होम / बिजनेस / क्या ब्रिटेन से होने जा रही है मंदी की शुरुआत, बड़ी संख्या में हो रहे हैं जॉब कट
क्या ब्रिटेन से होने जा रही है मंदी की शुरुआत, बड़ी संख्या में हो रहे हैं जॉब कट
अगर कोरोना जैसे हालातों को छोड़ दें तो जैसी गिरावट अभी देखने को मिली है वैसी गिरावट इससे पहले कोरोना और 2009 की मंदी में ही देखने को मिली है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
एक दशक पहले जब मंदी का संकट आया था तो इससे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था नहीं बच पाई थी. कुछ वैसी ही मंदी की आहट एक बार फिर होती नजर आ रही है. लेकिन एक रेटिंग एजेंसी की हाल ही में आई रिपोर्ट बताती है कि ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरी जा रही है. रिपोर्ट कहती है कि ये इस दशक की मंदी की शुरुआत हो रही है जिसकी शुरुआत ब्रिटेन से हो रही है. अगर ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में ये दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय है.
क्या कहती है एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट?
एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट कहती है कि नवीनतम PMI (Purchasing Manager's Index) आंकड़े में अगस्त के मुकाबले सितंबर में कमी देखने को मिल रही है. अगस्त में जहां ये फिगर 48.6 था वहीं दूसरी ओर सिंतबर ये दो प्वॉइंट गिरकर 46.8 पर आ गया है. ये तीव्र गिरावट अर्थशास्त्रियों के अनुमान से ज्यादा है. इस आंकड़े में कमी आने के कारण एक बार फिर बाजार में तनाव देखने को मिल सकता है. पीएमआई 50 के आंकड़े से दूर चला गया है. जो अच्छा संकेत नहीं है.
नौकरी जाने को लेकर क्या कहती है रिपोर्ट?
एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट में रोजगार को लेकर और गंभीरता से बताया गया है. रिपोर्ट कहती है कि अगर कोरोना काल की स्थितियों को छोड़ दें तो मौजूदा समय में रोजगार जाने की रफ्तार 2009 की मंदी से भी ज्यादा है. ये जानकारी ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को लेकर जताई गई आशंकाओं को और बढ़ाती है. हालांकि बैंक ऑफ इंग्लैंड मुद्रास्फीति के खिलाफ अपनी लड़ाई में तेजी से आगे बढ़ रहा है. लेकिन श्रम बाजार के कमजोर होने की स्थितियों ने बाजार को जटिल बना दिया है.
क्या कहते हैं S&P ग्लोबल के मुख्य अर्थशास्त्री?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एसएंडपी ग्लोबल के मुख्य अर्थशास्त्री क्रिस विलियम्स कहते हैं कि ब्रिटेन में मंदी की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं. विलियम्स कहते हैं कि लगातार गिरती रोजगार दर, वेतन की नेगोशिएसन को कमजोर बनाती है. वो कहते हैं कि मुद्रास्फीति के लिहाज से वेतन बढ़ोतरी अहम भाग है. इसके कारण व्यापार भी प्रभावित हो रहा है. ये एक तरह से 2009 के बाद अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है इसके कारण जीवन यापन और कठिन हो रहा है. इनपुट मूल्य में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है. इससे महंगाई को कम करने के प्रयासों में तेजी आ सकती है.
टैग्स