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क्या Stock Market लगा सकता है बड़ा गोता? इस वजह से मंडरा रहा है खतरा
शेयर बाजार में पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से तेजी का रुख बरकरार है, लेकिन अब एक आशंका उत्पन्न होती नजर आ रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) की चाल कैसी रहेगी, यह काफी हद तक विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करता है. इतिहास गवाह है कि जब भी विदेशी निवेशकों ने खरीदारी में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है, बाजार रफ्तार से दौड़ा है. इसके उलट, जब उनका जोर बिकवाली पर रहा है, बाजार को बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सितंबर के पहले पखवाड़े में इंडियन स्टॉक मार्केट से करीब 4,800 करोड़ रुपए निकाले हैं. चिंता की बात ये है कि आने वाले दिनों में भी FPIs के बिकवाल बने रहने की आशंका है.
छह महीने रहे मेहरबान
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सितंबर में अब तक FPI की इस निकासी का असर बाजार पर ज्यादा इसलिए नहीं पड़ा, क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अच्छी-खासी खरीदारी की है. लेकिन यदि FPI का रुख ऐसा ही रहा, तो कुछ भी कहना मुश्किल है. मार्च से अगस्त तक लगातार 6 माह विदेशी निवेशक भारतीय बाजार पर मेहरबान रहे. इस दौरान उन्होंने 1.74 लाख करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे. अमेरिका में बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ने, क्रूड ऑयल महंगा होने, डॉलर की मजबूती और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता सहित तमाम ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से FPI एक बार फिर से बिकवाली कर रहे हैं.
दिख सकता है उतार-चढ़ाव
मार्केट एनालिस्ट के अनुसार, अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल (10 वर्ष के लिए 4.28%) ऊंचे स्तर पर है और डॉलर सूचकांक भी 105 के पार पहुंच गया है. इसके अलावा, इस हफ्ते अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों के बारे में फैसला लेगा. इससे पहले विदेशी निवेशकों की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव दिख सकता है. पिछले हफ्ते मार्केट में तेजी के बावजूद विदेशी निवेशकों ने 565 करोड़ रुपए भारतीय बाजार से निकाल लिए थे. क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण हैं, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है और यदि ऐसा होता है, तो RBI ब्याज दरों में इजाफा कर सकता है. एनालिस्ट का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इंडस्ट्री के लिए भी अच्छी नहीं है. क्योंकि कई सेक्टर में क्रूड ऑयल से प्राप्त होने वाले उत्पादों का इस्तेमाल कच्चे माल के तौर पर किया जाता है. इनमें मुख्य रूप से पेंट, फार्मा, प्लास्टिक और पैकेजिंग इंडस्ट्री शामिल हैं.
ऐसे असर डालेगा कच्चा तेल
क्रूड ऑयल महंगा होने से इन कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ेगी और मार्जिन में कमी आएगी. इसका असर कंपनियों के तिमाही नतीजे पर पड़ेगा. कमजोर नतीजे स्टॉक मार्केट में कंपनी के प्रदर्शन को भी प्रभावित करेंगे. इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की दूसरी चिंता वैल्यूएशंस को लेकर भी है. कई सेक्टर में शेयरों की कीमतें बहुत ज्यादा हो गईं हैं. इन सब कारणों के मद्देनजर आशंका है कि आने वाले समय में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक और बिकवाली कर सकते हैं. ऐसे में यह आशंका भी बनी रहेगी कि उनके इस रुख से भारतीय बाजार बड़ा गोता न लगा ले. फिलहाल, घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदी से FPI की बिकवाली का ज्यादा प्रभाव नजर नहीं आया है. लेकिन आगे भी यही हाल रहेगा, कहना बेहद मुश्किल है.
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