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IT विभाग ने नोटिफाई किया CII, जानते हैं इसका क्या होगा आप पर असर?
दरअसल हमारे निवेश से लेकर संपत्ति की कीमत समय के साथ बढ़ती रहती है. ऐसे में उस पर टैक्स का सही आंकलन करने के लिए इस बार इसे 363 तय किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
केन्द्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2024-25 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक का निर्धारण कर दिया है. सरकार ने इस बार के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक को 363 तय किया है. इससे पहले पिछले साल में ये सूचकांक 348 तय किया गया था. लागत मुद्रासफीति सूचकांक में कुछ संशोधन भी किए गए हैं. सीबीडीटी की ओर से इसे लेकर ट्वीट कर जानकारी दी गई है.
इनकम टैक्स विभाग की ओर से ट्वीट कर दी गई जानकारी
इस मामले में आयकर विभाग ने ट्वीट कर जानकारी दी है. आयकर विभाग की ओर से किए गए ट्वीट में बताया गया है कि सीबीडीटी 24 मई, 2024 की अधिसूचना संख्या 44/2024 के माध्यम से वित्त वर्ष 2024-2025 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) को अधिसूचित करता है. आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2025-26 और उसके बाद के वर्षों के लिए प्रासंगिक वित्त वर्ष 2024-25 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक 363 है.
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आम आदमी से कैसे जुड़ा कॉस्ट इन्फ्लेशन सूचकांक
दरअसल जब कभी भी कम कोई अचल संपत्ति जैसे निवेश या संपत्ति पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की गणना की जाती है तो ये उसके बहुत काम आता है. यही नहीं सिक्योरिटी या ज्वैलरी को बेचने से हासिल होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की गणना में ये भी काफी काम आता है. सरकार की ओर से लगभग हर वर्ष के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन सूचकांक का निर्धारण किया जाता है. ये महंगाई को ध्यान में रखते हुए असेट की खरीद कीमत और उसकी वर्तमान कीमत को एडजस्ट करता है. इससे ये भी सुनिश्चित होता है कि सामान्य मूल्य वृिद्ध से होने वाले होने वाले नाममात्र लाभ की बजाए वास्तविक लाभ पर टैक्स लगाया जाए.
पिछले कुछ सालों में कितना रहा है सूचकांक
अगर आयकर विभाग द्वारा पिछले कुछ सालों में तय किए गए सूचकांकों पर नजर डालें तो वो समय के साथ बदलते रहे हैं. ये 2014-15 में 240, 2015-16 में 254, 2016-17 में 264, 2017-18 में 272, 2018-19 में 280, 2019-20 में 289, 2020-21 में 301, 2021-22 में 317, 2022-23 में 331, 2023-24 348 और 2024-24 के लिए 363 तय किया गया है. ये समय के साथ लगातार बढ़ रहा है.
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