
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या अधिक देशों के बीच ऐसा करार होता है, जिसमें व्यापार होने वाले अधिकांश सामानों पर कस्टम ड्यूटी घटाई या खत्म की जाती है. इसके साथ ही व्यापार और निवेश से जुड़े नियमों को आसान बनाया जाता है, जिससे कारोबार बढ़े.
समझौते की टाइमलाइन
भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA की बातचीत लंबी रही है.
1. 2010 में बातचीत शुरू हुई
2. 2015 में 9 दौर के बाद ठहराव आया
3. मार्च 2025 में बातचीत फिर शुरू हुई
4. दिसंबर 2025 में समझौता पूरा हुआ
5. 27 अप्रैल 2026 को इस पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं
इस समझौते में व्यापार, सेवाएं, निवेश, कस्टम नियम और विवाद समाधान समेत 20 अध्याय शामिल हैं.
भारत को क्या मिलेगा
इस समझौते से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं. टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर के उत्पाद न्यूजीलैंड में जीरो ड्यूटी पर निर्यात हो सकेंगे. आईटी, शिक्षा, फाइनेंस, पर्यटन और कंस्ट्रक्शन जैसे सर्विस सेक्टर में नए अवसर खुलेंगे. भारतीय पेशेवरों को 5,000 वीजा कोटा के तहत 3 साल तक काम करने का मौका मिलेगा.
इसके अलावा, न्यूजीलैंड ने अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है.
न्यूजीलैंड को क्या फायदा
भारत न्यूजीलैंड को लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच देगा. करीब 54% उत्पादों को पहले दिन से ही ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी. इनमें ऊन, कोयला, लकड़ी और कुछ कृषि उत्पाद शामिल हैं.
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा
इस समझौते के बाद कुछ आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं. सेब, कीवी, मनुका शहद और कुछ डेयरी उत्पादों पर ड्यूटी में छूट मिलेगी, हालांकि इन पर कोटा और न्यूनतम कीमत की शर्तें लागू होंगी. समुद्री उत्पादों और कुछ अन्य वस्तुओं पर चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी खत्म की जाएगी.
संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित
भारत ने अपने किसानों और MSME सेक्टर की सुरक्षा के लिए कई उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है. इनमें डेयरी, चीनी, कुछ कृषि उत्पाद, तांबा और एल्युमीनियम जैसे सेक्टर शामिल हैं. इन पर कोई ड्यूटी छूट नहीं दी जाएगी.
निवेश और रणनीतिक महत्व
न्यूजीलैंड का 20 अरब डॉलर निवेश का वादा इस समझौते को और अहम बनाता है. यह भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आर्थिक रणनीति मजबूत करने में मदद करेगा. वहीं न्यूजीलैंड को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था तक बेहतर पहुंच मिलेगी.